बिहार की जलवायु — तापमान
ऋतु-चक्र, तापांतर, औसत तापमान एवं परीक्षा-केंद्रित विश्लेषण — सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
परिचय एवं जलवायु-प्रकार
बिहार की जलवायु एवं तापमान BPSC Prelims तथा Mains दोनों के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण विषय है। बिहार उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु (Tropical Monsoon Climate) के अंतर्गत आता है जिसमें तापमान का वार्षिक उतार-चढ़ाव अत्यधिक होता है — ग्रीष्म में 45–48°C से लेकर शीत में 2–4°C तक।
बिहार में तीन प्रमुख ऋतुएँ
| ऋतु | महीने | औसत तापमान | विशेषता |
|---|---|---|---|
| ग्रीष्म ऋतु | मार्च – जून | 32°C – 48°C | लू (Hot Wind), तेज धूप, न्यूनतम वर्षा |
| वर्षा ऋतु (Monsoon) | जुलाई – अक्टूबर | 26°C – 32°C | SW मानसून, 80–85% वार्षिक वर्षा, उमस |
| शीत ऋतु | नवम्बर – फरवरी | 8°C – 18°C | शीतलहर, पाला, कोहरा, उत्तर-पूर्वी मानसून |
तापमान को प्रभावित करने वाले कारक
बिहार के तापमान को निर्धारित करने वाले अनेक भौगोलिक एवं वायुमंडलीय कारक हैं। इन कारकों की समझ BPSC Mains में विश्लेषणात्मक प्रश्नों के उत्तर के लिए अनिवार्य है। तापमान उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम — दोनों दिशाओं में भिन्न होता है।
हिमालय उत्तरी साइबेरियाई ठंडी हवाओं को रोकता है जिससे बिहार में अन्य समान अक्षांशों की तुलना में तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहता है। किन्तु हिमालय से आने वाली ठंडी हवाएँ दिसंबर–जनवरी में शीतलहर लाती हैं।
बिहार समुद्र से दूर स्थलावृत्त (Landlocked) है। इसलिए ग्रीष्म में अत्यधिक गर्मी और शीत में अत्यधिक सर्दी — यानी तापांतर अधिक होता है। पश्चिमी बिहार (रोहतास, भोजपुर) में यह महाद्वीपीय प्रभाव अधिक स्पष्ट है।
बिहार का दक्षिणी भाग (गया — 24°N) उत्तरी भाग (पश्चिम चम्पारण — 27°N) की तुलना में अधिक गर्म रहता है क्योंकि यह कर्क रेखा के समीप है। दक्षिण में सूर्य की किरणें अधिक सीधी पड़ती हैं।
दक्षिण बिहार के गया, नवादा, रोहतास क्षेत्र में पठारी धरातल होने से तापमान अधिक रहता है। उत्तर बिहार में तराई एवं नम जलोढ़ मैदान होने से तापमान तुलनात्मक रूप से कम उग्र रहता है।
गंगा, सोन, गंडक, कोसी जैसी बड़ी नदियाँ स्थानीय आर्द्रता बढ़ाती हैं जिससे नदी-तटीय जिलों में तापमान कुछ कम रहता है। मानसून काल में सापेक्षिक आर्द्रता 80–90% तक पहुँच जाती है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून–सितम्बर) वर्षा लाकर तापमान घटाता है। शीत ऋतु में उत्तर-पूर्वी मानसून एवं पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) शीतलहर का कारण बनते हैं।
ग्रीष्म ऋतु — तापमान विश्लेषण
ग्रीष्म ऋतु (मार्च से जून) बिहार में सबसे कठोर मौसम है। मई–जून में दक्षिण बिहार के जिलों — विशेषकर गया, औरंगाबाद, नवादा — में तापमान 45–48°C तक पहुँच जाता है। इस काल में लू (Loo) नामक गर्म शुष्क हवाएँ चलती हैं जो जनजीवन के लिए घातक हैं।
लू (Loo) — विशेष अध्ययन
लू एक गर्म, शुष्क एवं धूल-भरी हवा है जो मई–जून में पश्चिम से पूर्व की ओर राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश से होती हुई बिहार में प्रवेश करती है। इसका तापमान 45°C से अधिक हो सकता है और यह Heat Stroke (लू लगना) का प्रमुख कारण है।
- दिशा: पश्चिम → पूर्व
- काल: मई–जून (अपराह्न 2–5 बजे)
- तापमान: 40–48°C
- आर्द्रता: अत्यन्त कम (10–20%)
- सर्वाधिक प्रभावित: पश्चिम बिहार — भोजपुर, बक्सर, रोहतास
ग्रीष्म ऋतु में क्षेत्रीय तापमान (मई)
| क्षेत्र/जिला | औसत अधिकतम (मई) | औसत न्यूनतम | विशेषता |
|---|---|---|---|
