बिहार का जलवायु परिवर्तन
तापमान में वृद्धि
Bihar Competitive Exams के लिए सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री — कारण, प्रभाव, डेटा और परीक्षा-केन्द्रित विश्लेषण।
परिचय एवं अवलोकन
बिहार का जलवायु परिवर्तन और तापमान में वृद्धि Bihar Govt. Competitive Exams तथा बिहार की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। गंगा के मैदानी क्षेत्र में स्थित बिहार — जो उष्णकटिबंधीय जलवायु के अंतर्गत आता है — पिछले पाँच दशकों में औसत तापमान, ग्रीष्म लहर, एवं मौसमी विषमताओं में उल्लेखनीय परिवर्तन अनुभव कर रहा है।
बिहार की जलवायु विशेषताएँ — एक दृष्टि में
तापमान वृद्धि — डेटा एवं प्रवृत्तियाँ
IMD, IPCC एवं नेशनल एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज (NAPCC) के आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि बिहार में तापमान वृद्धि की दर राष्ट्रीय औसत के समकक्ष या उससे अधिक रही है।
दशकवार औसत तापमान परिवर्तन (बिहार)
| क्र. | दशक | औसत अधिकतम तापमान | औसत न्यूनतम तापमान | प्रमुख घटना |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 1970 के दशक | 33.2°C | 16.8°C | सामान्य मानसून पैटर्न |
| 2 | 1980 के दशक | 33.5°C | 17.0°C | सूखे वर्षों की शुरुआत |
| 3 | 1990 के दशक | 33.9°C | 17.3°C | Heat Wave की आवृत्ति बढ़ी |
| 4 | 2000 के दशक | 34.4°C | 17.6°C | मानसून अनिश्चितता; बाढ़-सूखा चक्र |
| 5 | 2010–2020 | 35.0°C | 18.1°C | रिकॉर्ड तोड़ Heat Wave 2019, 2023 |
शहरवार अधिकतम तापमान (ग्रीष्म 2023)
भविष्य का तापमान अनुमान (IPCC Projection)
तापमान वृद्धि के कारण एवं कारक
बिहार में तापमान वृद्धि के कारणों को दो स्तरों पर समझना आवश्यक है — (1) वैश्विक कारण, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से जुड़े हैं, और (2) स्थानीय एवं क्षेत्रीय कारण, जो बिहार की विशिष्ट भौगोलिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों से उत्पन्न होते हैं।
A. वैश्विक कारण (Global Causes)
CO₂, CH₄, N₂O जैसी गैसें वायुमण्डल में ताप को रोकती हैं — जिसे Greenhouse Effect कहते हैं। औद्योगिक क्रान्ति के बाद से CO₂ का स्तर 280 ppm से बढ़कर 420 ppm से अधिक हो गया है।
कोयला, पेट्रोल, डीजल के दहन से भारी मात्रा में CO₂ निकलती है। बिहार में परिवहन क्षेत्र तथा ईंट-भट्ठे इसके प्रमुख स्रोत हैं।
बंगाल की खाड़ी के बढ़ते तापमान से मानसून पैटर्न बदल रहा है, जिससे बिहार में मानसूनी वर्षा की अनिश्चितता बढ़ी है।
वायुमण्डल में एरोसोल कणों की अधिकता से सौर विकिरण का वितरण बदल रहा है — कहीं अधिक गर्मी, कहीं कम वर्षा।
B. स्थानीय एवं क्षेत्रीय कारण (Bihar-Specific)
बिहार में वन क्षेत्र राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का मात्र 7.3% है, जबकि राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार यह 33% होना चाहिए। वनों की कटाई से भूमि की ताप-अवशोषण क्षमता बढ़ती है और ठंडक देने वाला वाष्पोत्सर्जन कम होता है। चंपारण, कैमूर और जमुई के वन क्षेत्र में भारी कमी आई है।
पटना, गया, भागलपुर, मुज़फ्फरपुर जैसे शहरों में तेज़ी से हो रहे निर्माण, कंक्रीट की सतह, AC का उपयोग तथा वाहनों की भीड़ से Urban Heat Island प्रभाव उत्पन्न होता है। पटना शहर का तापमान आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में 2–3°C अधिक रहता है।
धान की खेती में CH₄ (मीथेन) का उत्सर्जन होता है। साथ ही, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से N₂O निकलती है — दोनों शक्तिशाली Greenhouse Gases हैं। बिहार में करोड़ों एकड़ कृषि भूमि से ये गैसें स्थानीय तापमान को प्रभावित करती हैं।
बिहार में हज़ारों ईंट-भट्ठे कोयले से चलते हैं, जो CO₂ तथा Black Carbon उत्सर्जित करते हैं। Black Carbon सूर्य की ऊर्जा को वायुमण्डल में ही अवशोषित कर लेता है, जिससे स्थानीय तापमान बढ़ता है।
क्षेत्र-वार प्रभाव एवं भेद्यता
बिहार के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों — उत्तरी मैदान, गंगा तटीय क्षेत्र, दक्षिणी पठार — में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अलग-अलग रूपों में प्रकट हो रहे हैं। इसे समझना Bihar Govt. Competitive Exams के प्रश्नों के लिए आवश्यक है।
उत्तरी बिहार
तराई एवं नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रगंगा तटीय क्षेत्र
