बिहार की भौगोलिक स्थिति
एवं स्थलाकृतिक स्वरूप
अक्षांश-देशांतर विस्तार · सीमाएँ · भू-आकृतिक प्रदेश · नदी तंत्र · BPSC Prelims + Mains
परिचय एवं भौगोलिक महत्त्व
बिहार की भौगोलिक स्थिति एवं स्थलाकृतिक स्वरूप BPSC Prelims और Mains दोनों के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय है — प्रत्येक परीक्षा चक्र में इससे 2-4 प्रश्न पूछे जाते हैं।
बिहार भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक स्थलरुद्ध (landlocked) राज्य है। यह उत्तर भारत के विशाल गंगा मैदान का हिस्सा है और अपनी भौगोलिक विविधता के कारण कृषि, संस्कृति तथा इतिहास की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। 15 नवंबर 2000 को झारखण्ड के अलग होने के बाद वर्तमान बिहार का स्वरूप निर्धारित हुआ।
बिहार एक स्थलरुद्ध राज्य (Landlocked State) है अर्थात् इसकी कोई सीमा किसी समुद्र या महासागर से नहीं लगती। राज्य की भूमि तीन ओर अन्य भारतीय राज्यों से तथा उत्तर में नेपाल से घिरी है। गंगा नदी बिहार को दो असमान भागों में विभाजित करती है — उत्तरी बिहार एवं दक्षिणी बिहार।
अक्षांश-देशांतर विस्तार एवं राज्य सीमाएँ
बिहार की सटीक भौगोलिक स्थिति को अक्षांश-देशांतर के माध्यम से समझना BPSC Prelims के लिए अनिवार्य है — यहाँ से प्रायः एक प्रश्न प्रत्येक परीक्षा में आता है।
📍 अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार
| विशेषता | विवरण | महत्त्व |
|---|---|---|
| उत्तरी अक्षांश (उत्तर) | 27°31′ उत्तरी अक्षांश | नेपाल सीमा के निकट |
| दक्षिणी अक्षांश (दक्षिण) | 24°20′ उत्तरी अक्षांश | झारखण्ड सीमा |
| पूर्वी देशांतर (पूर्व) | 88°17′ पूर्वी देशांतर | पश्चिम बंगाल सीमा |
| पश्चिमी देशांतर (पश्चिम) | 83°19′ पूर्वी देशांतर | उत्तर प्रदेश सीमा |
| अक्षांशीय विस्तार | लगभग 3°11′ | उत्तर-दक्षिण लंबाई ~345 km |
| देशांतरीय विस्तार | लगभग 4°58′ | पूर्व-पश्चिम चौड़ाई ~483 km |
🗺️ राज्य सीमाएँ — चारों दिशाएँ
स्थलाकृतिक प्रदेश — भू-आकृतिक वर्गीकरण
बिहार को मुख्यतः तीन स्थलाकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया जाता है — उत्तरी मैदान, दक्षिणी मैदान और दक्षिण का पठारी-पहाड़ी क्षेत्र। यह विभाजन BPSC Mains के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण है।
📊 स्थलाकृतिक वर्गीकरण — तुलनात्मक सारणी
| क्र. | स्थलाकृतिक प्रदेश | विस्तार / क्षेत्र | प्रमुख नदियाँ | मिट्टी | विशेषता |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | तराई क्षेत्र | उत्तर बिहार की नेपाल सीमा | गंडक, कोसी, बागमती | नवीन जलोढ़ (खादर) | घना जंगल, दलदली भूमि |
| 2 | उत्तरी गंगा मैदान | तराई से गंगा तक | गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी | नवीन जलोढ़ | सर्वाधिक उपजाऊ, बाढ़ग्रस्त |
| 3 | दक्षिणी गंगा मैदान | गंगा से झारखण्ड तक | सोन, पुनपुन, फल्गु | पुरानी जलोढ़ (बांगर) | ऊबड़-खाबड़, बीहड़ भूमि |
| 4 | कैमूर पठार | रोहतास, कैमूर जिला | सोन नदी | लाल-पीली, चट्टानी | विंध्य शैल क्रम, सर्वोच्च बिंदु |
| 5 | राजगीर-गया पहाड़ियाँ | नालंदा, गया जिला | फल्गु, मोरहर | लाल, कंकड़ीली | प्राचीन चट्टानें, बौद्ध धर्म |
उत्तरी एवं दक्षिणी मैदानी क्षेत्र — विस्तृत विवेचन
गंगा नदी बिहार को दो मुख्य भागों में बाँटती है — उत्तर बिहार का मैदान जो हिमालयी नदियों से पोषित है और दक्षिण बिहार का मैदान जो प्रायद्वीपीय नदियों से निर्मित है।
उत्तर बिहार का मैदान हिमालय की तलहटी से लेकर गंगा नदी तक फैला है। इस क्षेत्र की समुद्र तल से ऊँचाई 75 मीटर से कम है। यह क्षेत्र तीव्र ढाल वाला है और उत्तर से दक्षिण की ओर क्रमशः ढलता है।
उपखण्ड
- भाबर पट्टी — हिमालय की तलहटी के पास। यहाँ नदियाँ भूमिगत हो जाती हैं। छोटे-छोटे कंकड़-पत्थर की मिट्टी।
- तराई पट्टी — भाबर के दक्षिण में। दलदली, घने जंगल, जहाँ भूमिगत नदियाँ फिर से प्रकट होती हैं। वाल्मीकि नगर (पश्चिम चंपारण) प्रमुख उदाहरण।
