बिहार की स्थलाकृति
परिचय एवं बिहार की भौगोलिक संरचना
बिहार की स्थलाकृति (Topography) BPSC परीक्षा के भूगोल खण्ड का सर्वाधिक पूछा जाने वाला विषय है — यहाँ उत्तरी हिमालयी मैदान, मध्य में गंगा की जलधारा और दक्षिण में प्राचीन छोटानागपुर पठार का अद्भुत संगम मिलता है।
बिहार का कुल क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किलोमीटर है, जो भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 2.86% है। भौगोलिक दृष्टि से इसे मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है:
भूगर्भीय इतिहास (Geological History)
बिहार की भूमि दो बिल्कुल अलग भूगर्भीय युगों से निर्मित है। उत्तर का मैदान Quaternary युग (10,000 वर्ष से अब तक) की हिमालयी नदियों के जलोढ़ निक्षेपण से बना है, जबकि दक्षिण का पठार Archean (आर्कियन) युग की प्राचीनतम चट्टानों — जैसे ग्रेनाइट, नीस (Gneiss), और शिस्ट (Schist) — से बना है। यही कारण है कि दक्षिण का पठार खनिज-सम्पन्न है और उत्तर का मैदान कृषि के लिए आदर्श।
उत्तरी मैदानी क्षेत्र (Northern Plains)
उत्तर बिहार का मैदानी क्षेत्र गंगा नदी के उत्तर में स्थित विशाल जलोढ़ मैदान है, जो नेपाल की तराई से लेकर गंगा के उत्तरी तट तक फैला हुआ है। यह क्षेत्र संसार के सर्वाधिक उपजाऊ क्षेत्रों में से एक है।
उत्तरी मैदान की उप-विभागीय संरचना
उत्तरी मैदानी क्षेत्र को मुख्यतः चार उप-भागों में विभाजित किया जाता है, जो उत्तर से दक्षिण की ओर क्रमशः इस प्रकार हैं:
भौतिक विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| ऊँचाई | पश्चिम में ~90 मीटर से पूर्व में ~30 मीटर तक (उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व ढलान) |
| मिट्टी का प्रकार | जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) — बलुई दोमट से चिकनी दोमट तक |
| मुख्य नदियाँ | गंडक, बागमती, कमला-बलान, कोसी, महानन्दा (सभी हिमालय से) |
| बाढ़ | प्रतिवर्ष उत्तर बिहार के 76 लाख हेक्टेयर में से ~68% बाढ़ प्रभावित |
| जलवायु | आर्द्र उपोष्ण कटिबंधीय; वर्षा 1000–1500 mm पूर्व में अधिक |
| प्रमुख जिले | चम्पारण, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, मुजफ्फरपुर, वैशाली |
तराई क्षेत्र की विशिष्टताएँ
तराई (Terai) शब्द नेपाली भाषा से आया है जिसका अर्थ है “निचला और नम”। बिहार में तराई क्षेत्र पश्चिमी चम्पारण में सर्वाधिक विकसित है। यहाँ वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान एवं वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व स्थित है, जो बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है। गन्डक नदी इस क्षेत्र की मुख्य जीवन-रेखा है।
- गण्डक (नारायणी): नेपाल में ‘सालिग्रामी’ कहलाती है। त्रिवेणी नहर (चम्पारण) इसी से निकलती है। सोनपुर में गंगा से मिलती है।
