बिहार की आर्द्रता और वायु — लू
बिहार की जलवायु, आर्द्रता, मानसून और ग्रीष्मकालीन लू पर Bihar Govt. Competitive Exams एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
परिचय एवं जलवायु का स्वरूप
बिहार की आर्द्रता और वायु — विशेषकर लू — Bihar Govt. Competitive Exams के भूगोल खंड में बार-बार पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण विषय हैं। बिहार की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी (Tropical Monsoon) प्रकार की है, जिसमें गर्मी, आर्द्रता और वर्षा का विशेष चक्र चलता है।
बिहार भारत के उत्तर-पूर्वी भाग में 24°20’N से 27°31’N अक्षांश तथा 83°19’E से 88°17’E देशांतर के मध्य स्थित है। उत्तर में हिमालय की तराई, दक्षिण में छोटानागपुर पठार की सीमा, पश्चिम में उत्तर प्रदेश का मैदान और पूर्व में पश्चिम बंगाल — इन भौगोलिक स्थितियों के कारण बिहार की जलवायु पर अनेक शक्तियाँ प्रभाव डालती हैं।
आर्द्रता — परिभाषा, प्रकार एवं मापन
आर्द्रता (Humidity) वायुमण्डल में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को कहते हैं। यह बिहार की जलवायु को समझने का मूल आधार है क्योंकि यहाँ मानसून और लू दोनों ही आर्द्रता के विभिन्न रूपों का परिणाम हैं।
आर्द्रता के प्रमुख प्रकार
मापन उपकरण
| उपकरण | मापता है | विशेषता |
|---|---|---|
| हाइग्रोमीटर (Hygrometer) | सापेक्ष आर्द्रता | सबसे सामान्य यंत्र |
| साइक्रोमीटर (Psychrometer) | सापेक्ष आर्द्रता | आर्द्र एवं शुष्क बल्ब थर्मामीटर |
| हेयर हाइग्रोमीटर | सापेक्ष आर्द्रता | बालों की लम्बाई में परिवर्तन का उपयोग |
| ओसांक हाइग्रोमीटर | ओसांक (Dew Point) | संघनन बिन्दु का मापन |
बिहार में आर्द्रता का वितरण एवं मौसमी परिवर्तन
बिहार में आर्द्रता का वितरण न तो समान है और न ही स्थिर — यह ऋतु, भूगोल और स्थानीय वायु परिसंचरण के अनुसार बदलता रहता है। पूर्वी बिहार और पश्चिमी बिहार के बीच आर्द्रता में स्पष्ट अंतर देखा जाता है।
ऋतुवार आर्द्रता (मौसमी चक्र)
क्षेत्रीय आर्द्रता वितरण
| क्षेत्र | जिले | ग्रीष्म आर्द्रता | मानसून आर्द्रता | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| उत्तर-पूर्वी बिहार | पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार | 50–60% | 90–95% | सर्वाधिक आर्द्र, नेपाल व बंगाल का प्रभाव |
| मध्य बिहार | पटना, नालन्दा, वैशाली, सारण | 35–50% | 80–88% | मध्यम आर्द्रता, गंगा का प्रभाव |
| दक्षिणी बिहार | गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद | 30–45% | 75–85% | पठारी प्रभाव, अपेक्षाकृत कम वर्षा |
| पश्चिमी बिहार | रोहतास, कैमूर, भोजपुर, बक्सर | 20–35% | 72–82% | सर्वाधिक शुष्क ग्रीष्म, लू का केन्द्र |
| उत्तर-पश्चिमी बिहार | चम्पारण, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर | 40–55% | 82–90% | हिमालय की तराई से नमी, मध्यम आर्द्रता |
लू (Loo) — परिभाषा, उत्पत्ति एवं मार्ग
