बिहार की जलवायु
तापमान की स्थिति
BPSC Prelims + Mains के लिए संपूर्ण अध्ययन सामग्री — ग्रीष्म, शीत एवं मानसून तापमान, क्षेत्रीय विविधता तथा परीक्षोपयोगी तथ्य
परिचय एवं बिहार की जलवायु का स्वरूप
बिहार की जलवायु से संबंधित तापमान की स्थिति BPSC Prelims और Mains दोनों परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार 25°N से 27.31°N अक्षांश और 83.19°E से 88.17°E देशांतर के मध्य स्थित है और इसकी जलवायु मुख्यतः उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु (Tropical Monsoon Climate) की श्रेणी में आती है।
बिहार की जलवायु को कोपेन वर्गीकरण (Köppen Classification) के अनुसार Aw एवं Cwa प्रकार में रखा जाता है। राज्य की जलवायु में वार्षिक तापमान में अत्यधिक विविधता पाई जाती है — ग्रीष्म काल में तापमान 45°C से ऊपर जा सकता है जबकि शीत काल में यह 4°C–5°C तक गिर जाता है। इस प्रकार वार्षिक तापांतर (Annual Range of Temperature) बहुत अधिक होता है।
| ऋतु | महीने | औसत तापमान | विशेषता |
|---|---|---|---|
| ग्रीष्म | मार्च – जून | 35°C – 45°C+ | लू, उच्च तापांतर, शुष्कता |
| वर्षा (मानसून) | जून – सितंबर | 27°C – 30°C | आर्द्रता, बादल, तापमान में कमी |
| शीत | नवंबर – फरवरी | 4°C – 20°C | कोहरा, पश्चिमी विक्षोभ, शीतलहर |
| संक्रमण (Transition) | अक्टूबर | 25°C – 32°C | मानसून की वापसी, साफ आसमान |
ग्रीष्म ऋतु — तापमान विश्लेषण (मार्च से जून)
ग्रीष्म ऋतु बिहार की सबसे कठोर ऋतु है जो मार्च से जून तक चलती है। इस अवधि में सूर्य उत्तरायण होता है और ITCZ (Inter Tropical Convergence Zone) उत्तर की ओर खिसकता है, जिससे बिहार में तापमान तेज़ी से बढ़ता है।
मार्च महीने में तापमान 25°C से 35°C के बीच रहता है। अप्रैल में यह 30°C से 40°C तक पहुँच जाता है। मई और जून बिहार के सर्वाधिक गर्म महीने होते हैं। इन महीनों में दक्षिण-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों जैसे गया, औरंगाबाद, रोहतास में तापमान 45°C से 48°C तक रिकॉर्ड किया गया है। उत्तरी बिहार के तराई क्षेत्रों में यह अपेक्षाकृत कम 38°C – 42°C रहता है।
लू (Hot Wind) — ग्रीष्मकालीन विशेष परिघटना
लू बिहार में मई-जून में चलने वाली अत्यंत गर्म और शुष्क हवा है। यह पश्चिम से पूर्व की ओर चलती है और राजस्थान-पाकिस्तान के मरुस्थलीय क्षेत्र से आती है। इसका तापमान सामान्यतः 45°C से अधिक होता है और यह मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक है।
| स्थान | मई में अधिकतम तापमान | जून में अधिकतम तापमान | विशेषता |
|---|---|---|---|
| गया | 46°C – 48°C | 38°C – 42°C | बिहार का सर्वाधिक गर्म स्थान |
| पटना | 40°C – 44°C | 36°C – 40°C | गंगा तट पर, कुछ राहत |
| भागलपुर | 38°C – 42°C | 34°C – 38°C | पूर्वी बिहार, थोड़ी आर्द्रता |
| मुजफ्फरपुर | 37°C – 41°C | 33°C – 37°C | उत्तरी बिहार, तराई प्रभाव |
| पूर्णिया | 35°C – 39°C | 32°C – 36°C | सर्वाधिक आर्द्र, हिमालय का प्रभाव |
शीत ऋतु — तापमान विश्लेषण (नवंबर से फरवरी)
शीत ऋतु बिहार में नवंबर से फरवरी तक चलती है। इस अवधि में सूर्य दक्षिणायन होता है और उत्तर-पश्चिम से आने वाली ठंडी हवाएँ (Westerlies) बिहार के तापमान को काफी नीचे गिरा देती हैं। जनवरी बिहार का सर्वाधिक ठंडा महीना होता है।