- नवीन जलोढ़ मैदान — तराई के दक्षिण में, सर्वाधिक उपजाऊ। खादर मिट्टी (नवीन जलोढ़)। बाढ़ का क्षेत्र।
- पुरानी जलोढ़ पट्टी — थोड़ा ऊँचा क्षेत्र। बांगर मिट्टी। बाढ़ का प्रभाव कम।
दक्षिण बिहार का मैदान गंगा के दक्षिण तट से लेकर छोटानागपुर पठार (झारखण्ड) की उत्तरी सीमा तक विस्तृत है। यह उत्तर बिहार की तुलना में अपेक्षाकृत ऊँचा, कम उपजाऊ और कम बाढ़ग्रस्त है।
मुख्य विशेषताएँ
- ऊँचाई — समुद्र तल से 50-100 मीटर। उत्तरी मैदान से थोड़ा ऊँचा।
- मिट्टी — पुरानी जलोढ़ (बांगर) तथा दक्षिणी सीमा पर लाल-पीली मिट्टी।
- बीहड़ भूमि (Ravines) — गया और जहानाबाद जिलों में फल्गु नदी के किनारे बीहड़ भूमि पाई जाती है।
- कृषि — रबी फसलें प्रमुख — गेहूँ, चना, मसूर। सिंचाई पर अधिक निर्भरता।
- प्रमुख जिले — पटना, गया, नालंदा, जहानाबाद, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर।
⚖️ उत्तर बिहार बनाम दक्षिण बिहार — तुलना
| तत्त्व | उत्तर बिहार | दक्षिण बिहार |
|---|---|---|
| नदियों का स्रोत | हिमालय (हिमनदी) | प्रायद्वीपीय पठार (वर्षाजल) |
| मिट्टी | नवीन जलोढ़ (खादर) | पुरानी जलोढ़ (बांगर) |
| बाढ़ का खतरा | बहुत अधिक | कम |
| भूमि की उर्वरता | अत्यधिक उपजाऊ | अपेक्षाकृत कम उपजाऊ |
| प्रमुख फसलें | धान, जूट, मकई | गेहूँ, चना, मसूर |
| सिंचाई | नहर व नदियाँ | नलकूप, सोन नहर |
दक्षिणी पठार एवं पहाड़ी क्षेत्र
बिहार के दक्षिण-पश्चिम में कैमूर और रोहतास जिलों में विंध्य-कैमूर पर्वत श्रेणी स्थित है जो बिहार का एकमात्र पर्वतीय क्षेत्र है।
झारखण्ड के अलग होने से पहले बिहार में छोटानागपुर पठार का विशाल भाग था। वर्तमान बिहार में पठारी एवं पहाड़ी क्षेत्र मुख्यतः दक्षिण-पश्चिमी कोने में सीमित है। इस क्षेत्र में विंध्य शैल क्रम की पुरानी चट्टानें पाई जाती हैं।
कैमूर पठार
दक्षिण-पश्चिम बिहारराजगीर-गया पहाड़ियाँ
मध्य-दक्षिण बिहार🏔️ बिहार की प्रमुख पहाड़ियाँ एवं उनकी स्थिति
| पहाड़ी/श्रेणी | जिला | अधिकतम ऊँचाई | शैल प्रकार | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|---|
| सोमेश्वर श्रेणी | पश्चिम चंपारण | ~880 मीटर | हिमालयी शैल | बिहार का सर्वोच्च बिंदु |
| कैमूर श्रेणी | कैमूर, रोहतास | ~300-500 मीटर | विंध्य शैल | जलप्रपात — तुत्लाबांध, करकट |
| राजगीर पहाड़ियाँ | नालंदा | ~100-300 मीटर | प्राचीन आग्नेय | पाँच पर्वत — बौद्ध तीर्थ |
| गया पहाड़ियाँ | गया | ~100-250 मीटर | ग्रेनाइट-नीस | बोधगया — बौद्ध तीर्थ |
| खड़गपुर पहाड़ियाँ | मुंगेर, जमुई | ~200-300 मीटर | आर्कियन शैल | वन सम्पदा, जड़ी-बूटी |
अपवाह तंत्र एवं प्रमुख नदियाँ
बिहार का अपवाह तंत्र गंगा नदी पर केंद्रित है। गंगा पूर्व दिशा में बहते हुए बिहार के मध्य से होकर गुजरती है और उत्तर व दक्षिण की नदियाँ गंगा में समाहित होती हैं।
🔵 गंगा की उत्तरी सहायक नदियाँ (हिमालयी)
- घाघरा (सरयू) — बिहार के उत्तर-पश्चिम में। UP-Bihar सीमा।
- गंडक — नेपाल से, पश्चिम चंपारण। त्रिवेणी नहर इसी पर।
- बूढ़ी गंडक — मुजफ्फरपुर होकर हाजीपुर में गंगा में मिलती है।
- बागमती — नेपाल से। सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर।
- कमला-बलान — नेपाल से। दरभंगा-मधुबनी।
- कोसी — बिहार का शोक। 7 धाराओं का संगम (सप्तकोसी)। सुपौल।
- महानंदा — सिक्किम/दार्जिलिंग से। किशनगंज।
🟠 गंगा की दक्षिणी सहायक नदियाँ (प्रायद्वीपीय)
- सोन — बिहार की सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक। मध्यप्रदेश से। इंद्रपुरी बैराज।
- पुनपुन — पलामू (झारखण्ड) से। पटना के पास गंगा में।
- फल्गु (निरंजना) — गया जिले में। बौद्ध धर्म का महत्त्व।
- मोरहर — नवादा जिले में।
- किऊल — मुंगेर के पास गंगा में।
- अजय — जमुई-बाँका जिले में।
दक्षिणी: सोन → पुनपुन → फल्गु → किऊल → अजय
याद करें: “घ-ग-बू-ब-क-को-म” (उत्तर) और “सो-पु-फ-कि-अ” (दक्षिण)
📝 Interactive MCQ अभ्यास
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