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हिंदी Important Questions Chapter 13 शिक्षा Class 12 Hindi Bihar Board बिहार बोर्ड

Important Questions For All Chapters – हिंदी Class 12

Short Questions (with Answers)


1. जे. कृष्णमूर्ति का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर : जे. कृष्णमूर्ति का जन्म 12 मई 1895 को मदनपल्ली, चित्तूर, आंध्र प्रदेश में हुआ था।

2. जे. कृष्णमूर्ति के माता-पिता का नाम क्या था?

उत्तर : उनके माता-पिता का नाम संजीवम्मा और नारायणा जिद्दू था।

3. कृष्णमूर्ति की मृत्यु कब और कहाँ हुई थी?

उत्तर : उनकी मृत्यु 17 फरवरी 1986 को ओजई, कैलिफोर्निया में हुई थी।

4. जे. कृष्णमूर्ति का मुख्य कार्य क्या था?

उत्तर : वे एक वक्ता, दार्शनिक और शिक्षाविद थे, जिनके व्याख्यान शिक्षा, दर्शन और अध्यात्म पर आधारित थे।

5. कृष्णमूर्ति के जीवन पर किसका प्रभाव था?

उत्तर : उनकी किशोरावस्था में सी. डब्ल्यू. लीडबेटर और एनी बेसेंट का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।

6. ‘शिक्षा का उद्देश्य’ कृष्णमूर्ति के अनुसार क्या है?

उत्तर : उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को पूरी तरह से स्वतंत्र और आत्मप्रज्ञ बनाना है।

7. कृष्णमूर्ति ने किस सोसाइटी से जुड़कर काम किया?

उत्तर : उन्होंने थियोसोफिकल सोसाइटी से जुड़कर काम किया।

8. कृष्णमूर्ति किसे ‘सच्चा ज्ञान’ मानते हैं?

उत्तर : वे प्रतीति-आधारित सच्चे ज्ञान को मुक्ति और स्वतंत्रता का आधार मानते हैं।

9. कृष्णमूर्ति का प्रसिद्ध कथन क्या है?

उत्तर : “सत्य की खोज व्यक्ति को स्वयं करनी होती है।”

10. कृष्णमूर्ति के शिक्षा चिंतन की विशेषता क्या है?

उत्तर : उन्होंने परंपरागत शिक्षा प्रणालियों की सीमाओं का अध्ययन कर नई शिक्षण दृष्टियों का उद्घाटन किया।

11. कृष्णमूर्ति का मुख्य संदेश क्या था?

उत्तर : उनका संदेश था कि सत्य की खोज के लिए व्यक्ति को स्वतंत्रता और विद्रोह के साहस की आवश्यकता होती है।

12. कृष्णमूर्ति के अनुसार ध्यान क्या है?

उत्तर : ध्यान वह ज्योति है, जो क्रिया के मार्ग को आलोकित करता है और प्रेम को परिभाषित करता है।

13. कृष्णमूर्ति ने शिक्षा के विषय में क्या कहा?

उत्तर : उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन को समझना और संपूर्णता को अपनाना है।

14. कृष्णमूर्ति किस प्रकार के समाज का निर्माण चाहते थे?

उत्तर : वे एक ऐसा समाज चाहते थे, जो भय और परंपराओं से मुक्त हो।

15. कृष्णमूर्ति की प्रमुख रचनाओं में से एक का नाम बताएं।

उत्तर : उनकी प्रमुख रचना है “द फर्स्ट एंड लास्ट फ्रीडम”।

16. कृष्णमूर्ति का विश्व में क्या स्थान है?

उत्तर : उन्हें बीसवीं सदी में भारत के दूसरे बुद्ध के रूप में देखा गया।

17. कृष्णमूर्ति के अनुसार भय का जीवन में क्या प्रभाव है?

उत्तर : उनके अनुसार, भय मेधा और स्वतंत्रता को नष्ट कर देता है।

18. कृष्णमूर्ति किस प्रकार के ध्यान का प्रचार करते थे?

