eVidyarthi
Menu
  • School
    • Close
    • CBSE English Medium
    • CBSE Hindi Medium
    • UP Board
    • Bihar Board
    • Maharashtra Board
    • MP Board
    • Close
  • Sarkari Exam Preparation
    • Close
    • Notes For Competitive Exams
    • MCQs for Competitive Exams
    • All Govt Exams Preparation
    • NCERT Syllabus for Competitive Exam
    • Close
  • Study Abroad
    • Close
    • Study in Australia
    • Study in Canada
    • Study in UK
    • Study in Germany
    • Study in USA
    • Close
हिन्‍दी Bihar Board Class 12 | Menu
  • MCQ’s Hindi Class 12 Bihar Board
  • Book Hindi Class 12 Bihar Board
  • Solutions Hindi Class 12 Bihar Board
  • Notes Hindi Class 12 Bihar Board
  • Important Questions Hindi Class 12 Bihar Board
  • Sample/ Model Paper Hindi Class 12 Bihar Board
  • Question Papers Hindi Class 12 Bihar Board
  • Hindi Class 12

हिंदी Important Questions Chapter 9 प्रगीत और समाज Class 12 Hindi Bihar Board बिहार बोर्ड

Important Questions For All Chapters – हिंदी Class 12

Short Questions (with Answers)


1. नामवर सिंह का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर : नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1927 को जीयनपुर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था।

2. नामवर सिंह के माता-पिता का नाम क्या था?

उत्तर : उनके माता-पिता का नाम वागेश्वरी देवी और नागर सिंह था।

3. नामवर सिंह ने पीएचडी किस विषय पर की थी?

उत्तर : उन्होंने ‘पृथ्वीराज रासो की भाषा’ विषय पर पीएचडी की थी।

4. नामवर सिंह ने बीए और एमए किस विश्वविद्यालय से किया?

उत्तर : उन्होंने बीए और एमए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से किया।

5. नामवर सिंह को साहित्य अकादमी पुरस्कार कब मिला?

उत्तर : उन्हें 1971 में ‘कविता के नए प्रतिमान’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।

6. नामवर सिंह ने किस पत्रिका का संपादन किया?

उत्तर : उन्होंने ‘आलोचना’ त्रैमासिक पत्रिका का संपादन किया।

7. ‘वाद विवाद संवाद’ पुस्तक का विषय क्या है?

उत्तर : यह पुस्तक आलोचना के सैद्धांतिक पहलुओं पर आधारित है।

8. नामवर सिंह ने ‘जनयुग’ में क्या भूमिका निभाई?

उत्तर : उन्होंने ‘जनयुग’ में संपादक के रूप में कार्य किया।

9. नामवर सिंह के गुरु कौन थे?

उत्तर : उनके गुरु आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी थे।

10. नामवर सिंह ने किस विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग का नेतृत्व किया?

उत्तर : उन्होंने जोधपुर विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग का नेतृत्व किया।

11. नामवर सिंह ने ‘दूसरी परंपरा की खोज’ में किस विषय पर विचार किया?

उत्तर : उन्होंने हिंदी साहित्य में दूसरी परंपरा की व्याख्या की है।

12. ‘प्रगीत’ को नामवर सिंह ने किस रूप में परिभाषित किया है?

उत्तर : उन्होंने ‘प्रगीत’ को वैयक्तिक और आत्मपरक कविताओं के रूप में परिभाषित किया।

13. नामवर सिंह ने किस आलोचना शैली को अपनाया?

उत्तर : उन्होंने मार्क्सवादी आलोचना शैली अपनाई।

14. नामवर सिंह ने साहित्य को किस दृष्टि से देखा?

उत्तर : उन्होंने साहित्य को ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से देखा।

15. ‘कहना न होगा’ पुस्तक किस प्रकार की है?

उत्तर : यह साक्षात्कारों का संग्रह है।

16. नामवर सिंह का साहित्यिक दृष्टिकोण क्या था?

