बिहार का पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिक महत्व — जैव विविधता
बिहार की जैव विविधता BPSC परीक्षा का एक महत्वपूर्ण खंड है — वन्यजीव अभयारण्यों से लेकर आर्द्रभूमि तक, यह लेख परीक्षा-उपयोगी तथ्यों का संपूर्ण संकलन प्रस्तुत करता है।
परिचय एवं भौगोलिक संदर्भ
बिहार का पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिक महत्व BPSC परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है — गंगा के उपजाऊ मैदान से लेकर हिमालय की तलहटी (तराई) तक फैला यह राज्य अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए जाना जाता है।
बिहार 94,163 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह राज्य उत्तर में हिमालय की तराई, पूर्व में गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान, दक्षिण में छोटानागपुर पठार की सीमा और पश्चिम में गंगा के मैदानों से घिरा है। इस भौगोलिक विविधता के कारण यहाँ तीन प्रमुख Ecosystem पाए जाते हैं — वन तंत्र (Forest Ecosystem), आर्द्रभूमि तंत्र (Wetland Ecosystem) और कृषि तंत्र (Agro-Ecosystem)।
बिहार में जैव विविधता का महत्व क्यों?
- तराई का अनूठापन: उत्तरी बिहार की तराई पट्टी हिमालयी और मैदानी प्रजातियों का मिलन-बिंदु है, जहाँ दुर्लभ बाघ, गैंडा और हाथी पाए जाते हैं।
- गंगा का महत्व: गंगा नदी डॉल्फिन, घड़ियाल और सैकड़ों मछली प्रजातियों का आवास है — यह Biodiversity Hotspot की भूमिका निभाती है।
- Agro-biodiversity: बिहार में मखाना, मधुमक्खी पालन और सीधी बुवाई धान जैसी अनूठी कृषि विविधता मिलती है।
- प्रवासी पक्षियों का ठिकाना: काँवर झील और नागी-नकटी जलाशय हजारों प्रवासी पक्षियों को शीतकाल में आश्रय देते हैं।
- औषधीय पादप भंडार: वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान सहित दक्षिण बिहार के वनों में 200 से अधिक औषधीय पौधे पाए जाते हैं।
बिहार के वन — प्रकार एवं वितरण
बिहार में कुल वन क्षेत्र राज्य के भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 7.27% है, जो राष्ट्रीय लक्ष्य 33% से काफी कम है। राज्य के वनों का अधिकांश भाग दक्षिण बिहार (रोहतास, कैमूर, गया, नवादा, जमुई, मुंगेर) तथा उत्तर-पश्चिम बिहार (पश्चिमी चंपारण) में स्थित है।
भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India — FSI) के अनुसार बिहार में वन आवरण को तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है: सघन वन (Dense Forest), खुला वन (Open Forest), और झाड़ी-वन (Scrub)। राज्य में वनों का वर्गीकरण Champion and Seth की प्रणाली पर आधारित है।
| वन प्रकार | स्थानीय नाम | प्रमुख क्षेत्र | मुख्य वृक्ष प्रजातियाँ |
|---|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय आर्द्र पर्णपाती वन Tropical Moist Deciduous | साल-सागौन वन | पश्चिमी चंपारण, गया | साल (Shorea robusta), सागौन, असना, शीशम |
| उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन Tropical Dry Deciduous | मिश्रित पर्णपाती वन | रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद | अमलतास, पलाश, तेंदू, महुआ, बहेड़ा |
| उष्णकटिबंधीय काँटेदार वन Tropical Thorn Forest | झाड़-झंखाड़ वन | कैमूर, रोहतास (शुष्क क्षेत्र) | बबूल, खेजड़ी, बेर, करील |
| तराई वन Terai Forests | भावर-तराई वन | पश्चिमी चंपारण (वाल्मीकि) | खैर, सिसू, साल, सेमल, गम्हार |
| बाँस वन Bamboo Forests | बाँस-झुण्ड | जमुई, बाँका, मुंगेर | बाँस (Bambusa spp.), बेंत |
जिलेवार वन आवरण — प्रमुख तथ्य
बिहार में कैमूर जिला सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला जिला है। रोहतास, पश्चिमी चंपारण, गया, नवादा और जमुई जिलों में भी महत्वपूर्ण वन क्षेत्र मौजूद है। उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों में वन क्षेत्र नगण्य है क्योंकि वहाँ गहन कृषि होती है।
वन्यजीव अभयारण्य एवं संरक्षित क्षेत्र
