बिहार की मानसून प्रणाली और El Niño का प्रभाव
दक्षिण-पश्चिम मानसून बिहार की कृषि, जल संसाधन और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है — और El Niño की घटनाएँ इस जीवनरेखा को बाधित करती हैं।
परिचय — बिहार की जलवायु संरचना
बिहार की मानसून प्रणाली और El Niño का प्रभाव Bihar Govt. Competitive Exams, UPPSC तथा अन्य बिहार सरकारी परीक्षाओं में बारम्बार पूछे जाने वाले विषय हैं। बिहार एक उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु वाला राज्य है जहाँ वार्षिक जीवन का लगभग हर पहलू — खेती, बाढ़, सूखा — मानसून की नियमितता पर निर्भर करता है।
बिहार उत्तर-पूर्व भारत में स्थित एक स्थलरुद्ध (landlocked) राज्य है। यहाँ कोई समुद्री तट नहीं है, अतः आर्द्रता का एकमात्र स्रोत दक्षिण-पश्चिम मानसून ही है। राज्य के उत्तर में नेपाल के हिमालयी क्षेत्र से आने वाली नदियाँ (कोसी, गंडक, बागमती) वर्षाकाल में प्रलयंकारी बाढ़ लाती हैं, जबकि मानसून कमजोर पड़ने पर दक्षिण बिहार में सूखे की स्थिति बन जाती है। इस दोहरी मार — अतिवृष्टि और अनावृष्टि — के पीछे El Niño Southern Oscillation (ENSO) की भूमिका वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है।
मानसून का आगमन एवं बिहार में वितरण
दक्षिण-पश्चिम मानसून बिहार की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 85–90% अंश प्रदान करता है। मानसून का क्रमिक आगमन, ठहराव और विदाई — तीनों चरण बिहार की खेती और जल-प्रबंधन के लिए निर्णायक हैं।
🗺️ मानसून प्रवेश का मार्ग (Monsoon Tracks)
बिहार में मानसून दो शाखाओं से पहुँचता है। पहली अरब सागर शाखा (Arabian Sea Branch) पश्चिम से गुजरात–राजस्थान होते हुए उत्तर प्रदेश पार करती है और जून के अंत तक बिहार के पश्चिमी जिलों में प्रवेश करती है। दूसरी बंगाल की खाड़ी शाखा (Bay of Bengal Branch) अधिक शक्तिशाली है — यह म्यांमार और पूर्वोत्तर भारत होते हुए जून के प्रथम सप्ताह में बिहार के पूर्वी जिलों (किशनगंज, पूर्णिया) में प्रवेश करती है और फिर पश्चिम की ओर आगे बढ़ती है।
🌧️ वर्षा का क्षेत्रीय वितरण
| क्र. | क्षेत्र | प्रमुख जिले | औसत वर्षा | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर-पूर्व बिहार | किशनगंज, पूर्णिया, अररिया | 1,400–1,800 mm | सर्वाधिक वर्षा; बाढ़-प्रवण |
| 2 | उत्तर-पश्चिम बिहार | चम्पारण, सीतामढ़ी, मधुबनी | 1,200–1,500 mm | हिमालयी नदियाँ; बाढ़-संवेदनशील |
| 3 | मध्य बिहार (गंगा तटीय) | पटना, वैशाली, सारण | 1,000–1,200 mm | सामान्य वर्षा; खरीफ का केंद्र |
| 4 | दक्षिण बिहार | गया, औरंगाबाद, रोहतास | 800–1,100 mm | अपेक्षाकृत कम वर्षा; सूखा-संवेदनशील |
| 5 | दक्षिण-पश्चिम (Plateau fringe) | कैमूर, बांका, जमुई | 900–1,100 mm | Chota Nagpur तलहटी; ओरोग्राफिक वर्षा |
El Niño क्या है? — विज्ञान एवं ENSO तंत्र
El Niño प्रशांत महासागर के भूमध्यीय क्षेत्र में समुद्र-सतह तापमान (Sea Surface Temperature — SST) की असामान्य वृद्धि की घटना है जो वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण को बाधित करती है और भारत सहित दक्षिण एशिया में मानसून को कमज़ोर करती है।
⚙️ ENSO तंत्र — Walker Circulation
सामान्य स्थिति में भूमध्यीय प्रशांत क्षेत्र में Walker Circulation सक्रिय रहता है। इसमें पश्चिमी प्रशांत (इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया) में गर्म जल के कारण संवहनीय वर्षा होती है, जबकि पूर्वी प्रशांत (पेरू तट) पर ठंडा जल और उच्च दाब रहता है। El Niño में यह संतुलन टूट जाता है — पूर्वी प्रशांत गर्म हो जाता है, संवहन वहाँ स्थानांतरित हो जाता है और Walker Circulation कमज़ोर पड़ जाती है।
