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हिंदी Important Questions Poem 1 कड़बक Class 12 Hindi Bihar Board बिहार बोर्ड

Important Questions For All Chapters – हिंदी Class 12

Short Questions (with Answers)


1. मलिक मुहम्मद जायसी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर : मलिक मुहम्मद जायसी का जन्म 1492 के आसपास जायस, उत्तर प्रदेश में हुआ था।

2. जायसी के पिता का नाम क्या था?

उत्तर : जायसी के पिता का नाम मलिक शेख ममरेज (मलिक राजे अशरफ) था।

3. जायसी के गुरु कौन थे?

उत्तर : जायसी के गुरु सूफी संत शेख मोहिदी और सैयद अशरफ जहाँगीर थे।

4. जायसी ने किस प्रमुख ग्रंथ की रचना की?

उत्तर : मलिक मुहम्मद जायसी ने महाकाव्य पद्मावत की रचना की।

5. जायसी का जीवन कैसे बीता?

उत्तर : उनका जीवन कठिनाइयों से भरा था; बचपन में ही वे अनाथ हो गए और फकीरों के साथ समय बिताया।

6. ‘पद्मावत’ की कथा किस आधार पर लिखी गई है?

उत्तर : ‘पद्मावत’ की कथा चित्तौड़ के राजा रतनसेन और सिंहल द्वीप की राजकुमारी पद्मावती की प्रेमकथा पर आधारित है।

7. जायसी किस काव्य धारा के कवि थे?

उत्तर : वे सूफी प्रेममार्गी काव्यधारा के प्रमुख कवि थे।

8. जायसी की भाषा क्या थी?

उत्तर : जायसी ने अपनी रचनाओं में खालिस अवधी भाषा का प्रयोग किया।

9. ‘पद्मावत’ का त्रिकोणीय कथानक किसे दर्शाता है?

उत्तर : यह रतनसेन, पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच प्रेम और संघर्ष को दर्शाता है।

10. ‘पद्मावत’ के अलावा जायसी की अन्य रचनाएँ कौन-सी हैं?

उत्तर : उनकी अन्य रचनाओं में ‘अखरावट’, ‘आखिरी कलाम’, और ‘चित्ररेखा’ शामिल हैं।

11. जायसी ने ‘रकत कै लेई’ का क्या अर्थ बताया?

उत्तर : ‘रकत कै लेई’ का अर्थ है अपने खून से जोड़कर बनाई गई काव्य रचना।

12. जायसी ने अपनी एक आँख को किससे जोड़ा है?

उत्तर : उन्होंने अपनी एक आँख की तुलना दर्पण से की है।

13. ‘पद्मावत’ किस रस से भरपूर है?

उत्तर : यह शृंगार और करुण रस से भरपूर है।

14.  ‘पद्मावत’ में अलाउद्दीन खिलजी का क्या पात्र है?

उत्तर : अलाउद्दीन खिलजी कथा में पद्मावती के सौंदर्य से प्रभावित सुल्तान के रूप में प्रस्तुत है।

15. जायसी के लेखन का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर : उनका लेखन धार्मिक-सामाजिक सद्भाव और प्रेम की भावना को बढ़ावा देना था।

16. जायसी का व्यक्तित्व कैसा था?

उत्तर : जायसी मृदुभाषी, मनस्वी और संत स्वभाव के व्यक्ति थे।

17. जायसी ने ‘पद्मावत’ में किस शैली का उपयोग किया है?

उत्तर : उन्होंने चौपाई-दोहा शैली में ‘पद्मावत’ की रचना की है।

18. जायसी के समय का सामाजिक वातावरण कैसा था?

उत्तर : उनका समय धार्मिक और सांस्कृतिक संघर्ष का था।

19. ‘पद्मावत’ के अंत में कवि क्या कहता है?

उत्तर : कवि कहता है कि राजा रतनसेन और पद्मावती जैसे पात्र तो अब नहीं रहे, लेकिन उनकी कथा और यश जीवित हैं।

20. जायसी की रचनाओं में किसका प्रभाव देखा जाता है?

उत्तर : उनकी रचनाओं में सूफी मत और तसव्वुफ का प्रभाव स्पष्ट दिखता है।


Medium Questions (with Answers)


1. जायसी के जीवन का उनके काव्य पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर : बचपन में अनाथ होकर कठिनाइयों से गुजरे जायसी का जीवन प्रेम, करुणा और आध्यात्मिकता से भरा रहा। उनकी ये भावनाएँ उनके काव्य, विशेषकर पद्मावत में झलकती हैं। उनके अनुभवों ने उनके लेखन को संवेदनशील और व्यापक बनाया।

2. जायसी ने ‘पद्मावत’ में प्रेम को कैसे प्रस्तुत किया है?