बिहार में 1 राष्ट्रीय उद्यान, 13 वन्यजीव अभयारण्य और 1 टाइगर रिजर्व स्थित हैं। वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व है, जो नेपाल के चितवन राष्ट्रीय उद्यान से सटा हुआ है।
| # | अभयारण्य / संरक्षित क्षेत्र | जिला | क्षेत्रफल (km²) | प्रमुख वन्यजीव / विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| 1 | वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान (Tiger Reserve) | पश्चिमी चंपारण | 898.45 | बाघ, हाथी, गैंडा (कभी-कभी), तेंदुआ, हिरण |
| 2 | वाल्मीकि वन्यजीव अभयारण्य | पश्चिमी चंपारण | 545.15 | बाघ, तेंदुआ, जंगली सुअर, हिरण |
| 3 | गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य | गया | 138.85 | तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल |
| 4 | राजगीर वन्यजीव अभयारण्य | नालंदा | 35.84 | तेंदुआ, भालू, सांभर, खरगोश |
| 5 | उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य | पश्चिमी चंपारण | 8.87 | हिरण, खरगोश, पक्षी |
| 6 | भीमबाँध वन्यजीव अभयारण्य | मुंगेर | 681.99 | तेंदुआ, भालू, सांभर, गर्म जल स्रोत |
| 7 | काँवर झील (पक्षी विहार) | बेगूसराय | 67.50 | एशिया की सबसे बड़ी ताजे पानी की ऑक्सबो झील, प्रवासी पक्षी |
| 8 | नागी पक्षी अभयारण्य | जमुई | 1.91 | प्रवासी पक्षी — Greylag Goose, Pintail |
| 9 | नकटी पक्षी अभयारण्य | जमुई | 3.33 | जलीय पक्षी, प्रवासी बत्तख |
| 10 | पंत (रजौली) वन्यजीव अभयारण्य | नवादा | 35.87 | तेंदुआ, भेड़िया, सांभर |
| 11 | कैमूर वन्यजीव अभयारण्य | कैमूर, रोहतास | 1342 (सबसे बड़ा) | भेड़िया, तेंदुआ, चीतल, जंगली बिल्ली, मुर्गा |
| 12 | विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य | भागलपुर | 60 km (river stretch) | गांगेय डॉल्फिन (राष्ट्रीय जलीय पशु) |
| 13 | बरेला साल्हा पक्षी विहार | वैशाली | — | साइबेरियन पक्षी, प्रवासी जलपक्षी |
कैमूर वन्यजीव अभयारण्य — विशेष महत्व
कैमूर वन्यजीव अभयारण्य बिहार का सबसे बड़ा अभयारण्य है (लगभग 1342 km²) जो कैमूर और रोहतास जिलों में फैला है। यह विंध्य पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। यहाँ कर्मनाशा और दुर्गावती नदियाँ बहती हैं। भविष्य में इसे दूसरा Tiger Reserve बनाने की योजना है।
वनस्पति विविधता (Flora)
बिहार की वनस्पति विविधता अत्यंत समृद्ध है — यहाँ साल, सागौन, तेंदू, महुआ, पलाश जैसे आर्थिक महत्व के वृक्षों के साथ-साथ दुर्लभ औषधीय पौधे, जलीय वनस्पति और तराई की विशेष वनस्पति पाई जाती है।
- साल (Shorea robusta) — सर्वाधिक पाया जाने वाला वृक्ष
- सागौन (Tectona grandis) — मूल्यवान इमारती लकड़ी
- शीशम (Dalbergia sissoo) — फर्नीचर हेतु
- महुआ (Madhuca longifolia) — आदिवासी समुदाय का जीवनाधार
- तेंदू (Diospyros melanoxylon) — बीड़ी पत्ता उद्योग
- पलाश (Butea monosperma) — “वन की अग्नि”, होली रंग
- अश्वगंधा (Withania somnifera) — तनाव निवारक
- गुड़मार (Gymnema sylvestre) — मधुमेह
- सर्पगंधा (Rauvolfia serpentina) — BP नियंत्रण
- कालमेघ (Andrographis paniculata) — ज्वरनाशक
- शतावरी (Asparagus racemosus) — महिला स्वास्थ्य
- सफेद मूसली (Chlorophytum borivilianum) — पोषण
मखाना (Euryale ferox) — बिहार की अनूठी जैव-संपदा
बिहार विश्व के 85-90% मखाने का उत्पादन करता है। मखाना (Fox Nut / Gorgon Plant) एक जलीय पौधा है जो उथले जलाशयों, तालाबों और झीलों में उगता है। दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, पूर्णिया जिले मखाना उत्पादन के मुख्य केंद्र हैं। वर्ष 2023 में मखाने को GI Tag (Geographical Indication) प्रदान किया गया।
- मखाना (Euryale ferox): GI Tag प्राप्त, विश्व उत्पादन का 90% बिहार में
- कतरनी चावल: भागलपुर का GI Tagged बासमती जैसा चावल
- जर्दालु आम: भागलपुर का GI Tagged विशेष आम
- शाही लीची: मुजफ्फरपुर की GI Tagged विश्वप्रसिद्ध लीची
- मगही पान: नालंदा का GI Tagged पान, Piper betle की विशेष किस्म
जलीय वनस्पति (Aquatic Flora)
