बिहार में भूकंप के कारण
भूकंप क्यों आते हैं? — Plate Tectonics से Liquefaction तक, BPSC Prelims + Mains के लिए सम्पूर्ण वैज्ञानिक एवं भूगर्भीय विश्लेषण।
परिचय — भूकंप क्या है और बिहार क्यों संवेदनशील है?
बिहार में भूकंप के कारण BPSC Prelims और Mains दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। भूकंप (Earthquake) पृथ्वी की आंतरिक ऊर्जा के अचानक मुक्त होने की घटना है जो भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) के रूप में प्रसारित होती है। बिहार की विशेष भूगर्भीय स्थिति इसे भारत के सर्वाधिक भूकंप-संवेदनशील राज्यों में रखती है।
बिहार की भूकंप-संवेदनशीलता — एक दृष्टि में
बिहार में भूकंप आने के कारणों को तीन वृहद् श्रेणियों में बाँटा जा सकता है — (1) भूगर्भीय / Tectonic कारण जो मूल एवं प्राथमिक हैं, (2) भू-संरचना सम्बन्धी कारण जो भूकंप के प्रभाव को बढ़ाते हैं, और (3) मानव-जनित (Anthropogenic) कारण जो आधुनिक विकास की देन हैं। उत्तरी बिहार विशेष रूप से इन तीनों कारणों से एक साथ प्रभावित है, जिससे यह क्षेत्र Zone IV और Zone V में वर्गीकृत किया गया है।
| कारण की श्रेणी | उदाहरण | प्रभाव क्षेत्र | परीक्षा महत्व |
|---|---|---|---|
| Tectonic कारण | Plate Collision, Fault Lines | सम्पूर्ण बिहार (विशेषतः उत्तर) | ★★★★★ |
| भू-संरचना कारण | Alluvium, Liquefaction, Site Amplification | उत्तरी बिहार का मैदान | ★★★★☆ |
| Anthropogenic कारण | बाँध, खनन, भूजल दोहन | स्थानीय क्षेत्र | ★★★☆☆ |
भूगर्भीय / Tectonic कारण — मूल एवं प्राथमिक कारण
बिहार में भूकंप का सबसे प्रमुख एवं मूलभूत कारण Plate Tectonics है। भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच की टक्कर लाखों वर्षों से जारी है और यही हिमालयी क्षेत्र में भूकंपों का जनक है।
2.1 — Plate Tectonics: टक्कर का विज्ञान
पृथ्वी की ऊपरी परत (Lithosphere) कई बड़े-बड़े खंडों में विभाजित है जिन्हें Tectonic Plates कहते हैं। ये प्लेटें पृथ्वी के Mantle पर तैरती हैं और धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। भारतीय प्लेट (Indo-Australian Plate) लगभग 45–55 मिमी प्रतिवर्ष की दर से उत्तर-पूर्व दिशा में खिसक रही है। यह प्लेट यूरेशियन प्लेट के साथ Convergent Boundary बनाती है — अर्थात् दोनों प्लेटें एक-दूसरे की ओर आ रही हैं।
2.2 — Plate Boundary के प्रकार और बिहार
2.3 — Subduction Zone — भूकंप का इंजन
Subduction वह प्रक्रिया है जिसमें एक प्लेट दूसरी के नीचे खिसकती है। बिहार-नेपाल सीमा के उत्तर में भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे Subduct हो रही है। इस प्रक्रिया में दो महत्वपूर्ण घटनाएँ होती हैं — (a) Elastic Rebound: जब प्लेटें खिसकती हैं तो उनमें elastic ऊर्जा संचित होती रहती है। जब यह सीमा से अधिक हो जाती है तो अचानक टूटन (rupture) होती है और ऊर्जा भूकंप के रूप में मुक्त होती है। (b) Seismic Gap: कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ लम्बे समय से बड़ा भूकंप नहीं आया — वहाँ ऊर्जा संचित होती रहती है। बिहार-नेपाल क्षेत्र में ऐसे Seismic Gap की पहचान की गई है।