लू एक अत्यंत गर्म, शुष्क और तेज़ पश्चिमी अथवा उत्तर-पश्चिमी हवा है जो मई-जून में उत्तर भारत के मैदानों में — विशेषकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार के पश्चिमी भागों में — चलती है। यह Bihar Govt. Competitive Exams में बार-बार पूछा जाने वाला विषय है।
लू की परिभाषा एवं मुख्य लक्षण
लू की उत्पत्ति एवं कारण
लू की उत्पत्ति मुख्यतः थार मरुस्थल (राजस्थान) में होती है। ग्रीष्मकाल में यहाँ की बालुई भूमि बहुत तेज़ी से गर्म होती है। इस अत्यधिक तापमान के कारण निम्न वायुदाब (Low Pressure) का क्षेत्र बनता है। आसपास की ठंडी हवाएँ इस ओर खिंचती हैं, लेकिन रेगिस्तान से गुज़रते हुए वे स्वयं गर्म और शुष्क हो जाती हैं। इसी प्रक्रिया से लू का जन्म होता है।
राजस्थान में मई-जून में तापमान 50°C तक पहुँच जाता है, जो लू को और भी तीव्र बना देता है। यहाँ से लू पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार के पश्चिमी छोर तक पहुँचती है।
लू का मार्ग पश्चिम से पूर्व की ओर है। राजस्थान → मध्य प्रदेश का उत्तरी भाग → उत्तर प्रदेश → बिहार — यही लू का प्रमुख मार्ग है। जैसे-जैसे लू पूर्व की ओर बढ़ती है, बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी के कारण इसकी तीव्रता घटती जाती है।
बिहार में लू से सर्वाधिक प्रभावित जिले हैं — रोहतास, कैमूर, भोजपुर, बक्सर, सारण, सीवान और गोपालगंज। पटना भी लू की चपेट में आता है, लेकिन पूर्वी बिहार के जिले — पूर्णिया, अररिया, किशनगंज — बंगाल की नमी के कारण अपेक्षाकृत कम प्रभावित होते हैं।
बिहार के पूर्वी भागों में बंगाल की खाड़ी से आने वाली आर्द्र हवाएँ लू की तीव्रता को कम करती हैं। जब यह नमी भरी पूर्वी हवा और पश्चिम से आने वाली शुष्क लू का टकराव होता है, तो तूफानी वर्षा (Nor’wester / काल बैसाखी) की सम्भावना बन जाती है। यह मई-जून में बिहार के पूर्वी जिलों में देखा जाता है।
लू के प्रभाव, कारण एवं बचाव
लू केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि बिहार में प्रतिवर्ष सैकड़ों मौतों और आर्थिक नुकसान का कारण बनती है। इसके कारण, प्रभाव और बचाव के उपाय परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
लू उत्पन्न होने के मुख्य कारण
राजस्थान की बालुई मिट्टी तीव्र गति से गर्म होती है, जिससे निम्न वायुदाब बनता है और शुष्क हवाएँ पूर्व की ओर बहती हैं।
मैदानी क्षेत्र में वनस्पति की कमी, खुली भूमि और उच्च ताप अवशोषण क्षमता लू को और तीव्र बनाती है।
जब मानसून सामान्य से देर से आता है तो लू का प्रकोप लम्बे समय तक बना रहता है और ग्रीष्म अधिक कष्टकर हो जाती है।
वैश्विक तापमान वृद्धि (Global Warming) के कारण लू की आवृत्ति और तीव्रता दोनों में वृद्धि हो रही है। बिहार में Heat Wave Days बढ़ रहे हैं।
वन आवरण (Forest Cover) घटने से भूमि की वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन क्षमता घटती है, जिससे स्थानीय तापमान और शुष्कता बढ़ती है।
पटना जैसे शहरों में Urban Heat Island Effect के कारण तापमान ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में 2–4°C अधिक रहता है।
लू के दुष्प्रभाव
- Heat Stroke (लू लगना): शरीर का तापमान 40°C से ऊपर, बेहोशी, दौरे — जानलेवा स्थिति।
