बिहार का शीत ऋतु
बिहार के ऋतु विभाजन में शीत ऋतु की विस्तृत जानकारी — Bihar Govt. Competitive Exams एवं अन्य बिहार राज्य प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु
परिचय एवं ऋतु अवधि
बिहार का शीत ऋतु (Winter Season) Bihar Govt. Competitive Exams एवं अन्य बिहार प्रतियोगी परीक्षाओं में एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। यह ऋतु सामान्यतः नवंबर के मध्य से आरंभ होकर फरवरी के अंत तक रहती है।
बिहार की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसून (Tropical Monsoon) प्रकार की है, किन्तु इसमें महाद्वीपीय प्रभाव भी स्पष्ट देखा जाता है। शीत ऋतु इसी महाद्वीपीय प्रभाव का परिणाम है। हिमालय पर्वत से आने वाली ठंडी हवाएँ तथा पश्चिमी विक्षोभों (Western Disturbances) की सक्रियता इस ऋतु की प्रमुख विशेषता है।
ऋतु क्रम — कालचक्र
तापमान एवं जलवायु लक्षण
शीत ऋतु में बिहार का औसत तापमान 10°C–20°C के बीच रहता है। जनवरी में न्यूनतम तापमान मैदानी जिलों में 5°C–8°C तथा उत्तरी जिलों में और भी कम हो सकता है।
दिन का अधिकतम तापमान (Diurnal Maximum) भी इस काल में 20°C–25°C के आस-पास रहता है। दिन-रात के तापमान में अंतर (Diurnal Range) इस ऋतु में सर्वाधिक होता है, जो महाद्वीपीय जलवायु की पहचान है। सूर्य का दक्षिणायन (Southern Solstice) दिसंबर में होने के कारण दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं, जिससे धरातल से ऊष्मा का विकिरण (Radiation Cooling) अधिक होता है।
तापमान सारणी — प्रमुख जिले (जनवरी)
| क्र. | जिला / क्षेत्र | अधिकतम तापमान (°C) | न्यूनतम तापमान (°C) | विशेष लक्षण |
|---|---|---|---|---|
| 1 | पटना | 22–24 | 8–10 | मध्यम शीत, घना कोहरा |
| 2 | गया | 23–25 | 6–8 | अधिक ठंड, पाला संभव |
| 3 | मुजफ्फरपुर (उत्तरी) | 20–22 | 5–7 | तराई प्रभाव, अत्यधिक ठंड |
| 4 | भागलपुर (पूर्व) | 22–24 | 9–11 | अपेक्षाकृत कम शीत |
| 5 | दरभंगा | 20–22 | 4–6 | सर्वाधिक ठंड, पाला, कोहरा |
| 6 | रोहतास/कैमूर (दक्षिण) | 24–26 | 7–10 | पठारी क्षेत्र — थोड़ी कम आर्द्रता |
तापमान वितरण के मुख्य कारण
उत्तर बिहार हिमालय के निकट है, इसलिए ठंडी हवाएँ सीधे आती हैं। उत्तरी जिले (दरभंगा, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर) अधिक ठंडे रहते हैं।
दिसंबर में सूर्य मकर रेखा पर होता है। बिहार पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं, जिससे ऊर्जा कम प्राप्त होती है और तापमान कम रहता है।
मध्य एशिया और हिमाचल से आने वाली शीतल उत्तर-पश्चिमी हवाएँ (North-Westerlies) बिहार में ठंड का मुख्य कारण हैं।
लंबी रातों में भूतल से ऊष्मा का विकिरण अधिक होता है (Radiation Cooling), जिससे न्यूनतम तापमान और गिरता है। इसी से पाला (Frost) पड़ता है।
तापमान-संबंधी प्रमुख आँकड़े
शीतकालीन वर्षा — माघी बौछार (Mahawat)
शीत ऋतु में बिहार को पश्चिमी विक्षोभों (Western Disturbances) से होने वाली वर्षा प्राप्त होती है, जिसे माघी बौछार या Mahawat कहा जाता है। यह वर्षा रबी फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी होती है।
पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागरीय क्षेत्र (Mediterranean Sea) से उत्पन्न चक्रवातीय तूफान हैं, जो पश्चिम एशिया और ईरान-पाकिस्तान होते हुए भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में प्रवेश करते हैं। शीत ऋतु में इनकी सक्रियता के कारण बिहार के पश्चिमी एवं उत्तरी भागों में हल्की से मध्यम वर्षा होती है। यह वर्षा दिसंबर–जनवरी–फरवरी माह में होती है।
शीतकालीन वर्षा के प्रमुख तथ्य
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्रोत | पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) — भूमध्यसागरीय मूल |
| स्थानीय नाम | माघी बौछार / Mahawat |
| माह | दिसंबर, जनवरी, फरवरी |
| औसत वर्षा | 25–50 mm (पूरे शीत ऋतु में) |
| वर्षा का स्वरूप | हल्की से मध्यम, कभी-कभी ओले (Hailstorm) |
| प्रभावित क्षेत्र | पश्चिमी बिहार (रोहतास, भोजपुर, बक्सर) अधिक, पूर्वी बिहार कम |
| कृषि महत्व | गेहूँ, दलहन, तिलहन (रबी फसलों) के लिए अमृत समान |
| हानि | ओलावृष्टि से खड़ी फसलों को कभी-कभी नुकसान |
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) एक बाह्य उष्णकटिबंधीय तूफान (Extra-Tropical Cyclone) है, जो भूमध्यसागर (Mediterranean Sea), कैस्पियन सागर या काले सागर से नमी लेकर आता है। यह पश्चिमी जेट स्ट्रीम (Jet Stream) के माध्यम से पश्चिम से पूर्व दिशा में गति करता है।
जब यह भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग (जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा) से होते हुए पूर्व की ओर बढ़ता है, तो उत्तरी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में हल्की वर्षा लाता है। इसी वर्षा को माघी बौछार (Mahawat) कहते हैं।
- नवंबर–मार्च: पश्चिमी विक्षोभों की मुख्य सक्रियता अवधि।
- जनवरी–फरवरी: बिहार में सर्वाधिक प्रभाव।
- गेहूँ के लिए: यह वर्षा “सोने पर सुहागा” मानी जाती है — सिंचाई का खर्च बचता है।
- ओलावृष्टि: कभी-कभी इन्हीं विक्षोभों के साथ ओले गिरते हैं।
हवाएँ, कोहरा एवं अन्य घटनाएँ
शीत ऋतु में बिहार में उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएँ (North-Westerlies) प्रवाहित होती हैं। इसके साथ घना कोहरा (Dense Fog) और कभी-कभी पाला (Frost) भी इस ऋतु की विशेषता है।
शीत ऋतु में आर्द्रता का स्तर सापेक्ष रूप से कम होता है, किंतु ठंडे तापमान के कारण रात में ओस (Dew) और सुबह कोहरा (Fog) देखा जाता है। विशेषकर गंगा के मैदानी क्षेत्र में दिसंबर-जनवरी में घना कोहरा जनजीवन को प्रभावित करता है।
शीत ऋतु में मध्य एशिया एवं हिमालयी क्षेत्र में उच्च वायुदाब (High Pressure) का केंद्र बनता है। इससे ठंडी, शुष्क हवाएँ उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर प्रवाहित होती हैं। इन्हें “शीतलहर” (Cold Wave) कहते हैं जब तापमान अचानक तेज़ी से गिरता है।
- दिशा: उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व
- प्रकृति: शुष्क, ठंडी
- प्रभाव: तापमान में अचानक गिरावट
- शीतलहर: जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5°C कम हो
दिसंबर-जनवरी में बिहार, विशेषकर गंगा के मैदान में घना कोहरा छाता है। ठंडे तापमान के कारण जल-वाष्प जमकर कोहरे का रूप लेती है। Visibility 100 मीटर से कम होने पर इसे “घना कोहरा (Dense Fog)” कहते हैं।
- कारण: विकिरण शीतलन (Radiation Cooling)
