बिहार की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति
समाज की संरचना — जाति, वर्ग, लिंग एवं धार्मिक विविधता के संदर्भ में बिहार की सामाजिक व्यवस्था का विस्तृत विश्लेषण
परिचय एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बिहार की सामाजिक संरचना BPSC परीक्षा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। यह राज्य भारत के सबसे प्राचीन सांस्कृतिक केंद्रों में से एक रहा है — मगध साम्राज्य, नालंदा विश्वविद्यालय और वैशाली गणराज्य इसी भूमि पर पुष्पित-पल्लवित हुए। बिहार की सामाजिक व्यवस्था जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के जटिल अंतर्संबंधों से निर्मित है।
बिहार 2000 ई. में झारखंड के विभाजन के पश्चात् अपने वर्तमान स्वरूप में आया। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की जनसंख्या 10.41 करोड़ थी, जो भारत में तीसरे स्थान पर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से बिहार छोटा किंतु जनघनत्व की दृष्टि से देश में सर्वाधिक (1,106 व्यक्ति/वर्ग किमी) है।
ऐतिहासिक सामाजिक विकास
बिहार की सामाजिक संरचना का निर्माण विभिन्न ऐतिहासिक चरणों में हुआ। वैदिक काल में यह क्षेत्र आर्य संस्कृति का प्रमुख केंद्र था। बौद्ध एवं जैन काल (5वीं-6वीं शताब्दी ईपू) में सामाजिक समानता के आंदोलन ने जाति-व्यवस्था को चुनौती दी। मुगल काल में इस्लाम के प्रसार से बिहार की सांस्कृतिक विविधता में वृद्धि हुई। ब्रिटिश काल में भूमि व्यवस्था और औपनिवेशिक नीतियों ने सामाजिक-आर्थिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया।
जातिगत संरचना — Bihar Caste System
बिहार की सामाजिक संरचना में जाति सबसे महत्वपूर्ण निर्धारक तत्व है। यहाँ की राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक व्यवस्था में जाति की केंद्रीय भूमिका रही है। बिहार में Mandal Commission (1990) के पश्चात् OBC जातियों की राजनीतिक शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
बिहार की जनसंख्या को मोटे तौर पर चार वर्गों में बांटा जा सकता है — सवर्ण/उच्च जातियाँ, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST)। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में SC जनसंख्या लगभग 15.9% तथा ST जनसंख्या लगभग 1.3% है।
प्रमुख जातीय समूह
बिहार में प्रमुख सवर्ण जातियाँ हैं — भूमिहार, राजपूत/ठाकुर, ब्राह्मण और कायस्थ। ये जातियाँ ऐतिहासिक रूप से भूमि-स्वामित्व, शिक्षा और प्रशासन में प्रभावशाली रही हैं।
- भूमिहार: उत्तर-मध्य बिहार में प्रभावशाली, ऐतिहासिक भूमि-स्वामी वर्ग, मुजफ्फरपुर, वैशाली, भोजपुर में केंद्रित।
- राजपूत/ठाकुर: बिहार के सीमांचल व मगध क्षेत्र में उपस्थिति, भोजपुर “रणवीर सेना” से संबंधित।
- ब्राह्मण: पारंपरिक रूप से धार्मिक व शैक्षणिक भूमिका, मिथिला क्षेत्र में मैथिल ब्राह्मण प्रमुख।
- कायस्थ: लेखन व प्रशासन में पारंपरिक दक्षता, पटना, भागलपुर में प्रमुखता।
बिहार में OBC जनसंख्या कुल आबादी का लगभग 51% है। Mandal Commission (1980) की सिफारिशों के 1990 में लागू होने के पश्चात् OBC की राजनीतिक शक्ति में क्रांतिकारी बदलाव आया।
- यादव (Yadav): सबसे बड़ा OBC समूह, लगभग 14% जनसंख्या; RJD की राजनीतिक आधार-शिला, लालू प्रसाद यादव से जुड़े।
- कुर्मी (Kurmi): कृषि आधारित जाति, JDU का प्रमुख समर्थन-आधार, नीतीश कुमार इसी जाति से।
- कोइरी/कुशवाहा: कृषि कुशल जाति, मध्य बिहार में प्रभावशाली।
- अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC): जैसे नाई, धोबी, तेली आदि — ये Mandal के भीतर भी हाशिये पर हैं।