- Heat Exhaustion: अत्यधिक पसीना, कमज़ोरी, उल्टी, चक्कर।
- Dehydration: तेज़ लू में शरीर से पानी और नमक की अत्यधिक हानि।
- Heat Cramps: माँसपेशियों में ऐंठन, विशेषकर पेट और टाँगों में।
- मृत्यु दर: बिहार में प्रतिवर्ष लू से औसतन 100–200 मौतें होती हैं।
- फसल नुकसान: गेहूँ और दलहन की फसलें लू से झुलस जाती हैं — विशेषकर अप्रैल-मई में।
- मिट्टी की नमी: लू के कारण भूमि से जल का तीव्र वाष्पीकरण होता है, जिससे सिंचाई की माँग बढ़ जाती है।
- पशुधन: मवेशियों में Heat Stress, दूध उत्पादन में गिरावट और मृत्यु।
- बागवानी: आम, लीची आदि फलों के पकने की प्रक्रिया असामान्य हो जाती है।
बचाव एवं सरकारी उपाय
- पूर्व चेतावनी प्रणाली: IMD के साथ समन्वय में ऑरेंज/रेड अलर्ट जारी।
- शीतल केन्द्र (Cooling Centres): सरकारी भवनों में आमजन के लिए खुले।
- ORS वितरण: स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में Oral Rehydration Solution वितरण।
- स्कूल-कॉलेज बंद: अत्यधिक गर्मी में शिक्षण संस्थाएँ बंद रखने के आदेश।
- NDMA दिशानिर्देश: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के Heat Wave प्रोटोकॉल का पालन।
मानसून एवं आर्द्रता का अन्तःसम्बन्ध
बिहार में आर्द्रता का सर्वाधिक महत्वपूर्ण नियामक दक्षिण-पश्चिम मानसून है। मानसून की दिशा, समय और तीव्रता सीधे तौर पर राज्य की आर्द्रता, वर्षा और लू की समाप्ति को निर्धारित करते हैं।
मानसून का बिहार में प्रवेश एवं विदाई
| घटना | सामान्य तिथि | क्षेत्र | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| मानसून प्रवेश | जून के प्रथम सप्ताह | पूर्णिया, अररिया (पूर्वी बिहार) | आर्द्रता अचानक 85%+ हो जाती है, लू समाप्त |
| पटना में मानसून | 15–20 जून | मध्य बिहार | भीषण गर्मी से राहत, मानसूनी वर्षा शुरू |
| पश्चिमी बिहार | 20–25 जून | रोहतास, कैमूर | लू की अंतिम आँधी, फिर राहत |
| मानसून विदाई | अक्टूबर प्रथम सप्ताह | पश्चिम से पूर्व क्रम | आर्द्रता धीरे-धीरे घटती है |
काल बैसाखी (Nor’wester) — लू और मानसून का संगम
बिहार और पश्चिम बंगाल में मई-जून में काल बैसाखी नामक तूफानी वर्षा होती है। यह उस समय उत्पन्न होती है जब पश्चिम से आने वाली गर्म शुष्क हवा (लू) और बंगाल की खाड़ी से आने वाली आर्द्र हवाओं का टकराव होता है। इस टकराव से तीव्र ऊर्ध्वाधर संवहन (Convection) होता है, जिससे गरज-चमक के साथ भारी वर्षा होती है।
आर्द्रता और वर्षा का सम्बन्ध
जब वायु की सापेक्ष आर्द्रता 100% तक पहुँचती है, तो वायु संतृप्त (Saturated) हो जाती है। इस अवस्था में वायुमण्डल में अतिरिक्त जलवाष्प संघनित (Condense) होकर बादल और वर्षा का रूप लेता है। बिहार में मानसून के दौरान यही प्रक्रिया प्रतिदिन दोहराई जाती है।
जिलावार तुलना एवं त्वरित संदर्भ सारणी
परीक्षा में अक्सर विशेष जिलों की जलवायु विशेषताएँ पूछी जाती हैं। नीचे दी गई त्वरित संदर्भ सारणी Bihar Govt. Competitive Exams के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है।
Interactive MCQ अभ्यास
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