बिहार की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
— अक्षांश (Latitude)
अक्षांश किस प्रकार बिहार के तापमान, ऋतु-चक्र और सौर विकिरण को निर्धारित करता है — BPSC परीक्षा की दृष्टि से सम्पूर्ण विश्लेषण
परिचय — अक्षांश क्या है और यह जलवायु को क्यों प्रभावित करता है?
बिहार की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों में अक्षांश (Latitude) सबसे मूलभूत और प्राथमिक कारक है, क्योंकि यह किसी स्थान पर पड़ने वाली सूर्य की ऊर्जा की मात्रा और कोण को सीधे नियंत्रित करता है — यही BPSC परीक्षा में इस विषय का केन्द्रीय बिन्दु है।
पृथ्वी एक गोलाकार पिण्ड है। भूमध्य रेखा (Equator) को 0° अक्षांश कहते हैं और उत्तरी ध्रुव को 90° उत्तरी अक्षांश। किसी भी स्थान का अक्षांश यह बताता है कि वह स्थान भूमध्य रेखा से कितने डिग्री उत्तर या दक्षिण में स्थित है। अक्षांश रेखाएँ पूर्व से पश्चिम की ओर खींची जाती हैं और इन्हें समानांतर रेखाएँ (Parallels) भी कहा जाता है।
अक्षांश जलवायु को कैसे प्रभावित करता है — मूल सिद्धान्त
जब सूर्य की किरणें किसी स्थान पर लम्बवत् (90° के कोण पर) पड़ती हैं, तो एक निश्चित क्षेत्रफल पर ऊर्जा की अधिकतम मात्रा केन्द्रित होती है। परन्तु जैसे-जैसे अक्षांश बढ़ता है, किरणें तिरछी होती जाती हैं और एक ही मात्रा की सौर ऊर्जा अधिक बड़े क्षेत्र पर फैल जाती है — फलतः प्रति इकाई क्षेत्रफल पर प्राप्त ऊष्मा घट जाती है। इसी कारण भूमध्यरेखीय क्षेत्र सबसे गर्म और ध्रुवीय क्षेत्र सबसे ठण्डे होते हैं।
बिहार की अक्षांशीय स्थिति — विस्तार और भौगोलिक संदर्भ
बिहार राज्य 24°20’10” उत्तरी अक्षांश से 27°31’15” उत्तरी अक्षांश तथा 83°19’50” पूर्वी देशांतर से 88°17’40” पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है। यह स्थिति इसे उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु प्रदान करती है।
| 1 भौगोलिक तथ्य | मान / विवरण | महत्व |
|---|---|---|
| दक्षिणतम बिन्दु | 24°20’10” उत्तरी अक्षांश | कर्क रेखा के निकट, अधिकतम ऊष्मा प्राप्ति |
| उत्तरतम बिन्दु | 27°31’15” उत्तरी अक्षांश | नेपाल सीमा के पास, शीत ऋतु में अधिक ठण्ड |
| कुल अक्षांशीय विस्तार | लगभग 3°11′ (≈ 350 km उत्तर-दक्षिण) | उत्तर-दक्षिण तापमान प्रवणता |
| कर्क रेखा | 23.5°N — बिहार से दक्षिण में | बिहार उष्ण-आर्द्र (Tropical Humid) क्षेत्र में |
| जलवायु वर्ग (Köppen) | Cwa — Humid Subtropical / Aw | मानसूनी वर्षा, गर्म ग्रीष्म, शीत ऋतु में ठण्ड |
समीपवर्ती राज्यों से तुलनात्मक स्थिति
बिहार की अक्षांशीय स्थिति को समझने के लिए इसके पड़ोसी राज्यों से तुलना उपयोगी है। झारखण्ड (22°–25°N) बिहार से दक्षिण में होने के कारण कुछ अधिक उष्ण रहता है। उत्तर प्रदेश (23.5°–30.4°N) का अक्षांशीय विस्तार बिहार से अधिक है, जिससे UP में जलवायु की अधिक विविधता पाई जाती है। पश्चिम बंगाल (21.5°–27°N) की स्थिति बिहार के समान है, परन्तु समुद्र की निकटता के कारण वहाँ आर्द्रता अधिक रहती है। इस प्रकार बिहार अन्य राज्यों की तुलना में एक विशिष्ट अक्षांशीय स्थिति में है जो इसे महाद्वीपीय प्रभाव प्रदान करती है।
अक्षांश और सौर विकिरण — ऊर्जा का कोण और मात्रा
अक्षांश का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव यह है कि यह सूर्य की किरणों के पतन-कोण (Angle of Incidence) और दिन की लम्बाई (Duration of Sunshine) को नियंत्रित करता है — ये दोनों मिलकर किसी स्थान पर प्राप्त होने वाली कुल सौर ऊर्जा का निर्धारण करते हैं।
सूर्य का उदग्र कोण (Solar Angle) — बिहार के संदर्भ में