उत्तर : उनका दृष्टिकोण प्रगतिशील और लोकनिष्ठ था।

17. नामवर सिंह के आलोचनात्मक निबंधों की प्रमुख पुस्तक कौन सी है?

उत्तर : ‘वाद विवाद संवाद’ उनकी प्रमुख आलोचनात्मक निबंधों की पुस्तक है।

18. नामवर सिंह ने किस संस्था के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया?

उत्तर : उन्होंने राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

19. नामवर सिंह ने किस विषय पर गहन अध्ययन किया था?

उत्तर : उन्होंने साहित्य, दर्शन, इतिहास और समाजशास्त्र पर गहन अध्ययन किया था।

20. ‘पृथ्वीराज रासो की भाषा’ पर पीएचडी करने का वर्ष क्या था?

उत्तर : उन्होंने 1956 में पीएचडी पूरी की थी।


Medium Questions (with Answers)


1. नामवर सिंह ने हिंदी आलोचना में कौन-सा योगदान दिया है?

उत्तर : नामवर सिंह ने हिंदी आलोचना को एक नई दिशा दी और उसे सामाजिक, ऐतिहासिक संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने साहित्य को केवल गुण-दोष विवेचन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसमें लोकनिष्ठा और समयबोध जोड़ा। उनके विचार साहित्य की गहराई में जाने और उसे व्यापक सामाजिक संदर्भ में देखने के लिए प्रेरित करते हैं।

2. ‘प्रगीत’ काव्य को नामवर सिंह ने कैसे परिभाषित किया?

उत्तर : नामवर सिंह ने ‘प्रगीत’ काव्य को वैयक्तिकता और आत्मपरकता की अभिव्यक्ति के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने बताया कि यह काव्य रूप समाज के व्यापक यथार्थ को प्रतिबिंबित करता है। इसे ‘एकांत संगीत’ या ‘अकेले कंठ की पुकार’ भी कहा जाता है।

3. नामवर सिंह ने मुक्तिबोध की कविताओं को कैसे देखा?

उत्तर : उन्होंने मुक्तिबोध की कविताओं को आत्मसंघर्ष और बहिर्मुख संघर्ष के अद्भुत समन्वय के रूप में देखा। उनकी कविताएँ लंबी होने के बावजूद सामाजिक यथार्थ की गहरी व्याख्या करती हैं। मुक्तिबोध की कविताओं में अंतर्निहित संघर्ष को उन्होंने काव्यात्मक शक्ति का स्रोत बताया।

4. नामवर सिंह की आलोचना में किन विशेषताओं का उल्लेख किया गया है?

उत्तर : उनकी आलोचना में गहरी ऐतिहासिक अंतर्दृष्टि, लोकनिष्ठा, परंपरा की पहचान और साहित्यिक रूपों की सूक्ष्म समझ दिखाई देती है। उन्होंने आलोचना में लालित्यपूर्ण भाषा और मुहावरों का सुंदर प्रयोग किया। उनकी आलोचना में भावनात्मक और बौद्धिक संतुलन का अद्भुत तालमेल है।

5. नामवर सिंह की आलोचना में समाज और साहित्य का क्या संबंध है?

उत्तर : नामवर सिंह ने साहित्य को समाज का दर्पण माना और बताया कि साहित्य सामाजिक यथार्थ को प्रतिबिंबित करता है। उनकी आलोचना में समाज और साहित्य के बीच गहरी अंतर्संबंध की व्याख्या की गई है। वे साहित्य को समाज के परिवर्तन और विकास का महत्वपूर्ण साधन मानते थे।

6. नामवर सिंह ने ‘दूसरी परंपरा’ से क्या तात्पर्य दिया है?

उत्तर : ‘दूसरी परंपरा’ से नामवर सिंह का तात्पर्य हिंदी साहित्य में वैकल्पिक दृष्टिकोण और रचनात्मकता से है। वे इसे मुख्यधारा की परंपरा से अलग मानते थे, जो नए विचारों और प्रयोगों को बढ़ावा देती है। इस परंपरा में उन्होंने अपने गुरु हजारी प्रसाद द्विवेदी और रवींद्रनाथ ठाकुर को शामिल किया।

7. नामवर सिंह ने ‘वाद विवाद संवाद’ में क्या विश्लेषण किया है?