प्रमुख भ्रंश रेखाएँ (Fault Lines) — भूकंप के सीधे स्रोत
भ्रंश रेखाएँ (Fault Lines) पृथ्वी की ऊपरी परत में वे दरारें हैं जहाँ चट्टानें टूटकर एक-दूसरे के सापेक्ष खिसकती हैं। बिहार-नेपाल क्षेत्र में स्थित भ्रंश रेखाएँ — विशेषतः MFT, MBT और MCT — इस क्षेत्र के अधिकांश विनाशकारी भूकंपों का प्रत्यक्ष कारण हैं।
Main Frontal Thrust (MFT) को Himalayan Frontal Thrust (HFT) भी कहते हैं। यह हिमालय की सबसे दक्षिणी और सबसे सक्रिय भ्रंश रेखा है जो बिहार-नेपाल सीमा के ठीक उत्तर में स्थित है। यहीं पर Sub-Himalayan Range (Siwalik Hills) का शिवालिक भाग Indo-Gangetic Plane से मिलता है।
- स्थिति: बिहार की उत्तरी सीमा से लगभग 20–50 किमी उत्तर में
- गतिविधि: यहाँ भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे खिसकती है — दर 14–17 मिमी/वर्ष
- खतरा: Seismologists का मानना है कि MFT पर ही M 8.0+ का “Big One” सम्भव है
- 1934 सम्बन्ध: 1934 के बिहार भूकंप का सम्बन्ध MFT या उसके निकटवर्ती Fault से था
Main Boundary Thrust (MBT) Sub-Himalaya को Lesser Himalaya से अलग करती है। यह MFT के उत्तर में और MCT के दक्षिण में स्थित है। बिहार से इसकी दूरी अधिक है किंतु इस पर उत्पन्न भूकंप की तरंगें बिहार तक पहुँचती हैं।
- स्थिति: बिहार सीमा से लगभग 80–150 किमी उत्तर में
- गतिविधि: MFT से कम सक्रिय, लेकिन ऐतिहासिक भूकंपों का स्रोत
- बिहार पर प्रभाव: M 6.0–7.0 के भूकंप उत्पन्न कर सकती है जो बिहार में तीव्रता से महसूस होते हैं
Main Central Thrust (MCT) Lesser Himalaya को Greater (Higher) Himalaya से अलग करती है। यह MBT के उत्तर में स्थित है और बिहार से काफी दूर है। किंतु इस पर M 7.5+ का भूकंप आने पर बिहार में भी तीव्र प्रभाव पड़ता है।
- स्थिति: बिहार सीमा से लगभग 200–300 किमी उत्तर में
- ऐतिहासिक भूकंप: 2015 के गोरखा भूकंप (M 7.8) का सम्बन्ध MCT के निकट था
- बिहार पर प्रभाव: 2015 में बिहार में ~65 मृत, व्यापक भय
भ्रंश रेखाओं की तुलना — एक दृष्टि में
| भ्रंश रेखा | पूर्ण नाम | स्थान | बिहार से दूरी | भूकंप क्षमता | बिहार पर प्रभाव |
|---|---|---|---|---|---|
| MFT | Main Frontal Thrust | शिवालिक का दक्षिणी किनारा | 20–50 किमी | M 8.0+ | अत्यधिक विनाशकारी |
| MBT | Main Boundary Thrust | Sub और Lesser Himalaya | 80–150 किमी | M 6.0–7.0 | तीव्र क्षति |
| MCT | Main Central Thrust | Lesser और Greater Himalaya | 200–300 किमी | M 7.0–8.0 | मध्यम क्षति |
भू-संरचना सम्बन्धी कारण — प्रभाव को बढ़ाने वाले कारक
