बिहार के लोक नृत्य
एवं लोक संगीत
BPSC Prelims + Mains — झिझिया · जट-जटिन · विदेसिया · बिरहा · सोहर और सम्पूर्ण लोक-विरासत
परिचय — बिहार की लोक कला परम्परा
बिहार के लोक नृत्य एवं संगीत BPSC परीक्षा के सांस्कृतिक विरासत खण्ड में बार-बार पूछे जाते हैं। झिझिया, जट-जटिन, विदेसिया, बिरहा, सोहर जैसी विधाएँ न केवल मनोरंजन का साधन हैं बल्कि बिहार की हजारों वर्ष पुरानी सामाजिक, धार्मिक और कृषि-परम्परा की जीवंत अभिव्यक्ति हैं।
बिहार की लोक कला को मुख्यतः चार सांस्कृतिक क्षेत्रों में समझा जा सकता है — मिथिला (उत्तर बिहार), मगध (मध्य बिहार), भोजपुर (पश्चिमी बिहार) और अंग (पूर्वी बिहार)। प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट नृत्य-संगीत परम्परा है जो उस क्षेत्र की भाषा, भूगोल और सामाजिक संरचना को प्रतिबिम्बित करती है।
बिहार के प्रमुख लोक नृत्य — एक दृष्टि
| # | नृत्य | क्षेत्र | अवसर / विशेषता | कलाकार |
|---|---|---|---|---|
| 1 | झिझिया | मिथिला | नवरात्रि, वर्षा — महिलाओं का समूह नृत्य | घड़े पर दीपक |
| 2 | जट-जटिन | मिथिला | वर्षा ऋतु — पति-पत्नी की कथा | युगल नृत्य |
| 3 | विदेसिया | भोजपुर | परदेसी पति की विरह कथा | भिखारी ठाकुर |
| 4 | झरनी | मिथिला | मुहर्रम — ताजिया जुलूस | हिन्दू-मुस्लिम साझा |
| 5 | पँवड़िया / धोबिया | भोजपुर | विवाह — पेशेवर नर्तक | धोबी समुदाय |
| 6 | करमा | मगध/सीमांचल | करम पर्व — आदिवासी-लोक | आदिवासी समुदाय |
| 7 | सामा-चकेवा नृत्य | मिथिला | कार्तिक — भाई-बहन पर्व | महिलाएँ |
| 8 | छऊ | अंग/सीमा क्षेत्र | चैत्र पर्व — मुखौटा नृत्य | पेशेवर |
BPSC Prelims में लोक नृत्यों के नाम, क्षेत्र और अवसर से प्रश्न आते हैं। Mains में लोक कला और सामाजिक एकता, लोक कला का संरक्षण जैसे विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। झिझिया और जट-जटिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं।
मिथिला के प्रमुख लोक नृत्य — झिझिया, जट-जटिन, झरनी
मिथिला क्षेत्र — दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर — के लोक नृत्य बिहार की सबसे समृद्ध नृत्य परम्परा का प्रतिनिधित्व करते हैं। झिझिया, जट-जटिन और झरनी BPSC में सर्वाधिक पूछे जाने वाले नृत्य हैं।
झिझिया — मिथिला का सर्वप्रमुख लोक नृत्य
झिझिया मिथिला का सबसे प्रसिद्ध और अनूठा लोक नृत्य है। यह नवरात्रि और वर्षा ऋतु में मनाया जाता है। इस नृत्य में महिलाएँ समूह में नृत्य करती हैं। नृत्य की प्रमुख विशेषता यह है कि नर्तकी अपने सिर पर छिद्रयुक्त मिट्टी का घड़ा रखती है जिसमें जलता हुआ दीपक होता है। यह दीपक तेज गति से नृत्य करते समय भी बुझता नहीं — यही इसकी कला है।
- क्षेत्र: मिथिला (दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी)
- अवसर: नवरात्रि, वर्षा ऋतु, देवी पूजा
- कलाकार: महिलाएँ (समूह नृत्य)