जनवरी में बिहार का औसत तापमान 10°C से 20°C के बीच रहता है। न्यूनतम तापमान 4°C से 8°C तक गिर जाता है। कभी-कभी हिमालय से आने वाली शीतलहर (Cold Wave) के कारण तापमान 0°C से 2°C तक भी पहुँच सकता है। गया, पटना और आरा जैसे दक्षिणी-मध्यवर्ती जिलों में सर्वाधिक ठंड पड़ती है।
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का प्रभाव
शीत ऋतु में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) भूमध्य सागर से उठकर भारत आते हैं। इनके कारण बिहार में शीतकालीन वर्षा होती है जिसे स्थानीय भाषा में “मावठ” कहते हैं। यह वर्षा रबी फसल (गेहूँ, चना) के लिए अत्यंत लाभकारी होती है। पश्चिमी विक्षोभ के समय तापमान में थोड़ी वृद्धि होती है क्योंकि बादल विकिरण को रोकते हैं।
| स्थान | जनवरी में अधिकतम तापमान | जनवरी में न्यूनतम तापमान | विशेषता |
|---|---|---|---|
| गया | 22°C – 24°C | 4°C – 6°C | बिहार में सर्वाधिक ठंडा (basin effect) |
| पटना | 20°C – 22°C | 6°C – 8°C | गंगा तट, कोहरा अधिक |
| भागलपुर | 21°C – 23°C | 7°C – 9°C | पूर्वी बिहार, अपेक्षाकृत गर्म |
| पूर्णिया | 18°C – 20°C | 7°C – 10°C | हिमालय का प्रभाव, घना कोहरा |
| मुजफ्फरपुर | 19°C – 21°C | 5°C – 8°C | उत्तरी बिहार, तराई से ठंडी हवा |
मानसून ऋतु एवं तापमान परिवर्तन (जून से सितंबर)
मानसून ऋतु बिहार की सर्वाधिक महत्वपूर्ण ऋतु है। दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) का बिहार में प्रवेश जून के मध्य में होता है और यह सितंबर तक जारी रहता है। मानसून के आगमन के साथ तापमान में 5°C से 8°C की अचानक कमी आती है।
मानसून का बिहार में प्रवेश बंगाल की खाड़ी शाखा से होता है जो पूर्णिया, भागलपुर होते हुए पश्चिम की ओर बढ़ती है। बिहार में मानसून के दौरान औसत तापमान 27°C से 30°C के बीच रहता है। आर्द्रता बहुत अधिक (80%–90%) होने के कारण उमस का अनुभव होता है। मानसून के समय वास्तविक तापमान कम होने पर भी अनुभूत तापमान (Heat Index) अधिक होता है।
मानसून आगमन एवं तापमान में परिवर्तन
दक्षिण-पश्चिम मानसून बिहार की वार्षिक वर्षा का 85%–90% प्रदान करता है। मानसून के दौरान बिहार का औसत तापमान जून में 30°C, जुलाई-अगस्त में 27°C–28°C और सितंबर में 28°C–30°C रहता है। मानसून काल में दैनिक तापांतर (Diurnal Range) न्यूनतम होता है क्योंकि बादल दिन में सूर्यताप को और रात में पार्थिव विकिरण को रोकते हैं।
- प्रवेश — बंगाल की खाड़ी शाखा से पूर्णिया होते हुए
- अवधि — जून के दूसरे सप्ताह से सितंबर तक
- औसत वर्षा — 1,000 से 1,500 मिमी (क्षेत्रवार भिन्न)
- तापमान प्रभाव — मानसून आते ही 5°C–8°C की गिरावट
- आर्द्रता — 80% से 95% तक पहुँचती है
मानसून की वापसी (Retreating/North-East Monsoon) अक्टूबर में होती है। इस समय को संक्रमण ऋतु (Transition Season) कहते हैं। आसमान साफ हो जाता है और तापमान 25°C से 32°C के बीच रहता है। इस काल में चक्रवातीय वर्षा (Cyclonic Rainfall) भी हो सकती है। अक्टूबर में तापमान में धीरे-धीरे कमी आती है और नवंबर से शीत ऋतु शुरू हो जाती है।
