नमामि गंगे योजना
बिहार का जल प्रदूषण — समाधान
गंगा पुनरुद्धार, STP, घाट विकास एवं नीतियाँ — BPSC परीक्षा हेतु सम्पूर्ण विश्लेषण
परिचय — बिहार में जल प्रदूषण की स्थिति
बिहार में जल प्रदूषण (Water Pollution) एक गम्भीर पर्यावरणीय एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट है। गंगा — जो बिहार की जीवन-रेखा है — उद्योगों, नगरीय मलजल एवं कृषि रसायनों के कारण अत्यधिक प्रदूषित हो चुकी है। BPSC परीक्षा में जल प्रदूषण के कारण, प्रभाव एवं नमामि गंगे योजना से सम्बंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
बिहार में जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत
चीनी मिलें (Sugar Mills), डिस्टिलरीज, चमड़ा उद्योग, कागज मिलें — अनुपचारित अपशिष्ट सीधे नदियों में। पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर के निकट अधिक।
पटना सहित अनेक शहरों का अनुपचारित सीवेज (Untreated Sewage) सीधे गंगा में। STP की अपर्याप्त संख्या एवं क्षमता।
रासायनिक उर्वरक (यूरिया, DAP), कीटनाशक — वर्षा जल के साथ नदियों में। नाइट्रेट एवं फॉस्फेट से जल-कुसुम (Algal Bloom)।
अधजले शव, मूर्ति विसर्जन, पूजा सामग्री — कोलिफॉर्म बैक्टीरिया में वृद्धि। गंगा तटीय शहरों में विशेष समस्या।
नगर निगमों का कूड़ा सीधे घाटों एवं नदी तटों पर। प्लास्टिक, पॉलीथिन से दीर्घकालिक प्रदूषण।
अवैध बालू खनन से नदी के तल एवं तट की संरचना नष्ट — जल की स्व-शोधन क्षमता घटती है।
नमामि गंगे — परिचय एवं उद्देश्य
नमामि गंगे (Namami Gange) — जिसका अर्थ है “गंगा को नमन” — भारत सरकार की प्रमुख एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन है। इसे जून 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रारम्भ किया गया। यह पूर्व की गंगा एक्शन प्लान (GAP) योजनाओं की विफलता के बाद एक नए दृष्टिकोण के साथ आई।
नमामि गंगे — मूल तथ्य
नमामि गंगे की विशेषताएँ — पूर्व योजनाओं से अंतर
| पहलू | गंगा एक्शन प्लान (GAP) | नमामि गंगे |
|---|---|---|
| प्रारम्भ | 1985 (राजीव गाँधी) | 2014 (नरेन्द्र मोदी) |
| दृष्टिकोण | केवल मलजल उपचार | एकीकृत (Integrated) — सब पहलू |
| बजट | ₹452 करोड़ (GAP-I) | ₹20,000 करोड़ |
| भागीदारी | सरकारी एजेंसी | PPP, NGO, ग्राम पंचायत |
| परिणाम | काफी हद तक विफल | आंशिक सफलता, जारी |
| नोडल एजेंसी | CPCB | NMCG |
| कानूनी शक्ति | कम | NGT + सुप्रीम कोर्ट निगरानी |
नमामि गंगे के प्रमुख घटक (Key Components)
नमामि गंगे एक एकीकृत (Integrated) कार्यक्रम है जिसमें मलजल उपचार से लेकर जन जागरूकता तक अनेक घटक सम्मिलित हैं। BPSC Prelims में इन घटकों के नाम एवं उनसे जुड़े तथ्य पूछे जाते हैं।
Sewage Treatment Plant (STP) नमामि गंगे का सबसे महत्वपूर्ण एवं सर्वाधिक बजट वाला घटक है। पटना सहित बिहार के प्रमुख शहरों में STP निर्माण किया जा रहा है। Hybrid Annuity Model (HAM) के तहत PPP (Public-Private Partnership) से STP बनाए जा रहे हैं जिसमें सरकार 40% राशि देती है और 60% निजी क्षेत्र देता है। बिहार के लिए पटना में 60 MLD STP (Saidpur) तथा बेउर में 43 MLD STP प्रमुख परियोजनाएँ हैं। STP में जल शोधन की प्रक्रिया: Primary Treatment → Secondary Treatment (Biological) → Tertiary Treatment।
