बिहार की मिट्टी के प्रकार
जलोढ़, लाल, बलथर, काली एवं अन्य मिट्टियाँ — BPSC Prelims & Mains सम्पूर्ण अध्ययन
परिचय — बिहार की मृदा संरचना
बिहार की मृदा (मिट्टी) उसकी कृषि समृद्धि का मूल आधार है। राज्य के 90% से अधिक क्षेत्र में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है जो गंगा एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा लाई गई तलछट से निर्मित है। दक्षिणी बिहार में लाल एवं पठारी मिट्टी का क्षेत्र है। BPSC परीक्षा में मिट्टी के प्रकार, उनकी विशेषताएँ, वितरण और उनसे उगाई जाने वाली फसलें — सभी से प्रश्न पूछे जाते हैं।
📊 बिहार की मिट्टियाँ — वर्गीकरण एक दृष्टि में
| मिट्टी का प्रकार | वितरण क्षेत्र | विशेषता | प्रमुख फसलें |
|---|---|---|---|
| जलोढ़ — खादर | गंगा तटवर्ती, उत्तर बिहार | नई, अत्यंत उपजाऊ, नमी-युक्त | धान, गेहूँ, गन्ना, सब्जियाँ |
| जलोढ़ — बांगर | गंगा मैदान (ऊँचे भाग), दक्षिण बिहार | पुरानी जलोढ़, कुछ कम उपजाऊ, कंकड़युक्त | गेहूँ, चना, सरसों, दलहन |
| लाल मिट्टी | गया, नवादा, जमुई, बाँका, रोहतास | लोह-ऑक्साइड से लाल; अम्लीय; कम उपजाऊ | मोटे अनाज, दलहन, तिलहन |
| बलथर/पथरीली | कैमूर, रोहतास पठार | रेतीली-बजरीली; पतली परत; अनुपजाऊ | सीमित — ज्वार, बाजरा |
| दलदली/पीट | उत्तर बिहार — दरभंगा, मधुबनी, सहरसा | अत्यधिक नमी; कार्बनिक पदार्थ अधिक | मखाना, सिंघाड़ा, जलकृषि |
| काली मिट्टी | गया, औरंगाबाद (सीमित) | नमी धारण क्षमता अधिक; चिकनी | कपास (सीमित), गेहूँ |
| करैल/ऊसर | सारण, गोपालगंज कुछ भाग | क्षारीय; लवण की अधिकता; अनुपजाऊ | सुधार के बाद धान |
भारत में मृदा वर्गीकरण ICAR (Indian Council of Agricultural Research) एवं NBSS&LUP (National Bureau of Soil Survey and Land Use Planning) द्वारा किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर USDA Soil Taxonomy का प्रयोग होता है। BPSC में भारतीय वर्गीकरण — जलोढ़, लाल, काली, लेटेराइट — अधिक पूछा जाता है।
ज-ला-ब-द-का-क
जलोढ़ मिट्टी — खादर एवं बांगर
जलोढ़ मिट्टी बिहार की सबसे महत्वपूर्ण एवं सर्वाधिक विस्तृत मिट्टी है। यह गंगा, कोसी, गंडक, सोन तथा अन्य नदियों द्वारा लाई गई तलछट (Sediment) से निर्मित है। बिहार के कुल क्षेत्रफल का 90% से अधिक भाग इसी मिट्टी से ढका है। इसे दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है — खादर (नई जलोढ़) और बांगर (पुरानी जलोढ़)।
🌊 खादर मिट्टी (Khadar — नई जलोढ़)
खादर वह जलोढ़ मिट्टी है जो नदियों द्वारा प्रत्येक वर्ष बाढ़ के समय जमा होती है। यह नदी तटों एवं बाढ़ के मैदानों में मिलती है। खादर मिट्टी बहुत उपजाऊ होती है क्योंकि इसमें नए खनिज एवं जैव तत्व प्रतिवर्ष जुड़ते रहते हैं।
- रंग: हल्का भूरा या धूसर (Grey)
- बनावट: महीन, रेतीली-दोमट; नमी-धारण क्षमता अच्छी
- pH: लगभग 7–8 (तटस्थ से हल्का क्षारीय)
- वितरण: गंगा, कोसी, गंडक के तटीय क्षेत्र — उत्तर बिहार के निचले मैदान