- विशेषता: सिर पर दीपक-युक्त छिद्रित घड़ा
- भाषा: मैथिली गायन के साथ
- UNESCO: अमूर्त विरासत की सूची में
जट-जटिन — वर्षा ऋतु का युगल नृत्य
जट-जटिन बिहार का अत्यन्त लोकप्रिय युगल लोक नृत्य है। यह उत्तर बिहार में वर्षा ऋतु (सावन-भादो) में खेला जाता है। इसमें एक पुरुष (जट) और एक महिला (जटिन) के बीच नोक-झोंक, प्रेम और विरह की कथा अभिनय-नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत की जाती है। यह बिहार का एकमात्र मिश्रित (युगल) लोक नृत्य है जिसमें पुरुष और महिला दोनों एक साथ भाग लेते हैं।
जट-जटिन की कहानी एक विदेश गये पति (जट) और उसकी प्रतीक्षारत पत्नी (जटिन) की है। पत्नी अपने परदेसी पति की राह देखती है, उससे नोक-झोंक करती है और अंत में मिलन होता है। वर्षा ऋतु में यह कथा और भी मार्मिक हो जाती है क्योंकि उस मौसम में पति घर नहीं लौट पाता।
झरनी — सांप्रदायिक सौहार्द का नृत्य
झरनी मिथिला क्षेत्र में मुहर्रम के अवसर पर होने वाला विशेष नृत्य है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें हिन्दू और मुसलमान दोनों समुदाय एक साथ भाग लेते हैं। ताजिया जुलूस के साथ झरनी का प्रदर्शन होता है — यह बिहार की गंगा-जमुनी तहजीब और साम्प्रदायिक सौहार्द का जीवंत उदाहरण है।
भोजपुर एवं अन्य क्षेत्रों के लोक नृत्य — विदेसिया, करमा, छऊ
भोजपुर क्षेत्र के लोक नृत्य मुख्यतः भिखारी ठाकुर की नाट्य परम्परा से जुड़े हैं। विदेसिया बिहार का सबसे प्रसिद्ध लोक नाट्य-नृत्य है। इसके अतिरिक्त करमा, छऊ, पँवड़िया जैसे नृत्य भी बिहार की सांस्कृतिक विरासत के अभिन्न अंग हैं।
विदेसिया — भोजपुरी लोक नाट्य का शिखर
विदेसिया भोजपुरी लोक नाट्य की सर्वोच्च विधा है जिसे भिखारी ठाकुर (1887–1971) ने सृजित और लोकप्रिय बनाया। इसमें परदेस गये पति और घर में विरह झेलती पत्नी की मार्मिक कथा गीत, नृत्य और नाटक के माध्यम से प्रस्तुत होती है। विदेसिया केवल मनोरंजन नहीं — यह बिहारी श्रमिक पलायन की पीड़ा का सामाजिक दस्तावेज है।
भिखारी ठाकुर का जन्म सारण जिले के कुतुबपुर गाँव में हुआ था। वे नाई (हज्जाम) जाति के थे किन्तु अपनी प्रतिभा से भोजपुरी के सर्वश्रेष्ठ नाटककार, गायक और अभिनेता बने। उनकी रचनाओं में विदेसिया, गबरघिचोर, बेटी बियोग, बिधवा विलाप, भाई-विरोध, कलयुग बाहार प्रमुख हैं। वे स्वयं महिला की भूमिका निभाते थे — यही ‘लौंडा नाच’ की परम्परा है। उन्होंने जाति-भेद, दहेज प्रथा, स्त्री-शोषण और पलायन जैसे सामाजिक मुद्दों को लोक कला के माध्यम से उठाया।
- विदेसिया: परदेसी पति की विरह कथा — सर्वाधिक प्रसिद्ध
- गबरघिचोर: सामाजिक व्यंग्य नाटक
- बेटी बियोग: बेटी की विदाई की पीड़ा
- बिधवा विलाप: विधवा स्त्री की दुर्दशा
करमा नृत्य — आदिवासी-लोक परम्परा