उत्तर : वे ध्यान को व्यक्ति की आंतरिक स्वतंत्रता और सत्य की खोज का माध्यम मानते थे।

19. कृष्णमूर्ति के व्याख्यान किन विषयों पर होते थे?

उत्तर : उनके व्याख्यान शिक्षा, दर्शन, और अध्यात्म जैसे विषयों पर आधारित होते थे।

20. कृष्णमूर्ति ने जीवन को क्या बताया है?

उत्तर : उन्होंने जीवन को एक अद्भुत, अगाध और रहस्यमय प्रक्रिया बताया है।


Medium Questions (with Answers)


1. कृष्णमूर्ति के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य क्या होना चाहिए?

उत्तर : शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार के लिए कौशल देना नहीं बल्कि मनुष्य को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाना है। यह जीवन की संपूर्ण प्रक्रिया को समझने और मानवता के लिए सच्चा सहयोग देने की क्षमता विकसित करती है। सच्ची शिक्षा सीमाओं से बाहर निकलकर जीवन को व्यापक बनाती है।

2. कृष्णमूर्ति ने सच्चे विद्रोह को क्यों महत्वपूर्ण माना?

उत्तर : सच्चा विद्रोह व्यक्ति को परंपराओं और बंधनों से मुक्त करता है। यह सत्य की खोज के लिए आवश्यक है, क्योंकि बिना विद्रोह के स्वतंत्रता और ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता। विद्रोह समाज और जीवन में नई संभावनाओं को जन्म देता है।

3. कृष्णमूर्ति ने भय को मानव विकास में बाधा क्यों बताया?

उत्तर : भय व्यक्ति की सोचने और सृजन करने की क्षमता को खत्म कर देता है। यह मेधा और प्रेम को नष्ट कर, जीवन को जटिल और अस्थिर बनाता है। भयमुक्त वातावरण ही सच्चे ज्ञान और स्वतंत्रता को संभव बनाता है।

4. कृष्णमूर्ति के अनुसार जीवन को कैसे समझा जाना चाहिए?

उत्तर : जीवन को केवल रोजगार या धन कमाने तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह पक्षियों, वृक्षों, भावनाओं और समाज के सभी पहलुओं से भरा हुआ है। जीवन को समझने के लिए इसके हर पहलू का अध्ययन और अनुभव जरूरी है।

5. कृष्णमूर्ति ने स्वतंत्रता को शिक्षा के लिए क्यों आवश्यक बताया?

उत्तर : स्वतंत्रता व्यक्ति को सच्चाई की खोज और अपने विचारों को स्पष्टता से व्यक्त करने में सक्षम बनाती है। यह भय और परंपरागत बंधनों से मुक्ति देती है। शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाना है।

6. क्यों कृष्णमूर्ति ने कहा कि अनुकरण करना शिक्षा नहीं है?

उत्तर : कृष्णमूर्ति के अनुसार अनुकरण से व्यक्ति के सोचने की स्वतंत्रता खत्म हो जाती है। यह केवल परंपराओं और दूसरों की सोच को दोहराने का काम करता है। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को सत्य की अपनी खोज करने के लिए प्रेरित करना है।

7. कृष्णमूर्ति ने ध्यान को जीवन में क्यों महत्वपूर्ण माना?

उत्तर : ध्यान जीवन को गहराई से समझने और सत्य की खोज में मदद करता है। यह मन को स्पष्टता और प्रेम से भर देता है। ध्यान मनुष्य को जीवन के हर पहलू को जागरूकता के साथ देखने में सक्षम बनाता है।

8. कृष्णमूर्ति के अनुसार महत्त्वाकांक्षा का क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर : महत्त्वाकांक्षा व्यक्ति को स्वार्थी और क्रूर बनाती है। यह समाज में प्रतिस्पर्धा और असमानता पैदा करती है। इससे व्यक्ति केवल अपने फायदे के बारे में सोचता है और दूसरों की भावनाओं को नजरअंदाज करता है।

9. कृष्णमूर्ति ने संगठित धर्म के प्रति क्या दृष्टिकोण रखा?