- विशेषता: नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश — सभी पर्याप्त मात्रा में; ह्यूमस अपेक्षाकृत कम
- प्रमुख जिले: दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार
🏔️ बांगर मिट्टी (Bangar — पुरानी जलोढ़)
बांगर वह पुरानी जलोढ़ मिट्टी है जो गंगा मैदान के ऊँचे एवं बाढ़-मुक्त भागों में पाई जाती है। इसमें वर्षों से खनिज तत्व जमा हो जाते हैं जिससे कभी-कभी कंकड़ (Kankar) की परत बन जाती है।
- रंग: पीला-भूरा
- बनावट: चिकनी-दोमट; कहीं-कहीं कंकड़युक्त
- कंकड़ (Kankar): चूने की कठोर गोलियाँ जो जल-निकासी रोकती हैं
- वितरण: गंगा के दक्षिण — पटना, नालंदा, भोजपुर, बक्सर के ऊँचे भाग
- उर्वरता: खादर से कुछ कम; नाइट्रोजन की कमी संभव
- प्रमुख जिले: पटना, भोजपुर, रोहतास, भागलपुर के ऊँचे भाग
🌾 जलोढ़ मिट्टी में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें
- धान — प्रमुख; उत्तर बिहार में
- मक्का — खासकर कोसी क्षेत्र
- गन्ना — नमी-युक्त क्षेत्र
- जूट — पूर्णिया, कटिहार क्षेत्र
- गेहूँ — बिहार की प्रमुख रबी फसल
- सरसों — दोमट जलोढ़ में
- दलहन — मसूर, चना
- आलू — पटना, नालंदा
- लीची — मुजफ्फरपुर (GI Tag)
- आम — भागलपुर का जर्दालु
- केला — हाजीपुर (GI Tag)
- सब्जियाँ — पटना, वैशाली
जलोढ़ मिट्टी भारत की सबसे उपजाऊ मिट्टी है। BPSC में पूछा जाता है: “बिहार में सर्वाधिक पाई जाने वाली मिट्टी?” = जलोढ़। “खादर और बांगर में अंतर?” — खादर नई (नदी तट, बाढ़ग्रस्त), बांगर पुरानी (ऊँचे क्षेत्र, कंकड़युक्त)। “जलोढ़ मिट्टी में किस तत्व की कमी होती है?” = नाइट्रोजन एवं ह्यूमस।
लाल मिट्टी — दक्षिणी बिहार
लाल मिट्टी बिहार के दक्षिणी एवं दक्षिण-पूर्वी जिलों में पाई जाती है जो झारखंड (छोटानागपुर पठार) से लगे हैं। इस मिट्टी का लाल रंग लोह-ऑक्साइड (Iron Oxide — Fe₂O₃) की अधिकता के कारण है। यह मिट्टी बिहार के लगभग 7–8% क्षेत्र में पाई जाती है।
📍 वितरण एवं प्रमुख जिले
- गया जिला: बोधगया के आसपास; छोटानागपुर से आती पठारी भूमि
- नवादा: राजगीर की पहाड़ियों के निकट
- जमुई: झारखंड सीमा; लौह-खनिज युक्त
- बाँका: झारखंड से सटा; पहाड़ी-पठारी क्षेत्र
- रोहतास-कैमूर: विंध्य पठार के किनारे
- औरंगाबाद: दक्षिणी भाग में झारखंड से आती लाल मिट्टी
⚗️ लाल मिट्टी की रासायनिक संरचना एवं कमियाँ
- नाइट्रोजन (N) — अत्यंत कम
- फास्फोरस (P) — कम; लोह से बाधित
- ह्यूमस — बहुत कम; कार्बनिक पदार्थ नगण्य
- कैल्शियम एवं मैग्नीशियम — कम
- pH अम्लीय — चूने की आवश्यकता
- मोटे अनाज: ज्वार, बाजरा, रागी
- दलहन: अरहर, मूँग (सूखा-सहिष्णु)
- तिलहन: मूँगफली, तिल
- कपास: सीमित क्षेत्र में
- सिंचाई से: धान, गेहूँ भी संभव
अनेक परीक्षार्थी सोचते हैं कि लाल मिट्टी बिहार में प्रमुख है — यह गलत है। बिहार में लाल मिट्टी केवल दक्षिणी सीमांत जिलों (गया, नवादा, जमुई, बाँका) में है। बिहार की प्रमुख मिट्टी जलोढ़ है, लाल नहीं। लाल मिट्टी मुख्यतः झारखंड, ओडिशा, तमिलनाडु में मिलती है।