उत्तर : ‘वाद विवाद संवाद’ में नामवर सिंह ने हिंदी साहित्य में उत्पन्न विभिन्न विवादों और वादों का विश्लेषण किया है। उन्होंने इन वादों को साहित्य के विकास के लिए आवश्यक माना। यह पुस्तक साहित्यिक आलोचना को संवाद का माध्यम बनाने पर जोर देती है।

8. नामवर सिंह की भाषा शैली की विशेषता क्या है?

उत्तर : उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और ललित गद्य के समान है। वे मुहावरों, कटाक्ष और व्यंग्य का प्रभावी ढंग से उपयोग करते हैं। उनकी शैली में तर्क, भाव और साहित्यिक लालित्य का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

9. नामवर सिंह ने साहित्यिक आलोचना को क्या नई दिशा दी?

उत्तर : उन्होंने साहित्यिक आलोचना को सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ में देखा और इसे व्यापक बनाया। उनकी आलोचना में केवल साहित्य का गुण-दोष विवेचन नहीं, बल्कि उसकी सामाजिक भूमिका पर भी जोर दिया गया। वे आलोचना को समाज की समस्याओं को समझने का माध्यम मानते थे।

10. नामवर सिंह के आलोचनात्मक दृष्टिकोण में मार्क्सवाद का क्या योगदान है?

उत्तर : नामवर सिंह के आलोचनात्मक दृष्टिकोण में मार्क्सवाद का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने साहित्य को वर्ग संघर्ष और सामाजिक यथार्थ के संदर्भ में देखा। उनकी आलोचना में सामाजिक परिवर्तन और शोषित वर्गों के अधिकारों पर जोर दिया गया है।

11. नामवर सिंह ने मुक्तिबोध की कविताओं में किस विशेषता को रेखांकित किया?

उत्तर : नामवर सिंह ने मुक्तिबोध की कविताओं में आत्मसंघर्ष और सामाजिक यथार्थ की गहरी व्याख्या की। उन्होंने कहा कि मुक्तिबोध की कविताएँ व्यक्तित्व के भीतर और समाज के बाहर चल रहे द्वंद्व को प्रकट करती हैं। उनकी कविताओं में गहरी आत्मपरकता और भावनात्मक तीव्रता है।

12. आचार्य रामचंद्र शुक्ल के काव्य सिद्धांत के बारे में नामवर सिंह ने क्या कहा?

उत्तर : नामवर सिंह ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल के काव्य सिद्धांत प्रबंध काव्य को प्राथमिकता देते हैं। शुक्ल जी ने लंबी कविताओं को जीवन का व्यापक चित्रण करने वाला माना। नामवर सिंह ने प्रगीतधर्मी कविताओं को भी सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

13. त्रिलोचन और नागार्जुन की कविताओं की विशेषता क्या है?

उत्तर : त्रिलोचन और नागार्जुन की कविताएँ प्रगीतात्मकता और सामाजिक यथार्थ का अद्भुत मिश्रण हैं। त्रिलोचन की कविताओं में आत्मपरकता और संवेदनशीलता होती है, जबकि नागार्जुन की कविताएँ तीव्र सामाजिक आक्रोश को व्यक्त करती हैं। दोनों कवियों ने अपने काव्य में समाज की समस्याओं को गहराई से उकेरा है।

14. नई कविता में प्रगीतधर्मी कविताओं का क्या महत्व है?

उत्तर : नई कविता में प्रगीतधर्मी कविताएँ वैयक्तिकता और आत्मपरकता की गहन अभिव्यक्ति हैं। इन कविताओं में समाज के प्रति एक नई दृष्टि और सामाजिक यथार्थ की जटिलता दिखाई देती है। नामवर सिंह ने इन्हें सामाजिक बदलाव के वाहक के रूप में देखा।

15. नामवर सिंह ने समाज में कविता की भूमिका को कैसे परिभाषित किया?