- बागमती: नेपाल के महाभारत श्रेणी से निकलती है। सीतामढ़ी होते हुए मुज़फ्फरपुर-दरभंगा में बहती है।
- कमला-बलान: नेपाल से आती है। मधुबनी और दरभंगा में बहती है।
- कोसी: नेपाल में ‘सप्तकोसी’ कहलाती है। सात धाराओं — सुन कोसी, तामुर, अरुण आदि — से मिलकर बनती है। भीमनगर बराज इस पर बना है। सहरसा-सुपौल-मधेपुरा में बहती है।
- महानन्दा: दार्जिलिंग की पहाड़ियों से निकलती है। किशनगंज-पूर्णिया-कटिहार होकर बांग्लादेश जाती है। बिहार की पूर्वतम नदी है।
- बूढ़ी गण्डक: सोमेश्वर (चम्पारण) से निकलती है। मुज़फ्फरपुर होकर मोनघर (मुंगेर) में गंगा से मिलती है।
दक्षिणी पठारी क्षेत्र (Southern Plateau)
बिहार का दक्षिणी पठारी क्षेत्र छोटानागपुर पठार का उत्तरी विस्तार है — आर्कियन युग की प्राचीन कठोर चट्टानों से निर्मित यह पठार खनिज-सम्पदा, वन एवं जैव-विविधता की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
झारखण्ड के गठन (नवम्बर 2000) से पूर्व बिहार का दक्षिणी पठारी क्षेत्र बहुत विस्तृत था। अब बिहार में इस पठार के अवशेष मुख्यतः गया, नवादा, जमुई, बाँका, मुंगेर, नालन्दा, औरंगाबाद, रोहतास जिलों में मिलते हैं। यह क्षेत्र दक्षिण बिहार के उच्च भूमि (Upland) के रूप में जाना जाता है।
संरचनात्मक विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| चट्टान प्रकार | ग्रेनाइट, नीस (Gneiss), शिस्ट — आग्नेय एवं रूपान्तरित चट्टानें |
| भूगर्भीय युग | आर्कियन (Archean) — पृथ्वी की सबसे पुरानी शैल संरचनाएँ |
| ऊँचाई | 300 मीटर से 600 मीटर तक; सोमेश्वर श्रेणी (870 मी.), राजगीर की पहाड़ियाँ (~330 मी.) |
| मिट्टी | लाल मिट्टी (Red Laterite Soil) — लोहे की अधिकता, कम उर्वर |
| प्रमुख पहाड़ियाँ | राजगीर, गिरियक, गया, नवादा, जमुई की पहाड़ियाँ; खड़गपुर पहाड़ी |
| जल प्रवाह | नदियाँ यहाँ से दक्षिण से उत्तर की ओर (गंगा की ओर) बहती हैं |
प्रमुख पहाड़ियाँ एवं उनका महत्त्व
राजगीर की पहाड़ियाँ
नालन्दा जिलाखड़गपुर पहाड़ी
मुंगेर जिलागया की पहाड़ियाँ
गया जिलाजमुई-बाँका की पहाड़ियाँ
सन्थाल परगना सीमाखनिज सम्पदा (Mineral Resources)
झारखण्ड अलग होने के बाद बिहार का अधिकांश खनिज भण्डार चला गया, फिर भी दक्षिणी बिहार में कुछ महत्त्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं:
- अभ्रक (Mica): नवादा, गया, जमुई — भारत में अभ्रक उत्पादन में बिहार का ऐतिहासिक योगदान रहा है।
- ताँबा (Copper): जमुई एवं बाँका जिले — सीमित भण्डार।
- बॉक्साइट: मुंगेर एवं जमुई में सीमित मात्रा में।
- क्वार्टज़ाइट: रोहतास एवं कैमूर की पहाड़ियों में — इससे सीमेण्ट उद्योग को लाभ।
- पाइराइट (गन्धक): रोहतास जिले में। सिन्दरी उर्वरक कारखाने (अब बन्द) को कच्चा माल मिलता था।
- चूना पत्थर (Limestone): रोहतास, कैमूर — सीमेण्ट उद्योग का आधार।
