बिहार का भूगर्भीय संरचना और भूकंप
भूकंपीय क्षेत्र, भूगर्भीय इतिहास, प्रमुख भूकंप घटनाएँ और BPSC Prelims + Mains के लिए सम्पूर्ण विश्लेषण।
परिचय एवं भौगोलिक स्थिति
बिहार की भूगर्भीय संरचना और भूकंपीय क्षेत्र BPSC परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। बिहार भारत के सर्वाधिक भूकंप-संवेदनशील राज्यों में से एक है, विशेषकर इसका उत्तरी भाग जो हिमालय के भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्र के निकट स्थित है।
बिहार की भौगोलिक स्थिति
बिहार भारत के पूर्वी भाग में स्थित एक भू-आवेष्ठित (Landlocked) राज्य है। यह उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखंड से घिरा हुआ है। भूगर्भीय दृष्टि से बिहार दो प्रमुख भागों में विभाजित है — उत्तर का मैदानी क्षेत्र (जो गंगा के उत्तर में हिमालय की तराई तक फैला है) और दक्षिण का पठारी क्षेत्र (जो छोटानागपुर पठार का विस्तार था, अब झारखंड का भाग है)।
गंगा नदी बिहार को दो स्पष्ट भू-भागों में बाँटती है। उत्तरी बिहार — जो हिमालय से आने वाली नदियों (कोसी, गण्डक, बागमती, कमला-बलान, बूढ़ी गण्डक) द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदान है — भूकंपीय दृष्टि से Zone IV और V में आता है। दक्षिणी बिहार अपेक्षाकृत कम भूकंप-संवेदनशील है।
| भौगोलिक विशेषता | विवरण | महत्व |
|---|---|---|
| उत्तरी सीमा | नेपाल (हिमालय तराई) | भूकंप-सक्रिय प्लेट सीमा के निकट |
| प्रमुख नदियाँ | गंगा, कोसी, गंडक, बागमती | जलोढ़ निक्षेप — भूकंप प्रवर्धन |
| भू-संरचना | नवीन जलोढ़ मैदान | Liquefaction की उच्च संभावना |
| औसत ऊँचाई | 52-75 मीटर (मैदानी भाग) | समतल भूमि — भूकंपीय तरंगों का तीव्र प्रसार |
| भूकंप ज़ोन | Zone III, IV, V | उच्च से अतिउच्च जोखिम |
भूगर्भीय संरचना का इतिहास — Geological History
बिहार की भूगर्भीय संरचना को समझने के लिए हमें Gondwanaland के विघटन से लेकर हिमालय के उत्थान तक की यात्रा समझनी होगी। यह इतिहास बिहार की भूकंप-संवेदनशीलता की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है।
Indo-Gangetic Foredeep — बिहार की भूगर्भीय जड़
Indo-Gangetic Foredeep वह गहरी खाई है जो हिमालय के उत्थान की प्रतिक्रिया में निर्मित हुई। बिहार का उत्तरी मैदान इसी Foredeep के ऊपर स्थित है। यहाँ तलछट की गहराई 40,000 मीटर तक है। यह नवीन एवं कोमल तलछट भूकंपीय तरंगों को अवशोषित नहीं करती, बल्कि उन्हें और तीव्र कर देती है — इसे Site Amplification Effect कहते हैं।
बिहार की प्रमुख भूगर्भीय संरचनाएँ
बिहार में विभिन्न प्रकार की भूगर्भीय संरचनाएँ पाई जाती हैं जो इसकी भूकंप-संवेदनशीलता, नदी तंत्र और मृदा विविधता को निर्धारित करती हैं।
Liquefaction (मृदा द्रवीकरण) — बिहार का विशेष खतरा