उत्तर : संगठित धर्म मनुष्य को सीमाओं में बांधता है और उसकी स्वतंत्रता को खत्म करता है। यह सच्चाई की खोज में बाधा डालता है और समाज में अंधविश्वास और बंधनों को बढ़ावा देता है। सच्चा धर्म स्वतंत्रता और सत्य की खोज पर आधारित होना चाहिए।

10. कृष्णमूर्ति ने शिक्षा को व्यवसाय के रूप में क्यों खारिज किया?

उत्तर : उनका मानना था कि शिक्षा केवल रोजगार और पेशेवर दक्षता तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसका उद्देश्य मनुष्य के पूरे व्यक्तित्व को विकसित करना है। यह जीवन की संपूर्ण प्रक्रिया को समझने और अनुभव करने में मदद करती है।

11. क्यों कृष्णमूर्ति ने कहा कि जीवन केवल आजीविका नहीं है?

उत्तर : उनका कहना था कि जीवन असीम और गहन है, जिसमें संघर्ष, प्रेम, करुणा और रहस्य शामिल हैं। इसे केवल एक पेशा या आजीविका तक सीमित करना इसे छोटा करना है। जीवन को उसकी पूरी व्यापकता और गहराई से समझने की आवश्यकता है।

12. कृष्णमूर्ति ने सत्य की खोज के लिए क्या जरूरी बताया?

उत्तर : सत्य की खोज के लिए स्वतंत्रता और भयमुक्त वातावरण आवश्यक है। व्यक्ति को पारंपरिक सोच और सामाजिक दबावों से बाहर निकलकर खुद के लिए सच्चाई को खोजना चाहिए। यह खोज आत्मनिरीक्षण और जागरूकता पर आधारित होनी चाहिए।

13. कृष्णमूर्ति ने क्रांति के बारे में क्या कहा?

उत्तर : उन्होंने क्रांति को मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर जरूरी बताया। यह परंपरागत मान्यताओं और बंधनों को तोड़कर सत्य और स्वतंत्रता की ओर ले जाती है। क्रांति केवल विद्रोह नहीं, बल्कि नई संभावनाओं की खोज है।

14. कृष्णमूर्ति के अनुसार भयमुक्त वातावरण क्यों आवश्यक है?

उत्तर : भयमुक्त वातावरण व्यक्ति को स्वतंत्रता और सृजनशीलता प्रदान करता है। यह मेधा को विकसित करता है और जीवन की गहराई को समझने में मदद करता है। भय रहित वातावरण शिक्षा और सत्य की खोज का आधार है।

15. कृष्णमूर्ति के अनुसार नूतन समाज का निर्माण कैसे संभव है?

उत्तर : नूतन समाज का निर्माण स्वतंत्रता, सत्य और प्रेम के आधार पर हो सकता है। यह महत्त्वाकांक्षा और स्वार्थ से मुक्त होना चाहिए। व्यक्ति को बचपन से ही अपनी रुचि और प्रेम से काम करने की प्रेरणा दी जानी चाहिए।


Long Questions (with Answers)


1. कृष्णमूर्ति ने शिक्षा को व्यापक रूप से कैसे परिभाषित किया?

उत्तर : कृष्णमूर्ति ने शिक्षा को केवल पेशेवर दक्षता का माध्यम नहीं माना, बल्कि इसे संपूर्ण जीवन को समझने का साधन बताया। शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को आत्मनिर्भर, स्वतंत्र और सृजनशील बनाना है। यह भय, संकीर्णता और सामाजिक बंधनों से मुक्त करती है। उन्होंने कहा कि सच्ची शिक्षा व्यक्ति में करुणा, प्रेम और सहयोग की भावना को विकसित करती है। यह जीवन की संपूर्ण प्रक्रिया को समझने की क्षमता प्रदान करती है।

2. कृष्णमूर्ति ने संगठित धर्म और परंपराओं पर क्या आलोचना की?