दक्षिण बिहार की प्रमुख नदियाँ
- सोन नदी: मध्य प्रदेश के अमरकण्टक से निकलती है। बिहार में रोहतास, कैमूर, पटना जिले से बहती है। डेहरी (रोहतास) में इंद्रपुरी बराज और डेहरी-ऑन-सोन बैराज स्थित है। पटना के पश्चिम में गंगा से मिलती है।
- फल्गु (निरंजना): गया की पहाड़ियों से। मोक्षदायिनी नदी — हिन्दुओं के लिए पवित्र। बरसाती नदी है।
- पुनपुन: पलामू (झारखण्ड) से। पटना के दक्षिण-पूर्व में गंगा से मिलती है।
- कर्मनाशा: रोहतास पठार से। उत्तर प्रदेश-बिहार की सीमा बनाती है।
- कैमूर पठार: विन्ध्य पर्वत श्रेणी का पूर्वी विस्तार। रोहतास और कैमूर जिले में। तुतला भवानी जलप्रपात यहीं है।
- रोहतास गढ़: कैमूर पहाड़ियों पर ऐतिहासिक किला। राजा हरिश्चन्द्र से सम्बन्धित पौराणिक स्थल।
- सासाराम: रोहतास में, शेर शाह सूरी का मकबरा यहीं है।
उत्तरी मैदान बनाम दक्षिणी पठार — तुलनात्मक विश्लेषण
BPSC Mains के लिए यह तुलनात्मक विश्लेषण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। दोनों क्षेत्रों की भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक विशेषताओं को समझना बिहार के विकास की असमानता को भी स्पष्ट करता है।
| आधार | उत्तरी मैदानी क्षेत्र | दक्षिणी पठारी क्षेत्र |
|---|---|---|
| भूगर्भीय संरचना | Quaternary जलोढ़ निक्षेप | Archean आग्नेय/रूपान्तरित शैल |
| ऊँचाई | 30–90 मीटर | 300–870 मीटर |
| मिट्टी | जलोढ़ मिट्टी — अत्यन्त उपजाऊ | लाल लेटराइट मिट्टी — कम उपजाऊ |
| नदियाँ | हिमालय की बारहमासी नदियाँ | पठारी बरसाती नदियाँ |
| बाढ़ | प्रतिवर्ष — गम्भीर समस्या | बाढ़ कम, सूखा अधिक |
| कृषि | धान, गेहूँ, मक्का, गन्ना, मखाना | सीमित — ज्वार, बाजरा, दलहन |
| खनिज | नगण्य | अभ्रक, ताँबा, चूना, पाइराइट |
| वन | तराई में — वाल्मीकि वन | साल, सागौन — अपेक्षाकृत घने |
| जनसंख्या घनत्व | अत्यधिक (1200+ /km²) | अपेक्षाकृत कम |
| उद्योग | कृषि आधारित — चीनी मिलें | खनिज आधारित — सीमेण्ट |
| प्रमुख जिले | चम्पारण, दरभंगा, मुज़फ्फरपुर, पूर्णिया | गया, नवादा, जमुई, रोहतास |
विकास की असमानता — Mains विश्लेषण
उत्तर में बारहमासी हिमालयी नदियाँ सिंचाई के लिए पर्याप्त हैं, परन्तु बाढ़ नाशक हैं। दक्षिण में पठारी नदियाँ मौसमी हैं, अतः सूखा बड़ी समस्या है।
उत्तर बिहार की जलोढ़ मिट्टी की उर्वरता से फसल उत्पादन अधिक है। दक्षिण की लाल लेटराइट मिट्टी में नाइट्रोजन एवं फास्फोरस की कमी है।
2000 में झारखण्ड अलग होने से बिहार का लगभग 80% खनिज भण्डार चला गया। यह बिहार के औद्योगिक पिछड़ेपन का एक बड़ा कारण है।
पटना, मुज़फ्फरपुर जैसे बड़े नगर मैदानी क्षेत्र में हैं। दक्षिणी पठारी जिले — जमुई, बाँका — विकास की दृष्टि से पिछड़े हुए हैं।
बिहार का नदी तंत्र (River System)
