बिहार का नदी तंत्र एवं भूगर्भीय संरचना
परिचय एवं भूगर्भीय पृष्ठभूमि
बिहार का नदी तंत्र और भूगर्भीय संरचना BPSC परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले भूगोल विषयों में से एक है। बिहार एक नदी-बहुल राज्य है जहाँ 28 से अधिक प्रमुख नदियाँ प्रवाहित होती हैं और ये नदियाँ राज्य की कृषि, संस्कृति, एवं अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।
| विशेषता | उत्तरी बिहार | दक्षिणी बिहार |
|---|---|---|
| नदियों का उद्गम | हिमालय एवं तराई | छोटानागपुर पठार |
| नदी प्रकार | हिमालयी — बारहमासी | प्रायद्वीपीय — वर्षाकालीन |
| अवसाद भार | अत्यधिक — बाढ़ बहुल | कम — कठोर शैल क्षेत्र |
| भूगर्भीय संरचना | जलोढ़ मैदान (Alluvial) | आग्नेय व रूपांतरित शैल |
| मिट्टी | नवीन जलोढ़ (Khadar) | पुरानी जलोढ़ व लाल मिट्टी |
बिहार की प्रमुख नदी प्रणालियाँ
बिहार की समस्त नदियाँ अंततः गंगा नदी में मिलती हैं। गंगा बिहार की जीवन-रेखा है। इसे तीन वृहत् प्रणालियों में बाँटा जाता है — (1) गंगा मुख्य तंत्र, (2) उत्तरी सहायक नदियाँ, और (3) दक्षिणी सहायक नदियाँ।
गंगा नदी — बिहार में प्रवाह
गंगा बिहार में बक्सर जिले से प्रवेश करती है और कहलगाँव (भागलपुर) के पास राज्य छोड़ती है। बिहार में इसकी कुल लंबाई लगभग 445 किमी है। गंगा के उत्तरी तट पर पटना, हाजीपुर, छपरा और दक्षिणी तट पर आरा, बक्सर, भोजपुर स्थित हैं।
| # | नदी | उद्गम | गंगा में संगम (स्थान) | लंबाई (बिहार में) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | गंगा | गंगोत्री हिमनद | बंगाल की खाड़ी | 445 किमी |
| 2 | कोसी | गोसाईं धाम, नेपाल | कुरसेला (कटिहार) | 260 किमी |
| 3 | गंडक | मुस्ताङ (नेपाल) | हाजीपुर (सोनपुर) | 260 किमी |
| 4 | घाघरा | मापचाचुंग हिमनद | छपरा (सारण) | 83 किमी |
| 5 | सोन | अमरकंटक (मध्यप्रदेश) | दीघा-आरा (पटना) | 202 किमी |
| 6 | बागमती | महाभारत श्रेणी, नेपाल | खागड़िया के पास | 394 किमी |
| 7 | महानंदा | दार्जिलिंग पहाड़ियाँ | मनिहारी (कटिहार) | ~120 किमी |
| 8 | पुनपुन | पलामू पठार (झारखंड) | फतुहा (पटना) | ~170 किमी |
उत्तरी बिहार की प्रमुख नदियाँ
उत्तरी बिहार की नदियाँ हिमालय से उत्पन्न होती हैं। इनमें हिमनद-पोषित जल होता है, इसलिए ये वर्ष भर प्रवाहित रहती हैं। ये नदियाँ भारी मात्रा में अवसाद (Silt) लाती हैं जो बिहार के मैदानों को उपजाऊ बनाती है।
कोसी को “बिहार का शोक” (Sorrow of Bihar) कहा जाता है। इसका कारण इसका बार-बार मार्ग बदलना और विनाशकारी बाढ़ लाना है। पिछले 200 वर्षों में कोसी ने अपना मार्ग लगभग 120 किमी पश्चिम की ओर स्थानांतरित किया है।
- उद्गम: नेपाल में गोसाईं धाम (7,315 मी.) के पास — सात धाराओं से मिलकर बनती है।
- सहायक नदियाँ: सनकोसी, तामुर, अरुण — इन तीन प्रमुख धाराओं का संगम।
- बिहार प्रवेश: सुपौल जिले के पास भारत में प्रवेश।
- संगम: कुरसेला, कटिहार जिले में गंगा से मिलती है।
- बाढ़ 2008: कुसहा तटबंध टूटने से भीषण बाढ़ — 3.3 मिलियन लोग प्रभावित।
- कोसी परियोजना: भारत-नेपाल संयुक्त परियोजना — हनुमाननगर बाँध।
गंडक को नेपाल में नारायणी और तिब्बत में साप्तगंडकी कहते हैं। यह नेपाल के मुस्ताङ जिले में उत्पन्न होती है। बिहार में यह पश्चिम चंपारण से प्रवेश करती है।