बिहार में SC जनसंख्या 15.9% है। 2011 की जनगणना के अनुसार SC की सर्वाधिक जनसंख्या गया, नवादा, जहानाबाद जिलों में है। बिहार में 22 अनुसूचित जातियाँ अधिसूचित हैं।
- पासवान/दुसाध: सबसे बड़ी SC जाति, लगभग 5%; LJP के राम विलास पासवान इसी समुदाय से।
- चमार/मुसहर: अत्यधिक वंचित, भूमिहीन खेतिहर मजदूर; मुसहर बिहार की सबसे दलित-वंचित जाति मानी जाती है।
- महार/धोबी: पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े समुदाय।
- महादलित वर्ग: नीतीश कुमार सरकार ने SC में भी सबसे पिछड़ी 18-21 जातियों को महादलित श्रेणी दी — यह बिहार की विशिष्ट नीति है।
जाति एवं भूमि-स्वामित्व का सम्बन्ध
बिहार में भूमि-स्वामित्व और जाति का गहरा सम्बन्ध रहा है। 1950 के दशक में भूमि सुधार कानून बने किंतु क्रियान्वयन अत्यंत कमजोर रहा। जमींदारी उन्मूलन अधिनियम, 1950 के बावजूद भूमिहार, राजपूत और ब्राह्मण जातियों का भूमि पर वर्चस्व बना रहा। SC/ST और EBC जातियाँ मुख्यतः भूमिहीन खेतिहर मजदूर के रूप में रहीं।
| जाति वर्ग | अनुमानित जनसंख्या % | प्रमुख जातियाँ | राजनीतिक प्रतिनिधित्व |
|---|---|---|---|
| सवर्ण (Upper Caste) | 13-15% | भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण, कायस्थ | BJP, कांग्रेस |
| OBC | ~51% | यादव, कुर्मी, कोइरी, तेली | RJD, JDU |
| SC (अनुसूचित जाति) | 15.9% | पासवान, मुसहर, चमार | LJP, BSP |
| ST (अनुसूचित जनजाति) | 1.3% | संताल, मुंडा, उरांव, थारू | JMM (सीमित) |
| मुस्लिम OBC | ~10% | अंसारी, धुनिया, कुरेशी | RJD, AIMIM |
धार्मिक संरचना — Religious Composition
बिहार एक बहु-धार्मिक राज्य है जहाँ हिंदू, मुसलमान, बौद्ध, जैन, ईसाई और सिख समुदाय सह-अस्तित्व में रहते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में हिंदू 82.7%, मुस्लिम 16.9% और अन्य धर्म लगभग 0.4% हैं। बिहार बौद्ध और जैन धर्म की जन्मस्थली है।
सीमांचल क्षेत्र — मुस्लिम बहुल क्षेत्र
सीमांचल (Seemanchal) बिहार का पूर्वोत्तर क्षेत्र है जिसमें किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम जनसंख्या 45-70% तक है। किशनगंज में मुसलमान कुल जनसंख्या के 67.7% हैं।
| धर्म | जनसंख्या % (2011) | प्रमुख तीर्थस्थल/केंद्र |
|---|---|---|
| हिंदू | 82.7% | देवघर (झारखंड से निकट), गया, मनेर शरीफ |
| मुस्लिम | 16.9% | बिहारशरीफ दरगाह, मनेर, फुलवारी शरीफ |
| बौद्ध | 0.09% | बोधगया, राजगीर, नालंदा, वैशाली, कुशीनगर |
| जैन | 0.02% | पावापुरी (महावीर निर्वाण स्थल), वैशाली |
| ईसाई | 0.05% | मिशनरी स्कूल व अस्पताल, पटना |
धार्मिक पर्यटन एवं सांस्कृतिक महत्व
बिहार विश्व के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में से एक है। बोधगया में बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था — यह UNESCO Heritage Site है। पावापुरी में भगवान महावीर का निर्वाण हुआ। वैशाली में महावीर का जन्म और बुद्ध का अंतिम उपदेश — ये दोनों घटनाएं हुईं। बौद्ध सर्किट (Buddhist Circuit) के अंतर्गत बिहार सरकार पर्यटन को बढ़ावा दे रही है।
लिंग एवं महिला स्थिति — Gender & Women’s Status
बिहार में महिलाओं की स्थिति में पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, किंतु अभी भी पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचना, बाल-विवाह, दहेज प्रथा और कम साक्षरता दर प्रमुख चुनौतियाँ हैं। नीतीश कुमार सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक नीतियाँ लागू की हैं।
महिला सशक्तिकरण की प्रमुख योजनाएं