गंगा तट पर स्थित घाटों का निर्माण, नवीनीकरण एवं सौंदर्यीकरण। बिहार में पटना घाट (Gandhi Ghat, Patna Sahib Ghat), मुंगेर, भागलपुर के घाटों का विकास। घाटों पर शौचालय, बदलाव कक्ष, कूड़ा संग्रह की व्यवस्था। इलेक्ट्रिक शवदाह गृह (Electric Crematoriums) का निर्माण — अधजले शव गंगा में न जाएँ।
गंगा डॉल्फिन (Gangetic Dolphin — Platanista gangetica) बिहार का राज्य जल-जीव है तथा गंगा के स्वास्थ्य का सूचक (Indicator Species) है। नमामि गंगे के अंतर्गत डॉल्फिन संरक्षण हेतु विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभ्यारण्य (Vikramshila Gangetic Dolphin Sanctuary — भागलपुर) की सुरक्षा। महाशीर मछली एवं अन्य जलीय जीवों के संरक्षण हेतु Fish Nurseries। प्रवासी पक्षियों के लिए नदी तट का संरक्षण।
गंगा तट पर 500 मीटर के दायरे में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर प्रतिबंध। Common Effluent Treatment Plant (CETP) — लघु उद्योगों के लिए सामूहिक अपशिष्ट उपचार। Zero Liquid Discharge (ZLD) — बड़े उद्योगों के लिए अनिवार्य — कोई तरल अपशिष्ट नदी में नहीं। Tanneries (चमड़ा उद्योग) — कानपुर मॉडल बिहार में भी लागू। NGT द्वारा कड़ी निगरानी।
गंगा के दोनों तटों पर 5 किलोमीटर की चौड़ाई में वन पट्टी (Forest Strip) विकसित करने का लक्ष्य। Eco-Sensitive Zone घोषित — कृषि रसायनों पर प्रतिबंध। Organic Farming को प्रोत्साहन — गंगा के 10 km के दायरे में जैविक खेती। नदी तट का कटाव रोकना — जड़ युक्त वनस्पति से।
Ganga Vichar Manch — गंगा चिंतन के लिए मंच। Ganga Praharis — गंगा प्रहरी स्वयंसेवक जो नदी की निगरानी करते हैं। गंगा ग्राम (Ganga Gram) — गंगा तट पर स्थित ग्राम पंचायतों को ODF (Open Defecation Free) बनाना। स्कूल-कॉलेजों में Ganga Quest — ऑनलाइन पर्यावरण प्रश्नोत्तरी। Ganga Connect — दूतावासों एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर जागरूकता।
बिहार में नमामि गंगे का क्रियान्वयन
बिहार में नमामि गंगे के अंतर्गत पटना, भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय, हाजीपुर, छपरा सहित अनेक शहरों में परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं। गंगा बिहार में 12 जिलों से होकर गुज़रती है — इन सभी को नमामि गंगे में प्राथमिकता दी गई है।
बिहार में प्रमुख STP परियोजनाएँ
| शहर / स्थान | STP क्षमता | स्थिति | विशेषता |
|---|---|---|---|
| पटना — Saidpur | 60 MLD | निर्माणाधीन / पूर्ण | पटना शहर का सबसे बड़ा STP |
| पटना — Beur | 43 MLD | पूर्ण | HAM मॉडल पर निर्मित |
| पटना — Pahari | 20 MLD | पूर्ण | पुराना STP — अपग्रेड |
| भागलपुर | 40 MLD | प्रस्तावित / निर्माण | विक्रमशिला डॉल्फिन क्षेत्र |
| मुंगेर | 14 MLD | निर्माणाधीन | — |
| हाजीपुर | 18 MLD | निर्माणाधीन | गंडक संगम क्षेत्र |
| छपरा (सारण) | 11 MLD | प्रस्तावित | घाघरा-गंगा संगम |
बिहार में घाट विकास — प्रमुख स्थान
विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभ्यारण्य — BPSC Key Point
गंगा सफाई की पूर्व योजनाएँ — इतिहास एवं विफलता