- संगम: सोनपुर (हाजीपुर) में गंगा से — यहाँ प्रसिद्ध सोनपुर मेला लगता है।
- गंडक बैराज: वाल्मीकिनगर में निर्मित — सिंचाई एवं विद्युत हेतु।
- वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व: इसके तट पर स्थित — बिहार का एकमात्र Tiger Reserve।
- सहायक: बूढ़ी गंडक, तिलावे, सिकरहना।
घाघरा को उत्तर प्रदेश में सरयू कहा जाता है। यह मापचाचुंग हिमनद (तिब्बत) से निकलती है। बिहार में यह केवल सारण जिले की उत्तरी सीमा बनाती है और छपरा के निकट गंगा में मिलती है।
- महत्व: उत्तर प्रदेश-बिहार की सीमा बनाती है।
- बिहार में लंबाई: मात्र ~83 किमी — सीमा नदी।
- धार्मिक महत्व: हिंदू धर्म में पवित्र — अयोध्या इसी के तट पर।
बागमती नेपाल की महाभारत श्रेणी से निकलती है। काठमांडू इसी नदी के तट पर बसा है। यह बिहार में सीतामढ़ी जिले से प्रवेश करती है और खागड़िया जिले में गंगा से मिलती है। कमला-बलान भी नेपाल से आती है और दरभंगा-मधुबनी में बाढ़ के लिए कुख्यात है।
- बागमती का महत्व: पशुपतिनाथ मंदिर (काठमांडू) इसी के किनारे।
- बाढ़ क्षेत्र: दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी सर्वाधिक प्रभावित।
- कमला बाँध: जयनगर (मधुबनी) में — नेपाल के साथ विवादित।
- महानंदा: दार्जिलिंग से — पूर्णिया, कटिहार में बहती है।
दक्षिणी बिहार की प्रमुख नदियाँ
दक्षिणी बिहार की नदियाँ छोटानागपुर पठार से निकलती हैं। ये प्रायद्वीपीय नदियाँ हैं — वर्षाकाल में जलपूर्ण और शुष्क ऋतु में प्रायः सूख जाती हैं। इनके जलग्रहण क्षेत्र में कठोर आग्नेय एवं रूपांतरित शैल हैं, इसलिए ये अपरदन की दृष्टि से भिन्न हैं।
सोन नदी
अमरकंटक → दीघा (पटना)पुनपुन नदी
पलामू → फतुहा (पटना)फल्गू नदी (निरंजना)
छोटानागपुर → गयाकर्मनाशा नदी
कैमूर पठार → कैमूर जिलाअपरदन एवं निक्षेपण प्रक्रियाएँ
नदी अपरदन (River Erosion) और निक्षेपण (Deposition) बिहार की भूगर्भीय संरचना को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। BPSC Mains में इन प्रक्रियाओं का भौगोलिक व कृषि महत्व के संदर्भ में विश्लेषण करने की आवश्यकता होती है।
नदी अपरदन (River Erosion)
नदी अपरदन वह प्रक्रिया है जिसमें नदी अपने किनारों और तल को काटती है। बिहार में अपरदन की चार प्रमुख विधियाँ हैं:
नदी में बहने वाले पत्थर, बालू एवं कंकड़ नदी-तल को रेगमाल की तरह घिसते हैं। इससे Potholes (मंथ-कुंड) बनते हैं। दक्षिण बिहार की चट्टानी नदियों में विशेष रूप से दिखता है।
तीव्र गति से बहता जल शैलों में दरारें बनाता है। वायु दाब में अंतर से शैल टूटते हैं। यह उत्तरी बिहार की बाढ़ग्रस्त नदियों में प्रमुख है।
नदी का जल चूना-पत्थर और अन्य घुलनशील शैलों को घोल लेता है। कैमूर पठार क्षेत्र में यह प्रक्रिया क्रियाशील है।
नदी में बहते पत्थर आपस में टकराकर छोटे-छोटे होते जाते हैं। इससे महीन बालू और सिल्ट बनता है जो अंततः निक्षेपित होता है।
नदी निक्षेपण (River Deposition) एवं स्थलरूप
जब नदी की गति कम होती है तो वह अपना भार (अवसाद) जमा करने लगती है। बिहार के विशाल जलोढ़ मैदान इसी निक्षेपण का परिणाम हैं। प्रमुख निक्षेपण स्थलरूप:
बिहार की भूगर्भीय संरचना
