बिहार की जलवायु — सामान्य परिचय
उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु, मौसम-चक्र एवं BPSC Prelims + Mains के लिए सम्पूर्ण विश्लेषण
परिचय एवं भौगोलिक आधार
बिहार की जलवायु BPSC परीक्षा के भूगोल खंड का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। बिहार एक भू-आवेष्ठित (Landlocked) राज्य है जो उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु क्षेत्र में स्थित है। इसकी जलवायु की विशेषताएँ इसकी भौगोलिक स्थिति, स्थलाकृति और हिमालय की निकटता से गहराई से जुड़ी हैं।
बिहार का क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किमी है। यह राज्य पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश, उत्तर में नेपाल तथा दक्षिण में झारखंड से घिरा है। समुद्र से दूरी और हिमालय की निकटता — ये दोनों तत्त्व मिलकर बिहार की विशिष्ट जलवायु का निर्माण करते हैं।
| 1 विशेषता | विवरण |
|---|---|
| जलवायु प्रकार | उष्णकटिबंधीय मानसूनी (Tropical Monsoon) |
| कोपेन वर्गीकरण | Aw / Cwa (उत्तरी बिहार में Cwa) |
| औसत वार्षिक वर्षा | 1,000 – 1,500 mm (राज्य औसत लगभग 1,200 mm) |
| अधिकतम तापमान | 45°C – 48°C (ग्रीष्म में, गया/औरंगाबाद क्षेत्र) |
| न्यूनतम तापमान | 4°C – 6°C (शीत में, उत्तरी मैदान) |
| मानसून आगमन | जून के प्रथम सप्ताह (पूर्वी बिहार) |
| मानसून विदाई | अक्टूबर के अंत तक |
जलवायु का प्रकार — उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु
बिहार की जलवायु को उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु (Tropical Monsoon Climate) कहा जाता है। इस जलवायु की सबसे बड़ी पहचान है — मानसून पर पूर्ण निर्भरता, स्पष्ट मौसम-परिवर्तन, उच्च तापमान और वार्षिक वर्षा का अनियमित वितरण।
उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु की पहचान
- उच्च तापमान: वार्षिक औसत तापमान 22°C – 26°C के बीच रहता है; ग्रीष्म अत्यंत कठोर होती है।
- मौसमी वर्षा: वर्षा मुख्यतः जून से सितंबर (दक्षिण-पश्चिम मानसून) के बीच होती है। वार्षिक वर्षा का लगभग 80-85% इन्हीं चार महीनों में प्राप्त होता है।
- शुष्क शीतकाल: अक्टूबर से फरवरी तक वर्षा नगण्य होती है; वातावरण शीतल एवं शुष्क रहता है।
- हवाओं का मौसमी उलटफेर: ग्रीष्म में दक्षिण-पश्चिम आर्द्र मानसून और शीत में उत्तर-पूर्व शुष्क मानसून प्रवाहित होते हैं।
- स्पष्ट ऋतुएँ: ग्रीष्म, वर्षा, शरद और शीत — चारों ऋतुएँ स्पष्टतः परिभाषित हैं।
कोपेन वर्गीकरण के अनुसार
जर्मन जलवायुविद् व्लादिमीर कोपेन (Wladimir Köppen) ने वनस्पति एवं तापमान के आधार पर विश्व की जलवायु को वर्गीकृत किया। इस प्रणाली में बिहार की जलवायु दो उपवर्गों में आती है:
C = गर्म समशीतोष्ण; w = शुष्क शीतकाल; a = गर्मतम महीने में 22°C से अधिक तापमान। उत्तरी मैदानी बिहार — पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा आदि जिले — इस श्रेणी में आते हैं। यहाँ हिमालय की निकटता के कारण शीतकाल में तापमान काफी गिर जाता है।
A = उष्णकटिबंधीय (सर्वाधिक शीत महीने में 18°C से अधिक); w = शुष्क शीतकाल। गया, औरंगाबाद, नवादा जैसे दक्षिणी जिले इस श्रेणी में आते हैं। यहाँ झारखंड के पठार का प्रभाव होता है और तापमान उत्तर से अधिक रहता है।
| क्षेत्र | कोपेन कोड | प्रमुख जिले | विशेषता |
|---|---|---|---|
| उत्तरी मैदान | Cwa | पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी | शीत में तापमान गिरना, आर्द्र उपोष्ण |
