बिहार का भूगर्भीय कालक्रम — नवीन युग
Cenozoic Era से लेकर Holocene तक — बिहार का आधुनिक भूगर्भीय स्वरूप, जलोढ़ मैदान, भूकंप एवं नदी-भू-आकृति विज्ञान
परिचय — नवीन युग और बिहार का आधुनिक भूगर्भीय स्वरूप
बिहार का भूगर्भीय कालक्रम — नवीन युग (Navin Yug / Cenozoic Era) BPSC परीक्षा में भूगोल के सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। 66 मिलियन वर्ष पूर्व (Ma) से वर्तमान तक का यह काल बिहार के वर्तमान स्वरूप — उसके विशाल जलोढ़ मैदान, नदी-तंत्र, उपजाऊ मिट्टी और भूकंप-संवेदनशीलता — को परिभाषित करता है।
नवीन युग को भूविज्ञान में Cenozoic Era कहा जाता है। इस युग में हिमालय पर्वत का उत्थान हुआ, टेथिस सागर लुप्त हुआ और उसके स्थान पर गंगा-सिंधु का विशाल जलोढ़ मैदान (Indo-Gangetic Plain) बना। बिहार इसी मैदान का हृदय-स्थल है। राज्य की लगभग 94% भूमि नवीन युग की जलोढ़ मिट्टी से ढकी हुई है।
Cenozoic Era का काल-विभाजन — Periods, Epochs एवं बिहार संबंध
Cenozoic Era को वैश्विक स्तर पर तीन Periods और उनके अंतर्गत कई Epochs में विभाजित किया गया है। बिहार के भूगर्भीय विकास को समझने के लिए यह विभाजन आवश्यक है।
| Period | Epoch | समयावधि (Ma) | बिहार से संबंध |
|---|---|---|---|
| Paleogene | Paleocene | 66–56 | टेथिस सागर का क्रमिक संकुचन; भारतीय प्लेट यूरेशिया की ओर |
| Eocene / Oligocene | 56–23 | भारतीय प्लेट-यूरेशियन प्लेट टक्कर; हिमालय का प्रारंभिक उत्थान | |
| Neogene | Miocene | 23–5.3 | हिमालय तीव्र उत्थान; Siwalik श्रेणी का निर्माण; गंगा मैदान का प्रारंभिक जमाव |
| Pliocene | 5.3–2.6 | Siwalik Group की ऊपरी परतें; नदियों का वर्तमान स्वरूप निर्माण | |
| Quaternary | Pleistocene | 2.6–0.011 | हिमयुग; बाँगर (पुरानी जलोढ़) का निर्माण; नदियों में बड़े बदलाव |
| Holocene | 0.011–वर्तमान | खादर (नई जलोढ़); कृषि सभ्यता; बिहार का वर्तमान मैदान |
🌐 Siwalik Group — बिहार का एकमात्र Neogene शैल
Siwalik Group (शिवालिक समूह) Neogene काल (~15–2.6 Ma) में हिमालय की तलहटी में जमा हुई तलछटी शैलें हैं। बिहार में ये पश्चिमी चंपारण जिले में वाल्मीकि नगर के आस-पास मिलती हैं। Siwalik की तीन उप-श्रेणियाँ हैं —
हिमालय उत्थान — बिहार की भूगर्भीय नियति का निर्धारक
बिहार की वर्तमान भौगोलिक संरचना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारण हिमालय का उत्थान है। लगभग 50 Ma पूर्व भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट की टक्कर से हिमालय का जन्म हुआ। इस प्रक्रिया ने टेथिस सागर को समाप्त किया और बिहार के मैदान को जन्म दिया।
🔬 Indo-Gangetic Foredeep Basin — बिहार की भूगर्भीय स्थिति
बिहार Indo-Gangetic Foredeep Basin (IGFB) के मध्य-पूर्वी भाग में स्थित है। यह एक असममित अग्रवर्ती बेसिन (Asymmetric Foreland Basin) है जो हिमालय के भार से दब गया और जिसमें हजारों मीटर मोटी जलोढ़ की परतें जमा हो गईं। बिहार के मैदान के नीचे जलोढ़ की गहराई 1000–6000 मीटर तक है।
| क्षेत्र | जलोढ़ गहराई | भूगर्भीय महत्व |
|---|---|---|
| उत्तर बिहार (तराई) | 3000–6000 मी. | सर्वाधिक मोटी जलोढ़; भूजल का विशाल भंडार |
