नालंदा — विश्व की प्राचीनतम विश्वविद्यालय नगरी
परिचय एवं भौगोलिक स्थिति
नालंदा बिहार राज्य के नालंदा जिले में स्थित एक विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक नगर है, जो BPSC परीक्षा की दृष्टि से बिहार की धरोहर, शिक्षा एवं पर्यटन का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यह विश्व के प्राचीनतम आवासीय विश्वविद्यालय का स्थल है जिसे 2016 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित किया गया।
🗺️ भौगोलिक अवस्थिति
नालंदा पटना से लगभग 90 किमी दक्षिण-पूर्व में और राजगीर से 12 किमी उत्तर में स्थित है। यह नगर गंगा के मैदान में छोटानागपुर पठार की उत्तरी पहाड़ियों के निकट अवस्थित है। नालंदा जिले का मुख्यालय बिहारशरीफ है, जबकि नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष वर्तमान नालंदा गाँव (बड़गाँव)** के समीप हैं।
नालंदा विश्वविद्यालय — इतिहास एवं स्थापना
नालंदा विश्वविद्यालय 5वीं सदी CE में गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम के शासनकाल में स्थापित हुआ था। यह विश्व का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था जहाँ छात्र, शिक्षक एवं पुस्तकालय एक ही परिसर में रहते थे।
नालंदा का स्वर्णकाल — शैक्षिक वैभव
अपने उत्कर्ष काल में नालंदा केवल बौद्ध धर्म का केंद्र नहीं था — यह व्याकरण, तर्कशास्त्र, चिकित्साशास्त्र, गणित, खगोलशास्त्र और दर्शनशास्त्र की विश्व की सर्वोच्च शिक्षा पीठ था।
🏫 नालंदा विश्वविद्यालय की विशेषताएँ
👨🏫 नालंदा के प्रमुख विद्वान
नागार्जुन
2री सदी CEआर्यभट्ट
476–550 CEधर्मकीर्ति
7वीं सदी CEशीलभद्र
7वीं सदी CE📊 नालंदा विश्वविद्यालय — संरचना
| संरचना | विवरण | महत्त्व |
|---|---|---|
| विहार (Monasteries) | 11 विहार; छात्रों के आवास एवं अध्ययन कक्ष | आवासीय विश्वविद्यालय की मुख्य इकाई |
| मंदिर (Temples) | 14 मुख्य मंदिर; बुद्ध एवं बोधिसत्त्व की मूर्तियाँ | धार्मिक एवं ध्यान केंद्र |
| पुस्तकालय | रत्नसागर, रत्नोदधि (9 मंजिल), रत्नरंजक | लाखों पांडुलिपियाँ; विश्व का सबसे बड़ा पुस्तकालय |
| प्रांगण (Courtyards) | 8 प्रांगण; खुले में चर्चा एवं शिक्षण | सामूहिक शिक्षण पद्धति |
| स्नानागार एवं तालाब | अनेक जलाशय; दैनिक स्नान की व्यवस्था | शिष्टाचार एवं स्वच्छता |
प्रमुख पर्यटन स्थल
नालंदा में पुरातात्त्विक अवशेषों से लेकर संग्रहालय, स्मारक और आधुनिक शैक्षणिक संस्थान तक — सभी प्रकार के पर्यटन स्थल मिलते हैं। प्रत्येक स्थल का परीक्षा की दृष्टि से अलग महत्त्व है।
नालंदा महाविहार के उत्खनित अवशेष लगभग 14 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं। यह 2016 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित हुए। यहाँ दो मुख्य भाग हैं —
- विहार खंड (Monastery Block): 11 विहारों के अवशेष; छात्रों के कक्ष, भोजनशाला और ध्यान कक्ष स्पष्ट दिखते हैं। ईंटों की उत्कृष्ट चिनाई।
- मंदिर खंड (Temple Block): 14 मंदिरों के अवशेष; Temple No. 3 सर्वाधिक विशाल एवं प्रसिद्ध है — बुद्ध की विशाल प्रतिमा सहित।
- सारिपुत्त स्तूप: बुद्ध के प्रमुख शिष्य सारिपुत्त का जन्म नालंदा में हुआ था; उनके स्मृति में स्तूप निर्मित।
- Temple No. 2: अनेक छोटे-बड़े स्तूपों से घिरा; Votive Stupa का संग्रह।
नालंदा महाविहार के समीप स्थित ASI संग्रहालय उत्खनन से प्राप्त अमूल्य वस्तुओं का भंडार है।
- बुद्ध एवं बोधिसत्त्व की मूर्तियाँ: गुप्त एवं पाल कालीन; काले पत्थर (Black Basalt) से बनी; उत्कृष्ट शिल्प।
- ताँबे की मूर्तियाँ: धातु कला की उत्कृष्ट मिसाल।
- ताम्रपत्र (Copper Plates): दान-अभिलेख; नालंदा के इतिहास का प्राथमिक स्रोत।
- मुद्राएँ: गुप्त, पाल, हर्ष काल की सोने-चाँदी की मुद्राएँ।