बिहार में सूर्य का मध्याह्नकालीन कोण (Solar Noon Angle) ऋतु के अनुसार बदलता रहता है। ग्रीष्म संक्रान्ति (21 जून) को, जब सूर्य कर्क रेखा (23.5°N) पर लम्बवत् होता है, पटना (25.6°N) पर यह कोण 87.9° के लगभग होता है — अर्थात् लगभग पूर्णतः लम्बवत्। इस स्थिति में सौर ऊर्जा अत्यंत सघन रूप में पड़ती है जिससे तापमान अत्यधिक हो जाता है।
Insolation (आगमी सौर विकिरण) — अक्षांश का प्रभाव
किसी स्थान पर प्रति इकाई क्षेत्रफल प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा को Insolation कहते हैं। बिहार में सूर्य-कोण का उच्च मान होने के कारण Insolation की मात्रा वर्ष भर अपेक्षाकृत अधिक रहती है। इसी के फलस्वरूप बिहार में ग्रीष्म ऋतु लम्बी और तीव्र होती है। यदि बिहार की अक्षांशीय स्थिति 10° और उत्तर में होती, तो Insolation कम होती और जलवायु शीतल होती।
अक्षांश और तापमान — बिहार में तापमान का वितरण
बिहार के अक्षांशीय विस्तार के कारण राज्य के उत्तरी और दक्षिणी भागों में तापमान में स्पष्ट अंतर पाया जाता है, जो मुख्यतः सूर्य के बदलते कोण और दिन की लम्बाई में अंतर के कारण होता है।
| ऋतु | उत्तरी बिहार (27°N) | मध्य बिहार / पटना (25.6°N) | दक्षिणी बिहार (24°N) | अक्षांश का प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| ग्रीष्म (मई-जून) | 38–42°C | 40–44°C | 42–46°C (लू) | कम अक्षांश → अधिक गर्म |
| वर्षा (जुलाई-सितम्बर) | 28–32°C | 30–34°C | 30–34°C | अंतर कम (बादल समान करते हैं) |
| शीत (दिसम्बर-जनवरी) | 5–8°C (न्यूनतम) | 8–12°C | 10–14°C | अधिक अक्षांश → अधिक ठण्ड |
| वार्षिक औसत | ~24°C | ~25–26°C | ~26–27°C | दक्षिण → उत्तर तापमान घटता है |
तापमान प्रवणता (Temperature Gradient)
बिहार में उत्तर से दक्षिण की ओर लगभग 3° अक्षांश का अंतर है। सामान्यतः प्रत्येक 1° अक्षांश बढ़ने पर तापमान लगभग 0.5–1°C घट जाता है (अन्य कारक समान रहने पर)। अतः बिहार में उत्तर-दक्षिण तापमान प्रवणता लगभग 2–3°C की है। यह अंतर गर्मियों में अधिक स्पष्ट होता है जब दक्षिणी बिहार में लू चलती है परन्तु उत्तरी बिहार में हिमालय की शीतल हवाओं का प्रभाव रहता है।
बिहार का अक्षांश कम होने से ग्रीष्म में सूर्य लगभग लम्बवत् होता है → Insolation अधिक → तापमान 45°C तक। यही अक्षांश की भूमिका है।
शीत में सूर्य मकर रेखा पर होता है → बिहार में कोण मात्र 41° → Insolation न्यूनतम + पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) → शीत तरंगें।
अक्षांश के कारण बिहार में ग्रीष्म में ~14 घंटे व शीत में ~10 घंटे दिन होता है। लम्बे दिन → अधिक गर्मी, छोटे दिन → कम गर्मी।
मई-जून में दक्षिणी बिहार (24-25°N) में तापमान 45-48°C तक पहुँचता है। कम अक्षांश + थार मरुस्थल से आने वाली शुष्क हवाएँ → लू।
अक्षांश और ऋतु-चक्र — बिहार की तीन प्रमुख ऋतुएँ
बिहार की अक्षांशीय स्थिति के कारण यहाँ मुख्यतः तीन ऋतुएँ — ग्रीष्म, वर्षा (मानसून), और शीत — स्पष्ट रूप से अनुभव होती हैं। प्रत्येक ऋतु का मूल कारण पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के साथ अक्षांश की अन्तःक्रिया है।
मार्च से जून तक सूर्य उत्तरायण (Northward movement) करता है और कर्क रेखा की ओर बढ़ता है। चूँकि बिहार कर्क रेखा के उत्तर में मात्र 1–4° की दूरी पर है, सूर्य की किरणें लगभग लम्बवत् पड़ती हैं। इसके परिणामस्वरूप:
- मई में पटना का औसत अधिकतम तापमान 40–42°C तक पहुँच जाता है।
- दक्षिणी बिहार (गया, औरंगाबाद, नवादा) में 45–48°C तापमान रिकॉर्ड होता है।
- थार मरुस्थल से आने वाली शुष्क, गर्म हवाएँ (लू) का प्रकोप बढ़ जाता है।