बिहार की विशेष भूमि-संरचना भूकंप उत्पन्न नहीं करती, किंतु उसके प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है। नवीन जलोढ़ मैदान, उच्च भूजल स्तर और Indo-Gangetic Foredeep मिलकर बिहार को एक ऐसा क्षेत्र बनाते हैं जहाँ भूकंप की तरंगें विशेष रूप से घातक होती हैं।
हिमालय के उत्थान की प्रतिक्रिया में बना विशाल गर्त जो नवीन तलछट से भरा है। तलछट की गहराई 40,000 मीटर तक। यह ढीला तलछट भूकंपीय तरंगों को Amplify करता है।
कोसी, गंडक, बागमती आदि हिमालयी नदियों द्वारा लाई गई ढीली, असंगठित (unconsolidated) मिट्टी। Seismic Wave Velocity इसमें कम होती है जिससे तरंग-आयाम (amplitude) बढ़ जाता है।
कठोर चट्टान (Bedrock) की तुलना में नरम जलोढ़ भूमि पर भूकंप का प्रभाव 10 से 15 गुना तक अधिक हो सकता है। पटना जैसे शहर इसी कारण अधिक संवेदनशील हैं।
उत्तरी बिहार में भूजल स्तर अत्यंत उथला है — कई स्थानों पर केवल 2–5 मीटर की गहराई पर। यह Liquefaction के लिए आवश्यक शर्त है।
Seismic Micro-zonation — स्थानीय स्तर पर जोखिम
Seismic Micro-zonation एक विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया है जो किसी शहर के विभिन्न हिस्सों की भूकंप-संवेदनशीलता को अलग-अलग मापती है। IIT Patna और GSI (Geological Survey of India) ने पटना का Micro-zonation मानचित्र तैयार किया है।
| क्षेत्र (पटना) | भू-संरचना | Amplification स्तर | जोखिम |
|---|---|---|---|
| गंगा तटीय क्षेत्र (Patna Sahib, Kankarbagh उत्तर) | नवीन जलोढ़, उच्च जल स्तर | अत्यधिक उच्च | सर्वाधिक |
| पटना जंक्शन-बेली रोड क्षेत्र | मिश्रित जलोढ़ | उच्च | उच्च |
| कंकड़बाग दक्षिण, राजेंद्रनगर | पुरानी जलोढ़ (Bhangar) | मध्यम | मध्यम |
| फुलवारीशरीफ (दक्षिणी) | पुरानी जलोढ़ + Kankar | कम | अपेक्षाकृत कम |
मानव-जनित (Anthropogenic) कारण — Induced Seismicity
आधुनिक मानवीय गतिविधियाँ भी भूकंप उत्पन्न करने में सहायक हो सकती हैं। इन्हें Induced Seismicity कहते हैं। यद्यपि ये प्राकृतिक Tectonic भूकंपों जितने शक्तिशाली नहीं होते, किंतु BPSC Mains के लिए इनका ज्ञान आवश्यक है।
जब किसी बड़े जलाशय (Reservoir) में पानी भरा जाता है, तो उसके भार और पानी के रिसाव से भूमि में दबाव बढ़ता है। यह दबाव पहले से मौजूद भ्रंश रेखाओं को सक्रिय कर सकता है। इसे Reservoir Induced Seismicity (RIS) कहते हैं।
- गंडक बैराज (वाल्मीकिनगर): यह बाँध बिहार-नेपाल सीमा पर है और Zone V क्षेत्र में। इसके निर्माण के बाद क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि में परिवर्तन देखा गया।
- कोसी बैराज (हनुमान नगर): नेपाल में स्थित यह बैराज बिहार की कोसी नदी को नियंत्रित करता है। इसके निकट भी Seismic Monitoring आवश्यक है।
- विश्व उदाहरण: 1967 में महाराष्ट्र के कोयना बाँध के पास M 6.5 का भूकंप इसी कारण आया था।
