बिहार का ऋतु विभाजन ग्रीष्म ऋतु
Bihar Govt. Competitive Exams — Bihar Govt. Competitive Exams | हिंदी माध्यम | सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
परिचय एवं सामान्य जानकारी
बिहार की जलवायु का अध्ययन Bihar Govt. Competitive Exams एवं राज्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार में मुख्यतः तीन ऋतुएँ पाई जाती हैं — ग्रीष्म ऋतु (Summer Season), वर्षा ऋतु (Monsoon Season) एवं शीत ऋतु (Winter Season)। इनमें ग्रीष्म ऋतु अत्यंत कठोर, तापदीप्त और जन-जीवन को प्रभावित करने वाली होती है।
बिहार की ऋतुओं का संक्षिप्त विभाजन
| ऋतु | अवधि | प्रमुख विशेषता | औसत तापमान |
|---|---|---|---|
| 1 ग्रीष्म ऋतु | मार्च – जून | उच्च तापमान, लू, आँधी | 32°C – 48°C |
| 2 वर्षा ऋतु | जून (मध्य) – अक्टूबर | दक्षिण-पश्चिम मानसून | 26°C – 35°C |
| 3 शीत ऋतु | नवम्बर – फरवरी | शुष्क, कोहरा, पाला | 8°C – 22°C |
ग्रीष्म ऋतु का विस्तार और अवधि
बिहार में ग्रीष्म ऋतु का आगमन मार्च से होता है और यह जून के मध्य तक बनी रहती है जब तक कि दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रवेश नहीं हो जाता। यह लगभग 3 से 4 महीने की अवधि होती है जिसमें तापमान और शुष्कता दोनों अपने चरम पर होते हैं।
माह-वार तापीय क्रमिकता (Monthly Thermal Progression)
ग्रीष्म ऋतु की अवधि — क्षेत्रवार विभिन्नता
| क्षेत्र | प्रमुख जिले | ग्रीष्म की अवधि | विशेषता |
|---|---|---|---|
| उत्तर बिहार | मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी | मार्च–जून | हिमालयी प्रभाव से तुलनात्मक कम गर्मी, उच्च आर्द्रता |
| दक्षिण बिहार | गया, औरंगाबाद, नवादा | फरवरी अंत–जून | सर्वाधिक गर्म; छोटानागपुर पठार से गर्म हवाएँ |
| पश्चिमी बिहार | भोजपुर, रोहतास, कैमूर | मार्च–जून | शुष्क और गर्म; लू का सर्वाधिक प्रभाव |
| पूर्वी बिहार | भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार | मार्च–जून | आर्द्रता अधिक; तापमान थोड़ा कम |
तापमान वितरण और विशेषताएँ
ग्रीष्म ऋतु में बिहार का तापमान वितरण असमान होता है। दक्षिण बिहार में तापमान सर्वाधिक रहता है जबकि उत्तर बिहार में हिमालय की समीपता के कारण कुछ राहत मिलती है। मई माह बिहार का सबसे गर्म माह होता है।
प्रमुख स्थानों पर अधिकतम तापमान (मई)
तापमान वितरण की विशेषताएँ
उत्तर बिहार में तापमान अपेक्षाकृत कम रहने के निम्न कारण हैं: (1) हिमालय पर्वत की समीपता — हिमालय से आने वाली ठंडी हवाएँ उत्तर बिहार को कुछ राहत देती हैं। (2) नदी-तंत्र — गंडक, कोसी, बागमती आदि नदियाँ वाष्पीकरण द्वारा तापमान को कम करती हैं। (3) उच्च आर्द्रता — जलवाष्प अधिक होने से विकिरण ऊष्मा का शीघ्र ह्रास होता है।
दक्षिण बिहार में तापमान अधिक होने के कारण: (1) छोटानागपुर पठार की निकटता — पठार से तप्त शुष्क हवाएँ आती हैं। (2) कम नदी जल — जल की कमी से वाष्पीकरण ठंडक कम करती है। (3) कम वनाच्छादन — वनों की कमी से तापमान ऊँचा रहता है। गया जिला बिहार का सर्वाधिक गर्म स्थान है।
लू (Loo) — विशेष मौसम परिघटना
लू (Loo) बिहार की ग्रीष्म ऋतु की सबसे विशिष्ट और प्राणघातक मौसम परिघटना है। यह एक गर्म, शुष्क, धूल भरी पवन होती है जो उत्तर-पश्चिम दिशा से चलती है। अप्रैल से जून के मध्य तक लू का प्रकोप रहता है।