- वाष्पीकरण अधिक होने से नमी की कमी हो जाती है।
बिहार की अक्षांशीय स्थिति उसे दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) के मार्ग में लाती है। जून के अंत तक मानसून बिहार पहुँचता है। अक्षांश की भूमिका इस प्रकार है:
- बिहार की उत्तर-दक्षिण स्थिति के कारण मानसूनी धाराएँ (Bay of Bengal Branch) पूर्व से प्रवेश करती हैं।
- कम अक्षांश (दक्षिणी बिहार) में मानसून पहले पहुँचता है; उत्तरी बिहार में बाद में।
- वार्षिक औसत वर्षा: पूर्वी बिहार में 1200–1600 mm, पश्चिमी बिहार में 800–1000 mm।
- सूर्य के तापन के कारण निम्न दाब क्षेत्र बनता है जो मानसून को खींचता है — यह क्रिया भी अक्षांश-नियंत्रित है।
अक्टूबर से सूर्य दक्षिणायन (Southward movement) होता है। मकर रेखा की ओर बढ़ते सूर्य के कारण बिहार में सूर्य-कोण घटता जाता है और Insolation कम होती है:
- दिसम्बर-जनवरी में दिन की लम्बाई मात्र ~10 घंटे रह जाती है।
- सूर्य-कोण 41° तक गिर जाता है → कम ऊष्मा।
- उत्तरी बिहार में तापमान 5–7°C तक गिर जाता है; कभी-कभी पाला पड़ता है।
- पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) भूमध्यसागर से आकर थोड़ी वर्षा और शीत तरंगें लाते हैं।
- जनवरी में पटना का औसत न्यूनतम तापमान लगभग 8–10°C रहता है।
अक्षांश बनाम अन्य जलवायु कारक — तुलनात्मक विश्लेषण
यद्यपि अक्षांश बिहार की जलवायु का प्राथमिक नियंत्रक है, परन्तु यह अकेला नहीं है — अन्य कारक भी अक्षांश के प्रभाव को संशोधित करते हैं। BPSC Mains में इन कारकों की तुलना करना अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
| जलवायु कारक | बिहार पर प्रभाव | अक्षांश से सम्बन्ध | BPSC दृष्टिकोण |
|---|---|---|---|
| 🌐 अक्षांश (Latitude) | तापमान, सौर ऊर्जा, ऋतु-चक्र निर्धारित | — (स्वयं मूल कारक) | सर्वाधिक महत्वपूर्ण |
| 🏔️ हिमालय | शीत में ठण्डी हवाएँ रोकता है, मानसून को मोड़ता है | अक्षांश + ऊँचाई मिलकर कार्य करते हैं | द्वितीयक कारक |
| 🌊 मानसून हवाएँ | वर्षा वितरण, आर्द्रता | अक्षांश मानसून के मार्ग को प्रभावित करता है | वर्षा के लिए मुख्य |
| 📏 समुद्र से दूरी | महाद्वीपीय जलवायु → अधिक तापान्तर | अक्षांश + महाद्वीपीयता → विषम जलवायु | तापान्तर के लिए |
| ⛰️ धरातल / उच्चावच | दक्षिणी पठार गर्म, उत्तरी मैदान ठण्डा | अक्षांश के प्रभाव को स्थानीय स्तर पर बदलता है | क्षेत्रीय विभिन्नता |
| 🌿 वनस्पति | उत्तर में घने वन → शीतलता; दक्षिण में कम | अक्षांश-निर्धारित तापमान से वनस्पति तय होती है | जैव-जलवायु संबंध |
अक्षांश की सीमाएँ (Limitations) — Mains के लिए महत्वपूर्ण
केवल अक्षांश से बिहार की सम्पूर्ण जलवायु नहीं समझाई जा सकती। उदाहरणार्थ, पटना (25.6°N) और मुम्बई (18.9°N) के अक्षांश में बड़ा अंतर है, फिर भी मुम्बई में बिहार से कम तापान्तर है — कारण, मुम्बई समुद्र के निकट है। इसी प्रकार किशनगंज (बिहार, 26.1°N) में वार्षिक वर्षा 2000 mm से अधिक होती है जबकि पश्चिमी चम्पारण (27°N) में केवल 1100 mm — यह अंतर अक्षांश से नहीं, बल्कि वायु-प्रवाह की दिशा और स्थानीय स्थलाकृति से है।
- अक्षांश तापमान का ढाँचा (Framework) तय करता है — अन्य कारक उसे स्थानीय रूप से संशोधित करते हैं।
- सौर ऊर्जा का नियंत्रक → तापमान → वायु-दाब → हवाओं की दिशा → वर्षा — यह पूरी शृंखला अक्षांश से प्रारम्भ होती है।
- BPSC Mains में कहें: “अक्षांश जलवायु का आधारभूत नियन्त्रक है, जिस पर अन्य कारकों की परतें चढ़ती हैं।”
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