बिहार की जलवायु का कृषि पर प्रभाव
कृषि जोखिम — बाढ़, सूखा, एवं जलवायु परिवर्तन
परिचय एवं जलवायु सिंहावलोकन
बिहार की जलवायु का कृषि पर प्रभाव Bihar Govt. Competitive Exams की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय है। बिहार एक कृषि-प्रधान राज्य है जहाँ जलवायु की अनिश्चितता बाढ़, सूखा और अन्य आपदाओं के रूप में कृषि को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है।
🌏 बिहार की जलवायु — मूल विशेषताएँ
बिहार उष्णकटिबंधीय मानसून जलवायु (Tropical Monsoon Climate) क्षेत्र में स्थित है। यहाँ तीन प्रमुख ऋतुएँ होती हैं — ग्रीष्म (मार्च–जून), वर्षा/मानसून (जुलाई–अक्टूबर) और शीत (नवंबर–फरवरी)। राज्य की कृषि मुख्यतः मानसून पर निर्भर है। औसत वार्षिक वर्षा 1000–1500 मिमी के बीच है, परंतु वितरण अत्यंत असमान है।
🗺️ जलवायु क्षेत्रों का विभाजन
बिहार को कृषि-जलवायु दृष्टि से तीन क्षेत्रों में बाँटा जाता है —
| क्षेत्र | जिले | विशेषता | प्रमुख जोखिम |
|---|---|---|---|
| 1 उत्तरी बिहार | सीतामढ़ी, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, कटिहार आदि | गंगा की सहायक नदियाँ, नेपाल से बाढ़ | बाढ़ (90% क्षेत्र) |
| 2 मध्य बिहार | पटना, नालंदा, गया, जहानाबाद | गंगा मैदान, मिश्रित जलवायु | अनिश्चित वर्षा |
| 3 दक्षिणी बिहार | गया, औरंगाबाद, नवादा, रोहतास, बाँका | पठारी क्षेत्र, कम वर्षा | सूखा (Drought) |
कृषि का महत्त्व एवं फसल-चक्र
बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है। राज्य के GSDP में कृषि का योगदान लगभग 18–20% है, जबकि कार्यबल का 76% प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है।
🌾 प्रमुख फसलें एवं जलवायु संबंध
| फसल | मौसम | आवश्यक जलवायु | जोखिम |
|---|---|---|---|
| धान (Paddy) | खरीफ (जून–नवम्बर) | उच्च आर्द्रता, 1000+ मिमी वर्षा | बाढ़, अतिवृष्टि |
| गेहूँ (Wheat) | रबी (नवम्बर–अप्रैल) | शीतकालीन ठंड, सिंचाई | पाला, अनावृष्टि |
| मक्का (Maize) | खरीफ/रबी दोनों | मध्यम वर्षा, गर्म तापमान | सूखा, अनियमित वर्षा |
| दलहन (Pulses) | रबी | कम वर्षा, ठंडा मौसम | अनावृष्टि, पाला |
| गन्ना (Sugarcane) | वार्षिक | उच्च तापमान, पर्याप्त जल | बाढ़, सूखा दोनों |
| जूट (Jute) | खरीफ | उच्च आर्द्रता, बाढ़ मैदान | कम वर्षा |
📅 बिहार का कृषि-कैलेंडर
बाढ़ — कारण, प्रभाव एवं प्रबंधन
बाढ़ (Flood) बिहार की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदा है। राज्य का लगभग 73% उत्तरी क्षेत्र बाढ़-संभावित (Flood-Prone) है। प्रतिवर्ष लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न होती है और करोड़ों की फसल नष्ट होती है।
🌊 बाढ़ के प्रमुख कारण
कोसी, गंडक, बागमती, कमला, महानंदा नदियाँ नेपाल-हिमालय से अत्यधिक जल एवं गाद (Silt) लाती हैं। नेपाल में भारी वर्षा होने पर बिहार में बाढ़ आती है।
जुलाई–अगस्त में अत्यधिक और अल्प समय में केंद्रित वर्षा (Concentrated Rainfall) नदियों की जल-वहन क्षमता से अधिक हो जाती है।
गाद जमाव से नदी-तल (River Bed) ऊँचा हो जाता है जिससे नदियाँ आसानी से तटबंध तोड़ देती हैं। कोसी नदी को “बिहार का शोक” कहते हैं।
हिमालय एवं बिहार में वनों की कटाई से वर्षा जल को रोकने की क्षमता घटी है। जल-अपवाह (Run-off) तेज़ हो गया है।
अनेक बार पुराने और कमज़ोर तटबंध टूट जाते हैं जिससे अचानक बाढ़ (Flash Flood) की स्थिति बनती है और क्षति कई गुना बढ़ जाती है।
