बिहार की जलवायु का कृषि पर प्रभाव
फसल चक्र — खरीफ, रबी एवं जायद | Bihar Competitive Exams 2024–25
परिचय एवं जलवायु सिंहावलोकन
बिहार की जलवायु का कृषि पर प्रभाव Bihar Govt. Competitive Exams एवं अन्य बिहार सरकार की प्रतियोगी परीक्षाओं का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। बिहार की मानसूनी जलवायु, उपजाऊ गंगा मैदान और तीन विविध फसल ऋतुएँ — खरीफ, रबी एवं जायद — मिलकर इस राज्य को भारत के प्रमुख कृषि राज्यों में स्थान देती हैं।
बिहार 24°20′ उत्तरी अक्षांश से 27°31′ उत्तरी अक्षांश तथा 83°19′ पूर्वी देशांतर से 88°17′ पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है। यह उपोष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु क्षेत्र में आता है। राज्य की जलवायु को मुख्य रूप से Koppen वर्गीकरण के अनुसार Cwa (आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय) प्रकार में रखा जाता है।
बिहार में मिट्टी के प्रकार एवं कृषि योग्यता
| क्र. | मिट्टी का प्रकार | क्षेत्र | प्रमुख फसलें |
|---|---|---|---|
| 1 | नई जलोढ़ (Khadar) | गंगा तटीय मैदान | धान, गेहूँ, गन्ना |
| 2 | पुरानी जलोढ़ (Bhangar) | उत्तर बिहार का समतल क्षेत्र | मक्का, दलहन, तिलहन |
| 3 | दोमट मिट्टी | मध्यवर्ती एवं दक्षिण बिहार | गेहूँ, चना, सरसों |
| 4 | लाल-पीली मिट्टी | गया, नवादा, औरंगाबाद पठार क्षेत्र | अरहर, मसूर, मोटे अनाज |
| 5 | ताल/चौर मिट्टी | उत्तर बिहार के निम्न क्षेत्र | रबी धान (विशेष जलभराव प्रतिरोधी) |
जलवायु कारक एवं कृषि पर उनका प्रभाव
जलवायु के पाँच प्रमुख कारक — तापमान, वर्षा, आर्द्रता, पाला एवं सूर्यप्रकाश की अवधि — बिहार की कृषि उत्पादकता को सीधे प्रभावित करते हैं। इन कारकों का संतुलित स्वरूप ही तीन फसल ऋतुओं को संभव बनाता है।
धान को 20–35°C, गेहूँ को 10–25°C, मक्का को 20–30°C तापमान की आवश्यकता है। बिहार का तापमान परास इन सभी फसलों के अनुकूल है।
मानसूनी वर्षा खरीफ फसलों की मुख्य जलापूर्ति है। उत्तर-पूर्वी बिहार में अधिक वर्षा — धान के लिए उत्तम। पश्चिमी बिहार में कम वर्षा — सिंचाई पर निर्भरता अधिक।
दिसंबर–जनवरी में पड़ने वाला पाला आलू, टमाटर, सरसों की फसल को क्षति पहुँचाता है। गया, औरंगाबाद जिलों में पाले का प्रभाव सर्वाधिक होता है।
धान Short-day plant है — घटते दिन में पुष्पण होता है। गेहूँ Long-day plant है — बढ़ते दिन में पुष्पण। बिहार की ऋतुवत् फोटोपीरियड इन दोनों के लिए उपयुक्त है।
उच्च आर्द्रता (80–90%) मानसून काल में ब्लास्ट, ब्राउन स्पॉट जैसे रोगों को बढ़ावा देती है। शीत काल में कम आर्द्रता रबी फसलों के लिए अनुकूल रहती है।
उत्तर बिहार — कोसी, गंडक, बागमती नदियाँ — प्रतिवर्ष बाढ़ लाती हैं। एक ओर उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी का जमाव, दूसरी ओर खड़ी फसल का नुकसान।
जलवायु ऋतुएँ एवं फसल कैलेंडर — सारणी
| जलवायु ऋतु | माह | तापमान | वर्षा | प्रासंगिक फसल ऋतु |
|---|---|---|---|---|
| ग्रीष्म | मार्च – जून | 35–45°C | न्यूनतम (5–15 मि.मी.) | जायद (Zaid) फसलें |
| मानसून (वर्षा) | जून – सितंबर | 25–35°C | अधिकतम (80–90% वार्षिक) | खरीफ (Kharif) बुआई व वृद्धि |
