केंद्र सरकार की योजनाओं का बिहार पर प्रभाव
प्रमुख केंद्रीय योजनाएँ, उनका क्रियान्वयन और बिहार के विकास में योगदान — BPSC परीक्षा हेतु सम्पूर्ण विश्लेषण
परिचय एवं पृष्ठभूमि
बिहार में केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रभाव BPSC Prelims एवं Mains दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। बिहार भारत के सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाले एवं विकास की दृष्टि से पिछड़े राज्यों में से एक है — यही कारण है कि केंद्र सरकार की ग्रामीण विकास, कृषि, अवसंरचना, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सम्बंधी योजनाएँ यहाँ विशेष रूप से प्रभावशाली रही हैं।
📌 केंद्रीय योजनाओं की श्रेणियाँ
ग्रामीण विकास योजनाएँ
बिहार की 89% जनसंख्या ग्रामीण होने के कारण केंद्र की ग्रामीण विकास योजनाएँ राज्य के विकास की रीढ़ हैं। इन योजनाओं ने रोजगार, आवास, सड़क एवं स्वच्छता के क्षेत्र में बिहार में उल्लेखनीय परिवर्तन लाए हैं।
मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय | प्रारंभ: 2 फरवरी 2006 | अधिनियम: MGNREGA 2005
यह योजना प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 100 दिन का गारंटीकृत रोजगार प्रदान करती है। बिहार में यह योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ रोजगार के अवसर सीमित हैं और प्रवासन की समस्या गंभीर है।
- बिहार में लाभ: प्रतिवर्ष 1.5 करोड़+ परिवारों को रोजगार। ग्रामीण पलायन रोकने में सहायक।
- मजदूरी दर: बिहार में ₹228 प्रतिदिन (2023–24)।
- कार्य क्षेत्र: तालाब निर्माण, भूमि संरक्षण, सिंचाई, सड़क निर्माण।
- महिला सहभागिता: बिहार में 55%+ महिला श्रमिक — महिला सशक्तीकरण में योगदान।
- चुनौतियाँ: भुगतान में विलंब, कार्य की गुणवत्ता, फर्जी जॉब कार्ड।
मंत्रालय: ग्रामीण विकास | प्रारंभ: 20 नवम्बर 2016 | पूर्ववर्ती: Indira Awas Yojana (IAY)
इस योजना का लक्ष्य 2022 तक सभी को घर (Housing for All) था। बिहार इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी राज्यों में है।
- सहायता राशि: मैदानी क्षेत्र में ₹1.20 लाख प्रति लाभार्थी।
- बिहार में लक्ष्य: 53 लाख+ आवास निर्माण। अब तक 40 लाख+ पूर्ण।
- विशेषता: महिला के नाम पर / संयुक्त नाम पर आवास पंजीकरण अनिवार्य।
- वित्तपोषण: केंद्र–राज्य 60:40 अनुपात।
- SECC डेटा: लाभार्थी चयन Socio-Economic Caste Census के आधार पर।
मंत्रालय: ग्रामीण विकास | प्रारंभ: 25 दिसम्बर 2000 | संस्थापक: PM अटल बिहारी वाजपेयी
500+ जनसंख्या वाले गाँवों को All-Weather Road से जोड़ना इसका लक्ष्य था। PMGSY-II (2013) और PMGSY-III (2019) भी लागू हुए।
- बिहार में उपलब्धि: 35,000+ किमी सड़क निर्माण। 12,000+ गाँव जोड़े गए।
- महत्व: किसानों को बाजार, छात्रों को विद्यालय और रोगियों को अस्पताल तक पहुँच।
- PMGSY-III: पहले से बनी सड़कों का उन्नयन (Upgradation)।
- चुनौती: बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में सड़क रखरखाव कठिन।
प्रारंभ: 2 अक्टूबर 2014 | लक्ष्य: Open Defecation Free (ODF) भारत
बिहार में इस योजना का प्रभाव उल्लेखनीय रहा। राज्य ने 2019 में स्वयं को ODF घोषित किया।
- शौचालय निर्माण: बिहार में 2 करोड़+ शौचालयों का निर्माण।