ग्लोबल वार्मिंग से हिमालय के ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे हैं और चरम वर्षा की घटनाएँ (Extreme Rainfall Events) बढ़ रही हैं।
🏚️ बाढ़ का कृषि पर प्रभाव
- फसल विनाश: खड़ी फसल जलमग्न होकर सड़ जाती है। धान की रोपाई नष्ट, बीज बह जाते हैं।
- मृदा अपरदन: बाढ़ का तेज़ प्रवाह उपजाऊ मिट्टी की ऊपरी परत बहा ले जाता है।
- कृषि उपकरण क्षति: ट्रैक्टर, पंप, हल आदि पानी में डूब जाते हैं।
- पशुधन हानि: दुधारू पशु, बैल आदि बाढ़ में मर जाते हैं जिससे भविष्य की खेती भी प्रभावित होती है।
- बाज़ार संपर्क टूटना: सड़कें डूबने से उपज बाज़ार तक नहीं पहुँच पाती, कीमतें गिरती हैं।
- मृदा अनुर्वरता: बालू और गाद के जमाव से कृषि भूमि की उर्वरता नष्ट हो जाती है — यह बालू भराव (Sand Casting) की समस्या है।
- कर्ज़ का चक्र: फसल नष्ट होने पर किसान साहूकारों से कर्ज़ लेते हैं जिससे ऋण-जाल (Debt Trap) बनता है।
- पलायन: बाढ़-पीड़ित किसान रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं।
- सिंचाई ढाँचे की क्षति: नहरें, पंप हाउस, बाँध टूट जाते हैं जिनकी मरम्मत में वर्षों लग जाते हैं।
- जल-जमाव (Waterlogging): बाढ़ के बाद कई महीनों तक खेत जल से भरे रहते हैं जिससे अगली रबी बुवाई भी देर से होती है।
🚨 बाढ़ग्रस्त प्रमुख नदियाँ
| नदी | उद्गम | प्रभावित जिले | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|
| कोसी | तिब्बत/नेपाल (सप्तकोसी) | सुपौल, सहरसा, मधुबनी, दरभंगा | “बिहार का शोक”, नदी मार्ग बदलती है |
| गंडक | नेपाल (नारायणी) | पश्चिमी चंपारण, मुज़फ्फरपुर | त्रिवेणी नहर से जुड़ी |
| बागमती | नेपाल हिमालय | सीतामढ़ी, मुज़फ्फरपुर, दरभंगा | जल-जमाव की बड़ी समस्या |
| कमला-बालान | नेपाल | मधुबनी, दरभंगा | बाढ़ की आवृत्ति बहुत अधिक |
| महानंदा | दार्जिलिंग | पूर्णिया, कटिहार, अररिया | पूर्वी बिहार की मुख्य बाढ़ नदी |
- नेपाल निर्भरता: अधिकांश नदियाँ नेपाल से आती हैं, द्विपक्षीय समझौते की ज़रूरत।
- तटबंध विरोधाभास: तटबंध अंदर के क्षेत्र को बचाते हैं लेकिन तटबंध के बाहर जल-जमाव बढ़ाते हैं।
- भ्रष्टाचार: तटबंध निर्माण में निम्न गुणवत्ता से बार-बार टूटने की घटनाएँ।
- पूर्व-चेतावनी प्रणाली की कमी: ग्रामीण स्तर तक सूचना नहीं पहुँच पाती।
सूखा — कारण, प्रभाव एवं प्रबंधन
बिहार एक ऐसा अनोखा राज्य है जहाँ उत्तर में बाढ़ और दक्षिण में सूखे की समस्या एक साथ मौजूद है। दक्षिण बिहार के 15–17 जिले सूखे की दृष्टि से संवेदनशील हैं। गया, औरंगाबाद, नवादा, जमुई, बाँका और रोहतास प्रमुख सूखा-प्रभावित जिले हैं।
🔥 सूखे के प्रकार
🔍 सूखे के कारण
- मानसून की विफलता: दक्षिण-पश्चिम मानसून देर से आना या अल्प वर्षा — मुख्य कारण।
- La Niña / El Niño: प्रशांत महासागर के तापमान परिवर्तन से मानसून पर सीधा असर।
- पठारी भूगोल: दक्षिणी बिहार की शुष्क पठारी भूमि वर्षा जल को जल्दी बहा देती है।
- वनों की कटाई: वन आवरण घटने से वाष्पोत्सर्जन और पुनर्चक्रण (Recycling) कम होता है।
- अत्यधिक भू-जल दोहन: नलकूपों के अनियंत्रित उपयोग से भू-जल स्तर लगातार नीचे जाता है।
- जलवायु परिवर्तन: बढ़ते तापमान से वाष्पीकरण अधिक और वर्षा चक्र अनियमित हो रहा है।
🌾 सूखे का कृषि पर प्रभाव
सूखे में खरीफ बुवाई समय पर नहीं हो पाती। धान की रोपाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलता। दाल, तिलहन जैसी फसलें चौपट हो जाती हैं। दक्षिणी बिहार में एकल फसल प्रणाली (Mono-Cropping) होने से खाद्य सुरक्षा खतरे में आ जाती है।