उत्तर : संगठित धर्म और परंपराएं व्यक्ति को बंधनों में बांधती हैं और स्वतंत्रता को नष्ट करती हैं। कृष्णमूर्ति का मानना था कि यह सच्चाई की खोज और आत्मनिर्भरता में बाधा डालती हैं। उन्होंने कहा कि समाज को इन बंधनों से मुक्त होकर सत्य की ओर बढ़ना चाहिए। संगठित धर्म अक्सर भय और अंधविश्वास का सहारा लेता है, जो जीवन को कुरूप और सीमित बनाता है।

3. कृष्णमूर्ति ने सत्य और स्वतंत्रता की खोज को क्यों महत्वपूर्ण माना?

उत्तर : उनके अनुसार सत्य और स्वतंत्रता की खोज मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है। सत्य को केवल स्वतंत्र और भयमुक्त मन के द्वारा ही पाया जा सकता है। यह खोज व्यक्ति को जीवन की वास्तविकता को गहराई से समझने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त बंधन और भय इस खोज में सबसे बड़ी बाधा हैं। स्वतंत्रता और सत्य ही वास्तविक ज्ञान का आधार हैं।

4. कृष्णमूर्ति ने क्रांति को जीवन में क्यों आवश्यक बताया?

उत्तर : उन्होंने क्रांति को मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक बदलाव का माध्यम बताया। क्रांति परंपराओं और सामाजिक बंधनों को तोड़ने का काम करती है। यह व्यक्ति को सत्य, स्वतंत्रता और सच्चे प्रेम की ओर ले जाती है। उनके अनुसार, क्रांति का मतलब महत्त्वाकांक्षा और स्वार्थ से मुक्त होना है। यह व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए आवश्यक है।

5. कृष्णमूर्ति ने भय को मानव जीवन के लिए खतरनाक क्यों माना?

उत्तर : कृष्णमूर्ति का मानना था कि भय व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता को नष्ट कर देता है। यह मेधा और प्रेम को खत्म करता है और व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बनाता है। भय व्यक्ति के संबंधों और सामाजिक जीवन में अस्थिरता लाता है। उन्होंने कहा कि सच्ची शिक्षा का उद्देश्य भय को समाप्त करना होना चाहिए। भयमुक्त जीवन ही सृजनशीलता और स्वतंत्रता का आधार है।

6. कृष्णमूर्ति के अनुसार नूतन समाज का निर्माण कैसे संभव है?

उत्तर : नूतन समाज का निर्माण स्वतंत्रता, सत्य और प्रेम के आधार पर हो सकता है। यह समाज संकीर्णताओं, महत्त्वाकांक्षा और स्वार्थ से मुक्त होना चाहिए। व्यक्ति को बचपन से ही स्वतंत्र और भयमुक्त वातावरण में रखा जाना चाहिए। इस समाज में शिक्षा का उद्देश्य आत्मनिर्भरता और सहयोग को बढ़ावा देना होगा। ऐसा समाज ही सच्चाई और करुणा का प्रतीक हो सकता है।

7. कृष्णमूर्ति ने जीवन की संपूर्ण प्रक्रिया को कैसे समझाया?

उत्तर : जीवन की प्रक्रिया को उन्होंने संघर्ष, प्रेम, करुणा और रहस्यों का मिश्रण बताया। उनके अनुसार, जीवन केवल रोजगार या धन कमाने तक सीमित नहीं है। यह पक्षियों, पेड़ों, भावनाओं और समाज के हर पहलू को समेटे हुए है। जीवन की संपूर्णता को समझने के लिए शिक्षा का सहारा लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन को गहराई और व्यापकता के साथ समझना ही इसका सही अर्थ है।

8. कृष्णमूर्ति ने मेधा के विकास के लिए क्या आवश्यक बताया?

उत्तर : उनके अनुसार, मेधा का विकास भय और संकीर्णताओं से मुक्त होने पर ही संभव है। व्यक्ति को स्वतंत्र वातावरण में रहकर सोचने और सृजन करने का अवसर मिलना चाहिए। मेधा का विकास सत्य और वास्तविकता की खोज के माध्यम से होता है। उन्होंने कहा कि यह जीवन के हर पहलू को गहराई से देखने और समझने की क्षमता प्रदान करती है। मेधा के बिना व्यक्ति स्वतंत्रता और प्रेम को नहीं समझ सकता।

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