| गया (दक्षिण बिहार) | 44–48°C | 28–30°C | राज्य का सर्वाधिक गर्म जिला |
| औरंगाबाद, नवादा | 43–46°C | 27–29°C | पठारी क्षेत्र — उच्च तापांतर |
| पटना (मध्य बिहार) | 41–44°C | 26–28°C | राजधानी — लू का प्रभाव |
| भागलपुर (पूर्व) | 38–42°C | 24–27°C | गंगा के समीप — तुलनात्मक राहत |
| मुज़फ्फरपुर (उत्तर) | 37–40°C | 24–26°C | तराई प्रभाव — अपेक्षाकृत कम गर्म |
| प. चम्पारण (उत्तर-पश्चिम) | 36–39°C | 22–25°C | हिमालय तराई — सबसे कम गर्म |
कालबैसाखी (Norwester / Kalbaisakhi)
कालबैसाखी (बैसाख माह का काला तूफान) मानसून-पूर्व तड़ित-झंझावात है जो मई–जून में बंगाल की खाड़ी से उठकर पश्चिम बंगाल होते हुए बिहार के पूर्वी जिलों — पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर — में आती है। यह तेज़ हवाओं (60–80 kmph), वज्रपात एवं भारी वर्षा के साथ आती है। यह ग्रीष्म ताप से अस्थायी राहत देती है लेकिन फसलों को नुकसान पहुँचाती है।
वर्षा ऋतु एवं शरद तापमान
वर्षा ऋतु (जुलाई–अक्टूबर) में दक्षिण-पश्चिम मानसून बिहार में तापमान को 26°C – 32°C के मध्य स्थिर रखता है। यद्यपि तापमान घटता है, किन्तु उच्च आर्द्रता (80–90%) के कारण उमस (Humidity Discomfort) अधिक रहती है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून बिहार में जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक पहुँचता है। मानसून के आगमन से तापमान में तत्काल 5–8°C की गिरावट आती है।
| माह | औसत दिन-तापमान | औसत रात-तापमान | आर्द्रता |
|---|---|---|---|
| जुलाई | 32–34°C | 24–26°C | 80–85% |
| अगस्त | 31–33°C | 24–25°C | 85–90% |
| सितम्बर | 30–32°C | 23–25°C | 80–85% |
| अक्टूबर | 29–32°C | 20–23°C | 70–75% |
अक्टूबर में मानसून की वापसी (Retreating Monsoon) के साथ बिहार में शरद ऋतु प्रारम्भ होती है। यह ऋतु तापमान-दृष्टि से परिवर्तनकाल है।
- अक्टूबर: दिन गर्म (30–32°C), रातें ठंडी होने लगती हैं (18–22°C)। आसमान साफ।
- नवम्बर: तापमान तेज़ी से घटता है — दिन 22–26°C, रात 10–14°C। शीत ऋतु का पूर्वाभास।
- उमस से राहत: आर्द्रता घटकर 50–60% हो जाती है — यह सर्वाधिक सुखद काल है।
- कृषि महत्त्व: इस काल में खरीफ फसल कटाई एवं रबी बुआई की शुरुआत होती है।
- Bay of Bengal Branch: पूर्व बिहार (पूर्णिया, कटिहार) में पहले पहुँचती है — जून अंत में।
- Arabian Sea Branch: गंगा घाटी से होती हुई पश्चिम बिहार में — जुलाई प्रारम्भ तक।
- वापसी: अक्टूबर में उत्तर-पूर्व बिहार से मानसून की वापसी शुरू होती है।
शीत ऋतु — शीतलहर एवं पाला
शीत ऋतु (दिसम्बर–फरवरी) में बिहार का तापमान 2°C से 18°C के बीच रहता है। जनवरी सबसे ठंडा माह है। शीतलहर (Cold Wave), घना कोहरा एवं पाला इस ऋतु की प्रमुख विशेषताएँ हैं जो बिहार की कृषि एवं परिवहन को गहरे प्रभावित करती हैं।
शीतलहर (Cold Wave) — IMD परिभाषा एवं बिहार
IMD के अनुसार जब मैदानी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 10°C या उससे कम हो और सामान्य से 4.5°C कम हो — तब शीतलहर घोषित होती है। Severe Cold Wave तब जब सामान्य से 6.5°C कम। बिहार में प्रतिवर्ष दिसम्बर–जनवरी में शीतलहर के कारण दर्जनों मौतें होती हैं।
पाला (Frost) — कृषि पर प्रभाव
पाला तब पड़ता है जब रात का तापमान 0°C के निकट या उससे कम हो जाता है। बिहार में पाला सामान्यतः जनवरी के दूसरे–तीसरे सप्ताह में पड़ता है। यह आलू, मटर, सरसों, गेहूँ की फसलों को गम्भीर नुकसान पहुँचाता है। दक्षिण बिहार के गया, नवादा में पाले की सम्भावना उत्तर बिहार की तुलना में अधिक है क्योंकि पठारी क्षेत्र में Radiation Cooling अधिक होती है।
| जिला | जनवरी न्यूनतम | जनवरी अधिकतम | विशेषता |
|---|---|---|---|