| मध्य गंगा मैदान | 1500–3000 मी. | खादर और बाँगर का मिश्रण; अत्यंत उपजाऊ |
| दक्षिण बिहार (पठार-मैदान संधि) | 200–800 मी. | पतली जलोढ़ + प्राचीन शैलें; जल-संधारण कम |
जलोढ़ मैदान — बिहार की नवीन युग की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूगर्भीय देन
बिहार का जलोढ़ मैदान (Alluvial Plain) नवीन युग की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूगर्भीय संरचना है। यह हिमालय से निकलने वाली नदियों — गंगा, गंडक, कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला-बलान — द्वारा लाए गए अवसादों से बना है।
🗺️ बाँगर और खादर — दो प्रमुख प्रकार
📊 जलोढ़ की परतों की संरचना (Stratigraphy)
बिहार के मैदान की भूगर्भीय परत-संरचना ऊपर से नीचे निम्नानुसार है —
| ↓ परत (ऊपर → नीचे) | प्रकार | गहराई | महत्व |
|---|---|---|---|
| 1. Holocene Alluvium | खादर — महीन बालू, सिल्ट, मिट्टी | 0–30 मी. | कृषि भूमि, उथला भूजल |
| 2. Upper Pleistocene | बाँगर — कंकर, मध्यम कण | 30–150 मी. | भूजल का प्रमुख स्रोत (Aquifer) |
| 3. Middle Pleistocene | मोटे बालू + बजरी | 150–500 मी. | गहरे नलकूप; Arsenic-free zone |
| 4. Lower Pleistocene / Siwalik | कंग्लोमेरेट, सख्त बलुआ पत्थर | 500–2000 मी. | तेल-गैस अनुसंधान (ONGC) |
| 5. Basement (Proterozoic) | विंध्यन/धारवाड़ शैलें | 2000–6000 मी. | भूकंप की उत्पत्ति; Basement Fault |
Pleistocene एवं Holocene — बिहार का निकट-अतीत का भूगर्भ
Quaternary Period के दो Epochs — Pleistocene और Holocene — बिहार के वर्तमान स्वरूप के प्रत्यक्ष निर्माता हैं। इस काल में हिमयुग (Ice Age), अंतर-हिमयुग (Interglacial), मानसून का विकास और मानव सभ्यता का उदय हुआ।
Pleistocene काल में पृथ्वी पर 20 से अधिक हिमयुग (Glacial Cycles) आए। हालाँकि बिहार का क्षेत्र स्वयं हिमाच्छादित नहीं हुआ, परंतु हिमालय के हिमनदों (Glaciers) ने नदियों के प्रवाह और अवसाद-भार को व्यापक रूप से प्रभावित किया।
- Glacial Period: हिमनद फैले → नदियों में जल और अवसाद का प्रवाह बढ़ा → मोटे बजरी और बालू की परतें बिहार के मैदान में जमा हुईं → बाँगर का निर्माण
- Interglacial Period: गर्म काल → हिमनद पिघले → नदियाँ अपने पुराने अवसाद काटने लगीं → River Terraces (नदी सोपान) का निर्माण
- Kosi Fan: Pleistocene-Holocene सीमा पर कोसी नदी ने विशाल Alluvial Fan (~11,700 km²) बनाया — यह दुनिया के सबसे बड़े alluvial fans में से एक है।
- Sea Level Changes: अंतिम हिम-अधिकतम (~21,000 BP) में समुद्र स्तर ~120 मी. नीचे था — गंगा का विस्तार बंगाल की खाड़ी तक बढ़ गया था।
Holocene (जिसे अनौपचारिक रूप से “Anthropocene” भी कहा जाने लगा है) में अंतिम हिमयुग समाप्त हुआ, तापमान बढ़ा और भारतीय मानसून सक्रिय हुआ। बिहार के मैदान में खादर जलोढ़ जमा होती रही।
- ~8000–6000 BP (Holocene Optimum): जलवायु वर्तमान से अधिक आर्द्र थी। गंगा के मैदान में घने वन थे। मगध क्षेत्र में प्रारंभिक मानव बस्तियाँ।
- नदियों का Avulsion: Holocene में कोसी, गंडक, बागमती ने बार-बार अपना मार्ग बदला (Avulsion) — इससे उत्तर बिहार में नई खादर भूमि बनती रही।