Liquefaction वह प्रक्रिया है जिसमें भूकंप की तीव्र कंपन से जलसंतृप्त ढीली मिट्टी अस्थायी रूप से तरल की तरह व्यवहार करने लगती है। उत्तरी बिहार का मैदान — जहाँ भूजल स्तर (water table) बहुत ऊँचा है और मिट्टी नवीन जलोढ़ है — Liquefaction के लिए आदर्श परिस्थितियाँ प्रस्तुत करता है। 1934 के भूकंप में बिहार के कई क्षेत्रों में Liquefaction देखा गया था जिससे भवन धंस गए थे।
भूकंपीय क्षेत्र वर्गीकरण — Seismic Zoning
भारत सरकार (BIS — Bureau of Indian Standards) ने IS 1893:2016 के अनुसार पूरे देश को भूकंपीय जोखिम के आधार पर Zone II से Zone V तक चार क्षेत्रों में विभाजित किया है। बिहार के विभिन्न जिले Zone III, IV और V में आते हैं।
| Zone | जोखिम स्तर | MSK तीव्रता | बिहार के प्रभावित जिले |
|---|---|---|---|
| V | अत्यधिक उच्च (Very High) | IX और इससे अधिक | पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज (नेपाल सीमा) |
| IV | उच्च (High) | VIII | मुजफ्फरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर (उत्तरी भाग) |
| III | मध्यम (Moderate) | VII | पटना, गया, नालंदा, मुंगेर, भागलपुर (दक्षिणी भाग), बेगूसराय, खगड़िया |
| II | निम्न (Low) | VI और कम | बिहार का कोई जिला Zone II में नहीं |
Zone V — अत्यधिक भूकंपीय क्षेत्र (बिहार में)
Zone V में आने वाले बिहार के जिले नेपाल सीमा पर स्थित हैं। इन जिलों में हिमालय के Main Frontal Thrust (MFT) और Main Boundary Thrust (MBT) भ्रंश रेखाएँ निकट हैं। सीतामढ़ी, मधुबनी और पश्चिमी चंपारण विशेष रूप से संवेदनशील हैं। यहाँ Richter Scale पर 6.0 से अधिक तीव्रता के भूकंप आने की संभावना रहती है।
नेपाल से सटे सभी जिले। MFT और MBT भ्रंश रेखाओं की निकटता। 1934 जैसे विनाशकारी भूकंप की संभावना।
मध्य उत्तर बिहार — दरभंगा, मुजफ्फरपुर। नवीन जलोढ़ और Liquefaction जोखिम। घनी आबादी के कारण अधिक खतरा।
पटना सहित दक्षिणी गंगा मैदान। पुरानी जलोढ़ — अपेक्षाकृत स्थिर। लेकिन पटना की घनी आबादी जोखिम बढ़ाती है।
Zone V में Seismic Intensity Factor (Z) = 0.36, Zone IV में Z = 0.24, Zone III में Z = 0.16। यह मान भवन निर्माण कोड में प्रयुक्त होते हैं।
बिहार के प्रमुख भूकंप — Historical Earthquakes
बिहार ने अपने इतिहास में कई विनाशकारी भूकंपों का सामना किया है। इनमें 1934 का बिहार-नेपाल भूकंप सर्वाधिक विनाशकारी था जिसने बिहार का परिदृश्य ही बदल दिया। इन भूकंपों का अध्ययन BPSC परीक्षा की दृष्टि से आवश्यक है।
| वर्ष | तीव्रता (Richter) | केंद्र (Epicenter) | प्रभावित क्षेत्र | मृत्यु / क्षति |
|---|---|---|---|---|
| 1833 | 7.0 | नेपाल-बिहार सीमा | उत्तरी बिहार | भारी क्षति, मृत्यु आंकड़े अनिश्चित |
| 15 जनवरी 1934 | 8.0 | नेपाल (मुन्सियारी क्षेत्र) | बिहार, नेपाल, बंगाल | ~30,000 मृत (बिहार में) |
| 1988 | 6.6 | उदयपुर, नेपाल | उत्तरी बिहार (दरभंगा, मधुबनी) | ~1,000 मृत, भारी क्षति |
| 2011 | 6.9 | सिक्किम (उत्तरी) | बिहार में कम्पन महसूस हुई | बिहार में नगण्य |
| 2015 | 7.8 (गोरखा भूकंप) | नेपाल (गोरखा जिला) | उत्तरी बिहार में तीव्र कंपन | बिहार में ~65 मृत, व्यापक भय |