करमा नृत्य बिहार के मगध, सीमांचल और झारखण्ड सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रचलित है। यह करम पर्व के अवसर पर किया जाता है। करम एक वृक्ष (Nauclea parvifolia) है जिसकी शाखा गाड़कर उसकी पूजा होती है। इस नृत्य में युवक-युवतियाँ रात भर नृत्य करते हैं — यह आदिवासी और लोक परम्परा का अनूठा संगम है।
छऊ नृत्य — मुखौटा नृत्य
छऊ नृत्य मुख्यतः झारखण्ड से सम्बद्ध है किन्तु बिहार के अंग क्षेत्र (भागलपुर-मुंगेर) और सीमावर्ती जिलों में भी प्रचलित है। यह मुखौटा (Mask) नृत्य है जिसमें रामायण, महाभारत और पुराण के प्रसंगों का नाट्य-नृत्य होता है। 2010 में UNESCO ने छऊ को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया।
बिहार का लोक संगीत — बिरहा, सोहर, चैता, विदेसिया गीत
बिहार का लोक संगीत जीवन के हर पहलू को समेटे हुए है — जन्म से मृत्यु तक, खेती से विवाह तक, विरह से मिलन तक। बिरहा, सोहर, चैता, झूमर, नचारी, होरी, कजरी, सावन-गीत — ये सब बिहारी लोक-चेतना के विविध रंग हैं।
बिरहा भोजपुरी लोक संगीत की सर्वाधिक लोकप्रिय और शक्तिशाली विधा है। यह विरह (बिछड़ने का दुख) की अभिव्यक्ति है। बिरहा में प्रेम, पलायन, वीर-रस और सामाजिक व्यंग्य का अनूठा मिश्रण होता है। बिरहा गायन में हारमोनियम, ढोलक और झाल का प्रयोग होता है। गायक घंटों बिरहा गाता है — इसमें सुधाकंठ और शारदा सिन्हा जैसे कलाकारों ने इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
सोहर पुत्र-जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला मंगलगीत है। इसमें राम जन्म, कृष्ण जन्म की पौराणिक कथाओं के साथ नवजात शिशु की खुशी का वर्णन होता है। सोहर महिलाओं द्वारा समूह में ढोलक की थाप पर गाया जाता है। यह भोजपुरी और मैथिली दोनों क्षेत्रों में प्रचलित है।
चैता चैत्र माह (मार्च-अप्रैल) में गाया जाने वाला ऋतु गीत है। इसमें श्रृंगार और भक्ति का अद्भुत मिश्रण होता है — राम और कृष्ण के जीवन-प्रसंग, प्रकृति का वर्णन और विरह की पीड़ा। रामनवमी के अवसर पर चैता गायन विशेष रूप से होता है। शारदा सिन्हा की चैती गायकी ने इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
| विधा | अवसर / विषय | क्षेत्र |
|---|---|---|
| होरी / फाग | होली — राधा-कृष्ण की होली, रंगोत्सव | भोजपुर, मिथिला |
| झूमर | शिव-पार्वती की लीला, श्रृंगार | भोजपुर |
| नचारी | शिव की स्तुति, सावन-शिवरात्रि | भोजपुर |
| कजरी | सावन की वर्षा, विरह, श्रृंगार | भोजपुर, मगध |
| बारहमासा | बारह महीनों में विरह का वर्णन | सम्पूर्ण बिहार |
| गारी | विवाह में व्यंग्य-गीत, परिहास | भोजपुर, मिथिला |
| विवाह-गीत (मँगन) | विवाह के विभिन्न अनुष्ठान | सम्पूर्ण बिहार |
| समदाउन | विदाई के समय — पुत्री का ससुराल जाना | मिथिला |
शारदा सिन्हा — बिहार की कोकिला