| शरद | अक्टूबर – नवंबर | 20–30°C | घटती (30–50 मि.मी.) | खरीफ कटाई + रबी बुआई |
| शीत | दिसंबर – फरवरी | 4–20°C | न्यूनतम (पश्चिमी विक्षोभ से कभी-कभी) | रबी (Rabi) वृद्धि एवं कटाई |
खरीफ फसल चक्र (Kharif Crop Season)
खरीफ अरबी शब्द है जिसका अर्थ है “पतझड़”। ये फसलें मानसून के साथ बोई जाती हैं और शरद ऋतु में काटी जाती हैं। बिहार में खरीफ फसलों का बुआई काल जून–जुलाई तथा कटाई काल अक्टूबर–नवंबर होता है।
- बुआई काल: जून–जुलाई (दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ)
- कटाई काल: अक्टूबर–नवंबर (मानसून वापसी के बाद)
- जलापूर्ति: मुख्यतः मानसूनी वर्षा (1,000–1,500 मि.मी. आवश्यक)
- तापमान आवश्यकता: 25–35°C (उष्ण एवं आर्द्र जलवायु)
- दिन की लंबाई: Short-day photoperiod पर फूलना (जैसे धान)
- बिहार में महत्व: कुल खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 55–60% खरीफ से
बिहार की प्रमुख खरीफ फसलें
| फसल | बुआई | कटाई | आवश्यक वर्षा | प्रमुख जिले |
|---|---|---|---|---|
| धान (Rice) | जून–जुलाई | अक्टूबर–नवंबर | 1,000–2,000 मि.मी. | पटना, नालंदा, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी |
| मक्का (Maize) | जून–जुलाई | सितंबर–अक्टूबर | 600–1,000 मि.मी. | खगड़िया, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, कटिहार |
| अरहर/तुअर (Pigeon Pea) | जून–जुलाई | नवंबर–दिसंबर | 600–1,000 मि.मी. | गया, औरंगाबाद, नवादा, जमुई, बाँका |
| मूँगफली (Groundnut) | जून–जुलाई | अक्टूबर–नवंबर | 500–1,200 मि.मी. | गया, रोहतास, औरंगाबाद |
| जूट (Jute) | मार्च–मई | जुलाई–सितंबर | 1,000–1,500 मि.मी. | पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया |
| गन्ना (Sugarcane) | फरवरी–मार्च | नवंबर–मार्च (अगले वर्ष) | 1,500–2,500 मि.मी. | पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सारण, सीवान, गोपालगंज |
धान उत्पादन एवं जलवायु की भूमिका
बिहार में धान सबसे प्रमुख खरीफ फसल है जो राज्य के कुल कृषि क्षेत्रफल के लगभग 35–40% पर उगाई जाती है। राज्य में धान की तीन प्रकार की खेती होती है:
रबी फसल चक्र (Rabi Crop Season)
रबी अरबी शब्द है जिसका अर्थ है “वसंत”। ये शीतकालीन फसलें हैं जो शरद ऋतु (अक्टूबर–नवंबर) में बोई जाती हैं और वसंत ऋतु (मार्च–अप्रैल) में काटी जाती हैं। बिहार में रबी फसलों की उत्पादकता में हरित क्रांति के बाद महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।
- बुआई काल: अक्टूबर–नवंबर (खरीफ कटाई के बाद)
- कटाई काल: मार्च–अप्रैल (ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ से पहले)
- जलापूर्ति: सिंचाई + कभी-कभी पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) से वर्षा
- तापमान आवश्यकता: 10–22°C (ठंडी एवं शुष्क जलवायु)
- विशेषता: इन फसलों को पकने के समय उज्ज्वल शुष्क मौसम की आवश्यकता होती है।
- बिहार में महत्व: गेहूँ, चना, मसूर, सरसों — खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण।
बिहार की प्रमुख रबी फसलें
| फसल | बुआई | कटाई | तापमान | प्रमुख जिले |
|---|---|---|---|---|