उत्तर : उन्होंने कविता को समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता लाने वाला माध्यम माना। उनकी दृष्टि में कविता केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज में परिवर्तन लाने की शक्ति भी है। कविता में सामाजिक यथार्थ को व्यक्त करने की क्षमता होती है।


Long Questions (with Answers)


1. नामवर सिंह ने ‘प्रगीत’ काव्य की सामाजिक भूमिका को कैसे देखा?

उत्तर : नामवर सिंह ने ‘प्रगीत’ काव्य को सामाजिक और वैयक्तिक यथार्थ के समन्वय के रूप में देखा। उन्होंने इसे वैयक्तिकता की चरम सीमा पर पहुँचकर सामाजिकता का प्रतीक माना। प्रगीतधर्मी कविताएँ व्यक्ति के आंतरिक संघर्ष और समाज के बाहरी यथार्थ को एक साथ व्यक्त करती हैं। वे मानते थे कि आत्मपरकता में भी सामाजिक अर्थ छिपे होते हैं। इस प्रकार, प्रगीत काव्य व्यक्ति और समाज के बीच सेतु का कार्य करता है।

2. नामवर सिंह ने नई प्रगीतात्मकता के बारे में क्या कहा?

उत्तर : नामवर सिंह ने नई प्रगीतात्मकता को व्यक्तिवाद और सामाजिकता के द्वंद्व के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि यह प्रगीतात्मकता वैयक्तिकता के साथ-साथ समाज के व्यापक यथार्थ को भी व्यक्त करती है। नई कविता में यह प्रवृत्ति आत्मसंघर्ष और सामाजिक यथार्थ के बीच संतुलन स्थापित करती है। उन्होंने इसे एक नई साहित्यिक चेतना के उदय के रूप में देखा।

3. मुक्तिबोध की कविताओं में व्यक्त आत्मसंघर्ष और सामाजिक यथार्थ को नामवर सिंह ने कैसे परिभाषित किया?

उत्तर : नामवर सिंह ने मुक्तिबोध की कविताओं को आत्मसंघर्ष और बहिर्मुख संघर्ष का अद्भुत समन्वय बताया। उन्होंने कहा कि मुक्तिबोध की कविताएँ समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता और आत्मपरकता को व्यक्त करती हैं। उनकी कविताओं में व्यक्ति के भीतर चल रहे द्वंद्व और समाज में हो रहे संघर्ष का सजीव चित्रण मिलता है। यह काव्य आत्मसंघर्ष को सामाजिक यथार्थ से जोड़ता है।

4. आचार्य रामचंद्र शुक्ल के काव्य आदर्शों की आलोचना नामवर सिंह ने कैसे की?

उत्तर : नामवर सिंह ने आचार्य रामचंद्र शुक्ल के काव्य आदर्शों में प्रबंध काव्य को प्राथमिकता देने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शुक्ल जी प्रबंध काव्य को ही व्यापक जीवन का चित्रण करने वाला मानते थे। लेकिन नामवर सिंह ने प्रगीतधर्मी कविताओं की सामाजिक सार्थकता को भी महत्व दिया। उन्होंने बताया कि छोटी कविताएँ भी समाज की गहरी समस्याओं को व्यक्त कर सकती हैं।

5. नामवर सिंह ने त्रिलोचन और नागार्जुन की कविताओं की प्रगीतात्मकता को कैसे विश्लेषित किया?

उत्तर : नामवर सिंह ने त्रिलोचन और नागार्जुन की कविताओं को प्रगीतात्मकता और सामाजिक यथार्थ का अद्वितीय समन्वय बताया। त्रिलोचन की कविताएँ वैयक्तिक अनुभवों से भरपूर होती हैं, लेकिन वे व्यापक समाज की चिंताओं को भी उकेरती हैं। नागार्जुन की कविताओं में तीव्र सामाजिक आक्रोश और क्रांतिकारी भाव होते हैं। दोनों कवियों की कविताएँ अपनी गहराई में आत्मपरक होते हुए भी सामाजिक परिवर्तन की चेतना जगाने वाली हैं। उनकी कविताएँ नई प्रगीतात्मकता का अद्भुत उदाहरण हैं।

6. नामवर सिंह के अनुसार प्रगीत काव्य और प्रबंध काव्य में क्या अंतर है?

