मौर्य साम्राज्य और बिहार
अशोक की नीतियाँ और धम्म
प्रिय-दर्शी देवानांप्रिय अशोक — कलिंग युद्ध से धम्म तक की यात्रा। BPSC, BSSC, Bihar PSC एवं सभी Bihar competitive परीक्षाओं हेतु सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री।
परिचय — अशोक कौन थे?
अशोक की नीतियाँ और धम्म — BPSC एवं Bihar competitive परीक्षाओं का एक अनिवार्य अध्याय है। सम्राट अशोक (देवानांप्रिय, प्रिय-दर्शी) मौर्य वंश के सबसे महान शासक थे जिन्होंने 261 ईपू के कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्यागकर धम्म की नीति अपनाई और शासन को नैतिकता से जोड़ा।
राज्यारोहण एवं प्रारंभिक शासन
अशोक का सिंहासन पर आरोहण एक लंबे उत्तराधिकार संघर्ष के बाद हुआ। प्रारंभिक शासन में वे एक पारंपरिक, विजय-उन्मुख सम्राट थे — जो बाद में कलिंग युद्ध के प्रभाव से पूर्णतः परिवर्तित हो गए।
सिंहासन तक का मार्ग
बिन्दुसार की मृत्यु (272 ईपू) के बाद अशोक और उनके भाई-बंधुओं के बीच उत्तराधिकार के लिए संघर्ष हुआ। दिव्यावदान और महावंश जैसे बौद्ध ग्रंथों के अनुसार अशोक ने 99 भाइयों को मारकर सत्ता प्राप्त की — यद्यपि यह संख्या अतिश्योक्तिपूर्ण है। वास्तविक राज्यारोहण 272 ईपू में हुआ, किन्तु औपचारिक राज्याभिषेक 268 ईपू में — चार वर्ष बाद। इस अंतराल का कारण राजनीतिक अस्थिरता थी।
कलिंग युद्ध — परिवर्तन का मोड़
कलिंग युद्ध (261 ईपू) न केवल मौर्य साम्राज्य का सबसे बड़ा युद्ध था, बल्कि यह भारतीय इतिहास का वह क्षण था जिसने एक सम्राट को युद्ध-विजेता से शांति-दूत में बदल दिया। BPSC Prelims एवं Mains दोनों में यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय है।
स्थान: कलिंग (वर्तमान ओडिशा)
कारण: कलिंग मौर्य साम्राज्य से स्वतंत्र था; व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण।
13वाँ शिलालेख — कलिंग युद्ध का प्रत्यक्ष विवरण
अशोक का 13वाँ बृहत् शिलालेख कलिंग युद्ध का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रमाण है। इसमें अशोक ने स्वयं लिखवाया कि युद्ध के दौरान हुए नरसंहार को देखकर उनका हृदय पीड़ा से भर गया। उन्होंने लिखा — “देवानांप्रिय को यह विजय अत्यंत दुःखद लगी”। यह विश्व के किसी भी सम्राट द्वारा अपनी विजय पर पश्चाताप का पहला लिखित अभिलेख है।
| पहले (कलिंग से पूर्व) | परिवर्तन के कारण | बाद में (कलिंग के बाद) |
|---|---|---|
| साम्राज्य-विस्तार की नीति | 1 लाख मृत, 1.5 लाख बंदी | धम्म की नीति |
| भेरी-घोष (युद्ध नाद) | बौद्ध भिक्षु उपगुप्त से भेंट | धम्म-घोष (धर्म का प्रचार) |
| राज्य की नीति — विजय | कलिंग का नरसंहार देखा | धम्म-विजय |
| शिकार एवं मांस-भक्षण | बौद्ध धर्म अंगीकार | जीव-हत्या त्याग, शाकाहार |
| प्रशासन — राजस्व केंद्रित | अभिलेखों में प्रजा-हित | प्रजा-कल्याण केंद्रित |
धम्म — अशोक की राजनीति