पटना, भोजपुर, सारण, वैशालीदक्षिणी बिहार (मगध-अंग)
गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबादपूर्वी बिहार
भागलपुर, मुंगेर, बाँका, जमुईकृषि एवं जल संकट पर प्रभाव
बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है जहाँ लगभग 76% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान वृद्धि और अनिश्चित मानसून ने खाद्य सुरक्षा तथा जल संसाधनों पर गहरा प्रभाव डाला है।
कृषि पर प्रभाव
| फसल | तापमान सहनशीलता | वर्तमान खतरा | संभावित क्षति |
|---|---|---|---|
| धान (Rice) | 22–32°C | पकने के समय 40°C+ तापमान | उपज में 10–20% कमी |
| गेहूँ (Wheat) | 15–25°C | फरवरी में असामयिक गर्मी | दाने सिकुड़ना, 15–25% नुकसान |
| मक्का (Maize) | 18–32°C | परागण काल में अधिक गर्मी | परागण विफलता, उपज ह्रास |
| लीची (Litchi) | 22–30°C | मुज़फ्फरपुर में Heat Stress | AES (चमकी बुखार) से अप्रत्यक्ष संबंध |
| मखाना (Foxnut) | जलीय पारिस्थितिकी | जलस्तर परिवर्तन | उत्पादन क्षेत्र में कमी |
जल संकट
- उच्च तापमान + आर्द्रता: बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ता है।
- लीची विषाक्तता + गर्मी: 2019 में मुज़फ्फरपुर में 100+ बच्चों की मृत्यु — तापमान की भूमिका।
- Bihar Govt. Competitive Exams में पूछा गया: AES और जलवायु का संबंध एक महत्वपूर्ण टॉपिक है।
स्वास्थ्य एवं सामाजिक प्रभाव
तापमान वृद्धि का सीधा प्रभाव जन-स्वास्थ्य, प्रवासन, गरीबी और लैंगिक असमानता पर पड़ता है। बिहार जैसे घनी आबादी वाले और संसाधन-सीमित राज्य में ये प्रभाव और भी गहरे हैं।
2019 में बिहार में ग्रीष्म लहर से 150 से अधिक मौतें हुईं। गया, औरंगाबाद, नवादा में सर्वाधिक। गरीब मजदूर, वृद्ध और बच्चे सर्वाधिक प्रभावित।
तापमान वृद्धि से मलेरिया, डेंगू, कालाज़ार (Kala-Azar) के मच्छरों और वाहकों की प्रजनन अवधि एवं भौगोलिक क्षेत्र बढ़ रहा है। बिहार Kala-Azar का प्रमुख राज्य है।
कृषि, जल-संग्रह और घरेलू कार्यों में महिलाओं की बड़ी भूमिका होती है। तापमान वृद्धि से उनका कार्य-भार बढ़ता है — दूर से पानी लाना, फसल की देखभाल में अधिक समय।
बाढ़, सूखा और गर्मी के कारण बिहार से पलायन (Climate Migration) बढ़ रहा है। यह पहले से जारी आर्थिक पलायन को और तेज़ करता है — पंजाब, दिल्ली, मुंबई की ओर।
अत्यधिक गर्मी के कारण गर्मियों में स्कूल जल्दी बंद करने पड़ते हैं। सरकार Heat Wave के दौरान स्कूल बंद करती है, जिससे शैक्षणिक नुकसान होता है।
ILO के अनुसार भारत में उच्च तापमान के कारण श्रम उत्पादकता में भारी कमी आती है। बिहार जैसे कृषि-निर्भर राज्य में इसका सीधा GDP पर प्रभाव।
सरकारी नीतियाँ एवं उपाय
बिहार सरकार एवं केंद्र सरकार ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए कई नीतियाँ एवं योजनाएँ तैयार की हैं। इनका ज्ञान Bihar Govt. Competitive Exams और Mains दोनों के लिए आवश्यक है।
A. बिहार राज्य स्तरीय नीतियाँ
B. केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाएँ (बिहार में लागू)
| योजना / मिशन | उद्देश्य | बिहार में प्रासंगिकता |
|---|---|---|
| NAPCC (National Action Plan on CC) | 8 National Missions — Solar, Water, Agriculture आदि | NMSA (National Mission for Sustainable Agriculture) बिहार में सक्रिय |
| PM Fasal Bima Yojana | जलवायु जोखिम से फसल सुरक्षा | बाढ़ / सूखे से प्रभावित किसानों को मुआवजा |
| PMKSY (जल शक्ति) | सिंचाई दक्षता में सुधार | Micro-irrigation, Watershed Management |
| MNREGS | रोज़गार + पर्यावरण संरक्षण | जलवायु प्रभावित मजदूरों को रोज़गार; तालाब, बंधान निर्माण |
| National Solar Mission | सौर ऊर्जा विस्तार | बिहार में सोलर पंप, सोलर स्ट्रीट लाइट |
C. जल-जीवन-हरियाली — विशेष विश्लेषण
- घोषणा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा 2019 में; औपचारिक लॉन्च 26 अक्टूबर 2019
- बजट: ₹24,524 करोड़ (2020–2022)
- लक्ष्य: 1 करोड़ वृक्षारोपण, 2.5 लाख तालाब जीर्णोद्धार, सोलर ऊर्जा विस्तार
- विशेषता: सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा अनिवार्य; सार्वजनिक स्थलों पर “हरित आवरण”
- Jal-Jeevan-Hariyali Index: जिलों की प्रगति मापने हेतु
सारांश एवं परीक्षा प्रश्न
🎯 BPSC परीक्षा के लिए अति-महत्वपूर्ण तथ्य
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