- आय शून्य: फसल नष्ट होने पर परिवार की पूरी आय समाप्त हो जाती है।
- ऋण-संकट: बीज, खाद, सिंचाई के लिए लिए गए कर्ज़ चुकाने में असमर्थता।
- पलायन: मज़दूर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली की ओर पलायन करते हैं।
- कुपोषण: खाद्य उत्पादन घटने से ग्रामीण जनता में कुपोषण बढ़ता है।
- पशुधन मृत्यु: चारे और पानी की कमी से पशु मरते हैं।
अन्य कृषि जोखिम एवं जलवायु परिवर्तन
बाढ़ और सूखे के अलावा बिहार की कृषि अन्य जलवायु-जनित जोखिमों से भी प्रभावित होती है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण ये जोखिम और बढ़ते जा रहे हैं।
🌩️ अन्य प्रमुख कृषि जोखिम
🌍 जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव
| जलवायु बदलाव | कृषि पर प्रभाव |
|---|---|
| तापमान वृद्धि (0.5–1°C) | गेहूँ की पकने की अवधि घटी, उत्पादन 6–10% कम |
| अनिश्चित मानसून | बुवाई-कटाई का कैलेंडर बिगड़ा, योजना कठिन |
| CO₂ वृद्धि | कुछ फसलों में वृद्धि, पर पोषण मूल्य घटा |
| भू-जल स्तर में गिरावट | सिंचाई लागत बढ़ी, रबी फसलें प्रभावित |
| चरम मौसम घटनाएँ | बाढ़ और सूखे की तीव्रता और आवृत्ति दोनों बढ़ी |
| समुद्र तल वृद्धि | दीर्घकाल में डेल्टाई क्षेत्रों पर असर |
सरकारी योजनाएँ एवं उपाय
बिहार सरकार एवं केंद्र सरकार ने कृषि जोखिमों से निपटने के लिए अनेक योजनाएँ एवं कार्यक्रम लागू किए हैं। ये उपाय संरचनात्मक (Structural) और गैर-संरचनात्मक (Non-Structural) दोनों प्रकार के हैं।
🏛️ बाढ़ प्रबंधन से संबंधित योजनाएँ
- तटबंध निर्माण: बिहार में लगभग 3,700 किमी तटबंध हैं। कोसी, गंडक, बागमती आदि पर तटबंध बनाए गए हैं।
- कोसी बराज (Kosi Barrage): 1963 में भीमनगर (नेपाल) में निर्मित। कोसी के प्रवाह को नियंत्रित करने में सहायक।
- गंडक परियोजना: वाल्मीकि नगर बराज। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण दोनों के लिए।
- जल-निकासी नहरें: जल-जमाव वाले क्षेत्रों में जल निकासी के लिए नहर प्रणाली।
- बाढ़-नियंत्रण बाँध: Flood Detention Dams के माध्यम से जल का भंडारण।
- बाढ़ पूर्व-चेतावनी प्रणाली: CWC (Central Water Commission) और NDMA द्वारा SMS अलर्ट और रेडियो प्रसारण।
- बाढ़ मानचित्रण: GIS तकनीक से बाढ़-जोखिम मानचित्र तैयार।
- NDRF तैनाती: National Disaster Response Force की स्थायी बटालियन।
- आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार: राज्य स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया और पुनर्वास।
☀️ सूखा प्रबंधन से संबंधित योजनाएँ
PMFBY
2016 से लागूMGNREGA
2005 सेPMKSY
2015 सेBihar SAPCC
राज्य योजना🌾 कृषि-विशिष्ट उपाय
| उपाय | उद्देश्य | लाभ |
|---|---|---|
| बाढ़-सहिष्णु धान (Flood-Tolerant Rice) | जलमग्न स्थिति में जीवित रहे | Swarna Sub-1 किस्म 15 दिन तक जल में जीवित |
| सूखा-प्रतिरोधी बीज | कम पानी में उत्पादन | DRR Dhan 44, Sahbhagi Dhan किस्में |
| SRI पद्धति | धान में कम पानी उपयोग | 30–40% जल की बचत |
| जल-संचयन (Watershed) | वर्षा जल संग्रह | रबी सिंचाई में उपयोग |
| मृदा स्वास्थ्य कार्ड | उर्वरक उपयोग अनुकूलन | उत्पादन लागत कम |
- बिहार कृषि रोडमैप: 2012 से तीसरा रोडमैप (2017–2022) — कृषि उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य।
- जल-जीवन-हरियाली मिशन: 2019 — तालाब, पोखर, कुएँ का जीर्णोद्धार, वृक्षारोपण।
- कृषि इनपुट अनुदान: बाढ़/सूखे में फसल क्षति पर प्रति हेक्टेयर मुआवज़ा।


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