- समय: रात और सुबह के समय सर्वाधिक
- प्रभाव: रेल-सड़क यातायात बाधित, विमान सेवा प्रभावित
- क्षेत्र: गंगा नदी के किनारे के जिले सर्वाधिक प्रभावित
शीत ऋतु की प्रमुख मौसमी घटनाएँ
क्षेत्रीय भिन्नता — उत्तर बनाम दक्षिण बिहार
बिहार में शीत ऋतु का अनुभव पूरे राज्य में एक समान नहीं होता। उत्तर बिहार (तराई क्षेत्र) और दक्षिण बिहार (पठारी व मैदानी क्षेत्र) में स्पष्ट जलवायु भिन्नता पाई जाती है।
उत्तर बिहार बनाम दक्षिण बिहार — तुलना
| पहलू | उत्तर बिहार (तराई) | दक्षिण बिहार (मैदान/पठार) |
|---|---|---|
| न्यूनतम तापमान | 3°C–7°C (अत्यधिक ठंड) | 7°C–10°C (कम ठंड) |
| कोहरा | अत्यधिक घना और लंबे समय तक | कम घना, जल्दी छँटता है |
| पाला | जनवरी में पाला सामान्य | कभी-कभी ही पाला पड़ता है |
| माघी वर्षा | कम वर्षा | पश्चिमी भाग में अधिक वर्षा |
| आर्द्रता | अधिक (नदियों की निकटता) | कम |
| कारण | हिमालय की निकटता, नदी-प्रधान क्षेत्र | हिमालय से दूरी, पठारी प्रभाव |
| प्रमुख जिले | दरभंगा, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, मधुबनी | गया, रोहतास, कैमूर, नालंदा |
- हिमालय की तलहटी (तराई) के निकट होने से ठंड अधिक।
- गंडक, बागमती, कोसी जैसी नदियाँ आर्द्रता बढ़ाती हैं।
- घना कोहरा — दिसंबर-जनवरी में दृश्यता बहुत कम।
- दरभंगा, सीतामढ़ी में पाला पड़ने की सर्वाधिक संभावना।
- छोटानागपुर पठार का प्रभाव — अपेक्षाकृत शुष्क।
- गया जिला ठंडा किंतु कोहरा कम।
- रोहतास-कैमूर में पठारी हवाएँ — सुबह ठंडी, दोपहर गर्म।
- माघी वर्षा पश्चिमी दक्षिण बिहार (रोहतास) में अपेक्षाकृत अधिक।
कृषि एवं जनजीवन पर शीत ऋतु का प्रभाव
शीत ऋतु का बिहार की कृषि और सामाजिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। एक ओर यह रबी फसलों के लिए अनुकूल मौसम लाता है, तो दूसरी ओर पाला और शीतलहर से फसलों और जनजीवन को नुकसान भी पहुँचाता है।
शीत ऋतु में बोई जाने वाली प्रमुख फसलें (रबी)
| फसल | बुआई (Sowing) | कटाई (Harvest) | प्रमुख जिले |
|---|---|---|---|
| गेहूँ (Wheat) | नवंबर | मार्च–अप्रैल | रोहतास, भोजपुर, बक्सर, पटना |
| चना (Gram) | अक्टूबर–नवंबर | फरवरी–मार्च | गया, नालंदा, औरंगाबाद |
| मटर (Pea) | अक्टूबर–नवंबर | जनवरी–फरवरी | उत्तर बिहार, पटना |
| सरसों (Mustard) | सितंबर–अक्टूबर | फरवरी–मार्च | सारण, मुजफ्फरपुर, भोजपुर |
| मक्का (Rabi Maize) | नवंबर | मार्च | कोसी क्षेत्र, सहरसा |
| जौ (Barley) | नवंबर | मार्च–अप्रैल | रोहतास, भोजपुर |
शीत ऋतु के प्रभाव — सकारात्मक एवं नकारात्मक
- रबी फसलों (गेहूँ, चना, सरसों) के लिए उपयुक्त तापमान।
- माघी वर्षा से सिंचाई लागत में कमी।
- ठंड से कीट-पतंगों का नाश — फसल रोग कम।
- पर्यटन में वृद्धि — मकर संक्रांति, सोनपुर मेला आदि।
- शीतकालीन सब्जियाँ (आलू, फूलगोभी, पालक) की भरमार।
- पाले से गेहूँ-सरसों की फसलों को नुकसान।
- शीतलहर से वृद्धों-बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में।
- घने कोहरे से सड़क/रेल दुर्घटनाएँ।
- ओलावृष्टि से खड़ी फसल नष्ट।
- उत्तरी बिहार में बाढ़-संवेदनशील क्षेत्रों में नमी से समस्याएँ।
Mnemonics — स्मरण सूत्र
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