लाल मिट्टी का रंग उसमें उपस्थित लोह-ऑक्साइड (Fe₂O₃ — Ferric Oxide) के कारण है। जब क्रिस्टलीय शैल (आग्नेय एवं रूपांतरित) विखंडित होते हैं तो उनमें उपस्थित लोह-तत्व ऑक्सीकरण (Oxidation) से लाल हो जाता है। जहाँ पानी भरा रहता है वहाँ यह पीला हो जाता है (Hydrated form)।
बलथर एवं पठारी मिट्टी — कैमूर-रोहतास
बलथर मिट्टी बिहार के कैमूर पठार एवं रोहतास के ऊँचे क्षेत्रों में पाई जाती है। यह रेतीली, कंकड़-पत्थरयुक्त एवं अत्यंत पतली परत वाली मिट्टी है। विंध्य पर्वत से उतरी इस मिट्टी में कृषि के लिए बहुत कम उपयोगिता है। यह मिट्टी बिहार के कुल क्षेत्रफल के लगभग 2–3% में पाई जाती है।
📍 वितरण एवं विशेषताएँ
- कैमूर जिला: कैमूर पठार का पूरा क्षेत्र — विंध्य बलुआ पत्थर से निर्मित
- रोहतास जिला: पठारी भाग; सोन नदी से सटे ऊँचे क्षेत्र
- बनावट: बलुआ पत्थर के टुकड़े, मोटे रेत के कण, पत्थर-बजरी
- परत की गहराई: बहुत पतली — 15–30 सेमी तक
- जल-धारण: अत्यंत कम — वर्षा जल तुरंत बह जाता है
- ह्यूमस: नगण्य; कार्बनिक पदार्थ नहीं
यद्यपि बलथर मिट्टी कृषि के लिए अनुपयुक्त है, किंतु इस क्षेत्र का अन्य रूपों में आर्थिक महत्व है: (1) वन संसाधन — कैमूर में घने वन; (2) चूना पत्थर — रोहतास में; ACC सीमेंट कारखाने का आधार; (3) बालू-पत्थर — निर्माण उद्योग; (4) पर्यटन — कैमूर वन्यजीव अभयारण्य, झरने।
दलदली एवं पीट मिट्टी — उत्तर बिहार की निम्नभूमि
दलदली मिट्टी उत्तर बिहार के बाढ़ग्रस्त निम्न भूमि क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ वर्षाकाल में लंबे समय तक जल-जमाव रहता है। इस मिट्टी में अपघटित कार्बनिक पदार्थ (Peat) की प्रचुरता होती है। यह मिट्टी बिहार के मखाना उत्पादन का आधार है।
📍 वितरण एवं विशेषताएँ
- दरभंगा, मधुबनी: कमला-बालान, बागमती के बाढ़ क्षेत्र; मखाना उत्पादन
- सहरसा, सुपौल: कोसी की निम्नभूमि; चौर क्षेत्र
- वैशाली, मुजफ्फरपुर: गंडक-गंगा दोआब के निचले भाग
- बनावट: बारीक, चिकनी, काले-भूरे रंग की
- कार्बनिक पदार्थ: अत्यधिक — जलीय वनस्पतियों के सड़ने से
- जल-धारण: बहुत अधिक — जल भरा रहता है
- pH: अम्लीय से तटस्थ (6–7)
🌿 मखाना — दलदली मिट्टी की अनमोल देन
बिहार भारत का 90% मखाना उत्पादन करता है। मखाना जल-भराव वाली दलदली मिट्टी में उगता है — मुख्यतः दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, अररिया जिलों में। मखाना को GI Tag प्राप्त है। दलदली मिट्टी की उच्च नमी एवं कार्बनिक पदार्थ मखाना की खेती के लिए आदर्श है। मखाना को “सफेद सोना” भी कहते हैं।
| जलीय फसल | उपयुक्त मिट्टी | प्रमुख क्षेत्र (बिहार) | विशेषता |
|---|---|---|---|
| मखाना | दलदली, जल-भराव | दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया | GI Tag; 90% उत्पादन |
| सिंघाड़ा | दलदली, तालाब | दरभंगा, वैशाली | जल में उगता है |
| धान (भदई) | जलोढ़-दलदली | उत्तर बिहार | पानी में खड़े रहकर |
| कमल | दलदली, तालाब | मधुबनी, दरभंगा | राज्य फूल |
