बिहार का भूगर्भीय कालक्रम
प्रोटेरोजोइक युग — प्राचीन चट्टानें, खनिज भंडार और भूगर्भीय विकास
परिचय एवं बिहार का भूगर्भीय कालक्रम
बिहार का भूगर्भीय कालक्रम BPSC परीक्षा के भूगोल खंड में एक महत्वपूर्ण विषय है। प्रोटेरोजोइक युग (Proterozoic Eon) पृथ्वी के इतिहास में 2500 मिलियन वर्ष पूर्व से 541 मिलियन वर्ष पूर्व तक विस्तृत था और बिहार की अधिकांश प्राचीन भूगर्भीय संरचनाओं का निर्माण इसी काल में हुआ।
पृथ्वी का भूगर्भीय इतिहास चार महाकल्पों (Eons) में बाँटा गया है — हेडियन, आर्कियन, प्रोटेरोजोइक और फेनेरोजोइक। बिहार झारखंड की सीमा से लगे छोटा नागपुर पठार के माध्यम से आर्कियन एवं प्रोटेरोजोइक काल की शैलों को स्पर्श करता है। राज्य के दक्षिणी भाग में इन प्राचीन शैलों के अवशेष मिलते हैं जो राज्य की आर्थिक समृद्धि का आधार हैं।
प्रोटेरोजोइक युग का वर्गीकरण एवं वैश्विक संदर्भ
प्रोटेरोजोइक युग को तीन उप-युगों (Eras) में विभाजित किया गया है। प्रत्येक उप-युग की बिहार की भूगर्भीय संरचना में अलग भूमिका है।
| उप-युग (Era) | समयावधि (Ma) | बिहार/झारखंड संबंध | प्रमुख शैल/घटना |
|---|---|---|---|
| पैलियोप्रोटेरोजोइक (Paleoproterozoic) | 2500–1600 Ma | सिंघभूम क्रेटन का स्थिरीकरण; धारवाड़ समूह अंतिम चरण | Iron Ore Series (IOS), Copper Belt Thrust |
| मीसोप्रोटेरोजोइक (Mesoproterozoic) | 1600–1000 Ma | सोन घाटी, विंध्यन बेसिन का प्रारंभिक विकास | Vindhyan Supergroup (निचला), Cuddapah basin |
| नियोप्रोटेरोजोइक (Neoproterozoic) | 1000–541 Ma | विंध्यन का ऊपरी भाग; हिमानी घटनाएँ (Snowball Earth) | Upper Vindhyan, Kaimur Group, Rewa Group |
🌍 वैश्विक घटनाएँ जो बिहार को प्रभावित कर गईं
बिहार की प्रमुख प्रोटेरोजोइक शैल संरचनाएँ — स्थान एवं विवरण
बिहार और सीमावर्ती झारखंड में प्रोटेरोजोइक काल की चार प्रमुख शैल प्रणालियाँ मिलती हैं — धारवाड़ समूह, सिंघभूम समूह (Iron Ore Series), कुडप्पा समूह और विंध्यन सुपरग्रुप। इनका वितरण बिहार के खनिज भूगोल को निर्धारित करता है।
📍 बिहार में भौगोलिक वितरण
| जिला/क्षेत्र | शैल समूह | प्रमुख खनिज | आर्थिक उपयोग |
|---|---|---|---|
| रोहतास, कैमूर | विंध्यन (ऊपरी) | चूनापत्थर, बलुआ पत्थर | सीमेंट उद्योग (Dalmia, ACC) |
| गया, औरंगाबाद (आंशिक) | विंध्यन + धारवाड़ | ग्रेनाइट, क्वार्टजाइट | निर्माण पत्थर |
| नवादा, जमुई सीमा | आर्कियन-प्रोटेरोजोइक संधि | अभ्रक, फेल्सपार | विद्युत उद्योग, पेंट |
| सोन घाटी | विंध्यन (निचला + ऊपरी) | डायमंड (Panna से आगत), चूनापत्थर | पर्यटन, सीमेंट |
विंध्यन शैल समूह — बिहार का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रोटेरोजोइक संरचना
विंध्यन सुपरग्रुप (Vindhyan Supergroup) बिहार की भूगर्भीय संरचना में सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रोटेरोजोइक इकाई है। सोन नदी घाटी इसकी धुरी है और यह रोहतास से लेकर सासाराम तक के विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई है।