- Oxbow Lakes (गोखुर झीलें): नदियों के पुराने Meanders से बने। दरभंगा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया में अनेक गोखुर झीलें हैं — ये Holocene भूगोल की देन हैं।
- Chars और Diara: गंगा के बीच स्थित रेती-द्वीप (chars) और बाढ़-मैदान (diara) — Holocene अवसादन की सक्रिय प्रक्रिया के परिणाम।
⚖️ Pleistocene बनाम Holocene — तुलनात्मक विश्लेषण
| पहलू | Pleistocene | Holocene |
|---|---|---|
| समयावधि | 2.6 Ma – 11,700 BP | 11,700 BP – वर्तमान |
| जलोढ़ प्रकार | बाँगर (पुरानी, कठोर) | खादर (नई, मुलायम) |
| अवसाद कण | मोटे बालू, बजरी, कंकर | महीन सिल्ट, क्ले, बालू |
| उर्वरता | कम (कंकर युक्त) | अधिक (नवीन पोषक) |
| बिहार स्थान | गंगा के दक्षिण, ऊँचे टेरेस | उत्तर बिहार, नदी तट |
| भूजल | Aquifer (गहरा) | उथला + Arsenic-prone |
नदी-तंत्र एवं भू-आकृति विज्ञान — नवीन युग की जीवित प्रक्रियाएँ
बिहार की नदियाँ नवीन युग (विशेषतः Holocene) की सक्रिय भूगर्भीय प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। ये नदियाँ निरंतर अवसाद जमा करती और काटती रहती हैं, जिससे बिहार का मैदानी स्वरूप सदा परिवर्तनशील बना रहता है।
गंगा, बागमती, कमला जैसी नदियाँ मैदान में धीमी गति से बहती हैं → Meanders बनाती हैं। पुराने Meanders छूट जाने पर Oxbow Lakes (गोखुर) बनती हैं। दरभंगा में 100+ गोखुर झीलें हैं।
कोसी नदी पिछले 200 वर्षों में ~150 km पश्चिम खिसक गई है। इसे “बिहार का शोक” (Sorrow of Bihar) कहते हैं। यह Holocene avulsion का जीवित उदाहरण है।
हिमालय से मैदान में उतरते समय नदियाँ Alluvial Fans बनाती हैं। Kosi Fan दुनिया के सबसे बड़े fans में से एक (~11,700 km²)। यहीं “दियारा भूमि” बनती है।
उत्तर बिहार में वार्षिक बाढ़ — Holocene अवसादन की सक्रिय प्रक्रिया। हर बाढ़ नई उपजाऊ मिट्टी (silt) जमा करती है। बाढ़ = विनाश + उर्वरता — दोनों एक साथ।
Pleistocene-Holocene सीमा पर नदियों ने अपनी पुरानी घाटियाँ काटीं → River Terraces बने। पटना के दक्षिण में गंगा के किनारे इस प्रकार के सोपान देखे जा सकते हैं।
गंगा के मध्य में जमा बालू के द्वीप (Chars) — विशेषतः भागलपुर, कटिहार में। ये नवीनतम Holocene अवसादन के उदाहरण हैं। Chars पर बसी आबादी बाढ़ की सबसे बड़ी शिकार होती है।
🗺️ बिहार की प्रमुख नदियाँ — भू-आकृति महत्व
| नदी | उद्गम | Holocene प्रक्रिया | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| गंगा | गंगोत्री हिमनद | Meandering, Chars निर्माण | बिहार में 445 km; मुख्य जलोढ़ अक्ष |
| कोसी | तिब्बत-नेपाल | Avulsion, विशाल Fan | बिहार का शोक; ~150 km पश्चिम खिसकी |
| गंडक | नेपाल (धौलागिरी) | Flood Plain, Meandering | वाल्मीकि-नगर Barrage; Siwalik काटती है |
| सोन | अमरकंटक (MP) | Braided channel, कम अवसाद | Vindhyan पठार से आती है; मोटे बालू लाती है |
| बागमती | नेपाल (काठमांडू) | Oxbow lakes, Avulsion | दरभंगा-मुजफ्फरपुर में बाढ़ का मुख्य कारण |
भूकंप, टेक्टोनिक्स एवं आपदा प्रबंधन — नवीन युग की चुनौती
बिहार भारत के सर्वाधिक भूकंप-संवेदनशील राज्यों में से एक है। इसका कारण नवीन युग की टेक्टोनिक गतिविधियाँ हैं। 1934 का बिहार-नेपाल भूकंप (Magnitude 8.0) भारतीय इतिहास के सर्वाधिक विनाशकारी भूकंपों में से एक था।