लू का उद्गम थार मरुस्थल (राजस्थान) और पाकिस्तान की शुष्क भूमि से होता है। यह हवाएँ उत्तर-पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं और बिहार पहुँचते-पहुँचते अत्यंत गर्म हो जाती हैं।
लू के समय हवा का तापमान 45°C – 48°C तक पहुँच जाता है। इसकी गति सामान्यतः 25 – 45 km/h होती है। अत्यधिक शुष्क और गर्म होने के कारण यह मानव स्वास्थ्य के लिए घातक है।
लू मुख्यतः अप्रैल से जून के मध्य तक चलती है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच इसका प्रकोप सर्वाधिक होता है। सायं बाद इसकी तीव्रता घट जाती है।
बिहार में लू का सर्वाधिक प्रभाव रोहतास, कैमूर, भोजपुर, गया, औरंगाबाद और पटना में होता है। उत्तर-पश्चिम बिहार लू का मुख्य मार्ग है।
लू के स्वास्थ्य प्रभाव एवं सुरक्षा उपाय
लू के कारण Heat Stroke (लू लगना) की समस्या उत्पन्न होती है। इसमें शरीर का तापमान 40°C (104°F) से अधिक हो जाता है। लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, भ्रम, पसीना बंद हो जाना और बेहोशी शामिल हैं।
Heat Exhaustion में अत्यधिक पसीना, कमजोरी, मतली और चक्कर आते हैं। यह Heat Stroke से कम गंभीर है। बच्चे, वृद्ध और बाहर काम करने वाले मजदूर सर्वाधिक प्रभावित होते हैं।
बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा लू के मौसम में ORS (Oral Rehydration Solution) वितरण, सार्वजनिक छाया-स्थल और पेयजल की व्यवस्था की जाती है।
- दिशा: लू उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा में बहती है।
- प्रकृति: यह एक शुष्क, गर्म, धूल-भरी स्थानीय पवन है।
- तुलना: राजस्थान में इसे “लू”, अरब में “Simoom” और मध्य एशिया में “Sirocco” के समकक्ष माना जाता है।
- समाप्ति: मानसून के आगमन के साथ लू का प्रकोप समाप्त होता है।
- रिकॉर्ड: बिहार में गया में लू से सर्वाधिक मृत्यु दर्ज की गई है।
आँधी-तूफान एवं प्री-मानसून वर्षा
ग्रीष्म ऋतु में लू के साथ-साथ बिहार में Norwesters (काल बैसाखी), वज्रपात और धूलभरी आँधी (Dust Storms) की घटनाएँ होती हैं। ये प्री-मानसून वर्षा लाती हैं और कभी-कभी भारी तबाही मचाती हैं।
प्री-मानसून वर्षा का वितरण
| माह | औसत वर्षा (मिमी) | प्रमुख कारण | प्रभावित क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| मार्च | 10–15 मिमी | पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) | उत्तर बिहार |
| अप्रैल | 15–25 मिमी | काल बैसाखी, संवहनीय वर्षा | पूर्व और उत्तर-पूर्व बिहार |
| मई | 25–40 मिमी | वज्र-तूफान, प्री-मानसून | सम्पूर्ण बिहार (विशेषकर पूर्व) |
| जून (पूर्वार्ध) | 40–70 मिमी | मानसून का आगमन | दक्षिण-पूर्व से शुरू |
कृषि एवं जन-जीवन पर ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव
ग्रीष्म ऋतु बिहार के किसानों, मजदूरों और सामान्य जन-जीवन को गहरे रूप से प्रभावित करती है। एक तरफ जहाँ तापमान खेती के लिए समस्याएँ उत्पन्न करता है, वहीं प्री-मानसून वर्षा कुछ राहत भी देती है।
कृषि पर प्रभाव
रबी फसल (Rabi Crop) की कटाई मार्च–अप्रैल में होती है। गेहूँ, चना, मसूर आदि इस समय तैयार होती हैं। उच्च तापमान के कारण फसल शीघ्र पक जाती है जो किसानों के लिए लाभकारी है।
