बिहार की स्थलाकृति
परिचय एवं सामान्य भौगोलिक स्वरूप
बिहार की स्थलाकृति (Topography) BPSC परीक्षा के भूगोल खंड की आधारशिला है। बिहार एक विविध भू-आकृतिक राज्य है जहाँ उत्तर में हिमालय की तराई पहाड़ियाँ, मध्य में विशाल गंगा का मैदान, और दक्षिण में छोटानागपुर पठार का विस्तार मिलता है।
बिहार की भू-आकृतिक विशेषताएँ — एक दृष्टि
| भू-आकृतिक इकाई | विस्तार क्षेत्र | औसत ऊँचाई | प्रमुख जिले |
|---|---|---|---|
| उत्तरी मैदान (तराई) | गंगा के उत्तर — नेपाल तक | 60–90 मी. | पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी |
| मध्य गंगा मैदान | गंगा के दोनों तट | 45–60 मी. | पटना, वैशाली, सारण, भोजपुर |
| दक्षिणी मैदान | गंगा के दक्षिण — पठार तक | 60–150 मी. | गया, नालंदा, जहानाबाद, औरंगाबाद |
| कैमूर-रोहतास पठार | दक्षिण-पश्चिम बिहार | 300–500 मी. | रोहतास, कैमूर, बक्सर |
| सोमेश्वर-रामनगर पहाड़ी | उत्तर-पश्चिम बिहार | 500–880 मी. | पश्चिम चंपारण |
| राजमहल पहाड़ियाँ | पूर्वी बिहार | 300–567 मी. | भागलपुर, बाँका |
| गया-नवादा पहाड़ी | मध्य-दक्षिण बिहार | 200–400 मी. | गया, नवादा, नालंदा |
उत्तरी गंगा मैदान एवं तराई क्षेत्र
उत्तरी गंगा मैदान बिहार का सर्वाधिक जनसंख्या-घन और कृषि-समृद्ध क्षेत्र है। यह गंगा के उत्तर से नेपाल सीमा तक विस्तृत है। इसे दो उप-भागों में बाँटा जाता है — भाभर क्षेत्र और तराई क्षेत्र।
उत्तरी मैदान की उप-इकाइयाँ
घाघरा और गंडक नदियों के बीच का मैदान सारण मैदान कहलाता है। इसमें सारण, सीवान, गोपालगंज जिले आते हैं। यह क्षेत्र गंगा-घाघरा दोआब का भाग है। यहाँ की मिट्टी अत्यंत उपजाऊ है और गेहूँ, धान, मक्के की खेती होती है। नदियों के लगातार मार्ग परिवर्तन से यहाँ जलजमाव (Waterlogging) की गंभीर समस्या है।
- प्रमुख जिले: सारण, सीवान, गोपालगंज।
- प्रमुख नदियाँ: घाघरा (उत्तर), गंडक (पूर्व), गंगा (दक्षिण)।
- मिट्टी: नवीन जलोढ़ (Khadar) — अत्यंत उपजाऊ।
- समस्या: बाढ़ एवं जलजमाव — लगभग हर वर्ष।
तिरहुत मैदान बिहार के उत्तरी मैदान की सबसे महत्वपूर्ण उप-इकाई है। यह गंडक और कोसी नदियों के बीच फैला है। इसमें मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, मधुबनी, समस्तीपुर आते हैं। मिथिला संस्कृति का केंद्र। यहाँ का मैदान अत्यंत समतल है और जनघनत्व बहुत अधिक।
- मिथिला का हृदय: मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर।
- बागमती-कमला बाढ़: यह क्षेत्र सर्वाधिक बाढ़प्रभावित है।
- लीची उत्पादन: मुजफ्फरपुर विश्वप्रसिद्ध — Shahi Litchi (GI Tag)।
- मखाना: दरभंगा-मधुबनी — विश्व का 85% मखाना यहीं।
- मधुबनी पेंटिंग: GI Tag — विश्व प्रसिद्ध लोककला।
कोसी और महानंदा के बीच का क्षेत्र मिथिला-कोसी मैदान कहलाता है। इसमें सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार, अररिया आते हैं। यह कोसी नदी के बार-बार मार्ग परिवर्तन से बना है। यहाँ Char (रेतीले टापू) और जलभराव वाले क्षेत्र मिलते हैं। पूर्णिया प्रमंडल इसी में है।
- कोसी का प्रभाव: नदी के मार्ग परिवर्तन से भूमि का रूप बदलता रहता है।
- Char वासी: नदी के रेतीले टापुओं पर जीवन — अत्यंत कठिन।
- पूर्णिया मैदान: जूट उत्पादन — पूर्वी बिहार की विशेषता।
- महानंदा तट: कटिहार — बंगाल से सटा सांस्कृतिक संधिस्थल।
दक्षिणी गंगा मैदान