- SBM-II (2020–25): ODF+ और ODF++ के लक्ष्य; ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन।
- प्रोत्साहन: प्रति शौचालय ₹12,000 की सहायता।
- प्रभाव: महिलाओं की गरिमा एवं सुरक्षा में सुधार; डायरिया, हैजा जैसी बीमारियों में कमी।
कृषि एवं खाद्य सुरक्षा योजनाएँ
बिहार की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है — राज्य की 75%+ आबादी कृषि पर निर्भर है। केंद्र की कृषि एवं खाद्य सुरक्षा योजनाओं का बिहार पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
| योजना | प्रारंभ | लाभ / विशेषता | बिहार में प्रभाव |
|---|---|---|---|
| PM Kisan Samman Nidhi | फरवरी 2019 | ₹6,000/वर्ष — 3 किस्तों में | 85 लाख+ किसान लाभार्थी |
| PM Fasal Bima Yojana (PMFBY) | 2016 | फसल बीमा — प्रीमियम 2% (खरीफ) | बाढ़ एवं सूखे से प्रभावित किसानों को राहत |
| National Food Security Act (NFSA) | 2013 | ₹1–3/किग्रा पर अनाज; 67% जनसंख्या को | बिहार में 8.71 करोड़ NFSA लाभार्थी |
| PM Kisan Urja Suraksha (KUSUM) | 2019 | सौर पम्प एवं सौर ऊर्जा संयंत्र | सिंचाई लागत में कमी; ऊर्जा स्वतंत्रता |
| Soil Health Card Scheme | 2015 | मिट्टी परीक्षण एवं पोषक तत्व सुझाव | उर्वरक उपयोग में सुधार; उत्पादकता वृद्धि |
| e-NAM (National Agriculture Market) | 2016 | ऑनलाइन कृषि मंडी — MSP का लाभ | बिहार APMC Act न होने से सीमित प्रभाव |
| Pradhan Mantri Annadata Aay Sanrakshan (PM-AASHA) | 2018 | MSP सुनिश्चित करने की योजना | दलहन एवं तिलहन किसानों को लाभ |
| One Nation One Ration Card (ONORC) | 2019 | देश में कहीं भी राशन लेने की सुविधा | प्रवासी बिहारी मजदूरों को बड़ा लाभ |
अवसंरचना एवं ऊर्जा योजनाएँ
बिहार लंबे समय से अवसंरचना की कमी से जूझता रहा है। केंद्र सरकार की अवसंरचना एवं ऊर्जा योजनाओं ने राज्य की कनेक्टिविटी, बिजली आपूर्ति और शहरी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
PM Gram Sadak Yojana (PMGSY)
2000 — सड़क संपर्कSaubhagya Yojana (PMSY)
2017 — हर घर बिजलीDeen Dayal Upadhyaya Gram Jyoti Yojana (DDUGJY)
2015 — ग्रामीण विद्युतीकरणBharatmala Pariyojana
2017 — राष्ट्रीय राजमार्गJal Jeevan Mission (JJM)
2019 — हर घर नल जलSagarmala / Inland Waterways
NW-1 — गंगा जलमार्ग🏙️ शहरी विकास योजनाएँ
- AMRUT (Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation, 2015): पटना, गया, भागलपुर, बिहारशरीफ, दरभंगा — 5 बिहारी शहरों में जल, सीवर एवं हरित क्षेत्र विकास।
- Smart Cities Mission (2015): पटना स्मार्ट सिटी सूची में शामिल। डिजिटल अवसंरचना, CCTV, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम।
- PM Awas Yojana Urban (PMAY-U, 2015): शहरी गरीबों को आवास। पटना, गया, मुजफ्फरपुर में बड़े पैमाने पर निर्माण।
- Digital India — BharatNet (2015): ग्रामीण क्षेत्रों में optical fibre। बिहार में 45,000+ ग्राम पंचायतें जोड़ने का लक्ष्य।
सामाजिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य योजनाएँ
बिहार में स्वास्थ्य अवसंरचना राष्ट्रीय औसत से पीछे है — प्रति 10,000 जनसंख्या पर अस्पताल बेड की संख्या अत्यंत कम है। केंद्र की स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने इस खाई को पाटने का कार्य किया है।