- टेराकोटा वस्तुएँ: दैनिक जीवन से संबंधित मृद-पात्र एवं मूर्तिकाएँ।
चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) की स्मृति में निर्मित भव्य स्मारक। यह भारत-चीन सांस्कृतिक मैत्री का प्रतीक है।
- स्थान: नालंदा महाविहार अवशेषों के निकट।
- वास्तुकला: चीनी स्थापत्य शैली में निर्मित; ह्वेनसांग की विशाल प्रतिमा।
- महत्त्व: भारत-चीन सांस्कृतिक संबंधों का ऐतिहासिक प्रमाण।
- प्रदर्शनी: ह्वेनसांग की भारत यात्रा, नालंदा अध्ययन एवं ग्रंथ संकलन से संबंधित चित्र एवं जानकारी।
1951 में बिहार सरकार द्वारा स्थापित। पाली भाषा, बौद्ध दर्शन एवं प्राच्य विद्याओं का अध्ययन केंद्र।
- स्थापना वर्ष: 1951 — बिहार सरकार का पहला बौद्ध अध्ययन केंद्र।
- वर्तमान दर्जा: डीम्ड विश्वविद्यालय (Deemed University); केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत।
- पाठ्यक्रम: पाली, प्राकृत, बौद्ध दर्शन, तिब्बती, सिंहली भाषाएँ।
- अंतरराष्ट्रीय छात्र: श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, जापान से छात्र अध्ययन करते हैं।
प्राचीन नालंदा की विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए 2010 में संसद के अधिनियम से स्थापित और 2014 में कार्यारंभ किया।
- स्थान: राजगीर के निकट नया परिसर (नालंदा से ~12 किमी)।
- विशेषता: अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय; एशियाई देशों का सहयोग (East Asia Summit Initiative)।
- पाठ्यक्रम: इतिहास, पारिस्थितिकी, बौद्ध अध्ययन, दर्शन, अंतरराष्ट्रीय संबंध।
- ग्रीन कैंपस: पर्यावरण अनुकूल परिसर; Net Zero Carbon Campus का लक्ष्य।
- नया परिसर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में नए परिसर का उद्घाटन किया।
पुरातात्त्विक उत्खनन एवं विदेशी यात्री
नालंदा के बारे में हमारी जानकारी का सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत चीनी तीर्थयात्रियों के यात्रा-वृत्तांत और ASI के उत्खनन हैं। इन दोनों स्रोतों के बिना नालंदा का इतिहास अधूरा होता।
🌏 प्रमुख विदेशी यात्री
| यात्री | देश | काल | ग्रंथ | नालंदा में योगदान |
|---|---|---|---|---|
| ह्वेनसांग (Xuanzang) | चीन | 629–645 CE | सी-यू-की | नालंदा में 5+ वर्ष अध्ययन; शीलभद्र से योगाचार सीखा; सर्वविस्तृत वर्णन |
| इत्सिंग (Yi Jing) | चीन | 671–695 CE | दक्षिण समुद्र भ्रमण | नालंदा में 10 वर्ष; 400 बौद्ध ग्रंथ ले गए; छात्रों की संख्या 3,000+ बताई |
| फाह्यान (Fa Hien) | चीन | 399–414 CE | फो-कुओ-ची | नालंदा के प्रारंभिक विहारों का उल्लेख; उस काल में विश्वविद्यालय पूर्ण नहीं था |
| धर्मस्वामिन् | तिब्बत | 1235 CE | — | बख्तियार खिलजी के आक्रमण के बाद नालंदा का वर्णन; खंडहर देखा |
🔍 ASI उत्खनन — प्रमुख तथ्य
1861 में Alexander Cunningham ने नालंदा की पहचान की। 1915 से 1937 के बीच ASI ने व्यवस्थित उत्खनन किया। इस दौरान 14 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में अवशेष उजागर हुए — 11 विहार, 14 मंदिर और अनेक स्तूप। उत्खनन में मिली ताम्रपत्र अभिलेखें नालंदा के इतिहास का सबसे महत्त्वपूर्ण लिखित स्रोत हैं। इनसे देवपाल (पाल वंश) द्वारा नालंदा को 5 गाँव दान देने का उल्लेख मिलता है।
नालंदा का पतन, UNESCO एवं पुनरुद्धार
नालंदा का विनाश भारतीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक है। 1193 CE में बख्तियार खिलजी के आक्रमण ने इस ज्ञान-पीठ को नष्ट कर दिया। परंतु 21वीं सदी में इसे UNESCO मान्यता और पुनर्स्थापित विश्वविद्यालय के माध्यम से नया जीवन मिला है।
⚔️ पतन के कारण
1193 CE में तुर्की आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने नालंदा पर आक्रमण किया। पुस्तकालय जलाया गया, भिक्षुओं की हत्या की गई और भवन ध्वस्त किए गए।