| प. चम्पारण | 2–4°C | 16–18°C | हिमालय तराई — सर्वाधिक ठंड |
| सीतामढ़ी, मधुबनी | 3–5°C | 17–19°C | नेपाल सीमावर्ती — ठंडी हवाएँ |
| मुज़फ्फरपुर | 5–7°C | 19–21°C | घना कोहरा |
| पटना | 6–8°C | 20–23°C | गंगा तट — मध्यम शीत |
| गया | 4–6°C | 22–24°C | Radiation Cooling — तापांतर अधिक |
| भागलपुर | 8–10°C | 22–24°C | पूर्व में — अपेक्षाकृत गर्म |
जिलेवार तापमान एवं वार्षिक तापांतर
वार्षिक तापांतर (Annual Range of Temperature) = वर्ष के सबसे गर्म माह का औसत तापमान MINUS सबसे ठंडे माह का औसत तापमान। बिहार में यह दक्षिण में अधिक (गया — 38–40°C) एवं उत्तर-पूर्व में कम है। BPSC Mains में इस तापांतर को स्पष्ट करने की आवश्यकता होती है।
वार्षिक तापमान तुलना — प्रमुख जिले
| जिला | ग्रीष्म अधि. (मई) | शीत न्यून. (जनवरी) | वार्षिक तापांतर | जलवायु स्वभाव |
|---|---|---|---|---|
| गया | 46–48°C | 4–6°C | ~42°C (सर्वाधिक) | अतिचर महाद्वीपीय |
| औरंगाबाद | 44–46°C | 5–7°C | ~39°C | महाद्वीपीय प्रभाव |
| पटना | 42–44°C | 6–8°C | ~36°C | मध्यम |
| मुज़फ्फरपुर | 38–40°C | 5–7°C | ~33°C | तराई प्रभाव |
| प. चम्पारण | 36–38°C | 2–4°C | ~34°C | हिमालय तराई |
| भागलपुर | 38–41°C | 8–10°C | ~30°C (न्यूनतम) | अपेक्षाकृत समुद्री |
तापमान वितरण — उत्तर-दक्षिण एवं पूर्व-पश्चिम प्रवणता
- दक्षिण (गया 24°N) → अधिक गर्म
- उत्तर (चम्पारण 27°N) → कम गर्म
- कारण: अक्षांश + पठारी स्थलाकृति
- शीत में उलटा — उत्तर में हिमालयी हवाएँ
- पश्चिम (रोहतास, भोजपुर) → अधिक गर्म
- पूर्व (भागलपुर, कटिहार) → कम गर्म
- कारण: महाद्वीपीयता + समुद्री आर्द्रता
- पूर्व में Bay of Bengal से नमी अधिक
🎯 अभ्यास प्रश्न (MCQ)
जलवायु परिवर्तन का तापमान पर प्रभाव
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण बिहार के तापमान में दीर्घकालिक परिवर्तन देखे जा रहे हैं। BPSC Mains में “बिहार पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव” — इस प्रश्न में तापमान-संबंधी बिंदु अनिवार्य रूप से शामिल करने चाहिए।
पिछले 50 वर्षों में बिहार का औसत तापमान 0.5–1°C बढ़ा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2050 तक यह 1.5–2°C और बढ़ सकता है। यह कृषि उत्पादकता के लिए गम्भीर खतरा है।
बिहार में Heat Wave की घटनाएँ पहले से अधिक बार और अधिक तीव्रता से आ रही हैं। 2022 एवं 2023 में अप्रैल माह में ही 43°C+ तापमान दर्ज हुआ — जो पहले मई–जून में होता था।
बढ़ते तापमान से गेहूँ की पैदावार घट रही है (फूल आने के समय 35°C+ घातक)। धान की Spikelet Sterility तापमान 40°C+ पर होती है। रबी और खरीफ दोनों प्रभावित।
उच्च तापमान से वाष्पीकरण बढ़ता है → नदियाँ छिछली → भूमिगत जल स्तर घटता है → पेयजल संकट। दक्षिण बिहार (गया, जहानाबाद) में गर्मियों में जल-संकट गम्भीर हो रहा है।
अत्यधिक गर्मी से Heat Stroke, Dehydration, Malaria एवं अन्य जल-जनित रोगों में वृद्धि। वृद्ध, बच्चे एवं बाहरी मज़दूर सर्वाधिक प्रभावित। बिहार में Heat Wave से प्रतिवर्ष सैकड़ों मौतें।
जलवायु परिवर्तन से मानसून अनिश्चित एवं असमान हो रहा है — कभी अतिवृष्टि (बाढ़), कभी अनावृष्टि (सूखा)। तापमान की परिवर्तनशीलता बढ़ रही है।
निष्कर्ष (Conclusion)
बिहार की जलवायु एवं तापमान का अध्ययन केवल परीक्षा की दृष्टि से नहीं, बल्कि राज्य की कृषि, जल-प्रबंधन, स्वास्थ्य एवं आपदा-प्रबंधन नीतियों को समझने के लिए भी आवश्यक है। उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु में अत्यधिक तापांतर, लू, शीतलहर एवं जलवायु परिवर्तन का संयुक्त प्रभाव बिहार के सतत विकास के लिए बड़ी चुनौती है।


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