उत्तर : नामवर सिंह ने प्रगीत काव्य को वैयक्तिक और आत्मपरक अनुभवों की अभिव्यक्ति बताया, जबकि प्रबंध काव्य को व्यापक जीवन के इतिवृत्त का चित्रण माना। प्रबंध काव्य में कथा और चरित्र होते हैं, जबकि प्रगीत काव्य में भावनाओं की गहराई होती है। प्रबंध काव्य समाज की विस्तृत तस्वीर प्रस्तुत करता है, जबकि प्रगीत काव्य समाज के भीतर के व्यक्तिगत संघर्ष को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि प्रगीत काव्य की वैयक्तिकता में भी गहरी सामाजिकता छिपी होती है। यह अंतर साहित्य में दोनों प्रकार की कविताओं की महत्ता को दर्शाता है।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ads

Bihar Board सभी कक्षा के अध्याय के प्रश्न उत्तर in Hindi PDF

NCERT Question Answer in Hindi Medium

Bihar Board Question Answer in Hindi Medium

Download एनसीईआरटी सलूशन, सैंपल पेपर, प्रश्न पत्र इन पीडीएफ

क्लास की बुक (पुस्तक), MCQ, नोट्स इन हिंदी

Download एनसीईआरटी सलूशन, सैंपल पेपर, प्रश्न पत्र इन पीडीएफ

CBSE, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान & हरियाणा Board हिंदी माध्यम

कक्षा 6 to 8 हिंदी माध्यम
कक्षा 9 & 10 हिंदी माध्यम
कक्षा 11 हिंदी माध्यम

State Board

यूपी बोर्ड 6,7 & 8
बिहार बोर्ड हिंदी माध्यम

CBSE Board

Mathematics Class 6
Science Class 6
Social Science Class 6
हिन्दी Class 6
सामाजिक विज्ञान कक्षा 6
विज्ञान कक्षा 6

Mathematics Class 7
Science Class 7
SST Class 7
सामाजिक विज्ञान कक्षा 7
हिन्दी Class 7

Mathematics Class 8
Science Class 8
Social Science Class 8
हिन्दी Class 8

Mathematics Class 9
Science Class 9
English Class 9

Mathematics Class 10
SST Class 10
English Class 10

Mathematics Class XI
Chemistry Class XI
Accountancy Class 11

Accountancy Class 12
Mathematics Class 12

Learn English
English Through हिन्दी
Job Interview Skills
English Grammar
हिंदी व्याकरण - Vyakaran
Microsoft Word
Microsoft PowerPoint
Adobe PhotoShop
Adobe Illustrator
Learn German
Learn French
IIT JEE

Study Abroad

Study in Australia: Australia is known for its vibrant student life and world-class education in fields like engineering, business, health sciences, and arts. Major student hubs include Sydney, Melbourne, and Brisbane. Top universities: University of Sydney, University of Melbourne, ANU, UNSW.

Study in Canada: Canada offers affordable education, a multicultural environment, and work opportunities for international students. Top universities: University of Toronto, UBC, McGill, University of Alberta.

Study in the UK: The UK boasts prestigious universities and a wide range of courses. Students benefit from rich cultural experiences and a strong alumni network. Top universities: Oxford, Cambridge, Imperial College, LSE.

Study in Germany: Germany offers high-quality education, especially in engineering and technology, with many low-cost or tuition-free programs. Top universities: LMU Munich, TUM, University of Heidelberg.

Study in the USA: The USA has a diverse educational system with many research opportunities and career advancement options. Top universities: Harvard, MIT, Stanford, UC Berkeley

Privacy Policies, Terms and Conditions, Contact Us
eVidyarthi and its licensors. All Rights Reserved.