विंध्यन का आंतरिक वर्गीकरण (Stratigraphy)
Semri Group विंध्यन का सबसे पुराना भाग है। इसमें मुख्यतः चूनापत्थर, शेल और डोलोमाइट पाए जाते हैं। बिहार के रोहतास एवं कैमूर क्षेत्र में इसकी परतें उपलब्ध हैं। इसी समूह में Stromatolites (नीले-हरे शैवाल के जीवाश्म) पाए गए हैं जो प्रोटेरोजोइक जीवन के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।
- Kajrahat Limestone — रोहतास में मिलता है; सीमेंट उद्योग का आधार
- Rohtasgarh Formation — रोहतास किले की चट्टानी संरचना इसी पर आधारित
- Stromatolite fossils — प्रारंभिक जीवन के प्रमाण
Kaimur Group का नाम बिहार के कैमूर पहाड़ियों के नाम पर पड़ा है। यह मुख्यतः लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) से बना है। यही बलुआ पत्थर मौर्य-काल के अशोक स्तंभों के लिए प्रयुक्त हुआ था।
- Chunar Sandstone — इसी से अशोक स्तंभ बनाए गए; BPSC में अत्यंत महत्वपूर्ण
- Scour-and-fill structures — नदी धाराओं के प्राचीन साक्ष्य
- कैमूर वन्यजीव अभयारण्य — इन्हीं चट्टानी संरचनाओं पर स्थित
Rewa Group में चित्रकूट (मध्यप्रदेश) से मिलने वाले हीरों का संबंध है। बिहार की सोन घाटी में यह समूह सोन नदी के किनारे-किनारे विकसित है। Bhander Group में विशेष प्रकार के चूनापत्थर और शेल मिलते हैं।
- Rewa Sandstone — मध्य प्रदेश-बिहार सीमा; हीरा-युक्त कठोर बेसाल्ट पाइप के ऊपर
- Bhander Limestone — सोन घाटी में उत्कृष्ट चूनापत्थर निक्षेप
- Narmada–Son Lineament (NSL) — विंध्यन बेसिन को दो भागों में बाँटता है; एक प्रमुख भूगर्भीय भ्रंश
🏛️ सांस्कृतिक-ऐतिहासिक महत्व
विंध्यन शैलों का सांस्कृतिक इतिहास से गहरा संबंध है। Chunar (चुनार) किला कैमूर बलुआ पत्थर पर बना है। बोधगया मंदिर परिसर में भी कुछ प्राचीन संरचनाएँ विंध्यन पत्थरों से निर्मित हैं। मौर्य सम्राट अशोक के 36+ शिलालेख और स्तंभ इसी Chunar Sandstone से काटे गए थे।
धारवाड़ एवं Iron Ore Series — बिहार के पुरातन शैल समूह
धारवाड़ एवं Iron Ore Series (IOS) मुख्यतः आर्कियन-प्रोटेरोजोइक संधिकाल की शैलें हैं जो झारखंड के सिंघभूम जिले और बिहार की दक्षिणी सीमा में मिलती हैं। ये शैलें मेटामॉर्फिक एवं आग्नेय (igneous) प्रकृति की हैं।
धारवाड़ समूह
~3000–2500 Ma (आर्कियन-प्रोटेरोजोइक संधि)Iron Ore Series (IOS)
~2100–1800 Ma (Paleoproterozoic)⚒️ Singhbhum Copper Belt — एक विशेष चर्चा
सिंघभूम तांबा पट्टी (Copper Belt) भारत की सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण तांबा पेटी है। यह Paleoproterozoic काल (~1900–1700 Ma) में Singhbhum Orogeny के दौरान निर्मित हुई। Surda, Mosabani, Rakha प्रमुख खनन स्थल हैं। HCL (Hindustan Copper Limited) का मुख्यालय खेतड़ी (राजस्थान) है परंतु बिहार-झारखंड में इसकी सर्वाधिक उत्पादन इकाइयाँ हैं।