| 2023 | 5.2 (श्रृंखला) | नेपाल-बिहार सीमा | सीतामढ़ी, मधुबनी | हल्की क्षति |
🔴 1934 बिहार-नेपाल भूकंप — विस्तृत अध्ययन
15 जनवरी 1934 को आया यह भूकंप बिहार के इतिहास का सर्वाधिक विनाशकारी प्राकृतिक आपदा था। इसकी तीव्रता Richter Scale पर 8.0 थी। भूकंप का Epicenter नेपाल के मुन्सियारी क्षेत्र में था जो बिहार की सीमा से महज 10-15 किमी दूर था। प्रातः 2:13 बजे आए इस भूकंप ने जब बिहार के लोग घरों में थे, भयावह विनाश किया।
- मानवीय क्षति: लगभग 30,000 लोगों की मृत्यु हुई। बिहार के मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, मधुबनी, भागलपुर आदि जिले सर्वाधिक प्रभावित रहे।
- Liquefaction: उत्तरी बिहार के कई क्षेत्रों में भूमि से पानी और रेत का फव्वारा निकला। घर जमीन में धंस गए। यह 20वीं सदी का पहला वैज्ञानिक रूप से दर्ज Liquefaction था।
- Slump Belts: भूकंप के कारण भूमि के बड़े भाग धंस गए (subsided) और नई झीलें बन गईं। इन्हें “Slump Belts” कहा गया।
- नदी मार्ग परिवर्तन: कोसी और अन्य नदियों का प्रवाह मार्ग बदला। कई स्थानों पर नए दलदली क्षेत्र बने।
- भवन क्षति: मुजफ्फरपुर, मोतीहारी, दरभंगा के अधिकांश पक्के मकान ध्वस्त हुए। ब्रिटिश काल में बनी कई सरकारी इमारतें खंडहर हो गईं।
- गाँधीजी का संदर्भ: महात्मा गाँधी ने इस भूकंप को ईश्वरीय दंड (अस्पृश्यता के लिए) कहा था, जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने अवैज्ञानिक कहकर विरोध किया।
2015 गोरखा भूकंप और बिहार
25 अप्रैल 2015 को नेपाल में 7.8 तीव्रता का गोरखा भूकंप आया। इसका Epicenter नेपाल के गोरखा जिले में था। इस भूकंप में नेपाल में 8,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। बिहार में इसके तीव्र झटके महसूस किए गए और लगभग 65 लोगों की मृत्यु हुई। इस घटना ने बिहार के भवन निर्माण कोड और आपदा तैयारी की कमियों को उजागर किया।
भूकंप के कारण एवं बिहार पर प्रभाव
बिहार में भूकंप आने के कई भूगर्भीय, संरचनात्मक और मानवीय कारण हैं। इन कारणों को Prelims के लिए तथ्यात्मक रूप से और Mains के लिए विश्लेषणात्मक रूप से समझना आवश्यक है।
भूकंप के कारण
भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे Subduction कर रही है। इस प्रक्रिया में संचित ऊर्जा अचानक भूकंप के रूप में मुक्त होती है। यही बिहार के भूकंप का मूल कारण है।
MFT, MBT, MCT जैसी प्रमुख भ्रंश रेखाएँ बिहार-नेपाल सीमा के पास हैं। इन पर प्लेटें खिसकती हैं और भूकंप उत्पन्न होते हैं।
नवीन जलोढ़ मैदान भूकंपीय तरंगों को प्रवर्धित (amplify) करता है। कठोर चट्टान की तुलना में जलोढ़ मिट्टी पर भूकंप का प्रभाव 10-15 गुना अधिक हो सकता है।
बड़े बाँधों (जैसे गंडक बैराज), भूजल दोहन और खनन गतिविधियाँ कभी-कभी छोटे भूकंपों को प्रेरित कर सकती हैं। यह Anthropogenic (मानव-प्रेरित) कारण है।
बिहार पर भूकंप के प्रभाव
- जन-धन की हानि: बिहार की घनी आबादी (1106 व्यक्ति/वर्ग किमी) के कारण किसी भी बड़े भूकंप में मानवीय क्षति विपत्तिजनक हो सकती है।