| महीना | औसत अधिकतम तापमान | औसत न्यूनतम तापमान | वर्षा |
|---|---|---|---|
| जून | 36°C – 38°C (मानसून पूर्व) → 30°C (मानसून बाद) | 24°C – 26°C | 150–200 मिमी |
| जुलाई | 28°C – 32°C | 23°C – 25°C | 250–350 मिमी (सर्वाधिक) |
| अगस्त | 28°C – 31°C | 24°C – 26°C | 220–300 मिमी |
| सितंबर | 30°C – 33°C | 23°C – 25°C | 150–200 मिमी |
बिहार में क्षेत्रीय तापमान विविधता
बिहार को तापमान एवं जलवायु की दृष्टि से मुख्यतः तीन क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है — उत्तरी बिहार (तराई क्षेत्र), मध्य बिहार (गंगा का मैदान) और दक्षिणी बिहार (पठारी एवं छोटानागपुर सीमा)। इन क्षेत्रों में स्थलाकृति, वनस्पति और समुद्र तट से दूरी के आधार पर तापमान भिन्न होता है।
- जिले: पूर्णिया, किशनगंज, सुपौल, सीतामढ़ी
- ग्रीष्म: 35°C – 40°C (हिमालय का मध्यम प्रभाव)
- शीत: 5°C – 10°C
- वर्षा: सर्वाधिक (1,400–2,000 मिमी)
- विशेषता: घना कोहरा, आर्द्रता अधिक
- जिले: पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर
- ग्रीष्म: 38°C – 44°C
- शीत: 6°C – 12°C
- वर्षा: 1,000–1,300 मिमी
- विशेषता: गंगा का जलवायु पर प्रभाव
- जिले: गया, औरंगाबाद, रोहतास, नवादा
- ग्रीष्म: 42°C – 48°C (सर्वाधिक)
- शीत: 4°C – 8°C (सर्वाधिक ठंडा)
- वर्षा: 900–1,100 मिमी (न्यूनतम)
- विशेषता: अत्यधिक तापांतर, शुष्कता
गया बेसिन प्रभाव — विशेष भौगोलिक कारण
गया की अत्यधिक गर्मी और ठंड का मुख्य कारण इसकी बेसिन (Basin) स्थिति है। गया चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इस कारण गर्मी में गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती और ठंड में ठंडी हवा नीचे इकट्ठा हो जाती है। इसे “Temperature Inversion” (तापमान विलोमता) का स्थानीय उदाहरण माना जाता है।
| क्षेत्र | प्रमुख जिले | वार्षिक वर्षा | तापमान रेंज (वार्षिक) | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| उत्तरी तराई | किशनगंज, पूर्णिया, सुपौल | 1,400–2,000 मिमी | 5°C – 40°C | सर्वाधिक वर्षा, हिमालय निकट |
| उत्तरी मैदान | मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, दरभंगा | 1,200–1,400 मिमी | 5°C – 41°C | कोसी बाढ़ क्षेत्र, नम जलवायु |
| गंगा मैदान | पटना, भोजपुर, सारण | 1,000–1,200 मिमी | 6°C – 44°C | मध्यम जलवायु, उपजाऊ |
| दक्षिणी पठार | गया, रोहतास, औरंगाबाद | 900–1,100 मिमी | 4°C – 48°C | सर्वाधिक तापांतर, शुष्क |
| पूर्वी मैदान | भागलपुर, मुंगेर, बांका | 1,100–1,300 मिमी | 7°C – 42°C | गंगा-बाढ़, मध्यम तापमान |
तापमान को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
बिहार के तापमान को नियंत्रित करने वाले अनेक भौगोलिक, वायुमण्डलीय एवं मानवीय कारक हैं। BPSC Mains में इन कारकों का विश्लेषणात्मक उत्तर लिखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बिहार 25°N–27°N पर स्थित है जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में आता है। इससे सूर्यताप (Insolation) का कोण बड़ा होता है और तापमान अधिक रहता है। कर्क रेखा (23.5°N) बिहार के दक्षिण से गुजरती है।
