बिहार की जलवायु भौगोलिक स्थिति का प्रभाव
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परिचय एवं भौगोलिक स्थिति
बिहार की जलवायु का सामान्य परिचय समझना BPSC परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है — यह राज्य भारत के उत्तर-पूर्व में स्थित है और इसकी भौगोलिक स्थिति इसके जलवायु स्वरूप को निर्णायक रूप से प्रभावित करती है।
बिहार 25°10′ उत्तरी अक्षांश से 27°31′ उत्तरी अक्षांश तथा 83°19′ पूर्वी देशान्तर से 88°17′ पूर्वी देशान्तर के मध्य स्थित है। यह स्थिति इसे उष्ण कटिबंध (Tropical Zone) और उपोष्ण कटिबंध (Sub-tropical Zone) की सीमा पर रखती है, जिससे यहाँ की जलवायु में विविधता आती है।
बिहार का क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर है। उत्तर में नेपाल, दक्षिण में झारखण्ड, पूर्व में पश्चिम बंगाल तथा पश्चिम में उत्तर प्रदेश से घिरा यह राज्य पूर्णतः स्थलरुद्ध (Landlocked) है। समुद्र से दूरी के कारण यहाँ महाद्वीपीय जलवायु (Continental Climate) के लक्षण अधिक प्रभावी हैं।
बिहार की जलवायु का वर्गीकरण
कोपेन (Köppen) के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार बिहार की जलवायु को Cwa प्रकार — अर्थात् Humid Subtropical with Dry Winter — में रखा जाता है। इसमें C = शीतोष्ण (Temperate), w = शीत ऋतु में शुष्क (Dry Winter), और a = ग्रीष्मकाल गर्म (Hot Summer) को इंगित करता है।
| कोपेन कोड | अर्थ | बिहार में स्वरूप |
|---|---|---|
| C | शीतोष्ण जलवायु | सर्दियों में तापमान 0°C से ऊपर रहता है |
| w | शीत ऋतु में शुष्क | नवम्बर–फरवरी में नगण्य वर्षा |
| a | उष्ण ग्रीष्मकाल | अप्रैल–जून में 40°C+ तापमान |
जलवायु को प्रभावित करने वाले भौगोलिक कारक
बिहार की जलवायु अनेक भौगोलिक कारकों के सम्मिलित प्रभाव से निर्मित होती है — इनमें अक्षांशीय स्थिति, हिमालय का अवरोध, गंगा नदी तंत्र, समुद्र से दूरी और स्थलाकृति प्रमुख हैं।
हिमालय बिहार के उत्तर में स्थित है और दो प्रकार से जलवायु को प्रभावित करता है — पहला, मानसूनी हवाओं को रोककर वर्षा कराता है; दूसरा, साइबेरियाई शीत लहरों को रोककर शीत ऋतु की अत्यधिक कठोरता से बचाता है।
बिहार बंगाल की खाड़ी से लगभग 400-700 किमी दूर है। यह दूरी (महाद्वीपीयता) यहाँ तापमान की वार्षिक परास को बड़ा बनाती है — ग्रीष्मकाल अत्यंत गर्म और शीतकाल काफी ठंडा होता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून बंगाल की खाड़ी शाखा से आकर बिहार में वर्षा करता है। यह शाखा पश्चिम बंगाल-झारखण्ड के रास्ते बिहार में प्रवेश करती है, इसलिए पूर्वी बिहार में पश्चिमी बिहार की अपेक्षा अधिक वर्षा होती है।
बिहार का लगभग सम्पूर्ण भाग गंगा के मैदान में स्थित है। गंगा और उसकी सहायक नदियाँ (कोसी, गण्डक, सोन, घाघरा) वायु में आर्द्रता बनाए रखती हैं तथा स्थानीय जलवायु को नियमित करती हैं।
दक्षिण में झारखण्ड का छोटानागपुर पठार उच्चभूमि के रूप में कार्य करता है। दक्षिण बिहार (जो अब झारखण्ड है) में तापमान और वर्षा का स्वरूप मैदानी क्षेत्रों से भिन्न था। कैमूर और राजगीर की पहाड़ियाँ स्थानीय वर्षा को प्रभावित करती हैं।
25°N–27.5°N के बीच स्थिति के कारण बिहार में सूर्य की किरणें वर्षभर अपेक्षाकृत सीधी पड़ती हैं। ग्रीष्मकाल में सूर्य प्रायः शीर्ष पर रहता है, जिससे तापमान 44°C तक पहुँच सकता है।
भौगोलिक स्थिति का जलवायु पर सम्मिलित प्रभाव
| भौगोलिक कारक | प्रभाव | परिणाम |
|---|---|---|
| हिमालय (उत्तर में) | मानसून को रोकता है, शीत लहरें रोकता है | वर्षा + मध्यम शीतकाल |
| बंगाल की खाड़ी (दक्षिण-पूर्व) | मानसून की आर्द्र हवाएँ भेजती है | जून-सितम्बर वर्षा |