शारदा सिन्हा बिहार की सर्वाधिक प्रसिद्ध लोक गायिका हैं। उन्हें ‘बिहार की कोकिला’ और ‘लोकगीतों की मल्लिका’ कहा जाता है। उनकी गायकी ने भोजपुरी और मैथिली दोनों विधाओं को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई। छठ गीत, चैती, सोहर और विवाह-गीत में उनकी आवाज अद्वितीय है। उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है।
शारदा सिन्हा को पद्मभूषण प्राप्त है। वे भोजपुरी और मैथिली दोनों में गाती हैं। उनके छठ गीत (‘केलवा के पात पर’) और चैती गीत अत्यन्त प्रसिद्ध हैं। BPSC में ‘बिहार की कोकिला’ = शारदा सिन्हा — यह तथ्य सीधे पूछा जाता है।
बिहार के लोक वाद्य यंत्र
बिहार के लोक वाद्य यंत्र उसके नृत्य और संगीत की आत्मा हैं। ताल, लय और स्वर के ये उपकरण पीढ़ियों से बिहारी लोक-जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ — शहनाई के सम्राट
उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ (1916–2006) का जन्म बिहार के डुमराँव (बक्सर जिला) में हुआ था। वे शहनाई के विश्वविख्यात वादक थे। उन्हें भारत रत्न (2001), पद्मविभूषण और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता के अवसर पर लाल किले पर उन्होंने शहनाई बजाई थी। वे काशी (वाराणसी) के विश्वनाथ मंदिर से जुड़े रहे।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ का जन्म डुमराँव (बिहार) में हुआ था परन्तु उनकी कर्मभूमि वाराणसी (UP) थी। BPSC में उनका जन्म-स्थान बिहार पूछा जाता है। भारत रत्न 2001 — इसे 2001 के बजाय कोई अन्य वर्ष न लिखें।
बिहार के प्रमुख लोक कलाकार एवं उनका योगदान
बिहार की लोक कला परम्परा को जीवंत रखने में अनेक महान कलाकारों का अमूल्य योगदान है। इन कलाकारों ने न केवल बिहार बल्कि सम्पूर्ण भारत में लोक कला की पहचान बनाई।
भिखारी ठाकुर
1887–1971 | सारण
भोजपुरी नाट्य
शारदा सिन्हा
1952–2024 | समस्तीपुर
पद्मभूषण
उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ
1916–2006 | डुमराँव, बक्सर
भारत रत्न
रामचन्द्र मांझी
बिहार लोक कलाकार
बिरहा गायन
बिहार की प्रमुख लोक कला संस्थाएँ
| संस्था | स्थान | कार्य |
|---|---|---|
| बिहार संगीत नाटक अकादमी | पटना | लोक कला, संगीत, नाटक का संरक्षण एवं प्रोत्साहन |
| मिथिला सांस्कृतिक परिषद | दरभंगा | मैथिली लोक कला, संगीत, नृत्य का संवर्धन |
| भोजपुरी साहित्य परिषद | पटना/आरा | भोजपुरी लोक साहित्य एवं कला |
| बिहार राज्य संग्रहालय | पटना | लोक वाद्य, नृत्य की ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण |
बिहार की लोक कला सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम रही है। भिखारी ठाकुर ने दहेज, जाति-भेद और स्त्री-शोषण के विरुद्ध विदेसिया के माध्यम से आवाज उठाई। झरनी नृत्य हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। लोक कला की यह भूमिका Mains के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
तुलनात्मक विश्लेषण, Quick Revision एवं स्मरण सूत्र