इसका सीधा प्रभाव हिन्द महासागर पर पड़ता है। हिन्द महासागर के ऊपर उच्च वायुदाब स्थापित होता है, Arabian Sea और Bay of Bengal में आर्द्रता-प्रवाह घटता है, और भारतीय उपमहाद्वीप पर मानसूनी वर्षा कमज़ोर पड़ जाती है। Southern Oscillation Index (SOI) — Darwin और Tahiti के वायुदाब का अंतर — El Niño में ऋणात्मक (negative) हो जाता है।
NOAA (अमेरिकी मौसम विज्ञान संस्था) Oceanic Niño Index (ONI) से El Niño की घोषणा करती है। ONI = Niño 3.4 क्षेत्र (5°N–5°S, 170°W–120°W) में 3 महीने के औसत SST का सामान्य से विचलन। जब ONI लगातार 5 या अधिक त्रैमासों तक +0.5°C ≥ रहे, तब El Niño घोषित होता है।
- कमज़ोर El Niño: ONI = +0.5 से +0.9°C — मानसून पर सीमित प्रभाव
- मध्यम El Niño: ONI = +1.0 से +1.4°C — दक्षिण बिहार में 15–25% वर्षा-कमी
- तीव्र El Niño: ONI ≥ +1.5°C — व्यापक सूखा; 1987, 2002, 2009, 2015 ऐसे वर्ष रहे
बिहार पर El Niño के प्रत्यक्ष प्रभाव
El Niño बिहार को कई स्तरों पर प्रभावित करता है — वर्षा का कम होना, मानसून का देर से आगमन, जल्दी विदाई और वर्षा में स्थानिक असमानता। इन सभी का प्रत्यक्ष प्रभाव कृषि, जलस्तर और आजीविका पर पड़ता है।
El Niño वर्षों में बिहार की औसत वर्षा सामान्य से 15–40% कम हो सकती है। दक्षिण बिहार (गया, औरंगाबाद, नवादा) सर्वाधिक प्रभावित होता है।
El Niño वर्षों में मानसून का प्रवेश 1 से 3 सप्ताह विलम्बित हो सकता है। धान की रोपनी और खरीफ बुआई प्रभावित होती है।
मानसून सितम्बर के आरम्भ में ही बिहार से विदा होने लगता है। रबी फसल के लिए भूजलस्तर अपर्याप्त रह जाता है।
El Niño के दौरान बिहार में मई–जून में तापमान 1–2°C अधिक रहता है। गर्मी की लहर (heat wave) की घटनाएँ बढ़ती हैं।
वर्षा-कमी के कारण भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) घट जाता है। उत्तर बिहार के तराई क्षेत्रों में भी जल-संकट उत्पन्न होता है।
El Niño वर्षों में भी उत्तर बिहार में flash floods आ सकती हैं क्योंकि नेपाल में कभी-कभी अधिक हिमनद-पिघलाव और स्थानीय वर्षा होती है। यह विरोधाभासी स्थिति परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
La Niña बनाम El Niño — तुलनात्मक विश्लेषण
परीक्षा में El Niño और La Niña की तुलना एक प्रमुख प्रश्न-बिंदु है। दोनों ENSO चक्र (El Niño Southern Oscillation) के विपरीत ध्रुव हैं और बिहार पर इनके प्रभाव भी विपरीत होते हैं।
| पहलू | El Niño 🌡️ | सामान्य (Normal) 🌤️ | La Niña ❄️ |
|---|---|---|---|
| SST (पूर्वी प्रशांत) | +0.5°C से अधिक | सामान्य (baseline) | –0.5°C से कम |
| व्यापारिक पवनें | कमज़ोर / उलटी | सामान्य पश्चिमगामी | तीव्र पश्चिमगामी |
| Walker Circulation | कमज़ोर / उलट | सामान्य | तीव्र |
| SOI मान | ऋणात्मक (Negative) | शून्य के निकट | धनात्मक (Positive) |
| भारतीय मानसून | कमज़ोर / विलम्बित | सामान्य | सक्रिय / अतिसक्रिय |
| बिहार में वर्षा | 15–40% कमी (deficit) | सामान्य (~1,200 mm) | 10–30% अधिक (excess) |
| बिहार में प्रभाव | सूखा, फसल-हानि | सामान्य खेती | बाढ़, भूस्खलन |
| आवृत्ति | हर 2–7 वर्ष | — | हर 2–7 वर्ष (अधिक लम्बा) |
ऐतिहासिक El Niño वर्ष एवं बिहार का अनुभव
El Niño की पुनरावृत्ति के साथ बिहार ने कई बार गम्भीर कृषि-संकट झेले हैं। परीक्षा में प्रमुख El Niño वर्ष और उनके प्रभाव प्रायः पूछे जाते हैं।
| वर्ष | El Niño तीव्रता | बिहार में वर्षा-विचलन | प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|---|
| 1972–73 | तीव्र | –30% | गम्भीर सूखा; धान उत्पादन में भारी गिरावट |
| 1982–83 | अत्यंत तीव्र | –25 से –35% | खाद्यान्न संकट; सिंचाई परियोजनाओं पर दबाव |