| दक्षिणी पठारी भाग | Aw | गया, औरंगाबाद, नवादा, रोहतास | अधिक तापमान, सवाना प्रकार |
| पूर्वी भाग | Cwa/Am | भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार | अधिक वर्षा, आर्द्रता अधिक |
मानसूनी तंत्र — दक्षिण-पश्चिम एवं उत्तर-पूर्व मानसून
बिहार की जलवायु का सम्पूर्ण चरित्र मानसूनी हवाओं द्वारा नियंत्रित होता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून (SW Monsoon) ग्रीष्म में आर्द्रता एवं वर्षा लाता है, जबकि उत्तर-पूर्व मानसून (NE Monsoon) शीतकाल में शुष्क एवं ठंडी हवाएँ लाता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून (ग्रीष्मकालीन मानसून)
भारत का मानसून हिंद महासागर में उत्पन्न आर्द्र हवाओं से निर्मित होता है। जब ग्रीष्म ऋतु में थार मरुस्थल एवं उत्तर-पश्चिम भारत में तीव्र निम्न दाब बनता है, तो दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक हवाएँ विषुवत रेखा पार करके भारत की ओर आकर्षित होती हैं। ये हवाएँ दो शाखाओं में बँट जाती हैं:
उत्तर-पूर्व मानसून (शीतकालीन मानसून)
अक्टूबर के बाद जब उत्तर भारत में उच्च दाब स्थापित होता है, तो उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर हवाएँ बहने लगती हैं। ये हवाएँ स्थलीय होने के कारण शुष्क एवं ठंडी होती हैं। बिहार में इन हवाओं के कारण शीतकाल में वर्षा नहीं होती। हालाँकि, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण जनवरी-फरवरी में कभी-कभी हल्की वर्षा होती है, जो रबी फसलों के लिए लाभकारी होती है।
| विशेषता | दक्षिण-पश्चिम मानसून | उत्तर-पूर्व मानसून |
|---|---|---|
| समय | जून – सितंबर | अक्टूबर – फरवरी |
| स्वभाव | आर्द्र, वर्षा लाने वाली | शुष्क, ठंडी |
| उत्पत्ति | हिंद महासागर / बंगाल की खाड़ी | मध्य एशिया / हिमालय क्षेत्र |
| बिहार पर प्रभाव | 80-85% वार्षिक वर्षा | ठंड, कोहरा, पाला |
| कृषि महत्व | खरीफ फसलें (धान, मक्का) | रबी फसलें (गेहूँ, सरसों) |
बिहार के चार प्रमुख मौसम (Four Seasons)
बिहार की उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु को चार स्पष्ट ऋतुओं में विभाजित किया जाता है: ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु और शीत ऋतु। प्रत्येक ऋतु की अपनी विशिष्ट जलवायु-दशाएँ हैं जो कृषि, जनजीवन और पारिस्थितिकी को प्रभावित करती हैं।
🌞 ग्रीष्म ऋतु (Summer)
मार्च – मई🌧️ वर्षा ऋतु (Monsoon)
जून – सितंबर🍂 शरद ऋतु (Autumn)
अक्टूबर – नवंबर❄️ शीत ऋतु (Winter)
दिसंबर – फरवरी| ऋतु | माह | तापमान | वर्षा | प्रमुख हवाएँ |
|---|---|---|---|---|
| ग्रीष्म | मार्च – मई | 32°C – 48°C | नगण्य | लू (पश्चिमी शुष्क) |
| वर्षा (मानसून) | जून – सितंबर | 26°C – 34°C | 1,000 – 1,500 mm | दक्षिण-पश्चिम आर्द्र |
| शरद | अक्टूबर – नवंबर | 18°C – 28°C | अल्प | शांत / मिश्रित |
| शीत | दिसंबर – फरवरी | 4°C – 18°C | अल्प (पश्चिमी विक्षोभ) | उत्तर-पूर्व शुष्क |
तापमान एवं वर्षा का वितरण
बिहार में तापमान और वर्षा का वितरण एक समान नहीं है। पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की ओर इनमें महत्वपूर्ण अंतर देखने को मिलता है। यह असमान वितरण बिहार की कृषि, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
वर्षा वितरण — क्षेत्रीय भिन्नता
तापमान वितरण — प्रमुख तथ्य
- सर्वाधिक गर्म स्थान: गया एवं औरंगाबाद — ग्रीष्म में 46-48°C। दक्षिण का पठारी धरातल और समुद्र से दूरी इसका कारण है।