उत्तर में हिमालय पर्वत एक प्राकृतिक अवरोध का कार्य करता है। यह उत्तर से आने वाली ठंडी साइबेरियाई हवाओं को रोकता है जिससे बिहार का तापमान अत्यधिक नहीं गिरता। उत्तर बिहार हिमालय की निकटता के कारण अधिक आर्द्र रहता है।
गंगा और उसकी सहायक नदियाँ तापमान को नियंत्रित करती हैं। जल की उच्च ऊष्मा क्षमता के कारण नदी के आसपास के क्षेत्रों में तापमान का दैनिक उतार-चढ़ाव कम होता है। पटना जैसे गंगा तटीय शहर में गर्मी और सर्दी दोनों में कुछ राहत मिलती है।
दक्षिण बिहार की छोटी पहाड़ियाँ (Rajgir Hills, Kaimur Range) तापमान को प्रभावित करती हैं। बेसिन क्षेत्र जैसे गया में तापमान अत्यधिक होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में (राजगीर) तापमान मैदानों की अपेक्षा कम रहता है।
ग्रीष्म काल में पश्चिम से लू, मानसून काल में दक्षिण-पश्चिम से नम हवाएँ, शीत काल में उत्तर-पश्चिम से ठंडी हवाएँ बिहार के तापमान को प्रभावित करती हैं। काल बैसाखी (Nor’westers) अप्रैल-मई में तापमान को अचानक गिरा देती है।
उत्तरी बिहार के वन क्षेत्र तापमान को नियंत्रित करते हैं। वनों की कटाई से दक्षिण बिहार में गर्मी बढ़ी है। वाष्पीकरण-वाष्पोत्सर्जन (Evapotranspiration) की दर वनाच्छादित क्षेत्रों में अधिक होती है जो स्थानीय तापमान को कम रखती है।
उत्तर की रूपरेखा: (1) भूमिका — कोपेन वर्गीकरण, Cwa (2) कारक — अक्षांश, हिमालय, गंगा, स्थलाकृति (3) क्षेत्रीय विभिन्नता — उत्तर/मध्य/दक्षिण (4) गया बेसिन प्रभाव (5) निष्कर्ष — जलवायु परिवर्तन का खतरा। उत्तर 200-250 शब्दों में लिखें।
जलवायु परिवर्तन एवं बिहार के तापमान पर प्रभाव
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण बिहार के तापमान में असामान्य परिवर्तन देखे जा रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण बिहार में गर्मी के दिनों की संख्या बढ़ रही है और शीत ऋतु छोटी होती जा रही है। BPSC 2024 Mains में यह विषय अत्यंत प्रासंगिक है।
- ग्रीष्मकालीन Heat Wave Days में वृद्धि
- मानसून की अनियमितता — कम अवधि में अधिक वर्षा
- शीत ऋतु का छोटा होना — रबी फसल प्रभावित
- लीची, आम उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव
- बाढ़ और सूखे की तीव्रता में वृद्धि
- पिछले 50 वर्षों में 0.5°C–1°C की औसत वृद्धि
- गर्म दिनों (>40°C) की संख्या में 15–20% वृद्धि
- मानसून की अवधि 5–7 दिन छोटी हुई
- शीतकालीन न्यूनतम तापमान में 0.3°C वृद्धि
- ग्लेशियर पिघलने से बाढ़ का खतरा बढ़ा
बिहार सरकार की पहल
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बिहार सरकार ने Bihar State Action Plan on Climate Change (BSAPCC) बनाया है। इसके अंतर्गत वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही Early Warning System के माध्यम से किसानों को मौसम की जानकारी दी जाती है।
- बाढ़ और सूखा: जलवायु परिवर्तन से एक ही वर्ष में बाढ़ और सूखे दोनों की संभावना।
- कृषि संकट: तापमान वृद्धि से धान, गेहूँ और लीची की उत्पादकता में कमी।
- स्वास्थ्य संकट: Heat Wave से मृत्यु दर में वृद्धि, विशेषकर बुजुर्गों में।
- पानी की कमी: भूजल स्तर में गिरावट, गर्मी में नदियाँ सूखने लगी हैं।


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