बिहार की भूगर्भीय संरचना तीन स्पष्ट इकाइयों में विभाजित है — उत्तरी जलोढ़ मैदान, मध्य गंगा मैदान, और दक्षिण का पठारी क्षेत्र। ये इकाइयाँ भिन्न-भिन्न भूगर्भीय काल की शैलों से निर्मित हैं।
| भूगर्भीय इकाई | शैल प्रकार | आयु | क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| उत्तरी मैदान | नवीन जलोढ़ (Khadar) | Holocene (10,000 वर्ष से) | गंगा के उत्तर का क्षेत्र | अत्यधिक उपजाऊ, बाढ़ग्रस्त |
| मध्य गंगा तल | पुरानी जलोढ़ (Bhangar) | Pleistocene | गंगा के दोनों तट | ऊँचाई पर, अपेक्षाकृत सुरक्षित |
| दक्षिणी पठार | ग्रेनाइट, नीस, शिस्ट | प्रीकैम्ब्रियन | गया, रोहतास, कैमूर | कठोर शैल, खनिज समृद्ध |
| कैमूर पठार | विंध्यन बलुआ पत्थर | प्रीकैम्ब्रियन-कैम्ब्रियन | रोहतास, कैमूर, बक्सर | चूना पत्थर, सीमेंट उद्योग |
| राजमहल पहाड़ियाँ | बेसाल्ट (ट्रैप) | Jurassic-Cretaceous | भागलपुर के पास | ज्वालामुखीय उद्गम |
जलोढ़ मिट्टी — दो प्रकार
खनिज संसाधन — दक्षिणी बिहार
बिहार का दक्षिणी पठारी क्षेत्र (मुख्यतः अब झारखंड में) खनिज संपदा से भरपूर था। वर्तमान बिहार में भी कुछ खनिज क्षेत्र हैं:
- चूना पत्थर (Limestone): रोहतास, कैमूर — सीमेंट उद्योग का आधार (डालमियानगर, बंजारी)।
- पाइराइट: रोहतास — उर्वरक उद्योग में उपयोगी।
- अभ्रक (Mica): गया, नवादा — विद्युत उद्योग में उपयोग।
- फेल्सपार: गया जिला — काँच उद्योग में उपयोग।
- सिलिका बालू: भागलपुर — काँच एवं बालू उद्योग।
- तांबा: सिंहभूम (अब झारखंड) — बिहार से अलग होने के बाद।
बाढ़ समस्या एवं नदी मार्ग परिवर्तन
बिहार भारत का सर्वाधिक बाढ़ग्रस्त राज्य है। राज्य का लगभग 73.06 लाख हेक्टेयर (राज्य क्षेत्र का ~76%) बाढ़ प्रभावित है। राष्ट्रीय बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का 17.2% बिहार में है।
बाढ़ के कारण — भूगर्भीय एवं नदी संरचना दृष्टि से
उत्तरी नदियाँ तीव्र ढाल से मैदान में आती हैं — अचानक वेग कम होने से भारी अवसाद जमा होता है, नदी उथली होती है और बाढ़ फैलती है।
जून-सितंबर में नेपाल और हिमालय में अत्यधिक वर्षा होती है। एक साथ सभी नदियाँ उफनती हैं। गंगा की क्षमता से अधिक जल आने पर बाढ़।
Siltation से नदी तल ऊँचा होता जा रहा है। तटबंध के बीच नदी-तल अब आसपास के गाँवों से ऊँचा हो गया है — Perched Rivers की समस्या।
कोसी ने 200 वर्षों में 120 किमी पश्चिम को खिसक गई है। गंडक और बागमती भी मार्ग बदलती रहती हैं। इससे नए क्षेत्र बाढ़ग्रस्त होते हैं।
तटबंध नीति एवं विवाद
बिहार में 3,400 किमी से अधिक तटबंध बनाए गए हैं — फिर भी बाढ़ नियंत्रित नहीं हो सकी। इसके कारण:
- Siltation: तटबंध के भीतर नदी तल ऊँचा होता गया — पानी बाहर जाने का रास्ता नहीं।
- Internal Drainage: तटबंध के बाहर का पानी भी वापस नहीं जाता — जलजमाव (Waterlogging) की समस्या।
- तटबंध टूटना: 2008 कुसहा, 2017 बेतिया — बड़ी आपदाएँ।
- भूमि अधिग्रहण: नदी मार्ग परिवर्तन से हजारों गाँव विस्थापन के खतरे में।
काँवर झील — पारिस्थितिकी तंत्र
बेगूसराय जिले में स्थित काँवर झील एशिया की सबसे बड़ी ताजे पानी की Ox-Bow Lake है। यह गंडक के पुराने मार्ग का अवशेष है। यह Ramsar Site घोषित है और प्रवासी पक्षियों का शीतकालीन आश्रय है।


Leave a Reply