बिहार की झीलों, नदियों और तालाबों में विविध जलीय वनस्पति पाई जाती है। कमल (Nelumbo nucifera) — भारत का राष्ट्रीय पुष्प — बिहार की झीलों में प्रचुर मात्रा में मिलता है। इसके अलावा जल-कुंभी (Water Hyacinth), हाइड्रिला, वॉटर चेस्टनट, नल-नरकुल आदि प्रमुख जलीय वनस्पतियाँ हैं। काँवर झील और अनुगंगा (Oxbow Lakes) में ये प्रचुरता से मिलती हैं।
जीव-जंतु विविधता (Fauna)
बिहार की जीव-जंतु विविधता में स्तनपायी, पक्षी, सरीसृप, उभयचर और मछलियाँ शामिल हैं। बाघ, हाथी, गांगेय डॉल्फिन और सैकड़ों प्रवासी पक्षी इस राज्य की पहचान हैं।
🐅 बाघ (Bengal Tiger)
Panthera tigris tigris🐬 गांगेय डॉल्फिन
Platanista gangetica🐘 एशियाई हाथी
Elephas maximus🦅 सारस क्रेन
Grus antigoneबिहार के प्रमुख स्तनपायी जीव
| जीव | वैज्ञानिक नाम | IUCN Status | प्रमुख आवास |
|---|---|---|---|
| बाघ | Panthera tigris tigris | Endangered | वाल्मीकि Tiger Reserve |
| हाथी | Elephas maximus | Endangered | वाल्मीकि, कैमूर |
| तेंदुआ | Panthera pardus | Vulnerable | कैमूर, गौतम बुद्ध, वाल्मीकि |
| गांगेय डॉल्फिन | Platanista gangetica | Endangered | गंगा नदी, भागलपुर |
| घड़ियाल | Gavialis gangeticus | Critically Endangered | गंडक, गंगा नदी |
| भालू (Sloth Bear) | Melursus ursinus | Vulnerable | कैमूर, राजगीर, गौतम बुद्ध |
| सांभर | Rusa unicolor | Vulnerable | कैमूर, वाल्मीकि, भीमबाँध |
| चीतल | Axis axis | Least Concern | वाल्मीकि, कैमूर |
पक्षी विविधता (Avifauna)
बिहार में 300 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमें स्थानीय और प्रवासी दोनों शामिल हैं। बिहार का राज्य पक्षी गौरैया (House Sparrow) है। काँवर झील, नागी-नकटी जलाशय और गंगा के दियारा क्षेत्र प्रमुख Bird Watching Zones हैं।
- Bar-headed Goose — तिब्बत से
- Greylag Goose — मध्य एशिया से
- Pintail Duck — साइबेरिया से
- Ruddy Shelduck — मंगोलिया से
- Common Teal — उत्तरी एशिया से
- गौरैया — राज्य पक्षी
- सारस क्रेन — विश्व का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी
- Lesser Adjutant Stork — दुर्लभ
- Black-necked Stork — दुर्लभ
- Indian Skimmer — गंगा की विशेष प्रजाति
आर्द्रभूमि एवं जलीय जैव विविधता
बिहार में आर्द्रभूमियाँ (Wetlands) जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। राज्य में 3 Ramsar Sites, सैकड़ों ताल-तलैया और गंगा की Oxbow झीलें (चाप झीलें) लाखों पक्षियों, मछलियों और जलीय जीवों का घर हैं।
बिहार के Ramsar स्थल
क्षेत्र: 6786 हेक्टेयर
Ramsar: 2020 में घोषित
एशिया की सबसे बड़ी ताजे पानी की Oxbow/Residual झील। हजारों प्रवासी पक्षियों का शीतकालीन निवास।
क्षेत्र: 1991 हेक्टेयर
Ramsar: 2022 में घोषित
भारत का पहला जलाशय जो Ramsar Site बना। Bar-headed Goose का प्रमुख शीतकालीन आश्रय।
क्षेत्र: 3332 हेक्टेयर
Ramsar: 2022 में घोषित
नागी के साथ एक साथ Ramsar Site का दर्जा प्राप्त। प्रवासी बत्तखों का महत्वपूर्ण पड़ाव।
गंगा नदी — जैव विविधता का केंद्र
गंगा नदी बिहार से होकर लगभग 445 किमी की यात्रा करती है। यह नदी भारत की सबसे महत्वपूर्ण Riverine Ecosystem है। गंगा में 160 से अधिक मछली प्रजातियाँ, गांगेय डॉल्फिन, घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए और अनगिनत जलीय कीट पाए जाते हैं।
मखाना उत्पादन एवं जलीय पारिस्थितिकी
बिहार की आर्द्रभूमियाँ न केवल जैव विविधता के लिए बल्कि मखाना उत्पादन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। मखाना की खेती उथले तालाबों, झीलों और ऑक्सबो झीलों में होती है। यह न केवल Agro-biodiversity बल्कि Wetland Ecosystem Services का उत्कृष्ट उदाहरण है।
जैव विविधता पर खतरे एवं संरक्षण प्रयास
बिहार की जैव विविधता पर वनों की कटाई, अतिक्रमण, जल प्रदूषण, अवैध शिकार और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरे मंडरा रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