उत्तर : जायसी ने प्रेम को आत्मा की पवित्रता और त्याग का प्रतीक बताया। रतनसेन और पद्मावती का प्रेम सूफी विचारधारा से प्रेरित है, जो ईश्वर और आत्मा के मिलन का प्रतीक है। यह प्रेम सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं को पार करता है।

3. ‘पद्मावत’ की कथा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर : इसका उद्देश्य प्रेम, साहस और मानवीय आदर्शों को उजागर करना है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक सद्भाव का संदेश देती है। साथ ही, यह भौतिक सुंदरता के पार आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करती है।

4. जायसी के साहित्य में सूफी तत्व कैसे दिखते हैं?

उत्तर : सूफी तत्व उनके साहित्य में प्रेम, त्याग और आध्यात्मिकता के रूप में दिखते हैं। वे भौतिकता से परे आंतरिक शुद्धता और आत्मा-परमात्मा के मिलन पर जोर देते हैं। उनका काव्य मानवीय एकता और प्रेम का संदेश देता है।

5. जायसी ने ‘फूल और खुशबू’ के प्रतीक का क्या अर्थ दिया?

उत्तर : जायसी कहते हैं कि फूल नष्ट हो सकता है, लेकिन उसकी खुशबू अमर रहती है। यह प्रतीक उनके काव्य की अमरता और यश का है, जो उनके जाने के बाद भी जीवित रहेगा। यह उनकी रचनात्मकता का आत्मविश्वास दिखाता है।

6. जायसी ने अपनी एक आँख को किससे जोड़ा है?

उत्तर : उन्होंने अपनी एक आँख की तुलना दर्पण से की, जिसमें मानवता और जीवन की गहराई झलकती है। यह आत्मस्वीकृति और मानवीय कमजोरियों को स्वाभाविक रूप से स्वीकारने का प्रतीक है।

7. जायसी ने ‘पद्मावत’ की रचना में कौन-सी शैली अपनाई?

उत्तर : उन्होंने चौपाई-दोहा शैली में ‘पद्मावत’ की रचना की। यह शैली कथा के भावों और कथानक को गहराई से व्यक्त करने में सहायक है। अवधी भाषा ने इसे लोकजीवन से जोड़ा।

8. अलाउद्दीन खिलजी का पात्र ‘पद्मावत’ में क्या दर्शाता है?

उत्तर : खिलजी को एक महत्वाकांक्षी और शक्तिशाली, लेकिन प्रेम के अधीन व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है। वह पद्मावती की सुंदरता के प्रति आकर्षित है और इसे पाने के लिए संघर्ष करता है। यह पात्र मानवीय इच्छाओं और कमजोरियों का प्रतीक है।

9. जायसी ने ‘रकत कै लेई’ से क्या तात्पर्य दिया है?

उत्तर : ‘रकत कै लेई’ का अर्थ है, अपने खून से जोड़कर बनाई गई रचना। यह उनके काव्य में आत्मा, भावनाओं और गहनता के निवेश को दर्शाता है। उन्होंने इसे अपनी आंतरिक पीड़ा और प्रेम का प्रतीक माना।

10. जायसी का ‘पद्मावत’ सामाजिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर : ‘पद्मावत’ धार्मिक और सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ावा देता है। यह प्रेम और मानवीय मूल्यों के आदर्शों को स्थापित करता है। साथ ही, यह संघर्ष और त्याग के माध्यम से जीवन के गहरे अर्थों को प्रकट करता है।


Long Questions (with Answers)


1. ‘पद्मावत’ में रतनसेन और पद्मावती के प्रेम का क्या महत्व है?

उत्तर : रतनसेन और पद्मावती का प्रेम त्याग, समर्पण और पवित्रता का प्रतीक है। यह प्रेम आत्मा और परमात्मा के मिलन की सूफी विचारधारा को दर्शाता है। उनका प्रेम सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं को पार करता है। रतनसेन का साहस और पद्मावती की निष्ठा इस प्रेम को महान बनाते हैं। यह प्रेम केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों का आदर्श भी प्रस्तुत करता है।

2. जायसी ने ‘पद्मावत’ में अलाउद्दीन खिलजी को कैसे चित्रित किया है?