| स्थलरुद्ध स्थिति | महाद्वीपीयता का प्रभाव | अधिक तापांतर |
| गंगा मैदान | समतल भूमि, आर्द्र वायु | एकसमान जलवायु पट्टी |
| नदी तंत्र | वायु में नमी, वाष्पीकरण | स्थानीय वर्षा में सहायक |
| कैमूर पहाड़ियाँ | पश्चिमी बिहार में अवरोध | वृष्टि छाया क्षेत्र (बक्सर) |
ऋतुएँ एवं उनकी विशेषताएँ
बिहार में मुख्यतः चार ऋतुएँ पाई जाती हैं — ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु (मानसून), शरद ऋतु (लौटता मानसून) और शीत ऋतु — जिनमें से प्रत्येक की अपनी विशिष्ट जलवायु दशाएँ होती हैं।
ऋतु-विशिष्ट जलवायु डेटा
| ऋतु | माह | औसत तापमान | वर्षा | विशेष घटनाएँ |
|---|---|---|---|---|
| ग्रीष्म | मार्च–मई | 35–44°C | नगण्य | लू, काल-बैसाखी |
| मानसून | जून–सितम्बर | 28–35°C | 80–85% वर्षा | बाढ़, उमस |
| शरद | अक्टूबर–नवम्बर | 20–30°C | घटती | अक्टूबर ताप |
| शीत | दिसम्बर–फरवरी | 5–15°C | पश्चिमी विक्षोभ से | कोहरा, पाला, माघी वर्षा |
वर्षा वितरण एवं मानसून तंत्र
बिहार में वार्षिक वर्षा का वितरण पूर्व से पश्चिम की ओर घटता जाता है — पूर्णिया में 1500 मिमी से अधिक और बक्सर-रोहतास में 900 मिमी से कम वर्षा होती है।
मानसून का बिहार में प्रवेश
दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा बिहार की प्रमुख वर्षा-स्रोत है। यह शाखा सामान्यतः 10 जून तक बिहार के पूर्वी भाग में और 15–20 जून तक सम्पूर्ण बिहार में फैल जाती है। अरब सागर शाखा का प्रत्यक्ष प्रभाव बिहार पर नगण्य है।
| 1 जिला / क्षेत्र | औसत वार्षिक वर्षा | विशेषता |
|---|---|---|
| किशनगंज / पूर्णिया | 1500–1800 मिमी | बिहार का सर्वाधिक वर्षा क्षेत्र |
| उत्तर-पूर्वी बिहार (दरभंगा, सहरसा) | 1200–1400 मिमी | बाढ़-प्रवण क्षेत्र |
| मध्य बिहार (पटना, गया) | 1000–1200 मिमी | सामान्य वर्षा |
| पश्चिमी बिहार (बक्सर, रोहतास) | 800–1000 मिमी | न्यूनतम वर्षा — वृष्टि छाया |
| बिहार का औसत | 1100–1200 मिमी | राज्य औसत |
वर्षा में पूर्व–पश्चिम ह्रास का कारण
मानसूनी पवनें पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते हुए आर्द्रता खोती जाती हैं। किशनगंज बंगाल की खाड़ी के निकट है और मेघालय पठार से उत्पन्न “फनल प्रभाव” के कारण भी अत्यधिक वर्षा पाता है। पश्चिम की ओर बढ़ने पर मानसूनी आर्द्रता घटती है और कैमूर की पहाड़ियाँ वृष्टि छाया (Rain Shadow) उत्पन्न करती हैं।
शीत ऋतु में भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उत्पन्न पश्चिमी विक्षोभ बिहार में हल्की वर्षा (जिसे स्थानीय रूप से “माघी वर्षा” या “रबी वर्षा” कहते हैं) लाते हैं। यह वर्षा गेहूँ और चना की फसल के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह वर्षा दिसम्बर से फरवरी के बीच होती है और सामान्यतः 40–80 मिमी तक होती है।
- स्रोत: भूमध्यसागर → पश्चिमी एशिया → उत्तर भारत → बिहार
- मात्रा: 40–80 मिमी (वार्षिक वर्षा का मात्र 5–8%)
- महत्व: रबी फसल (गेहूँ, सरसों, चना) के लिए लाभकारी
- समय: दिसम्बर–फरवरी
तापमान वितरण — ग्रीष्म और शीत
बिहार का तापमान वितरण भौगोलिक स्थिति के साथ-साथ भूतल संरचना और नदी घाटियों से भी प्रभावित होता है — ग्रीष्मकाल में पश्चिमी और शीतकाल में उत्तरी बिहार अधिक चरम तापमान अनुभव करते हैं।
ग्रीष्मकालीन तापमान (मार्च–जून)
मार्च से तापमान तेजी से बढ़ता है। मई में पश्चिमी बिहार (बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद) में तापमान 44°C–46°C तक पहुँच सकता है। इस काल में “लू” (Loo) — एक अत्यंत गर्म और शुष्क थलीय पवन — उत्तर-पश्चिम दिशा से चलती है, जो मनुष्यों और पशुओं के लिए हानिकारक होती है।
| क्षेत्र | अधिकतम तापमान (मई) | न्यूनतम तापमान (जनवरी) | वार्षिक तापांतर |