प्रमुख खतरे
जनसंख्या वृद्धि, कृषि विस्तार और ईंधन की माँग के कारण वन क्षेत्र में लगातार कमी आ रही है। बिहार का वन आवरण राष्ट्रीय लक्ष्य से बहुत कम है।
गंगा और उसकी सहायक नदियों में औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट का प्रवाह जलीय जैव विविधता को भारी नुकसान पहुँचा रहा है। डॉल्फिन और घड़ियाल की संख्या घट रही है।
बाघ, तेंदुआ, हाथी और डॉल्फिन जैसे वन्यजीवों का अवैध शिकार एक गंभीर समस्या है। अंग-तस्करी और खाल के लिए शिकार जारी है।
उत्तर बिहार में वार्षिक बाढ़ आर्द्रभूमियों को प्रभावित करती है। नदी के बदलते रुख से डॉल्फिन के आवास क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं।
तापमान वृद्धि और वर्षा पैटर्न में बदलाव से प्रवासी पक्षियों की आने की तिथियाँ बदल रही हैं, वनस्पति फूलने का समय प्रभावित हो रहा है।
सड़क, रेल और बाँध निर्माण से वन्यजीवों के आवास खंडित हो रहे हैं। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
संरक्षण प्रयास एवं सरकारी योजनाएँ
केंद्र सरकार की प्रमुख बाघ संरक्षण योजना। बिहार का वाल्मीकि Tiger Reserve इस प्रोजेक्ट के तहत 1990 से संरक्षित है। Project Tiger के तहत Core Zone और Buffer Zone की अवधारणा लागू है। NTCA (National Tiger Conservation Authority) इसका नोडल निकाय है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 में Project Dolphin की घोषणा की। इसका उद्देश्य गांगेय डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों का संरक्षण है। बिहार में विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य इस प्रोजेक्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Namami Gange Programme (2014) गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने और उसके Ecosystem को पुनर्स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना है। बिहार में पटना, मुंगेर, भागलपुर सहित कई शहरों में Sewage Treatment Plants (STP) स्थापित किए जा रहे हैं।
बिहार सरकार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान (2019) के तहत व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया है। इस योजना में तालाबों का जीर्णोद्धार, सौर ऊर्जा का उपयोग और जल संरक्षण को एकीकृत किया गया है। लक्ष्य है — 2024 तक बिहार का वन आवरण 17% करना।
2022 में नागी और नकटी को Ramsar Site घोषित करने के बाद इनके संरक्षण के लिए विशेष प्रबंधन योजना बनाई गई है। प्रवासी पक्षियों के अनुकूल आवास बनाए रखने के लिए जल स्तर का नियंत्रण, मछली पकड़ने पर प्रतिबंध और Eco-tourism का विकास किया जा रहा है।
- हाथी-मानव संघर्ष: वाल्मीकि क्षेत्र में हाथी अक्सर गाँवों में प्रवेश कर फसलें नष्ट करते हैं और कभी-कभी मानव हानि होती है।
- बाघ-मानव संघर्ष: बफर जोन के गाँवों में बाघ हमले की घटनाएँ होती हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण के प्रति स्थानीय विरोध पैदा होता है।
- समाधान: Community Forest Rights, Eco-development Committees, और Compensation Scheme से संघर्ष को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
सारांश, स्मृति-सूत्र एवं परीक्षा प्रश्न
🧠 स्मृति-सूत्र — बिहार के प्रमुख अभयारण्य
📌 BPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
⚡ त्वरित पुनरावलोकन तालिका
निष्कर्ष
बिहार की जैव विविधता — बाघ से लेकर डॉल्फिन तक, मखाने से लेकर साल के वनों तक — अत्यंत समृद्ध और परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। राज्य का वन आवरण भले ही कम है, लेकिन वाल्मीकि Tiger Reserve, Ramsar Sites और विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य जैसे संरक्षित क्षेत्र यहाँ की जैव विविधता को जीवित रखे हुए हैं। BPSC उम्मीदवारों को इस विषय के तथ्यात्मक पहलुओं (Prelims) के साथ-साथ विश्लेषणात्मक पहलुओं (Mains) पर भी ध्यान देना चाहिए।


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