| विशेषता | धारवाड़ | Iron Ore Series | Singhbhum Copper Belt |
|---|---|---|---|
| आयु | ~3000–2500 Ma | ~2100–1800 Ma | ~1900–1700 Ma |
| शैल प्रकार | Schist, Phyllite | BIF, Quartzite | Chlorite Schist, Shear Zone |
| प्रमुख खनिज | Mn, Cr, Fe | Fe (हेमेटाइट, मैग्नेटाइट) | Cu, Ni, Co |
| बिहार/झारखंड जिला | पूर्वी सिंघभूम | पश्चिमी सिंघभूम | पूर्वी सिंघभूम |
खनिज भंडार एवं आर्थिक महत्व — प्रोटेरोजोइक शैलों की देन
प्रोटेरोजोइक युग की शैलें बिहार और झारखंड के खनिज भंडारों का 90% से अधिक भाग प्रदान करती हैं। इन खनिजों ने भारत की औद्योगिक क्रांति की नींव रखी।
IOS का Hematite/Magnetite — Kiriburu, Noamundi, Bolani खदानें। उत्पादन: ~60 MT/वर्ष। झारखंड भारत का दूसरा सबसे बड़ा लौह-अयस्क उत्पादक राज्य।
Singhbhum Copper Belt — Mosabani, Rakha, Surda खदानें। HCL द्वारा संचालित। भारत के घरेलू तांबा उत्पादन का ~75% यहीं से।
Vindhyan Supergroup — रोहतास, कैमूर। Dalmia Cement, ACC का कच्चा माल। बिहार सरकार का Revenue निर्माण पट्टों से आता है।
धारवाड़ समूह — Seraikela-Kharsawan क्षेत्र। इस्पात उत्पादन में आवश्यक मिश्रधातु। भारत विश्व का 7वाँ सबसे बड़ा Mn उत्पादक।
धारवाड़-आर्कियन संधि — गया, नवादा, जमुई। विद्युत उद्योग में इन्सुलेटर। बिहार-झारखंड “Mica Belt” के रूप में विश्व प्रसिद्ध।
Kaimur Group (Vindhyan) — रोहतास, सासाराम। निर्माण उद्योग, ऐतिहासिक स्मारक। चुनार बलुआ पत्थर — मौर्य साम्राज्य की पहचान।
📊 खनिज उत्पादन — महत्वपूर्ण आँकड़े
जीवाश्म साक्ष्य, पर्यावरण एवं जैव विकास — प्रोटेरोजोइक जीवन
प्रोटेरोजोइक युग में बिहार की शैलों में मिले जीवाश्म साक्ष्य पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभिक चरण को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। Stromatolites इस काल के सर्वाधिक विश्वसनीय जीवाश्म हैं।
🌡️ प्रोटेरोजोइक पर्यावरण — बिहार के संदर्भ में
प्रोटेरोजोइक काल में बिहार का क्षेत्र गोंडवाना महाद्वीप का भाग था। उस समय यह क्षेत्र उथले समुद्र (shallow sea) तथा ज्वारीय फ्लैट (tidal flat) के रूप में था। विंध्यन की तलछटी परतें इसी उथले समुद्री वातावरण में निर्मित हुईं। Ripple marks, mud-cracks और cross-bedding जैसी संरचनाएँ उस प्राचीन तटीय वातावरण की कहानी बताती हैं।
| जीवाश्म/संरचना | स्थान (बिहार) | वैज्ञानिक महत्व | आयु (Ma) |
|---|---|---|---|
| Stromatolites | Semri Limestone, रोहतास | प्रारंभिक जीवन का प्रमाण; O₂ उत्पादक | ~1400 |
| Acritarchs | Kaimur Shale | Eukaryote विकास का प्रमाण | ~800–700 |
| Ripple Marks | विंध्यन बलुआ पत्थर | उथला समुद्री/नदी वातावरण | ~1000–600 |
| Mud Cracks | Kaimur/Rewa Groups | ज्वारीय/शुष्क वातावरण का साक्ष्य | ~900–600 |
सारांश, MCQ अभ्यास एवं परीक्षा प्रश्न
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