बिहार से होकर गंगा नदी पूरब की ओर बहती है और राज्य को उत्तर एवं दक्षिण में विभाजित करती है। उत्तर की नदियाँ हिमालय से और दक्षिण की नदियाँ पठार से आती हैं — इनका स्वभाव, वेग और महत्त्व बिल्कुल भिन्न है।
गंगा — बिहार की मुख्य धमनी
गंगा बिहार में पश्चिम (बक्सर) से प्रवेश करती है और पूर्व में राजमहल (झारखण्ड सीमा) तक लगभग 445 किलोमीटर बहती है। बिहार में इसकी महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ:
- बक्सर में उत्तर प्रदेश से प्रवेश।
- पटना — राज्य की राजधानी गंगा के किनारे।
- फरक्का बराज (पश्चिम बंगाल) से पूर्व बिहार के भागलपुर, कटिहार होकर गुज़रती है।
- उत्तर से: गण्डक, बूढ़ी गण्डक, बागमती, कमला, कोसी, महानन्दा मिलती हैं।
- दक्षिण से: सोन, पुनपुन, फल्गु मिलती हैं।
नदियों की तुलनात्मक विशेषताएँ
| नदी | उद्गम | बिहार में प्रवेश | गंगा से मिलन | विशेष तथ्य |
|---|---|---|---|---|
| गण्डक | नेपाल (धौलागिरि) | पश्चिमी चम्पारण | सोनपुर (हाजीपुर के पास) | सोनपुर मेला — एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला |
| कोसी | नेपाल (सप्तकोसी) | सुपौल | कटिहार जिले में | बिहार का शोक — धारा परिवर्तन के लिए प्रसिद्ध |
| सोन | मध्य प्रदेश (अमरकण्टक) | रोहतास | पटना (दीनापुर के पास) | बिहार में गंगा की सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक |
| महानन्दा | दार्जिलिंग पहाड़ियाँ | किशनगंज | बांग्लादेश में (बिहार में नहीं) | बिहार की पूर्वतम नदी |
| बागमती | नेपाल (महाभारत श्रेणी) | सीतामढ़ी | खगड़िया के पास | नेपाल में काठमाण्डु से बहती है; पशुपतिनाथ मंदिर के पास |
| फल्गु | गया की पहाड़ियाँ (बिहार) | — (बिहार में ही उद्गम) | पटना के पास (मोकामा क्षेत्र) | बरसाती नदी; पितृपक्ष के लिए पवित्र |
कृषि, जलवायु एवं आर्थिक भूगोल
बिहार की कृषि और जलवायु उसकी स्थलाकृति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उत्तर बिहार का जलोढ़ मैदान जहाँ धान-गेहूँ का भण्डार है, वहीं दक्षिण बिहार का पठार मोटे अनाज और बागवानी का क्षेत्र है।
मिट्टी के प्रकार एवं कृषि उपज
| मिट्टी | क्षेत्र | प्रमुख फसलें | विशेषता |
|---|---|---|---|
| जलोढ़ मिट्टी (पुरानी) | बांगर क्षेत्र | गेहूँ, दलहन | कंकड़ युक्त, कम नम |
| जलोढ़ मिट्टी (नई) | खादर/तराई | धान, गन्ना, केला | अत्यन्त उपजाऊ, नम |
| लाल मिट्टी | गया, नवादा, जमुई | ज्वार, बाजरा, दलहन | लोहे की अधिकता, कम उपजाऊ |
| ऊसर/क्षारीय मिट्टी | गंगा के निकट स्थान | सुधार के बाद गेहूँ | Na, Ca अधिक |
| दोमट मिट्टी | चम्पारण, मुज़फ्फरपुर | लीची, आम, गन्ना | बलुई + चिकनी मिट्टी का मिश्रण |
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जलवायु — उत्तर एवं दक्षिण का अन्तर
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