बिहार की भाषाएँ हिंदी · मैथिली · भोजपुरी · मगही
BPSC Prelims + Mains — भाषा, साहित्य, बोलियाँ और सांस्कृतिक पहचान
परिचय एवं भाषाई विविधता
बिहार की भाषाएँ एवं बोलियाँ BPSC परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले विषयों में से एक हैं — यहाँ हिंदी, मैथिली, भोजपुरी और मगही जैसी भाषाएँ न केवल संचार का माध्यम हैं, बल्कि बिहार की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक पहचान की वाहक भी हैं।
बिहार भाषाई दृष्टि से भारत के सर्वाधिक विविध राज्यों में से एक है। राज्य की आधिकारिक राजभाषा हिंदी है, जबकि उर्दू द्वितीय राजभाषा है। इसके अतिरिक्त मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान प्राप्त है। भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका जैसी बोलियाँ करोड़ों लोगों की मातृभाषा हैं।
बिहार की प्रमुख भाषाएँ एवं उनके क्षेत्र
| # | भाषा / बोली | मुख्य क्षेत्र | भाषा परिवार | विशेष दर्जा |
|---|---|---|---|---|
| 1 | हिंदी | सम्पूर्ण बिहार | इंडो-आर्यन | राजभाषा |
| 2 | मैथिली | उत्तर बिहार (मिथिला) | इंडो-आर्यन | 8वीं अनुसूची |
| 3 | भोजपुरी | पश्चिम बिहार, पूर्वी UP | इंडो-आर्यन | — |
| 4 | मगही | मगध क्षेत्र (पटना, गया, नालंदा) | इंडो-आर्यन | — |
| 5 | अंगिका | भागलपुर, बाँका, मुंगेर | इंडो-आर्यन | — |
| 6 | बज्जिका | उत्तरी बिहार (वैशाली, मुजफ्फरपुर) | इंडो-आर्यन | — |
हिंदी — बिहार की राजभाषा
हिंदी बिहार की संवैधानिक राजभाषा है। 1881 में बिहार देश का पहला राज्य बना जिसने उर्दू की जगह हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया — यह भारतीय भाषा-आंदोलन का एक ऐतिहासिक मोड़ था।
बिहार में हिंदी के प्रसार में अनेक साहित्यकारों और समाजसुधारकों का योगदान रहा है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव से थे। उनकी रचना ‘उर्वशी’ को 1972 में ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला। इसी प्रकार फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ (अररिया) ने ‘मैला आँचल’ (1954) लिखी जो बिहारी ग्रामीण जीवन का अमर चित्रण है।
रामधारी सिंह ‘दिनकर’
1908–1974फणीश्वरनाथ ‘रेणु’
1921–1977बाबू कुँवर सिंह / भारतेंदु प्रभाव
19वीं सदीनागार्जुन
1911–19981881 का ऐतिहासिक निर्णय — हिंदी को राजभाषा
1881 में तत्कालीन लेफ्टिनेंट-गवर्नर सर एशले ईडन के कार्यकाल में बिहार ने उर्दू के स्थान पर हिंदी (देवनागरी लिपि) को न्यायालयों और प्रशासन की भाषा बनाया। यह निर्णय देश में सबसे पहले बिहार में हुआ। इस आंदोलन का नेतृत्व बाबू शिवप्रसाद ‘सितारे हिन्द’ और अन्य समाजसुधारकों ने किया था।
मैथिली — संविधान-मान्य भाषा एवं मिथिला की आत्मा
मैथिली बिहार के उत्तरी भाग — मिथिला क्षेत्र — की भाषा है। 92वें संविधान संशोधन (2003) द्वारा इसे आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया, जिससे यह भारत की 22वीं राजभाषा बनी। यह बिहार के साथ-साथ झारखण्ड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में भी बोली जाती है।
मैथिली साहित्य का इतिहास