परंतु लू से देर से कटाई की स्थिति में फसल झुलस जाती है। खड़ी फसल पर लू का असर “Scorching” कहलाता है। इससे दाने पतले और खोखले रह जाते हैं।
खरीफ बुआई (Kharif Sowing) मानसून आने से पहले जून में शुरू होती है। किसान खेतों की जुताई, बीज उपचार और उर्वरक प्रबंध इसी ग्रीष्म काल में करते हैं।
ग्रीष्म ऋतु आम (Mango) का मौसम होता है। बिहार में दशहरी, लंगड़ा, चौसा आदि किस्मों का उत्पादन होता है। मुजफ्फरपुर और भागलपुर आम के प्रमुख उत्पादक जिले हैं।
लीची बिहार की सबसे प्रसिद्ध ग्रीष्मकालीन फसल है। मुजफ्फरपुर की लीची विश्व प्रसिद्ध है और GI Tag प्राप्त है। इसकी कटाई मई–जून में होती है।
ग्रीष्म में कद्दू, करेला, लौकी, तरबूज, खरबूजा आदि की खेती होती है। इनके लिए उच्च तापमान आवश्यक है।
जल संकट एवं नदियों पर प्रभाव
ग्रीष्म ऋतु में बिहार की छोटी नदियाँ और तालाब सूख जाते हैं। गंगा, सोन, पुनपुन जैसी बड़ी नदियों का जल स्तर न्यूनतम हो जाता है। भूजल स्तर (Ground Water Level) में भी गिरावट आती है। इससे पेयजल संकट उत्पन्न होता है।
| क्षेत्र | जल समस्या | प्रभावित जनसंख्या |
|---|---|---|
| दक्षिण बिहार | सर्वाधिक जल संकट; तालाब, कुएँ सूख जाते हैं | गया, नवादा, जहानाबाद के ग्रामीण |
| पश्चिमी बिहार | नदियाँ उथली; भूजल कम | रोहतास, कैमूर के किसान |
| उत्तर बिहार | तुलनात्मक बेहतर; हिमालय का जल | कम प्रभाव |
- लू से मृत्यु: प्रतिवर्ष बिहार में लू से दर्जनों लोगों की मृत्यु होती है। 2019 में 100 से अधिक मौतें हुई थीं।
- वज्रपात: बिहार वज्रपात (Lightning) से होने वाली मृत्यु में देश में अग्रणी है।
- बिजली संकट: उच्च तापमान के कारण AC, पंखों का उपयोग बढ़ता है जिससे बिजली की माँग बढ़ती है।
- पशुपालन: पशुओं में Heat Stress, दूध उत्पादन में कमी और मृत्यु की समस्या।
क्षेत्रीय तुलना, जलवायु विज्ञान एवं Bihar Govt. Competitive Exams विशेष
Bihar Govt. Competitive Exams और अन्य बिहार प्रतियोगी परीक्षाओं में जलवायु विज्ञान के सिद्धांतों को बिहार की ग्रीष्म ऋतु से जोड़कर प्रश्न पूछे जाते हैं। Köppen जलवायु वर्गीकरण, मानसून तंत्र और ताप-बजट की समझ परीक्षा में लाभकारी है।
Köppen जलवायु वर्गीकरण में बिहार
| क्षेत्र | Köppen Code | अर्थ | ग्रीष्म विशेषता |
|---|---|---|---|
| उत्तर बिहार | Cwa | Humid Subtropical with dry winter | गर्म ग्रीष्म परंतु Aw से कम |
| दक्षिण बिहार | Aw | Tropical Wet and Dry / Savanna | अत्यधिक गर्म ग्रीष्म, स्पष्ट शुष्क मौसम |
| पश्चिमी बिहार | Cwa / BSh | Subtropical / Semi-arid | अत्यधिक शुष्क और गर्म |
ग्रीष्म ऋतु और मानसून का संबंध
ग्रीष्म ऋतु में बिहार और उत्तर भारत पर ताप निम्न दाब (Thermal Low Pressure) का क्षेत्र बनता है। यह निम्न दाब ITCZ (Inter-Tropical Convergence Zone) को उत्तर की ओर खींचता है।
जब ITCZ उत्तर की ओर पर्याप्त खिंच जाता है, तब दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) केरल से प्रवेश करके उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ता है। बिहार में मानसून जून के दूसरे-तीसरे सप्ताह में पहुँचता है।
मानसून के आगमन के साथ तापमान में अचानक गिरावट आती है और आर्द्रता बढ़ जाती है। यही ग्रीष्म ऋतु के समाप्त होने का संकेत है।


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