नमामि गंगे से पहले गंगा एक्शन प्लान (GAP) के दो चरण चले जो मुख्यतः विफल रहे। इनकी विफलता के कारणों को समझना BPSC Mains के लिए आवश्यक है।
GAP की विफलता के कारण
- STP का रखरखाव नहीं: बने STP बिजली कटौती एवं रखरखाव के अभाव में बंद पड़ गए।
- पूर्णतः तकनीकी दृष्टिकोण: सामाजिक जागरूकता एवं जन भागीदारी का अभाव।
- अन्तर्विभागीय समन्वय नहीं: अनेक मंत्रालयों में जिम्मेदारी बँटी — कोई एक नोडल एजेंसी नहीं।
- अपर्याप्त बजट: जनसंख्या एवं प्रदूषण के अनुपात में बजट बहुत कम था।
- राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी: चुनावी प्राथमिकताएँ बदलने से योजना उपेक्षित हुई।
- नदी प्रवाह पर ध्यान नहीं: अविरल प्रवाह (Aviral Dhara) की अनदेखी — बाँधों एवं जल दोहन से प्रवाह घटा।
उपलब्धियाँ एवं चुनौतियाँ
नमामि गंगे के एक दशक (2014–2024) में कुछ उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हुई हैं, किन्तु अनेक चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। BPSC Mains में इस सन्तुलित विश्लेषण की अपेक्षा की जाती है।
- BOD में कमी: कई स्थानों पर गंगा जल की BOD में सुधार दर्ज।
- डॉल्फिन संख्या वृद्धि: 2022 में डॉल्फिन गणना में संख्या बढ़ी।
- STP निर्माण: देशभर में 1,500+ MLD STP क्षमता जोड़ी।
- घाट विकास: 100+ घाटों का नवीनीकरण।
- इलेक्ट्रिक शवदाह: अनेक स्थानों पर सक्रिय।
- Ganga Gram: 1,600+ ग्राम ODF घोषित।
- NGT निगरानी: अनेक प्रदूषण कर्ताओं पर जुर्माना।
- अपूर्ण STP: कई STP अभी निर्माणाधीन या क्षमता से कम काम कर रहे।
- बिजली आपूर्ति: STP चलाने के लिए निरंतर बिजली की समस्या।
- अवैध उद्योग: छोटी इकाइयाँ अभी भी सीधे नदी में अपशिष्ट।
- कृषि प्रदूषण: कीटनाशक एवं उर्वरक — नियंत्रण कठिन।
- अविरल प्रवाह: बाँधों से जल प्रवाह प्रभावित — नदी स्वयं साफ नहीं हो पाती।
- जन भागीदारी की कमी: ग्रामीण एवं शहरी नागरिकों की उदासीनता।
- कार्यान्वयन अंतराल: भ्रष्टाचार एवं नौकरशाही की बाधाएँ।
Artha Ganga — आर्थिक आयाम
Artha Ganga नमामि गंगे का एक नया आयाम है जो गंगा को आर्थिक विकास का माध्यम बनाने पर केंद्रित है। इसमें जल पर्यटन (Water Tourism), मत्स्यपालन (Fisheries), जैविक खेती (Organic Farming) एवं नदी-किनारे के उद्योग शामिल हैं। गंगा तट पर River Front Development — पटना में गंगा पाथवे (Ganga Pathway) इसका उदाहरण है।
जल प्रदूषण के अन्य समाधान एवं नीतियाँ
नमामि गंगे के अतिरिक्त बिहार में जल प्रदूषण नियंत्रण हेतु अनेक कानूनी, संस्थागत एवं तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। BPSC Prelims में इन कानूनों के नाम एवं वर्ष पूछे जाते हैं।
प्रमुख पर्यावरण कानून — जल प्रदूषण
तकनीकी एवं वैकल्पिक समाधान
- Bacteriophage: गंगा में विशेष वायरस पाए जाते हैं जो हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करते हैं।
- उच्च ऑक्सीजन अवशोषण क्षमता: गंगा जल अन्य नदियों की तुलना में अधिक ऑक्सीजन घोलता है।
- Self-purification: यदि प्रदूषण कम किया जाए तो गंगा स्वयं को शुद्ध करने में सक्षम है।
- COVID-19 अध्ययन: 2020 में शोध — गंगा जल में COVID-19 वायरस के प्रति प्रतिरोधी गुण।
MCQ अभ्यास — BPSC स्तर
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