पाल वंश के पतन के साथ नालंदा को मिलने वाले राजकीय अनुदान बंद हो गए। बिना आर्थिक संरक्षण के इतने विशाल संस्थान का संचालन असंभव हो गया।
8वीं-9वीं सदी में आदि शंकराचार्य के नेतृत्व में हिंदू दर्शन का पुनरुत्थान हुआ। बौद्ध धर्म का प्रभाव भारत में घटने लगा, जिससे नालंदा को मिलने वाले दान कम हुए।
बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने भी समय-समय पर नालंदा की संरचनाओं को क्षति पहुँचाई, जो धीरे-धीरे संस्था के कमजोर होने का कारण बनी।
🌐 UNESCO विश्व धरोहर — 2016
2016 में नालंदा महाविहार के पुरातात्त्विक स्थल को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में “Outstanding Universal Value” के आधार पर सम्मिलित किया गया। UNESCO ने इसे मानव सभ्यता की अमूल्य विरासत माना और कहा कि नालंदा प्राचीन काल में ज्ञान के वैश्विक प्रवाह का केंद्र था। यह बिहार की दूसरी और भारत की 40वीं UNESCO World Heritage Site बनी।
- 2007: East Asia Summit में नालंदा को पुनर्स्थापित करने का प्रस्ताव — सिंगापुर, चीन, भारत सहित 17 देशों का समर्थन।
- 2010: नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम 2010 — भारतीय संसद द्वारा पारित; अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना।
- 2014: नालंदा विश्वविद्यालय ने कार्य प्रारंभ किया — राजगीर के निकट अस्थायी परिसर में।
- 2016: UNESCO विश्व धरोहर मान्यता — नालंदा महाविहार (पुरातात्त्विक स्थल)।
- 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नालंदा विश्वविद्यालय के नए स्थायी परिसर का उद्घाटन किया।
पर्यटन विकास एवं आधुनिक परिदृश्य
नालंदा स्वदेश दर्शन योजना के बौद्ध सर्किट का सबसे महत्त्वपूर्ण केंद्र है। UNESCO मान्यता के बाद यहाँ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
🌐 बौद्ध सर्किट में नालंदा
केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना (Phase I और II) के तहत बौद्ध सर्किट में नालंदा को प्राथमिकता दी गई है। इस सर्किट में बोधगया → नालंदा → राजगीर → वैशाली → सारनाथ को एक-दूसरे से जोड़ा गया है। जापान, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया के बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए यह सर्किट अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
UNESCO और ASI के संयुक्त प्रयासों से नालंदा महाविहार के अवशेषों का संरक्षण। Heritage Management Plan तैयार किया गया है।
नालंदा को पटना, राजगीर, बोधगया से जोड़ने वाले राजमार्गों का चौड़ीकरण। बौद्ध सर्किट के तहत सड़क एवं रेल संपर्क को प्राथमिकता।
BTDC और निजी क्षेत्र द्वारा होटल एवं गेस्टहाउस का विकास। विदेशी पर्यटकों की सुविधा के लिए बहुभाषी गाइड सेवा।
नालंदा महाविहार अवशेषों पर Sound and Light Show — पर्यटकों को इतिहास को दृश्य-श्रव्य माध्यम से अनुभव कराने का प्रयास।
ASI द्वारा QR Code और AR (Augmented Reality) के माध्यम से पर्यटकों को जानकारी देने की योजना। डिजिटल पर्यटन को बढ़ावा।
नालंदा विश्वविद्यालय (2014) और नव नालंदा महाविहार के कारण Academic Tourism का उभरता केंद्र। देश-विदेश के शोधार्थियों का आगमन।
- संरक्षण बनाम पर्यटन का द्वंद्व: UNESCO Heritage Site पर अधिक पर्यटकों का दबाव; अवशेषों को नुकसान।
- आधारभूत संरचना की कमी: विश्वस्तरीय सुविधाओं का अभाव; पर्याप्त पार्किंग, शौचालय, पेयजल।
- जागरूकता का अभाव: स्थानीय समुदाय में विरासत के महत्त्व की समझ कम।
- कुशल गाइड की कमी: बहुभाषी, प्रशिक्षित गाइडों का अभाव — विदेशी पर्यटक असुविधा अनुभव करते हैं।


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