अशोक का धम्म (संस्कृत: धर्म) एक सार्वभौमिक नैतिक आचार-संहिता थी — न केवल बौद्ध धर्म का प्रचार। यह माता-पिता के प्रति सम्मान, सत्य, अहिंसा, दान और सभी जीवों के प्रति करुणा पर आधारित थी। BPSC परीक्षाओं में “धम्म क्या था?” यह एक अत्यंत सामान्य प्रश्न है।
धम्म के मूल सिद्धांत
धम्म और बौद्ध धर्म — अंतर
| आधार | अशोक का धम्म | बौद्ध धर्म |
|---|---|---|
| स्वरूप | सार्वभौमिक नैतिक आचार-संहिता | एक विशेष धार्मिक पंथ |
| लक्ष्य | सभी नागरिकों का नैतिक उत्थान | निर्वाण, मोक्ष |
| सम्बंध | बौद्ध धर्म से प्रेरित, किन्तु सर्वधर्म-समन्वयी | अशोक बौद्ध धर्म के अनुयायी भी थे |
| प्रचार माध्यम | अभिलेख, धर्म-महामात्र, धर्म-यात्राएँ | बौद्ध विहार, संघ, भिक्षु |
| दायरा | समस्त प्रजा — हिन्दू, बौद्ध, जैन, आजीवक | बौद्ध धर्म के अनुयायी |
- धर्म-महामात्र — विशेष अधिकारी जो धम्म का प्रचार करते थे और प्रजा की नैतिक स्थिति देखते थे। 5वाँ शिलालेख
- धर्म-यात्राएँ — राज्याभिषेक के 10वें वर्ष में अशोक ने बोधगया की यात्रा की; 20वें वर्ष में लुम्बिनी। शिकार-यात्राओं का स्थान लिया।
- धर्म-लिपि (अभिलेख) — शिलाओं, स्तम्भों और गुफाओं पर धम्म के संदेश उत्कीर्ण करवाए।
- राजकीय आदेश — मृत्युदंड पर रोक, पशु-बलि प्रतिबंध, अस्पताल स्थापना, सड़कें बनवाना।
- विदेश में प्रचार — पुत्र महेन्द्र को श्रीलंका, पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा। सीरिया, मिस्र, मैसेडोनिया, एपिरस, सायरीन में दूत भेजे।
- तृतीय बौद्ध संगीति — ~250 ईपू में पाटलिपुत्र में मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में आयोजित।
अभिलेख एवं शिलालेख — धम्म के शिलापत्र
अशोक के अभिलेख प्राचीन भारत के इतिहास के सबसे महत्त्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत हैं। ये शिलाओं, स्तम्भों और गुफाओं पर उत्कीर्ण हैं। BPSC एवं Bihar competitive परीक्षाओं में अशोक के अभिलेखों की संख्या, स्थान, विषय और लिपि पर प्रश्न नियमित आते हैं।
अभिलेखों के प्रकार
| प्रकार | संख्या | विषय | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|---|
| बृहत् शिलालेख | 14 | धम्म के व्यापक सिद्धांत | गिरनार (गुजरात), शाहबाजगढ़ी, मानसेहरा |
| लघु शिलालेख | अनेक | धम्म के संक्षिप्त संदेश | मस्की (कर्नाटक) — यहाँ “अशोक” नाम मिला |
| स्तम्भ अभिलेख | 7 बृहत् + कई लघु | धम्म-प्रचार, प्रशासनिक आदेश | दिल्ली-टोपरा, दिल्ली-मेरठ, लौरिया नंदनगढ़, सारनाथ |
| गुफा अभिलेख | 3 | आजीवक सम्प्रदाय को गुफाएँ दान | बराबर गुफाएँ (गया, बिहार) |
प्रमुख शिलालेखों का विषय
| शिलालेख | विषय | परीक्षा-महत्त्व |
|---|---|---|
| 1वाँ | पशु-बलि पर प्रतिबंध | ⭐⭐ |
| 2वाँ | मनुष्यों और पशुओं के लिए चिकित्सा व्यवस्था | ⭐⭐ |
| 5वाँ | धर्म-महामात्रों की नियुक्ति | ⭐⭐⭐ |
| 6वाँ | अशोक की प्रतिज्ञा — “सर्वदा प्रजा की भलाई के लिए उपलब्ध रहूँगा” | ⭐⭐ |
| 12वाँ | धार्मिक सहिष्णुता — सभी संप्रदायों का सम्मान | ⭐⭐⭐ |
| 13वाँ | कलिंग युद्ध का वर्णन एवं पश्चाताप | ⭐⭐⭐ |
अभिलेखों की लिपि और भाषा