BPSC परीक्षा की दृष्टि से बिहार के सभी प्रमुख लोक नृत्यों और संगीत विधाओं का तुलनात्मक Quick Revision यहाँ प्रस्तुत है।
| नृत्य / संगीत | क्षेत्र | अवसर | विशेषता | प्रमुख कलाकार |
|---|---|---|---|---|
| झिझिया | मिथिला | नवरात्रि, वर्षा | सिर पर दीपक-घड़ा, महिला समूह | — |
| जट-जटिन | उत्तर बिहार | सावन-भादो | युगल, पति-पत्नी की कथा | — |
| झरनी | मिथिला | मुहर्रम | हिन्दू-मुस्लिम साझा | — |
| विदेसिया | भोजपुर | सामाजिक अवसर | लोक नाट्य, पलायन-विरह | भिखारी ठाकुर |
| करमा | मगध/सीमांचल | करम पर्व | आदिवासी-लोक, रात्रि नृत्य | — |
| छऊ | अंग/झारखण्ड सीमा | चैत्र पर्व | मुखौटा नृत्य, UNESCO 2010 | — |
| बिरहा | भोजपुर | विरह/मेला | विरह+वीर रस, घंटों गायन | रामचन्द्र मांझी |
| सोहर | भोजपुर, मिथिला | पुत्र-जन्म | मंगलगीत, ढोलक सहित | शारदा सिन्हा |
| चैता | भोजपुर | चैत्र माह | ऋतु गीत, श्रृंगार-भक्ति | शारदा सिन्हा |
| शहनाई | सम्पूर्ण | मांगलिक | बिस्मिल्लाह खाँ, भारत रत्न | उ. बिस्मिल्लाह खाँ |
स्मरण सूत्र (Mnemonic)
झि – ज – झ – सा
भि – शा – बि
Quick Revision Table — परीक्षोपयोगी तथ्य
सारांश, BPSC परीक्षा बॉक्स एवं पूर्ववर्ती प्रश्न
🎯 BPSC परीक्षा — अति महत्वपूर्ण बिन्दु
झिझिया — मिथिला का लोक नृत्य। सिर पर दीपक-घड़ा। नवरात्रि/वर्षा ऋतु।
जट-जटिन — युगल नृत्य। उत्तर बिहार। वर्षा ऋतु। पति-पत्नी कथा।
भिखारी ठाकुर = भोजपुरी का शेक्सपियर = विदेसिया के जनक। सारण।
शारदा सिन्हा = बिहार की कोकिला = पद्मभूषण। समस्तीपुर।
बिस्मिल्लाह खाँ = जन्म डुमराँव (बक्सर) = भारत रत्न 2001।
बिहार की लोक कला — सामाजिक सुधार, सांप्रदायिक सौहार्द, नारी-शक्ति और पलायन की पीड़ा।
BPSC — पूर्ववर्ती एवं सम्भावित प्रश्न
प्र. 1: झिझिया नृत्य किस क्षेत्र से सम्बन्धित है?
प्र. 2: जट-जटिन नृत्य की विशेषता क्या है?
प्र. 3: ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ किसे कहा जाता है?
प्र. 4: उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ को किस वर्ष भारत रत्न मिला?
प्र. 5: झरनी नृत्य किस अवसर पर होता है और इसकी क्या विशेषता है?
प्र. 6: ‘सोहर’ लोकगीत किस अवसर पर गाया जाता है?
प्र. 7: भिखारी ठाकुर की ‘विदेसिया’ का सामाजिक महत्व बताइए।
प्र. 8: “बिहार की लोक कला केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम है।” विवेचना कीजिए। (200 शब्द)
BPSC Prelims में झिझिया (दीपक-घड़ा), जट-जटिन (युगल-वर्षा), झरनी (मुहर्रम), भिखारी ठाकुर (शेक्सपियर), शारदा सिन्हा (कोकिला), बिस्मिल्लाह खाँ (भारत रत्न 2001, डुमराँव) — ये 6 बिन्दु सर्वाधिक पूछे जाते हैं। Mains के लिए लोक कला का सामाजिक महत्व तैयार रखें। स्मरण सूत्र झि-ज-झ-सा (मिथिला) और भि-शा-बि (कलाकार) याद रखें।


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