- सबसे ठंडे स्थान: उत्तरी बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल — शीत में हिमालय की ठंडी हवाओं के सीधे प्रभाव से 3-5°C तक।
- वार्षिक तापांतर: बिहार में वार्षिक तापांतर 20°C – 24°C के बीच रहता है जो महाद्वीपीय प्रभाव को दर्शाता है।
- दैनिक तापांतर: शुष्क मौसम में दैनिक तापांतर 12°C – 16°C तक हो सकता है।
- जनवरी में न्यूनतम: पाला (frost) मुख्यतः उत्तरी बिहार के मैदानी भागों में दिसंबर-जनवरी में पड़ता है।
| स्थान | औसत जनवरी तापमान | औसत मई तापमान | वार्षिक वर्षा |
|---|---|---|---|
| पटना | 14°C | 34°C | ~1,170 mm |
| गया | 13°C | 37°C | ~1,000 mm |
| पूर्णिया | 14°C | 31°C | ~1,600 mm |
| मुजफ्फरपुर | 13°C | 33°C | ~1,300 mm |
| भागलपुर | 15°C | 33°C | ~1,250 mm |
जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
बिहार की जलवायु केवल एक कारक से नहीं बल्कि कई भौगोलिक, वायुमंडलीय और स्थानीय कारकों के संयुक्त प्रभाव से निर्मित होती है। BPSC Mains में इन कारकों का विश्लेषण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उत्तर में हिमालय साइबेरिया से आने वाली अत्यंत ठंडी ध्रुवीय हवाओं को रोकता है, जिससे बिहार का शीतकाल उतना कठोर नहीं होता जितना समान अक्षांश पर स्थित मध्य एशियाई देशों में। साथ ही यह नमी-युक्त मानसून हवाओं को उत्तर में आगे जाने से रोककर बिहार में वर्षा करवाता है।
बिहार समुद्र से काफी दूर है — एक भू-आवेष्ठित राज्य। समुद्र की समकारी प्रभाव (Moderating Effect) न होने से यहाँ तापमान चरम पर जाता है। ग्रीष्म में भीषण गर्मी और शीत में तीव्र ठंड — यह महाद्वीपीय जलवायु का लक्षण है।
बिहार 24°20’N – 27°31’N अक्षांशों पर स्थित है। यह कर्क रेखा (23.5°N) के निकट और उत्तर में है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में होने से सौर ऊष्मा अधिक मिलती है। ग्रीष्म में सूर्य लगभग सीधा चमकता है, जिससे तापमान उच्च रहता है।
उत्तरी बिहार — हिमालय की तलहटी (Terai), मध्य बिहार — गंगा का मैदान, दक्षिण बिहार — छोटानागपुर पठार का उत्तरी भाग। दक्षिण का पठारी भाग ऊँचाई के कारण और प्रतिच्छाया (Rain Shadow) के कारण कम वर्षा पाता है।
गंगा और उसकी सहायक नदियों की विशाल जल-राशि स्थानीय आर्द्रता को बनाए रखती है। नदियों के किनारे के क्षेत्रों में वाष्पीकरण अधिक होता है जिससे वर्षा की संभावना बढ़ती है। उत्तरी बिहार की नदियाँ (कोसी, गंडक, बागमती) हिमालयी हिमनदों से पोषित हैं।
भूमध्यसागर से उत्पन्न ये चक्रवाती तूफान जेट स्ट्रीम के सहारे भारत की ओर आते हैं। बिहार में ये जनवरी-फरवरी में हल्की वर्षा या ओलावृष्टि लाते हैं। यह वर्षा रबी फसलों (गेहूँ) के लिए वरदान होती है। इसे बिहार में “माघी बरसात” भी कहते हैं।
- बाढ़ की तीव्रता में वृद्धि: हिमालयी हिमनदों के पिघलने से नदियों में जल-प्रवाह बढ़ रहा है, जिससे उत्तरी बिहार में बाढ़ अधिक विनाशकारी होती जा रही है।
- वर्षा की अनिश्चितता: मानसून की समयसारिणी अनिश्चित होती जा रही है — कभी देर से आना, कभी अत्यधिक वर्षा — जो कृषि उत्पादन को प्रभावित करती है।
- ग्रीष्म लहर (Heat Wave): तापमान रिकॉर्ड टूट रहे हैं। गया में अप्रैल-मई में 47-48°C रिकॉर्ड किया गया है।
- सूखे का खतरा: पश्चिमी बिहार में वर्षा में कमी से सूखे की स्थिति पैदा होती है।


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