गंगा के दक्षिण में स्थित मैदान दक्षिणी गंगा मैदान कहलाता है। यह उत्तरी मैदान से थोड़ा ऊँचा और कम उपजाऊ है। इसके दक्षिण में क्रमशः पठारी भाग शुरू होता है। यहाँ की नदियाँ छोटानागपुर पठार से निकलती हैं — इसलिए इनमें बरसात में जल भर जाता है और गर्मियों में प्रायः सूख जाती हैं।
दक्षिणी मैदान की विशेषताएँ
| विशेषता | उत्तरी मैदान | दक्षिणी मैदान |
|---|---|---|
| नदी उद्गम | हिमालय (बारहमासी) | छोटानागपुर पठार (मौसमी) |
| मिट्टी | नवीन जलोढ़ (खादर) | पुरानी जलोढ़ + लाल मिट्टी |
| उर्वरता | अत्यधिक | मध्यम |
| ऊँचाई | 45–90 मी. | 60–150 मी. |
| बाढ़ समस्या | अत्यधिक | कम |
| प्रमुख फसलें | धान, गेहूँ, मक्का | गेहूँ, दलहन, सब्जी |
| जनघनत्व | बहुत अधिक | अधिक |
दक्षिणी पठारी क्षेत्र — कैमूर एवं रोहतास
बिहार के दक्षिण-पश्चिम में कैमूर पठार और रोहतास पठार स्थित हैं। ये छोटानागपुर पठार के उत्तरी विस्तार हैं। यह क्षेत्र प्राचीन भूगर्भीय दृष्टि से गोंडवाना भूखंड का भाग है और इसमें विंध्यन बलुआ पत्थर तथा प्रीकैम्ब्रियन शैल मिलते हैं।
कैमूर पठार
कैमूर एवं रोहतास जिलेरोहतास पठार
रोहतास जिलाकैमूर-रोहतास पठार की विशेषताएँ
- शैल प्रकार: विंध्यन बलुआ पत्थर, चूना पत्थर (Limestone), डोलोमाइट।
- भूगर्भीय आयु: प्रीकैम्ब्रियन से कैम्ब्रियन — अत्यंत प्राचीन।
- जलप्रपात: तुत्रलाव जलप्रपात (कैमूर), धुआँधार जलप्रपात — सोन की सहायकों पर।
- खनिज: चूना पत्थर — डालमियानगर (रोहतास) में सीमेंट कारखाना। पाइराइट भी।
- वन: कैमूर वन्यजीव अभयारण्य — बाघ, तेंदुआ, चीतल।
- ऐतिहासिक: रोहतासगढ़ किला — मध्यकालीन — शेरशाह सूरी से संबंध।
- सोन नदी: पठार को काटते हुए उत्तर की ओर प्रवाहित — गहरे गॉर्ज बनाती है।
गया-नवादा पहाड़ी क्षेत्र
गया और नवादा जिलों में कई छोटी-छोटी पहाड़ियाँ हैं जो ग्रेनाइट-नीस की बनी हैं। ये प्रीकैम्ब्रियन काल की अत्यंत प्राचीन शैलें हैं। इनमें ब्रह्मयोनि पहाड़ी, प्रेतशिला पहाड़ी, रामशिला प्रमुख हैं — ये हिंदू धर्म में श्राद्ध के लिए पवित्र मानी जाती हैं।
- ब्रह्मयोनि: गया में — पिंडदान का पवित्र स्थल।
- बाराबर गुफाएँ: जहानाबाद — अशोककालीन — आजीवक संप्रदाय को दी गई।
- राजगीर पहाड़ियाँ: नालंदा — पंचपहाड़ी (Panchahill) — जैन-बौद्ध तीर्थ।
- शैल प्रकार: ग्रेनाइट, क्वार्टज़ाइट, नीस — अत्यंत कठोर।
उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र — सोमेश्वर एवं रामनगर दून
बिहार के उत्तर-पश्चिम में पश्चिम चंपारण जिले में हिमालय की बाह्य श्रेणी (Siwalik / Outer Himalaya) का एक भाग मिलता है। इसे सोमेश्वर श्रेणी और रामनगर दून के नाम से जाना जाता है।
वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व एवं पहाड़ी क्षेत्र
वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिज़र्व भारत के सबसे उत्तरी टाइगर रिज़र्व में से एक है। यह बिहार का एकमात्र Tiger Reserve है। इसका विस्तार सोमेश्वर श्रेणी की ढलानों, भाभर क्षेत्र और तराई वनों तक है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | पश्चिम चंपारण जिला |
| क्षेत्रफल | 899.38 वर्ग किमी (Core — 335.65 km²) |
| नदी | गंडक नदी के किनारे |
| स्थापना | 1989 (Tiger Reserve घोषणा) |
| जैव विविधता | बाघ, हाथी, एक सींग वाला गैंडा (कभी-कभी), तेंदुआ, घड़ियाल |
| सर्वोच्च चोटी | सोमेश्वर — 880 मीटर (बिहार की सर्वोच्च) |
राजमहल पहाड़ियाँ एवं पूर्वी भूभाग
राजमहल पहाड़ियाँ बिहार के पूर्वी भाग में भागलपुर और बाँका जिलों में स्थित हैं। ये ज्वालामुखीय बेसाल्ट (Basalt Trap) से निर्मित हैं और भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये Gondwana Land के प्रायद्वीपीय पठार का उत्तरी सिरा हैं।