बिहार में अशोक के अभिलेख स्थल
| स्थान | जिला / बिहार | अभिलेख-प्रकार |
|---|---|---|
| लौरिया अरराज | पश्चिम चम्पारण | स्तम्भ अभिलेख (बृहत्) |
| लौरिया नंदनगढ़ | पश्चिम चम्पारण | स्तम्भ अभिलेख — सिंह स्तम्भ |
| रम्पुरवा | पश्चिम चम्पारण | दो स्तम्भ — सिंह एवं बैल शीर्ष |
| बराबर गुफाएँ | गया | गुफा अभिलेख — आजीवकों को दान |
प्रशासनिक नीतियाँ
अशोक ने धम्म को केवल उपदेश तक सीमित नहीं रखा — उन्होंने इसे ठोस प्रशासनिक नीतियों में बदला। कल्याणकारी राज्य की अवधारणा भारत में सबसे पहले अशोक के शासन में दिखती है।
अशोक की प्रमुख कल्याणकारी नीतियाँ
धर्म-महामात्र — एक विशेष प्रशासनिक नवाचार
धर्म-महामात्र वे विशेष अधिकारी थे जिन्हें अशोक ने अपने शासनकाल के 13वें वर्ष (5वें शिलालेख के अनुसार) नियुक्त किया था। इनका कार्य था — धम्म का प्रचार करना, विभिन्न संप्रदायों के बीच सौहार्द स्थापित करना, बंदियों के कल्याण का ध्यान रखना और अनाथों, वृद्धों तथा विकलांगों की देखभाल करना। ये अधिकारी किसी एक धर्म के प्रचारक नहीं थे — इनका दायित्व सभी धर्मों और समुदायों तक था।
अशोक के शासनकाल में पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना, बिहार) में तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ। इसकी अध्यक्षता मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की और अशोक ने इसे संरक्षण प्रदान किया। इसी संगीति में अभिधम्म पिटक को अंतिम रूप दिया गया और बौद्ध धर्म को विदेशों में भेजने का निर्णय लिया गया।
- स्थान — पाटलिपुत्र (पटना, बिहार)
- काल — अनुमानतः 250 ईपू
- अध्यक्ष — मोग्गलिपुत्त तिस्स
- परिणाम — त्रिपिटक को अंतिम रूप; 9 देशों में धर्म-प्रचारक भेजे गए
- महेन्द्र — अशोक के पुत्र → श्रीलंका में बौद्ध धर्म का प्रसार
- संघमित्रा — अशोक की पुत्री → श्रीलंका में बोधिवृक्ष की शाखा ले गईं
बिहार से अशोक का सम्बन्ध
बिहार अशोक के जीवन और साम्राज्य दोनों का केंद्र था। पाटलिपुत्र (पटना) उनकी राजधानी थी, बोधगया (गया) में उन्होंने धर्म-यात्रा की, और बिहार के अनेक स्थानों पर उनके स्तम्भ तथा अभिलेख आज भी मौजूद हैं।
| स्थान | बिहार में स्थिति | अशोक से सम्बन्ध |
|---|---|---|
| पाटलिपुत्र (पटना) | बिहार की राजधानी | मौर्य साम्राज्य की राजधानी; तृतीय बौद्ध संगीति; कुम्हरार में महल के अवशेष |
| बोधगया | गया जिला | अशोक ने यहाँ धर्म-यात्रा की (राज्यारोहण के 10वें वर्ष); महाबोधि विहार के जीर्णोद्धार का उल्लेख |
| लौरिया नंदनगढ़ | पश्चिम चम्पारण | प्रसिद्ध सिंह स्तम्भ; 7 बृहत् स्तम्भ अभिलेखों में से एक |
| लौरिया अरराज | पश्चिम चम्पारण | अशोक का स्तम्भ अभिलेख |
| रम्पुरवा | पश्चिम चम्पारण | सिंह एवं बैल शीर्ष वाले दो स्तम्भ (1876 में Carlyle ने खोजे) |
| बराबर गुफाएँ | जहानाबाद (पूर्व गया) | आजीवक सम्प्रदाय को दान की गई गुफाएँ; अभिलेख अंकित |
| वैशाली | वैशाली जिला | अशोक स्तम्भ — एकल सिंह शीर्ष। बुद्ध जन्म से सम्बद्ध स्थल पर निर्माण। |