उत्तर : जायसी ने खिलजी को महत्वाकांक्षी और शक्तिशाली शासक के रूप में चित्रित किया, जो पद्मावती की सुंदरता से आकर्षित होता है। वह पद्मावती को पाने के लिए हर संभव प्रयास करता है, जिससे उसकी कमजोरी और मानवीय इच्छाएँ उजागर होती हैं। खिलजी का पात्र शक्ति और प्रेम के बीच के द्वंद्व का प्रतीक है। यह पात्र जीवन के संघर्ष और मानवीय कमजोरियों को दर्शाता है।

3. जायसी ने ‘फूल और खुशबू’ के प्रतीक का क्या महत्व बताया?

उत्तर : जायसी ने ‘फूल और खुशबू’ के माध्यम से यह बताया कि भौतिक रूप नष्ट हो सकता है, लेकिन यश और कीर्ति अमर रहते हैं। यह उनके काव्य की आत्मा और उनकी रचनात्मकता का प्रतीक है। उनका यह दृष्टिकोण उनके आत्मविश्वास और साहित्य की अमरता को दर्शाता है। उनका मानना था कि एक सच्चे कलाकार की पहचान उसकी रचनाओं से जीवित रहती है।

4. जायसी ने अपनी शारीरिक खामियों को कैसे स्वीकार किया?

उत्तर : जायसी ने अपनी एक आँख और चेचक से प्रभावित चेहरे को अपने जीवन और काव्य का हिस्सा बनाया। उन्होंने इसे कमजोरियों के बजाय अपनी आत्मा की शक्ति के रूप में देखा। उनकी रचनाएँ दिखाती हैं कि उन्होंने अपनी खामियों को आत्मविश्वास और सृजनशीलता में बदला। उनकी यह स्वीकृति उनके काव्य को और अधिक गहराई और मानवीय बनाती है।

5. ‘पद्मावत’ का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?

उत्तर : ‘पद्मावत’ धार्मिक-सांस्कृतिक संघर्षों के समय में सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह प्रेम, त्याग और आदर्शों को स्थापित करता है और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है। जायसी ने इसमें सूफी और भारतीय परंपराओं का मेल दिखाया है। यह काव्य उस युग में सांस्कृतिक पुल के रूप में काम करता है। साथ ही, यह धार्मिक एकता और मानवता के मूल्यों को उजागर करता है।

6. जायसी के काव्य में सूफी तत्व कैसे प्रकट होते हैं?

उत्तर : जायसी के काव्य में सूफी तत्व प्रेम, त्याग और आध्यात्मिकता के रूप में प्रकट होते हैं। उन्होंने आत्मा और परमात्मा के मिलन को केंद्र में रखकर अपने काव्य की रचना की। उनके पात्र भौतिक आकर्षण से परे जाकर आध्यात्मिक प्रेम का अनुभव करते हैं। सूफी विचारधारा उनके काव्य में गहरी आंतरिकता और व्यापकता लाती है। यह भौतिकता से परे आत्मा की पवित्रता को उजागर करती है।

7. ‘पद्मावत’ में जायसी ने नायिका पद्मावती को किस रूप में प्रस्तुत किया है?

उत्तर : जायसी ने पद्मावती को पवित्रता, निष्ठा और साहस की प्रतीक नायिका के रूप में प्रस्तुत किया है। वह न केवल रतनसेन के प्रति प्रेममयी है, बल्कि अपने आदर्शों के लिए भी प्रतिबद्ध है। पद्मावती की सुंदरता भौतिक रूप तक सीमित नहीं, बल्कि उसके चरित्र और आत्मा में झलकती है। वह समाज में नारी शक्ति और त्याग का आदर्श प्रस्तुत करती है। उनका चरित्र सूफी प्रेम के उच्चतम मानदंडों को दर्शाता है।

8. जायसी ने अपने काव्य में भाषा और शैली का प्रयोग कैसे किया?

उत्तर : जायसी ने अपने काव्य में अवधी भाषा का प्रयोग किया, जो सरल, प्रभावी और लोकजीवन से जुड़ी हुई है। उन्होंने चौपाई-दोहा शैली में ‘पद्मावत’ की रचना की, जो कथा के विस्तार और भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम है। उनकी भाषा में सूफी विचारधारा और भारतीय परंपराओं का मेल है। यह शैली उनके काव्य को अद्वितीय बनाती है और उन्हें आमजन से जोड़ती है।

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