📊 बिहार में स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार
शिक्षा एवं कौशल विकास योजनाएँ
बिहार की साक्षरता दर 61.8% (Census 2011) — राष्ट्रीय औसत (73%) से काफी कम। केंद्र की शिक्षा एवं कौशल विकास योजनाओं ने इस अंतर को पाटने में योगदान दिया है।
🏫 बिहार में केंद्रीय शिक्षा संस्थान — केंद्र की देन
- IIT पटना (2008): केंद्रीय तकनीकी संस्थान — NIT Act 2007 के तहत।
- NIT पटना (NIT दर्जा: 2004): राष्ट्रीय महत्व का संस्थान।
- AIIMS पटना (2012): PMSSY योजना के तहत — केंद्र प्रायोजित।
- केंद्रीय विश्वविद्यालय बिहार, गया (2009): Central Universities Act, 2009।
- NIFT पटना (2008): फैशन एवं टेक्सटाइल डिजाइन शिक्षा।
- नालंदा विश्वविद्यालय (2010 Act): अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय — केंद्र एवं EAS देशों की पहल।
बिहार को विशेष पैकेज एवं विशेष राज्य का दर्जा
बिहार की केंद्र-राज्य सम्बंधों में सबसे महत्वपूर्ण माँग रही है — विशेष राज्य का दर्जा (Special Category Status)। यह राजनीतिक एवं आर्थिक दृष्टि से BPSC Mains का एक प्रमुख विषय है।
📦 2015 का विशेष पैकेज
| पैकेज का क्षेत्र | आवंटित राशि / योजना | विवरण |
|---|---|---|
| सड़क एवं रेलवे | ₹54,700 करोड़ | NH चौड़ीकरण, पुल, रेल लाइन दोहरीकरण |
| विद्युत | ₹26,000 करोड़ | DDUGJY, Saubhagya के तहत ग्रामीण विद्युतीकरण |
| AIIMS पटना विस्तार | ₹1,000 करोड़+ | AIIMS क्षमता विस्तार एवं नए विभाग |
| IIT पटना विस्तार | ₹500 करोड़+ | स्थायी परिसर (बिहटा) निर्माण |
| नालंदा विश्वविद्यालय | विशेष आवंटन | अंतर्राष्ट्रीय परिसर निर्माण (राजगीर) |
| Ganga Rail-cum-Road Bridge | ₹3,000 करोड़+ | दीघा–सोनपुर पुल; कनेक्टिविटी |
⚖️ विशेष राज्य दर्जा — माँग एवं विवाद
Special Category Status (SCS) वह दर्जा है जो पिछड़े, पहाड़ी, सीमावर्ती एवं छोटे राज्यों को दिया जाता है। वर्तमान में 11 राज्यों को यह दर्जा प्राप्त है (J&K, हिमाचल, उत्तराखंड, NE राज्य आदि)।
- SCS के लाभ: केंद्रीय योजनाओं में 90:10 वित्तपोषण (राज्य को केवल 10% देना होता है)। कर छूट — उद्योगों को आकर्षित करने में सहायक।
- बिहार की माँग के कारण: 2000 में झारखंड अलग होने से खनिज संपन्न क्षेत्र गया। बिहार का प्रति व्यक्ति राजस्व बहुत कम। बाढ़ की समस्या — हर वर्ष आर्थिक क्षति।
- केंद्र का रुख: 14वें वित्त आयोग के बाद SCS की प्रथा समाप्त। 15वें वित्त आयोग ने बिहार को 10.06% कर हिस्सेदारी — जो पर्याप्त मुआवजा मानी गई।
- Raghuram Rajan समिति (2013): एक Multi-Dimensional Index बनाने की सिफारिश — बिहार इसमें सबसे पिछड़े राज्यों में था।
झारखंड अलग होने से खनिज राजस्व गया। प्रति व्यक्ति आय बेहद कम। वार्षिक बाढ़ से GDP का 10–15% नुकसान। औद्योगिक निवेश आकर्षित करने हेतु कर लाभ आवश्यक।
14वें वित्त आयोग ने SCS समाप्त किया — सभी राज्यों को अधिक tax devolution मिलती है। बिहार को 10.06% हिस्सेदारी — सर्वाधिक। विशेष पैकेज SCS से अधिक लाभकारी हो सकता है।
MCQ अभ्यास प्रश्न
नीचे दिए गए पाँच MCQ BPSC Prelims स्तर पर आधारित हैं। किसी भी विकल्प पर क्लिक करें — सही उत्तर हरे रंग में और गलत लाल रंग में दिखेगा।


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