2007 में शुरू। कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को मुफ्त साइकिल। 2011 तक 16 लाख से अधिक साइकिलें वितरित। बालिका शिक्षा में क्रांतिकारी सुधार।
SC/ST और OBC की छात्राओं को वर्दी के लिए धनराशि। विद्यालय में उपस्थिति में वृद्धि एवं ड्रॉपआउट दर में कमी का लक्ष्य।
Bihar Rural Livelihoods Promotion Society — स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वावलम्बन। 1.1 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं।
बिहार पंचायत राज अधिनियम संशोधन — 2006 में 50% आरक्षण। 2011 के चुनाव में 1.17 लाख महिला प्रतिनिधि निर्वाचित। राष्ट्रीय मॉडल बना।
महिलाओं की प्रमुख समस्याएं
- बाल विवाह: बिहार में बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक — NFHS-5 (2019-21) के अनुसार 40.8%।
- दहेज प्रथा: दहेज से जुड़ी हिंसा और मृत्यु की घटनाएं अभी भी प्रमुख समस्या।
- पर्दा प्रथा: ग्रामीण व धार्मिक रूढ़िवादी परिवारों में महिलाओं की गतिशीलता सीमित।
- कम श्रम-शक्ति भागीदारी: महिला श्रम-शक्ति भागीदारी दर (LFPR) राष्ट्रीय औसत से कम।
- घरेलू हिंसा: NFHS डेटा के अनुसार बिहार में घरेलू हिंसा की दर उच्च।
जनजातीय समाज — Tribal Society in Bihar
झारखंड के अलग होने के बाद बिहार की ST जनसंख्या घटकर लगभग 1.3% (लगभग 13.37 लाख) रह गई है। बिहार में कुल 32 अनुसूचित जनजातियाँ अधिसूचित हैं। ये जनजातियाँ मुख्यतः बिहार के उत्तरी तराई क्षेत्र और पूर्वी-पश्चिमी सीमांत जिलों में निवास करती हैं।
प्रमुख जनजातियाँ एवं उनके क्षेत्र
| क्र. | जनजाति | प्रमुख जिले/क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|---|
| 1 | संताल (Santhal) | कटिहार, भागलपुर, बांका | सबसे बड़ी जनजाति; सोहराय पर्व; संताली भाषा (Ol Chiki लिपि) |
| 2 | थारू (Tharu) | पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण | नेपाल-बिहार सीमा पर निवास; PVTG श्रेणी में; हरेला पर्व |
| 3 | मुसहर (Musahar) | मधुबनी, सीतामढ़ी, दरभंगा | SC और ST दोनों श्रेणियों में विभिन्न राज्यों में अलग; सबसे वंचित |
| 4 | उरांव/कुरुख (Oraon) | बांका, जमुई | द्रविड़ भाषा परिवार; सरहुल पर्व |
| 5 | माल पहाड़िया | बांका | PVTG (विशेष संवेदनशील जनजातीय समूह) |
PVTG — विशेष संवेदनशील जनजातीय समूह
भारत सरकार ने Particularly Vulnerable Tribal Groups (PVTG) की पहचान की है। बिहार में 9 PVTG जनजातियाँ हैं — बिरजिया, बिरहोर, कोरवा, हिल खड़िया, माल पहाड़िया, सौरिया पहाड़िया, सावर, असुर और थारू। इनकी जनसंख्या निरंतर घट रही है और ये विलुप्तप्राय स्थिति में हैं।
बिहार की जनजातियों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा है। संताल की करम, सोहराय, बंधना उत्सव; थारू का हरेला, होरी; उरांव का सरहुल — ये सभी प्रकृति-पूजा पर आधारित पर्व हैं।
- सरना धर्म: अधिकांश जनजातियाँ प्रकृति-पूजक — “जल-जंगल-जमीन” से जुड़ी। 2021 की जनगणना में सरना धर्म कोड की माँग।
- जनजातीय भाषाएं: संताली, मुंडारी, हो, कुरुख — ये 8वीं अनुसूची में हैं (संताली 2003 से)।
- पारंपरिक न्याय: जनजातीय परिषदें (Gram Sabha) अपने विवाद खुद सुलझाती हैं।
- स्थानांतरी कृषि (झूम): कुछ जनजातियों में अभी भी प्रचलित; वन-अधिकार से जुड़ी समस्या।
सामाजिक समस्याएं एवं चुनौतियाँ
बिहार की सामाजिक संरचना अनेक गहरी समस्याओं से ग्रसित है। गरीबी, अशिक्षा, जातिगत भेदभाव, पलायन और कमजोर स्वास्थ्य सेवाएं — ये सभी मिलकर बिहार के सामाजिक विकास में बाधा बनती हैं। BPSC Mains में इन समस्याओं के कारण, प्रभाव और समाधान पर विस्तृत प्रश्न पूछे जाते हैं।