मैथिली का साहित्यिक इतिहास अत्यंत समृद्ध है। विद्यापति (1350-1448) मैथिली के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उनकी रचनाएँ — जिन्हें ‘पदावली’ कहा जाता है — राधा-कृष्ण की भक्ति से ओत-प्रोत हैं। विद्यापति को ‘मैथिल कोकिल’ और ‘अभिनव जयदेव’ कहा जाता है। उनकी कविताएँ बंगाल के वैष्णव आंदोलन पर भी गहरा प्रभाव डाला।
मिथिलाक्षर / तिरहुता लिपि
मैथिली की प्राचीन लिपि मिथिलाक्षर (जिसे तिरहुता भी कहते हैं) है। यह लिपि ब्राह्मी लिपि से विकसित हुई। यह पांडुलिपियों, शिलालेखों और पारंपरिक दस्तावेजों में प्रयुक्त होती थी। वर्तमान में मैथिली मुख्यतः देवनागरी लिपि में लिखी जाती है, परन्तु मिथिलाक्षर को पुनर्जीवित करने के प्रयास जारी हैं।
भोजपुरी — लोक जीवन की भाषा
भोजपुरी बिहार के पश्चिमी जिलों — सारण, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास तथा उत्तर प्रदेश के पूर्वी जिलों में बोली जाती है। विश्व में लगभग 8-10 करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं, जिनमें मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम और त्रिनिदाद में भारतीय मूल के लोग भी शामिल हैं।
भोजपुरी का नाम भोजपुर (आरा, बिहार) से पड़ा। यह भाषा अपने लोकगीतों, लोककथाओं और जीवंत लोक-संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। भोजपुरी के प्रमुख लोकगीतों में सोहर (जन्म), गारी (विवाह), चैता, बिरहा, झूमर आदि हैं।
भोजपुरी लोक संस्कृति — प्रमुख विधाएँ
भिखारी ठाकुर — भोजपुरी के शेक्सपियर
भिखारी ठाकुर (1887–1971) भोजपुरी के सर्वश्रेष्ठ नाटककार, गायक और कवि थे। उनका जन्म सारण जिले के कुतुबपुर में हुआ था। उन्हें ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ और ‘भरत मुनि’ कहा जाता है। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं: बिदेसिया, गबरघिचोर, बेटी बियोग, बिधवा विलाप। ‘बिदेसिया’ में परदेसी पति की अनुपस्थिति में स्त्री की पीड़ा का हृदयस्पर्शी चित्रण है।
मगही — मगध की ऐतिहासिक भाषा
मगही बिहार के मगध क्षेत्र — पटना, गया, नालंदा, जहानाबाद, अरवल, नवादा आदि जिलों — की मातृभाषा है। यह मगधी प्राकृत से विकसित हुई है — वही भाषा जिसमें महात्मा बुद्ध और महावीर ने अपने उपदेश दिये थे।
मगही की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऐतिहासिक महत्व है। अशोक के शिलालेख मगधी प्राकृत में लिखे गये थे। बौद्ध और जैन धर्म के मूल ग्रन्थ भी इसी भाषा में हैं। परन्तु आज मगही को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिला है, जो इसके वक्ताओं की एक प्रमुख माँग है।
मगही और मगधी प्राकृत का सम्बन्ध
मगही साहित्य एवं प्रमुख रचनाकार
मगही साहित्य की लम्बी परम्परा है। योगेश्वर प्रसाद सिंह ‘योगेश’ को मगही का पहला उपन्यासकार माना जाता है। मगही कविता, कहानी और लोकगीतों में मगध की ऐतिहासिक विरासत और ग्रामीण जीवन का चित्रण मिलता है। मगही के लोकगीतों में ‘बेटी की विदाई’, ‘बारहमासा’ आदि विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
मगधी प्राकृत से विकसित — बौद्ध, जैन धर्म और मौर्य साम्राज्य की भाषाई विरासत।
पटना, गया, नालंदा, जहानाबाद, अरवल, नवादा — मगध का मूल भूभाग।