काली मिट्टी एवं करैल-ऊसर मिट्टी
बिहार में काली मिट्टी (Regur) बहुत सीमित क्षेत्र में पाई जाती है — मुख्यतः दक्षिणी बिहार के कुछ भागों में। करैल या ऊसर मिट्टी वह अनुपजाऊ मिट्टी है जिसमें लवण की अधिकता होती है। ये दोनों मिट्टियाँ BPSC में उनकी विशेषताओं के कारण पूछी जाती हैं।
काली मिट्टी को रेगड़ (Regur) या कपास की मिट्टी भी कहते हैं। यह मुख्यतः दक्कन पठार (महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात) में पाई जाती है। बिहार में यह बहुत सीमित मात्रा में गया, औरंगाबाद और नवादा जिलों के कुछ भागों में मिलती है जो झारखंड के बेसाल्टिक क्षेत्र से सटे हैं।
करैल या ऊसर वह मिट्टी है जिसमें सोडियम, कैल्शियम एवं मैग्नीशियम के लवणों की अधिकता होती है। इसे Alkali Soil भी कहते हैं। बिहार में यह मिट्टी सारण, गोपालगंज के कुछ भागों में एवं उन स्थानों पर मिलती है जहाँ जल-निकासी ठीक नहीं है और सिंचाई के पानी के वाष्पीकरण से लवण जमा हो जाते हैं।
- pH > 8.5 — अत्यधिक क्षारीय
- पौधों की जड़ें लवण को अवशोषित नहीं कर पातीं
- मिट्टी की संरचना खराब होती है
- जल-अवशोषण क्षमता न्यूनतम
- फसलें नहीं उगतीं — बंजर भूमि
- जिप्सम का प्रयोग — सोडियम को कैल्शियम से विस्थापित करना
- हरी खाद — ढैंचा, सनई
- अम्लीय उर्वरक — अमोनियम सल्फेट
- जल-निकासी सुधार
- सुधार के बाद: धान, सेसबानिया
BPSC Prelims में अक्सर पूछा जाता है: “कपास किस मिट्टी में उगती है?” = काली मिट्टी (Regur)। किंतु यह भी याद रखें: बिहार में काली मिट्टी बहुत सीमित है इसलिए बिहार में कपास का उत्पादन नहीं के बराबर है। काली मिट्टी की विशेषता — “Self-ploughing” (स्व-जुताई) — गर्मियों में दरारें पड़ना।
मिट्टी की उर्वरता — फसलें एवं क्षेत्रीय संबंध
बिहार की मिट्टी की विविधता उसकी फसल-विविधता का आधार है। उत्तर बिहार का खादर क्षेत्र धान एवं मखाना के लिए, दक्षिण का बांगर क्षेत्र गेहूँ-दलहन के लिए, और दक्षिणी पठार लाल मिट्टी में मोटे अनाज के लिए जाना जाता है।
🗺️ क्षेत्र-अनुसार मिट्टी एवं फसल का संबंध
| क्षेत्र | प्रमुख जिले | मिट्टी का प्रकार | प्रमुख फसलें | विशेष उत्पाद (GI Tag) |
|---|---|---|---|---|
| उत्तर बिहार (निम्न) | दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल | खादर + दलदली | धान, मखाना, सिंघाड़ा, मक्का | मखाना (GI Tag) |
| उत्तर बिहार (ऊँचा) | मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी | खादर दोमट | धान, गेहूँ, गन्ना, लीची | शाही लीची (GI Tag) |
| पूर्वी बिहार | पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज | नई जलोढ़ + दलदली | धान, जूट, मक्का, मखाना | — |
| मध्य बिहार (गंगा तट) | पटना, भोजपुर, नालंदा | खादर + बांगर | धान, गेहूँ, आलू, सब्जियाँ | केला (हाजीपुर, GI Tag) |
| दक्षिण बिहार (मैदान) | गया, जहानाबाद, औरंगाबाद | बांगर + लाल मिश्रित | गेहूँ, दलहन, सरसों | जर्दालु आम — भागलपुर (GI) |