| केसरिया | पूर्वी चम्पारण | विश्व का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप (अशोक काल) |
अशोक की विरासत — आधुनिक भारत पर प्रभाव
अशोक की विरासत केवल इतिहास तक सीमित नहीं है — आधुनिक भारत गणराज्य ने अशोक के प्रतीकों को अपनी पहचान बना लिया है। यह विषय BPSC Mains में विश्लेषणात्मक प्रश्नों के रूप में पूछा जाता है।
अशोक के साम्राज्य के पतन के कारण
अशोक की मृत्यु (232 ईपू) के बाद मौर्य साम्राज्य तेज़ी से क्षीण हुआ। इसके प्रमुख कारण थे — अशोक की अहिंसा नीति से सेना का मनोबल गिरना, साम्राज्य का अत्यंत विशाल होना जो केंद्रीय नियंत्रण के लिए कठिन था, राजकोष का बौद्ध विहारों और कल्याण कार्यों पर अत्यधिक व्यय, और उत्तराधिकार में कमज़ोर शासक। 185 ईपू में अंतिम मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या उनके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने की।
- अहिंसा नीति: सेना का मनोबल गिरा जिससे साम्राज्य की रक्षा क्षमता कमज़ोर हुई।
- बौद्ध धर्म पक्षपात: आलोचकों के अनुसार बौद्ध विहारों को अत्यधिक दान से ब्राह्मण वर्ग में असंतोष बढ़ा।
- केंद्रीकरण की कमी: धम्म-प्रचार में व्यस्त रहने से प्रशासनिक नियंत्रण शिथिल हुआ।
- उत्तराधिकार: कोई शक्तिशाली उत्तराधिकारी तैयार नहीं किया जो इतने विशाल साम्राज्य को सम्भाल सके।
MCQ अभ्यास — Bihar Competitive Exam
नीचे दिए गए 5 MCQ प्रश्न BPSC, BSSC और Bihar PSC परीक्षाओं के स्तर के हैं। किसी एक विकल्प पर क्लिक करें — सही उत्तर तुरंत प्रकट होगा।
सारांश, स्मरण-सूत्र एवं विगत वर्षों के प्रश्न
स्मरण सूत्र — बौद्ध संगीतियाँ
स्मरण सूत्र — अशोक के प्रमुख शिलालेख
- कलिंग युद्ध — 261 ईपू; 1 लाख मृत, 1.5 लाख बंदी
- अशोक के अभिलेखों में नाम — “देवानांपिय पियदसि”; “अशोक” — केवल मस्की में
- ब्राह्मी लिपि-वाचन — James Prinsep, 1837 ई.
- धर्म-महामात्र — 5वाँ शिलालेख; शासन के 13वें वर्ष
- 13वाँ शिलालेख — कलिंग युद्ध का विवरण
- 12वाँ शिलालेख — धार्मिक सहिष्णुता
- तृतीय संगीति — पाटलिपुत्र (पटना), मोग्गलिपुत्त तिस्स
- महेन्द्र-संघमित्रा — अशोक के पुत्र-पुत्री → श्रीलंका
- राष्ट्रीय प्रतीक — सारनाथ का सिंह-शीर्ष
- अशोक चक्र — राष्ट्रीय ध्वज में, 24 तीलियाँ
- बिहार में अभिलेख — लौरिया नंदनगढ़, लौरिया अरराज, रम्पुरवा, बराबर गुफाएँ
🎯 BPSC परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण
उपसंहार
अशोक विश्व के उन विरले शासकों में हैं जिन्होंने विजय के शिखर पर पहुँचकर हिंसा को त्यागा। उनकी धम्म नीति आज भी प्रासंगिक है — धार्मिक सहिष्णुता, कल्याणकारी शासन और पर्यावरण-संरक्षण के उनके विचार आधुनिक लोकतंत्र की नींव हैं। बिहार की धरती से उभरकर उन्होंने एक ऐसा संदेश दिया जो आज भारत के राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र के रूप में फहराता है।


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