| गेहूँ (Wheat) | नवंबर–दिसंबर | मार्च–अप्रैल | 10–22°C | पटना, गया, नालंदा, बक्सर, भोजपुर, रोहतास, सीवान |
| चना (Gram) | अक्टूबर–नवंबर | फरवरी–मार्च | 10–20°C | गया, औरंगाबाद, पटना, नालंदा, अरवल, जहानाबाद |
| मसूर (Lentil) | अक्टूबर–नवंबर | मार्च–अप्रैल | 15–25°C | पटना, गया, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सारण |
| सरसों (Mustard) | अक्टूबर–नवंबर | फरवरी–मार्च | 15–25°C | पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल |
| आलू (Potato) | अक्टूबर–नवंबर | जनवरी–फरवरी | 15–20°C | नालंदा, पटना, भोजपुर, सारण |
| मटर (Pea) | अक्टूबर–नवंबर | जनवरी–फरवरी | 10–18°C | सहरसा, दरभंगा, वैशाली, मुजफ्फरपुर |
गेहूँ उत्पादन एवं जलवायु की भूमिका
गेहूँ बिहार की सबसे महत्वपूर्ण रबी फसल है। बिहार में गेहूँ उत्पादन में हरित क्रांति (Green Revolution) के बाद से निरंतर वृद्धि हुई है। HYV बीज (PBW-343, HD-2967, K-307) तथा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने उत्पादन बढ़ाया।
- बुआई: 10–15°C तापमान
- वृद्धि: 15–20°C तापमान
- पकाव: शुष्क, गर्म (22°C+)
- वर्षा: 50–75 सेमी पर्याप्त
- पाला — दाना बनने के समय हानिकारक
- लू (Loo) — मार्च-अप्रैल में गर्म हवाएँ
- अकाल वर्षा — कटाई के समय हानिकारक
- अधिक नमी — रस्ट रोग का कारण
जायद फसल चक्र (Zaid Crop Season)
जायद (Zaid) अरबी शब्द है जिसका अर्थ है “अतिरिक्त”। यह फसल ऋतु रबी कटाई (मार्च–अप्रैल) के बाद और खरीफ बुआई (जून) से पहले की संक्षिप्त अवधि है। इसे ग्रीष्मकालीन फसल भी कहा जाता है।
- बुआई काल: मार्च–अप्रैल (रबी कटाई के तुरंत बाद)
- कटाई काल: मई–जून (खरीफ बुआई से पूर्व)
- जलापूर्ति: पूर्णतः सिंचाई पर निर्भर (कोई मानसून नहीं)
- तापमान: 30–40°C — ग्रीष्म ऋतु की उच्च तापमान सहनशील फसलें
- अवधि: अत्यंत कम (60–90 दिन) — जल्द परिपक्व फसलें
- उद्देश्य: भूमि उपयोग अधिकतम करना, अतिरिक्त आय, सब्जी एवं फल आपूर्ति
बिहार की प्रमुख जायद फसलें
जायद फसलों हेतु विशेष भू-क्षेत्र — दियारा भूमि
दियारा (Diara) बिहार की गंगा, गंडक, कोसी, बागमती, सोन नदियों के किनारे की बाढ़ मैदानी भूमि है। यह भूमि बाढ़ के बाद अत्यंत उपजाऊ हो जाती है। जायद ऋतु में यहाँ:
- खरबूजा एवं तरबूज की व्यापक खेती — विशेषकर गंगा दियारा में (पटना, भोजपुर, बक्सर)
- सब्जियाँ (खीरा, ककड़ी, लौकी) — पटना, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर के दियारा क्षेत्र
- बालू मिश्रित जलोढ़ मिट्टी इन फसलों के लिए आदर्श है।
क्षेत्रवार कृषि विविधता एवं जलवायु
बिहार को कृषि-जलवायु की दृष्टि से तीन प्रमुख क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है — उत्तर बिहार मैदान, दक्षिण बिहार मैदान एवं दक्षिणी पठारी क्षेत्र। प्रत्येक क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और जल उपलब्धता में भिन्नता कृषि पैटर्न को प्रभावित करती है।
| क्षेत्र | जलवायु विशेषता | प्रमुख खरीफ | प्रमुख रबी | विशेष फसल |
|---|---|---|---|---|
| उत्तर-पश्चिम बिहार (चंपारण, गोपालगंज, सीवान) | उच्च वर्षा (1,200–1,500 मि.मी.), नदी सिंचित | धान, मक्का | गेहूँ, मसूर | गन्ना (चंपारण शुगर मिल्स) |