| दक्षिणी पठार | जमुई, बाँका, नवादा, रोहतास | लाल + बलथर | मोटे अनाज, दलहन, तिलहन | — |
| कैमूर-विंध्य | कैमूर, रोहतास पठार | बलथर + पथरीली | ज्वार, बाजरा (सीमित) | — |
📈 मिट्टी के पोषक तत्व — तुलनात्मक विश्लेषण
बहुत अधिक
अधिक
जलीय फसलों के लिए अधिक
मध्यम
कम
बहुत कम / नगण्य
प्रश्न: बिहार की मृदा की विविधता उसकी कृषि-विविधता का आधार है। विवेचना करें।
उत्तर-बिंदु: उत्तर में खादर = धान-मखाना-लीची; मध्य में बांगर = गेहूँ-आलू; दक्षिण में लाल = दलहन-तिलहन; दलदली = मखाना (90% उत्पादन)।
GI Products: लीची, केला, मखाना, जर्दालु आम, तसर सिल्क — सभी का मिट्टी से संबंध।
चुनौतियाँ: मृदा-अपरदन, बाढ़ से भूमि-नाश, नाइट्रोजन की कमी, ऊसर भूमि।
समाधान: मृदा परीक्षण, जैविक खेती, हरी खाद, जिप्सम उपचार।
मृदा अपरदन एवं संरक्षण
बिहार में मृदा अपरदन (Soil Erosion) एक गंभीर समस्या है। कोसी, गंडक एवं गंगा द्वारा प्रतिवर्ष लाखों टन उपजाऊ मिट्टी बह जाती है। इससे एक ओर भूमि की उर्वरता घटती है और दूसरी ओर नदियों का तल ऊँचा होता है जिससे बाढ़ बढ़ती है।
⚡ बिहार में मृदा-अपरदन के कारण
बिहार में अपरदन का सबसे बड़ा कारण। कोसी, गंडक, बागमती की बाढ़ से उपजाऊ ऊपरी परत (Topsoil) बह जाती है। भारी वर्षा से खेतों की मिट्टी कटती है।
कैमूर-रोहतास के बलथर क्षेत्र एवं कोसी के तटीय रेत-प्रधान क्षेत्रों में गर्मियों में तेज हवाओं से मिट्टी उड़ती है।
कैमूर, रोहतास, जमुई, बाँका के वन-क्षेत्र में वनों की कटाई से मिट्टी असुरक्षित हो जाती है। वर्षा में सीधी बूंदें मिट्टी को छिन्न-भिन्न करती हैं।
ढलान पर खेती, गहरी जुताई, मोनोकल्चर (एक ही फसल), रासायनिक खाद का अत्यधिक उपयोग — सभी मृदा संरचना कमजोर करते हैं।
🌿 मृदा संरक्षण के उपाय
- वनारोपण: नदी तटों पर वृक्ष लगाना
- हरी खाद: ढैंचा, सनई — मिट्टी में जैव-पदार्थ बढ़ाना
- घासीय आवरण: बंजर भूमि पर घास
- फसल-चक्र: दलहन-अनाज रोटेशन
- जैविक खाद: कंपोस्ट, वर्मीकंपोस्ट
- मेड़बंदी (Bunding): खेत के चारों ओर मेड़ बनाना
- समोच्च खेती (Contour Farming): ढलान पर क्षैतिज जुताई
- चेकडैम: छोटे-छोटे बाँध — मिट्टी रोकना
- तटबंध सुदृढ़ीकरण — नदियों के किनारे
- ड्रिप सिंचाई — जल का कम उपयोग, अपरदन कम
📋 राष्ट्रीय कार्यक्रम — मृदा स्वास्थ्य
अभ्यास MCQ
नीचे दिये गये प्रश्नों में से सही विकल्प पर क्लिक करें। उत्तर एवं व्याख्या तुरंत प्रकट होगी।
सारांश एवं परीक्षा प्रश्न (PYQ)
- बिहार की प्रमुख मिट्टी = जलोढ़ (90%+); लाल नहीं, काली नहीं
- खादर = नई जलोढ़, बाढ़ क्षेत्र, सर्वाधिक उपजाऊ; बांगर = पुरानी, ऊँची, कंकड़
- लाल रंग = Fe₂O₃ (Ferric Oxide); काली दरारें = Self-ploughing
- मखाना = दलदली/पीट मिट्टी; दरभंगा-मधुबनी; GI Tag; 90% उत्पादन
- करैल सुधार = जिप्सम + ढैंचा (हरी खाद)
- बलथर = कैमूर-रोहतास; रेतीली-बजरीली; अनुपजाऊ
- जलोढ़ में कमी = नाइट्रोजन + ह्यूमस; पोटाश पर्याप्त
BPSC परीक्षा प्रश्न — मिट्टी के प्रकार
प्र. 1: निम्नलिखित में से कौन सा सुमेलित नहीं है?