बिहार में कृषि के लिए भूजल का बड़े पैमाने पर दोहन होता है। जब भूजल निकाला जाता है तो भूमि के भीतर रिक्त स्थान बनते हैं। इससे भूमि धंसाव (Subsidence) और कभी-कभी छोटे भूकंप आ सकते हैं।
- उत्तरी बिहार में Over-exploitation of Groundwater एक गम्भीर समस्या है
- दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी में भूमि धंसाव के मामले दर्ज हुए हैं
- वैज्ञानिक इसे Micro-seismicity का कारण मानते हैं
गहरे खनन (Mining) से भूमि के भीतर रिक्त स्थान बनते हैं और छत (roof) के धंसने से भूकंप उत्पन्न होते हैं। बिहार के दक्षिणी भाग (जो अब झारखंड में है) में कोयला खनन से ऐसी घटनाएँ होती थीं।
औद्योगिक कचरे या Fracking (Natural Gas निष्कर्षण) में गहरे कुओं में उच्च दबाव पर तरल पदार्थ इंजेक्ट किया जाता है। यह पहले से मौजूद भ्रंश रेखाओं को Lubricate करता है और भूकंप की संभावना बढ़ाता है। यह मुख्यतः USA की समस्या है, किंतु बिहार के भविष्य के लिए सतर्कता आवश्यक है।
Liquefaction (मृदा द्रवीकरण) — बिहार का विशेष और भयावह खतरा
Liquefaction बिहार के उत्तरी मैदान के लिए भूकंप का सबसे विशिष्ट और विनाशकारी सहप्रभाव है। 1934 के भूकंप में बिहार के कई क्षेत्रों में यह घटना घटी थी और पूरे मकान जमीन में धंस गए थे। यह न केवल एक भूकंप का परिणाम है, बल्कि बिहार की भूमि-संरचना के कारण का भी प्रत्यक्ष प्रमाण है।
Liquefaction कैसे होता है? — चरणबद्ध प्रक्रिया
Liquefaction के लिए आवश्यक तीन शर्तें
बिहार के Liquefaction-प्रवण जिले
- Sand Boils: उत्तरी बिहार में भूमि से रेत और पानी के फव्वारे निकले — कई किमी दूर तक देखे गए।
- Slump Belts: विशाल भू-भाग धंस गए और नई अस्थायी झीलें बन गईं।
- इमारतों का धंसना: मुजफ्फरपुर, दरभंगा में पूरी इमारतें लगभग बिना टूटे जमीन में समा गईं।
- नदी मार्ग परिवर्तन: कोसी और अन्य नदियों के प्रवाह पथ बदले।
कारणों की तुलना, परस्पर सम्बन्ध एवं Mains विश्लेषण
बिहार में भूकंप के कारण परस्पर सम्बद्ध हैं। Tectonic कारण भूकंप उत्पन्न करते हैं, भू-संरचना उसे बढ़ाती है और मानव-जनित कारण अतिरिक्त जोखिम जोड़ते हैं। इस समग्र दृष्टिकोण से ही बिहार की भूकंप-संवेदनशीलता को पूर्णतः समझा जा सकता है।
कारणों का क्रमबद्ध प्रवाह — Cause-Effect Chain
उत्तरी बनाम दक्षिणी बिहार — भूकंप जोखिम की तुलना
| पहलू | उत्तरी बिहार | दक्षिणी बिहार |
|---|---|---|
| भूकंपीय ज़ोन | Zone IV और V | Zone III |
| निकटतम Fault | MFT (20–50 किमी) | दूर (300+ किमी) |
| भू-संरचना | नवीन जलोढ़ (Khadar) | पुरानी जलोढ़ (Bhangar) / Kankar |
| भूजल स्तर | 2–5 मीटर (बहुत उथला) | 15–30 मीटर (गहरा) |
| Liquefaction जोखिम | अत्यधिक उच्च | निम्न |
| Site Amplification | 10–15× | 2–5× |
| 1934 में प्रभाव | विनाशकारी (Epicentre निकट) | कम |


Leave a Reply