मंदार पर्वत (बाँका जिला)
मंदार पर्वत बाँका जिले में स्थित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय इसी पर्वत का उपयोग मथनी के रूप में किया गया था। यहाँ मधुसूदन मंदिर और पापहरणी झील प्रसिद्ध हैं। यह जैन तीर्थ भी है — 12वें तीर्थंकर वासुपूज्य की जन्मस्थली मानी जाती है।
| पहाड़ी/पठार | जिला | शैल प्रकार | ऊँचाई | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| सोमेश्वर चोटी | पश्चिम चंपारण | शिवालिक (बलुआ पत्थर) | 880 मी. (सर्वोच्च) | Tiger Reserve, वाल्मीकि |
| कैमूर पठार | कैमूर, रोहतास | विंध्यन बलुआ पत्थर | 300–500 मी. | सीमेंट, चूना पत्थर |
| राजमहल पहाड़ियाँ | भागलपुर, बाँका | बेसाल्ट ट्रैप | 300–567 मी. | संथाल, गोंडवाना कोयला |
| मंदार पर्वत | बाँका | ग्रेनाइट-नीस | ~225 मी. | समुद्र मंथन पौराणिक |
| ब्रह्मयोनि पहाड़ी | गया | ग्रेनाइट | ~160 मी. | हिंदू श्राद्ध तीर्थ |
| राजगीर पहाड़ी | नालंदा | क्वार्ट्ज़ाइट, शिस्ट | ~400 मी. | जैन-बौद्ध तीर्थ |
| गिरियक पहाड़ी | नालंदा | प्रीकैम्ब्रियन शैल | ~200 मी. | राजगीर के निकट |
भूमि उपयोग, मिट्टी एवं कृषि महत्व
बिहार की स्थलाकृति का सीधा प्रभाव यहाँ की मिट्टी, जलवायु और कृषि पर पड़ता है। मैदानी क्षेत्र की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी, पठारी क्षेत्र की लाल-लेटेराइट मिट्टी, और पहाड़ी ढलानों की वन मिट्टी — तीनों की अपनी विशेषताएँ हैं।
बिहार की मिट्टियाँ — स्थलाकृति अनुसार
बिहार की ~80% मिट्टी जलोढ़ है। उत्तरी मैदान में खादर (नवीन, उपजाऊ) और दक्षिणी/पुराने क्षेत्रों में बांगर (पुरानी, कंकर युक्त)। धान, गेहूँ, मक्के के लिए आदर्श।
दक्षिणी बिहार के पठारी क्षेत्र — गया, नवादा, रोहतास में। लौह ऑक्साइड से लाल रंग। अपेक्षाकृत कम उपजाऊ। दलहन, तिलहन उगाए जाते हैं।
उत्तरी बिहार की नदियों के किनारे। नवीन जलोढ़ का हिस्सा। सब्जी, तरबूज, खरबूज की खेती। दियारा क्षेत्र (नदी के रेतीले किनारों) में मक्का।
पश्चिम चंपारण की पहाड़ियों, कैमूर वन और राजमहल पहाड़ियों में। ह्यूमस युक्त — वन संरक्षण के लिए उपयुक्त। कृषि के लिए सीमित उपयोग।
स्थलाकृति आधारित कृषि वितरण
| क्षेत्र | स्थलाकृति | प्रमुख फसलें | विशेष उत्पाद |
|---|---|---|---|
| उत्तरी बिहार | जलोढ़ मैदान (खादर) | धान, गेहूँ, मक्का, गन्ना | Shahi Litchi (मुजफ्फरपुर), मखाना (दरभंगा) |
| मध्य बिहार (गंगा तट) | मिश्रित जलोढ़ | गेहूँ, धान, सब्जी | Jardhalu Mango (भागलपुर — GI Tag) |
| दक्षिणी मैदान | बांगर/लाल मिट्टी | गेहूँ, दलहन, तिलहन | मगही पान (गया — GI Tag) |
| दियारा क्षेत्र | नदी तटीय बालू | मक्का, सब्जी, तरबूज | मक्का — बिहार का प्रमुख उत्पाद |
| पठारी क्षेत्र | लाल-लेटेराइट | दलहन, ज्वार-बाजरा | सीमेंट के लिए चूना पत्थर (कैमूर) |
बिहार के GI Tag उत्पाद — स्थलाकृति से संबंध
- Shahi Litchi (मुजफ्फरपुर): तराई क्षेत्र की नम जलवायु और जलोढ़ मिट्टी — इसे विशिष्ट स्वाद देती है।
- Jardhalu Mango (भागलपुर): राजमहल पहाड़ियों की तलहटी में काली-लाल मिट्टी — विशेष आम।
- मखाना (दरभंगा-मधुबनी): तराई क्षेत्र के उथले जलाशय — दुनिया का 85% मखाना यहीं।
- मगही पान (गया-नालंदा): दक्षिणी मैदान की विशेष मिट्टी — प्रसिद्ध पान।
- सुजनी कढ़ाई (मुजफ्फरपुर): मिथिला क्षेत्र की हस्तकला।


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