मगही लोकगीत, कहावतें (लोकोक्तियाँ) और लोककथाएँ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत।
8वीं अनुसूची से बाहर। सरकारी संरक्षण का अभाव — डिजिटल और शैक्षणिक माध्यम में प्रयास जारी।
अन्य बोलियाँ — अंगिका, बज्जिका एवं उर्दू
बिहार की भाषाई विविधता में हिंदी, मैथिली, भोजपुरी और मगही के अलावा अंगिका, बज्जिका और उर्दू भी महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। उर्दू बिहार की द्वितीय राजभाषा है और अल्पसंख्यक समुदायों में व्यापक रूप से बोली जाती है।
अंगिका बिहार के पूर्वी भाग — भागलपुर, बाँका, मुंगेर, खगड़िया तथा झारखण्ड के कुछ जिलों में बोली जाती है। यह अंग महाजनपद (महाभारत कालीन) की भाषाई उत्तराधिकारी है — कर्ण का राज्य अंग प्रदेश ही था। इसे ‘छिका-छिकी’ भी कहते हैं। अंगिका को भी आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग है।
- बोली जाने वाले जिले: भागलपुर, बाँका, मुंगेर, खगड़िया, सहरसा
- ऐतिहासिक सम्बन्ध: अंग महाजनपद — कर्ण की राजधानी चम्पा (वर्तमान भागलपुर)
- साहित्य: अंगिका साहित्य परिषद द्वारा साहित्यिक गतिविधियाँ
- लिपि: देवनागरी (मुख्यतः)
बज्जिका उत्तरी बिहार के वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, चम्पारण जिलों में बोली जाती है। इसका नाम वज्जि महाजनपद से आया है जो विश्व के पहले गणराज्यों में से एक था। बज्जिका कभी-कभी मैथिली और भोजपुरी के बीच की बोली मानी जाती है।
- वज्जि महाजनपद — विश्व के प्रथम गणतंत्रों में से एक (6ठी शताब्दी ईपू)
- प्रमुख क्षेत्र: वैशाली, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर
- विशेषता: मैथिली और भोजपुरी के शब्द-भण्डार का मिश्रण
उर्दू बिहार की द्वितीय राजभाषा है। यह मुस्लिम बहुल क्षेत्रों तथा अल्पसंख्यक समुदायों में विशेष रूप से बोली जाती है। उर्दू साहित्य, शायरी और मदरसा शिक्षा में इसका विशेष महत्व है। बिहार में उर्दू अकादमी भी स्थापित है जो उर्दू भाषा और साहित्य के संरक्षण के लिए कार्य करती है।
तुलनात्मक विश्लेषण एवं स्मरण सूत्र
BPSC परीक्षा में बिहार की भाषाओं की तुलनात्मक जानकारी अत्यंत उपयोगी है। निम्नलिखित तालिका में सभी प्रमुख भाषाओं के मुख्य बिन्दु एक साथ दिये गये हैं।
| भाषा | प्रमुख क्षेत्र | 8वीं अनुसूची | प्रमुख साहित्यकार | प्रमुख कृति / विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| हिंदी | सम्पूर्ण बिहार | राजभाषा | दिनकर, रेणु, नागार्जुन | उर्वशी (ज्ञानपीठ 1972), मैला आँचल |
| मैथिली | मिथिला (उत्तर बिहार) | हाँ (2003) | विद्यापति, नागार्जुन | पदावली, तिरहुता लिपि |
| भोजपुरी | पश्चिम बिहार, पूर्वी UP | नहीं | भिखारी ठाकुर | बिदेसिया, बिरहा, सोहर |
| मगही | पटना, गया, नालंदा | नहीं | योगेश्वर प्रसाद सिंह | मगधी प्राकृत से विकसित |
| अंगिका | भागलपुर, बाँका | नहीं | — | अंग महाजनपद — कर्ण का राज्य |
| बज्जिका | वैशाली, मुजफ्फरपुर | नहीं | — | वज्जि महाजनपद से नाम |
| उर्दू | सम्पूर्ण बिहार | द्वितीय राजभाषा | — | अल्पसंख्यक समुदाय, मदरसा |


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