⚡ प्रमुख भूकंप घटनाएँ — बिहार
🔍 Liquefaction — एक विशेष भूगर्भीय खतरा
Liquefaction (मृदा-द्रवण) वह घटना है जब भूकंप के दौरान जलोढ़ मिट्टी की महीन परतें (saturated sand/silt) तरल जैसा व्यवहार करने लगती हैं। उत्तर बिहार की खादर मिट्टी Liquefaction के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। 1934 के भूकंप में मुजफ्फरपुर और दरभंगा में व्यापक Liquefaction देखी गई थी — जमीन से पानी और रेत फव्वारे की तरह निकले थे।
- सक्रिय Thrust Faults: Main Boundary Thrust (MBT), Main Frontal Thrust (MFT) — हिमालय के नजदीक होने से उत्तर बिहार को सर्वाधिक खतरा
- मोटी जलोढ़ परत: भूकंपीय तरंगों का Amplification होता है — ठोस चट्टान की तुलना में जलोढ़ में कम्पन 5-10 गुना अधिक होता है
- Liquefaction: खादर की उथली saturated परतें — नगरीय क्षेत्रों के लिए भयावह खतरा
- Dense Population: बिहार का जनघनत्व (~1100/km²) — छोटे भूकंप में भी भारी क्षति संभव
मृदा, खनिज एवं आर्थिक महत्व — नवीन युग की आर्थिक विरासत
नवीन युग (Cenozoic) की भूगर्भीय प्रक्रियाओं ने बिहार को दो प्रकार की आर्थिक संपदा दी है — उपजाऊ जलोढ़ मृदा (कृषि का आधार) और सीमित किंतु महत्वपूर्ण खनिज भंडार।
🌱 बिहार की जलोढ़ मृदाएँ — प्रकार एवं वितरण
| मृदा प्रकार | भूगर्भीय काल | स्थान | कृषि उपयोग |
|---|---|---|---|
| खादर (Khadar) | Holocene | उत्तर बिहार, नदी बाढ़ क्षेत्र | धान, गेहूँ, गन्ना — सर्वाधिक उत्पादक |
| बाँगर (Bangar) | Pleistocene | गंगा के दक्षिण, ऊँचे भाग | गेहूँ, दलहन; सिंचाई आवश्यक |
| Terai मृदा | Recent Holocene | पश्चिमी-पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी | घना वन + धान; उच्च नमी |
| लाल-पीली मृदा | Weathered Proterozoic | गया, नवादा, रोहतास दक्षिण | दलहन, तिलहन; कम उर्वर |
| दियारा मृदा | Active Holocene | गंगा-कोसी-गंडक के किनारे | मकई, तरबूज, सब्जी; बाढ़-नवीनीकृत |
⛏️ नवीन युग से प्राप्त खनिज एवं संसाधन
Pleistocene जलोढ़ के Aquifers बिहार के ~80% पेयजल का स्रोत हैं। उत्तर बिहार में भूजल स्तर उथला (2–5 मी.) है — Holocene खादर की देन।
नदियों से प्राप्त बालू बिहार का प्रमुख निर्माण-सामग्री स्रोत है। गंगा, कोसी, गंडक से वार्षिक करोड़ों टन बालू निकाली जाती है। अत्यधिक खनन एक पर्यावरणीय समस्या बन चुकी है।
ONGC ने गंगा मैदान के गहरे जलोढ़ (>2000 मी.) में हाइड्रोकार्बन की संभावना देखी है। सोन घाटी और उत्तर बिहार में सीमित अन्वेषण हुआ है — अभी तक व्यावसायिक उत्पादन नहीं।
Siwalik Weathering से प्राप्त Kaolin/China Clay — पश्चिमी चंपारण में मिलती है। सिरेमिक और कागज उद्योग में उपयोगी।
- धान उत्पादन: खादर मिट्टी की नमी-धारण क्षमता → बिहार भारत का 5वाँ सबसे बड़ा धान उत्पादक
- गेहूँ-पट्टी: बाँगर मिट्टी की जल-निकासी → गया, पटना, नालंदा में उच्च गेहूँ उत्पादन
- मखाना (Foxnut): दरभंगा-मिथिला की गोखुर झीलें (Holocene Oxbow) → विश्व उत्पादन का ~90%
- लीची: मुजफ्फरपुर का हल्का बाँगर-खादर मिश्रण → शाही लीची उत्पादन का प्रमुख केंद्र


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