(A) खादर — नई जलोढ़ मिट्टी (B) बांगर — पुरानी जलोढ़ मिट्टी (C) रेगड़ — काली मिट्टी (D) लाल मिट्टी — उत्तर बिहार
प्र. 2: “Self-ploughing” की विशेषता किस मिट्टी में पाई जाती है?
(A) जलोढ़ (B) लाल (C) काली (D) लेटेराइट
प्र. 3: बिहार में मखाना उत्पादन किस प्रकार की मिट्टी पर निर्भर है?
(A) बांगर जलोढ़ (B) लाल मिट्टी (C) दलदली-पीट मिट्टी (D) बलथर मिट्टी
प्र. 4: खादर और बांगर में अंतर स्पष्ट करें।
खादर: नई जलोढ़ मिट्टी; नदियों के बाढ़ क्षेत्र में; प्रतिवर्ष नई तलछट जमती है; हल्के भूरे रंग की; अत्यंत उपजाऊ; नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश की अच्छी मात्रा; उत्तर बिहार के निम्न क्षेत्रों में।
बांगर: पुरानी जलोढ़; गंगा के ऊँचे, बाढ़-मुक्त भाग; पीले-भूरे रंग की; कंकड़ (चूना की गोलियाँ) हो सकती हैं; उर्वरता कुछ कम; पटना, भोजपुर के ऊँचे भाग में।
प्र. 5: बिहार में लाल मिट्टी के वितरण एवं विशेषताएँ बताएँ।
विशेषताएँ: लोह ऑक्साइड (Fe₂O₃) के कारण लाल रंग; अम्लीय pH (5–6.5); नाइट्रोजन, फास्फोरस, ह्यूमस की कमी; जल-धारण कम; पतली परत। अनुकूल फसलें: मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा), दलहन (अरहर, मूँग), तिलहन (मूँगफली)।
प्र. 6: बिहार की मृदा की विविधता का वर्णन करते हुए मृदा अपरदन की समस्या एवं समाधान पर प्रकाश डालें। [BPSC Mains]
मिट्टी की विविधता: जलोढ़ (90%) — खादर + बांगर; लाल (दक्षिण, 7%); दलदली (उत्तर निम्नभूमि); बलथर (कैमूर); काली एवं करैल (सीमित)।
मृदा अपरदन: जल-अपरदन (कोसी, गंडक बाढ़); वायु-अपरदन (कैमूर-रोहतास); वनों की कटाई; अनुचित खेती।
प्रभाव: उर्वरता ह्रास; नदी-तल ऊँचा होना; बाढ़ बढ़ना; कृषि उत्पादन घटना।
समाधान: मेड़बंदी, समोच्च खेती, वनारोपण, हरी खाद, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, IWMP, चेकडैम।
निष्कर्ष: मिट्टी संरक्षण = कृषि सुरक्षा = खाद्य सुरक्षा।
प्र. 7: निम्न में से किस मिट्टी में नाइट्रोजन एवं ह्यूमस की कमी होती है?
(A) काली मिट्टी (B) दलदली मिट्टी (C) जलोढ़ मिट्टी (D) लेटेराइट मिट्टी
प्र. 8: कैमूर जिले में मुख्यतः कौन सी मिट्टी पाई जाती है?
(A) जलोढ़ खादर (B) दलदली मिट्टी (C) बलथर एवं पथरीली (D) काली मिट्टी
BPSC में मिट्टी से प्रश्न तीन कोणों से आते हैं: (1) पहचान — “X मिट्टी की विशेषता क्या है?”, (2) वितरण — “X मिट्टी बिहार के किन जिलों में?”, (3) फसल-संबंध — “मखाना किस मिट्टी में? लाल मिट्टी में कौन सी फसल?”। सबसे अधिक गलती: लाल मिट्टी को बिहार की प्रमुख मिट्टी मान लेना — बिहार की प्रमुख मिट्टी जलोढ़ है।


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