|---|---|---|---|
| पश्चिम बिहार (बक्सर) | 44–46°C | 7–10°C | 35–38°C |
| मध्य बिहार (पटना) | 41–44°C | 8–12°C | 30–35°C |
| पूर्वी बिहार (भागलपुर) | 38–42°C | 10–13°C | 28–32°C |
| उत्तरी बिहार (मोतिहारी) | 38–42°C | 5–8°C | 33–37°C |
शीतकालीन तापमान (दिसम्बर–फरवरी)
शीत ऋतु में उत्तरी बिहार — विशेषकर पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, सीतामढ़ी जिलों में — तापमान 3°C–5°C तक गिर जाता है। गया का तापमान भी कभी-कभी 2°C–4°C तक पहुँच जाता है क्योंकि यह एक घाटी क्षेत्र है जहाँ Cold Air Pooling होती है। जनवरी बिहार का सर्वाधिक ठंडा माह है।
- नदी घाटियाँ: गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे के क्षेत्रों में तापमान की चरमता कम होती है।
- वनाच्छादन: उत्तर बिहार में वनों की कमी से ग्रीष्मकालीन तापमान अधिक और शीतकालीन तापमान कम होता है।
- ऊँचाई: बिहार में कैमूर, राजगीर और गिरियक की पहाड़ियाँ निकटवर्ती मैदानों से 2–4°C अधिक ठंडी रहती हैं।
- शहरी ताप द्वीप: पटना, गया, भागलपुर जैसे शहरों में Urban Heat Island Effect के कारण तापमान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से 1–3°C अधिक रहता है।
क्षेत्रीय जलवायु भिन्नताएँ
बिहार को जलवायु की दृष्टि से तीन प्रमुख उपक्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है — उत्तरी मैदान, मध्य गंगा का मैदान और दक्षिण बिहार — जिनकी जलवायु दशाएँ परस्पर भिन्न हैं।
- हिमालय की तलहटी से आती शीत लहरें
- अधिक वर्षा (1200–1700 मिमी)
- बाढ़ की समस्या (कोसी, गण्डक, बागमती)
- शीतकाल में कोहरा और पाला
- आर्द्रता अधिक — मानसून लम्बा
- औसत वर्षा (1000–1200 मिमी)
- सामान्य जलवायु — बिहार की विशिष्ट जलवायु
- गर्म ग्रीष्म, मध्यम शीत
- पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा
- काल-बैसाखी — पूर्वी भाग में
- कम वर्षा (900–1100 मिमी)
- गया, नवादा, औरंगाबाद — अर्ध-शुष्क लक्षण
- कैमूर वृष्टि छाया क्षेत्र
- Cold Air Pooling (गया में)
- ग्रीष्मकाल अत्यंत उष्ण
किशनगंज — बिहार की आर्द्रतम भूमि
किशनगंज जिला बिहार का सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला क्षेत्र है। इसके कारण हैं — पश्चिम बंगाल की सीमा पर होने के कारण मानसून का सीधा प्रभाव, मेघालय पठार का Funnel Effect और सिलीगुड़ी गलियारे (Chicken’s Neck) की भौगोलिक स्थिति। यहाँ का वार्षिक वर्षा औसत 1700–1800 मिमी तक पहुँचता है।
जलवायु परिवर्तन एवं बिहार पर प्रभाव
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) बिहार की जलवायु को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है — बाढ़ और सूखे की आवृत्ति बढ़ रही है, मानसून अनिश्चित हो रहा है और तापमान में वृद्धि हो रही है।
हिमालय की बर्फ तेजी से पिघल रही है और उत्तर बिहार की नदियाँ (कोसी, गण्डक) अनिश्चित बाढ़ लाती हैं। कोसी को “बिहार का शोक” कहा जाता है — यह अपना मार्ग बदलती रहती है और विनाशकारी बाढ़ लाती है।
पिछले 50 वर्षों में बिहार का औसत वार्षिक तापमान 0.5–1°C बढ़ा है। लू की घटनाएँ (Heat Waves) और उनकी तीव्रता बढ़ रही है। ग्रीष्मकाल अधिक लम्बा होता जा रहा है।
मानसून के आगमन और प्रस्थान की तिथियाँ अनिश्चित हो रही हैं। कभी-कभी कम समय में अत्यधिक वर्षा (Flash Floods) और लम्बे शुष्क काल (Dry Spells) का क्रम देखा जाता है।
मानसून की अनिश्चितता धान, मक्का और गेहूँ की फसलों को प्रभावित करती है। बिहार में लगभग 76% आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए जलवायु परिवर्तन का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव गम्भीर है।
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