बिहार से प्रतिवर्ष लाखों लोग रोजगार के लिए दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा पलायन करते हैं। COVID-19 के दौरान 2020 में रिवर्स माइग्रेशन चर्चा में आई। सामाजिक पूंजी का नुकसान प्रमुख चिंता।
बिहार में IMR (Infant Mortality Rate) राष्ट्रीय औसत से अधिक। SRS 2020 के अनुसार बिहार का IMR 30/1000 जीवित जन्म। कुपोषण, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की कमी प्रमुख कारण।
2011 में साक्षरता 61.8% (राष्ट्रीय 74%)। महिला साक्षरता मात्र 51.5%। शिक्षकों की कमी, भूत शिक्षक (Ghost Teacher) समस्या, मिड-डे मील में अनियमितताएं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी, डॉक्टर-मरीज अनुपात राष्ट्रीय औसत से बहुत कम। एन्सेफलाइटिस (AES/JE) — मुजफ्फरपुर, चमकी बुखार समस्या।
1990 के दशक में सेना-संगठनों के बीच रणवीर सेना, MCC, सनलाइट सेना आदि का उदय। बथानी टोला (1996), लक्ष्मणपुर बाथे (1997), सेनारी (1999) जैसे नरसंहार।
NFHS-5 के अनुसार बिहार में बाल विवाह दर 40.8%। दहेज उत्पीड़न की घटनाएं लगातार। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से सुधार के प्रयास।
नक्सलवाद — Left Wing Extremism
बिहार के मगध-रोहतास क्षेत्र में नक्सलवाद एक प्रमुख समस्या रही है। गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, रोहतास, नवादा जिले “Red Corridor” के अंतर्गत आते थे। CPI (Maoist) और CPI (ML) के विभिन्न गुट सक्रिय रहे। नक्सलवाद के मूल कारण — भूमि-असमानता, जातिगत उत्पीड़न, गरीबी और बेरोजगारी हैं।
सामाजिक परिवर्तन एवं सरकारी पहलें
बिहार में सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हुई है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में 2005 के बाद से शासन सुधार, सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहलें हुई हैं। सात निश्चय योजना, जीविका, मद्यनिषेध और महिला पंचायत आरक्षण इनमें प्रमुख हैं।
प्रमुख सामाजिक कार्यक्रम एवं योजनाएं
बिहार सरकार ने 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण मद्यनिषेध (Total Prohibition) लागू किया। Bihar Excise (Amendment) Act, 2016 के तहत शराब का उत्पादन, बिक्री, परिवहन और उपभोग दंडनीय अपराध बना।
- महिला आंदोलन: जीविका SHG की महिलाओं की माँग पर यह निर्णय लिया गया।
- सामाजिक लाभ: घरेलू हिंसा में कमी, परिवार पर आर्थिक बोझ में कमी।
- आलोचना: राजस्व हानि, तस्करी में वृद्धि, कानूनी चुनौतियाँ।
- सुप्रीम कोर्ट: मद्यनिषेध को संवैधानिक माना; DPSP के Article 47 के अनुरूप।
2015 में नीतीश सरकार ने “सात निश्चय” की घोषणा की — ये 7 लक्ष्य बिहार के सामाजिक-आर्थिक विकास के रोडमैप हैं।
- आर्थिक हल, युवाओं को बल — रोजगार एवं कौशल विकास।
- आरक्षित रोजगार महिलाओं का अधिकार — सरकारी नौकरियों में 35% महिला आरक्षण।
- हर घर बिजली लगातार — ग्रामीण विद्युतीकरण।
- हर घर नल का जल — पेयजल आपूर्ति।
- घर तक पक्की गली-नाली — ग्रामीण सड़क और नाली।
- शौचालय निर्माण, घर का सम्मान — स्वच्छता मिशन।
- अवसर बढ़े, आगे पढ़े — उच्च शिक्षा अवसर।
Bihar Rural Livelihoods Promotion Society (BRLPS) — जीविका परियोजना 2006 में विश्व बैंक की सहायता से शुरू हुई। यह महिलाओं के SHG (स्वयं सहायता समूह) के माध्यम से ग्रामीण आजीविका का मॉडल है।
- 1.1 करोड़ से अधिक महिलाएं 10 लाख+ SHG से जुड़ी हैं।
- बैंक-लिंकेज: महिलाओं को क्रेडिट, माइक्रोफाइनेंस और कौशल प्रशिक्षण।
- शराबबंदी आंदोलन में जीविका महिलाओं की केंद्रीय भूमिका।
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) का राज्य मॉडल।


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