- बुनियादी ढाँचे को नुकसान: सड़कें, पुल, रेलवे लाइन, विद्युत तंत्र सब ध्वस्त होते हैं। बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य और कठिन हो जाता है।
- नदी तंत्र में परिवर्तन: भूकंप से नदियों का मार्ग बदल सकता है। कोसी नदी का मार्ग परिवर्तन इतिहास में कई बार हो चुका है।
- कृषि को क्षति: भूमि धंसने, Liquefaction और बाढ़ के कारण उपजाऊ खेत नष्ट होते हैं।
- महामारी का खतरा: जल-मल व्यवस्था ध्वस्त होने से हैजा, डायरिया जैसी बीमारियाँ फैलती हैं।
- आर्थिक प्रभाव: बिहार पहले से पिछड़ा राज्य है। भूकंप विकास को वर्षों पीछे धकेल देता है।
आपदा प्रबंधन एवं सरकारी तैयारी
बिहार सरकार और केंद्र सरकार ने भूकंप जोखिम को कम करने के लिए अनेक नीतियाँ और संस्थाएँ बनाई हैं। इनका अध्ययन Mains परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रमुख संस्थाएँ एवं उनकी भूमिका
| संस्था | भूमिका | स्तर |
|---|---|---|
| NDMA | राष्ट्रीय नीति निर्माण, NDRF का नियंत्रण, राज्यों को मार्गदर्शन | राष्ट्रीय |
| BSDMA | बिहार में आपदा नीति, जागरूकता, प्रशिक्षण | राज्य |
| NDRF | भूकंप के बाद खोज एवं बचाव (Search & Rescue) | राष्ट्रीय |
| GSI | Geological Survey — भूकंपीय अध्ययन, Seismic Zonation | राष्ट्रीय |
| IMD | India Meteorological Dept — भूकंप पूर्व चेतावनी (सीमित) | राष्ट्रीय |
| BIS | IS 1893 — भूकंपरोधी भवन निर्माण कोड | राष्ट्रीय |
Seismic Micro-zonation — पटना का विशेष अध्ययन
Seismic Micro-zonation एक विस्तृत भूकंपीय मानचित्रण प्रक्रिया है जो किसी शहर के भीतर विभिन्न क्षेत्रों की भूकंप-संवेदनशीलता को दर्शाती है। IIT Patna और GSI ने पटना का Micro-zonation मानचित्र तैयार किया है। इसके अनुसार गंगा के किनारे के क्षेत्र (Kankarbagh, Patna Sahib) अधिक संवेदनशील हैं जबकि कंकड़बाग के दक्षिणी भाग और राजेंद्रनगर अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।
- IS 1893 एवं IS 13920 का पालन: सभी नए निर्माण भारतीय मानक ब्यूरो के भूकंपरोधी कोड के अनुसार होने चाहिए।
- Pile Foundation: गहरी नींव से Liquefaction का खतरा कम होता है।
- Shear Walls और Tie Beams: भवन की संरचनात्मक मजबूती के लिए आवश्यक।
- Retrofitting: पुरानी इमारतों को भूकंपरोधी बनाना — विशेषकर स्कूल, अस्पताल।
- अवैज्ञानिक निर्माण: बिहार में 70% से अधिक भवन IS Code के अनुरूप नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे और अर्ध-पक्के मकान भूकंप में जल्दी ढह जाते हैं।
- जागरूकता की कमी: आम जनता भूकंप से बचाव के तरीके नहीं जानती।
- बाढ़-भूकंप संयोजन: नेपाल में भूकंप से बिहार में बाढ़ भी आ सकती है (बाँध टूटने से)। दोहरी आपदा से निपटना कठिन है।
- अवसंरचना की कमी: ग्रामीण बिहार में सड़क, संचार और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव राहत कार्य में बाधा डालता है।


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