| उत्तर-मध्य बिहार (मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी) | बाढ़ प्रभावित, उपजाऊ जलोढ़, आर्द्र | धान, जूट | गेहूँ, मटर, सब्जियाँ | लीची, केला, मखाना |
| उत्तर-पूर्व बिहार (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज) | सर्वाधिक वर्षा (1,400–1,800 मि.मी.), आर्द्र उष्णकटिबंधीय | धान, जूट, मक्का | सरसों, आलू | जूट, चाय (किशनगंज) |
| मध्य बिहार (गंगा मैदान) (पटना, नालंदा, वैशाली) | मध्यम वर्षा, उत्तम जलोढ़, सिंचाई सुविधा | धान, मक्का | गेहूँ, चना, आलू | सब्जियाँ, फल (पटना दियारा) |
| दक्षिण बिहार (गया, औरंगाबाद, नवादा, अरवल) | कम वर्षा (900–1,100 मि.मी.), पठारी प्रभाव | अरहर, मूँगफली, मक्का | चना, मसूर, सरसों | अरहर दाल, लहसुन |
| दक्षिण-पूर्व पठार (जमुई, बाँका, मुंगेर) | लाल-पीली मिट्टी, कम वर्षा, पथरीला क्षेत्र | मक्का, अरहर, ज्वार-बाजरा | चना, मसूर | आम, मक्का (Hybrid) |
विशेष एवं नकदी फसलें
🌿 मखाना (Makhana / Fox Nut)
दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल🍵 चाय (Tea)
किशनगंज जिलाजलवायु परिवर्तन, चुनौतियाँ एवं समाधान
जलवायु परिवर्तन बिहार की कृषि के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत कर रहा है। तापमान वृद्धि, अनियमित मानसून, बाढ़ और सूखे की बारंबारता में वृद्धि से तीनों फसल चक्र प्रभावित हो रहे हैं।
- तापमान वृद्धि: 2050 तक बिहार में 1.5–2°C तापमान वृद्धि अनुमानित — गेहूँ उत्पादन में 6–10% कमी संभव।
- मानसून की अनिश्चितता: Delayed onset (देरी से आगमन) एवं Early withdrawal — खरीफ बुआई प्रभावित।
- कोसी बाढ़: प्रतिवर्ष उत्तर बिहार में लाखों हेक्टेयर खड़ी फसल नष्ट।
- दक्षिण बिहार में सूखा: कम वर्षा वाले वर्षों में गया, औरंगाबाद में फसल विफलता।
- ओला वृष्टि (Hailstorm): फरवरी–मार्च में खड़ी रबी फसल को क्षति।
सरकारी योजनाएँ एवं समाधान
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY): प्राकृतिक आपदाओं से फसल हानि पर बीमा — बिहार में व्यापक रूप से लागू।
- राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY): कृषि अवसंरचना विकास — सिंचाई, भंडारण, प्रसंस्करण।
- जलजीवन हरियाली मिशन (बिहार): जल संरक्षण, पोखरों/तालाबों का जीर्णोद्धार, वृक्षारोपण।
- आत्मनिर्भर बिहार — कृषि रोडमैप: 7वाँ कृषि रोडमैप (2023–28) — जैविक खेती, उत्पादन वृद्धि, बाजार पहुँच।
- PMKSY (प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना): “हर खेत को पानी” — बिहार में 21 लाख हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई लक्ष्य।
- बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर: जलवायु अनुकूलित बीज किस्मों का विकास।
- SRI पद्धति (System of Rice Intensification): कम जल, अधिक धान उत्पादन — जलवायु परिवर्तन के दौर में महत्वपूर्ण।
- Zero Tillage (शून्य जुताई): रबी की बुआई में जल एवं ऊर्जा बचत।
- बाढ़ सहिष्णु धान किस्में: Swarna Sub 1 (14 दिन जलमग्नता सहन)।
- सूखा प्रतिरोधी किस्में: IR-64, DRR Dhan 42 — दक्षिण बिहार के लिए।


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