| 1987 | तीव्र | –40% (दक्षिण बिहार) | बिहार का सबसे बड़ा El Niño-प्रेरित सूखा; आपदा राहत घोषित |
| 1997–98 | सर्वकालिक तीव्रतम | –20 से –30% | कम वर्षा; परंतु La Niña के तेज़ आगमन से 1998 में बाढ़ |
| 2002 | मध्यम-तीव्र | –19% | पूरे भारत में सूखा; बिहार में खरीफ उत्पादन –22% |
| 2009 | मध्यम | –22% | मानसून विलम्बित; दक्षिण बिहार में सूखे जैसी स्थिति |
| 2015–16 | अत्यंत तीव्र | –15 से –25% | मानसून कमज़ोर; पटना–गया क्षेत्र में जल-संकट |
| 2023–24 | मध्यम-तीव्र | –10 से –20% | खरीफ 2023 में धान रोपनी प्रभावित; IOD ने आंशिक राहत दी |
कृषि एवं आर्थिक प्रभाव
बिहार की लगभग 76% जनसंख्या प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। El Niño प्रेरित वर्षा-कमी का आर्थिक प्रभाव बहुस्तरीय होता है — फसल उत्पादन से लेकर GSDP तक।
बिहार की प्रमुख खरीफ फसलें — धान (Rice), मक्का (Maize), दलहन (Pulses) — सभी जुलाई–अगस्त की वर्षा पर निर्भर हैं। El Niño वर्षों में:
- धान: रोपनी में विलम्ब; बाली भरने के समय वर्षा-कमी से उपज 20–35% कम।
- मक्का: पश्चिम चम्पारण, कटिहार में उत्पादन प्रभावित। मक्का-बेल्ट पर गहरा असर।
- दलहन: अरहर, मूँग, उड़द — कम वर्षा में जड़-सड़न और कम फूल-फल; उत्पादन –15 से –25%।
El Niño वर्षों में बिहार के प्रमुख जलाशयों — गंडक बैराज, कोसी बैराज, सोन बैराज — में जलस्तर सामान्य से नीचे रहता है। भूजल पुनर्भरण (recharge) घटता है, नलकूप अपर्याप्त साबित होते हैं और रबी सिंचाई के लिए संकट पैदा होता है।
गम्भीर El Niño वर्षों में बिहार के कृषि-GSDP में 5–12% की गिरावट सम्भव है। ग्रामीण मजदूरों की आय घटती है, पलायन बढ़ता है और सरकार पर MGNREGS, food subsidy का बोझ बढ़ता है। 2009 El Niño के बाद बिहार सरकार ने कृषि-राहत पैकेज की घोषणा की थी।
📊 प्रमुख फसलों में El Niño वर्षों में उत्पादन-विचलन
सरकारी नीतियाँ एवं El Niño अनुकूलन रणनीतियाँ
El Niño के प्रभावों से निपटने के लिए केंद्र और बिहार सरकार ने अनेक नीतियाँ एवं कार्यक्रम बनाए हैं। इनकी जानकारी Bihar Govt. Competitive Exams के लिए अत्यंत उपयोगी है।
- PMFBY — प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: El Niño सूखे में मुआवज़ा
- MGNREGS — ग्रामीण रोज़गार गारंटी: सूखे में आजीविका सुरक्षा
- NDRF/SDRF — राष्ट्रीय/राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष
- National Drought Manual 2016 — IMD-पूर्वानुमान आधारित तैयारी
- Bihar Agricultural Road Map — El Niño-अनुकूल फसलों को बढ़ावा
- Jal-Jeevan-Hariyali — तालाब पुनर्जीवन; जल-संचय
- Drip/Sprinkler Irrigation — सूक्ष्म-सिंचाई प्रसार
- Drought-tolerant varieties — DRR-Dhan 42 जैसी धान-प्रजातियाँ
📡 El Niño पूर्वानुमान और तैयारी
India Meteorological Department (IMD) अब El Niño पूर्वानुमान के आधार पर Extended Range Forecast (ERF) और Seasonal Forecast जारी करता है। अप्रैल–मई में जारी मानसून-पूर्वानुमान में El Niño सूचकांक को प्रमुखता दी जाती है। इससे किसानों को अग्रिम चेतावनी (Agro-met Advisory) मिलती है।
- लक्ष्य: 2019–2022 में 24 लाख तालाबों, 50,000 आहर-पईन का जीर्णोद्धार
- El Niño सन्दर्भ: परम्परागत जल-संचय से El Niño वर्षों में जल-उपलब्धता सुनिश्चित होती है
- निवेश: ₹24,524 करोड़ (2020–22)
- उपलब्धि: 2.5 लाख पोखरों का जीर्णोद्धार, 1 करोड़ पौधारोपण
सारांश एवं स्मृति-सूत्र (Mnemonic)
🧠 El Niño के प्रभाव याद करने का सूत्र
🎯 BPSC परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
परीक्षा-उपयोगी प्रश्न — PYQ एवं अभ्यास MCQ
नीचे दिए गए MCQ पर क्लिक करके अपनी तैयारी जाँचें। सही विकल्प चुनने पर हरे रंग में और गलत चुनने पर लाल रंग में दिखेगा।


Leave a Reply