बिहार के आग्नेय चट्टान
Igneous Rocks of Bihar — BPSC Prelims + Mains सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
परिचय — Introduction
बिहार के चट्टानों के प्रकार BPSC परीक्षा का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय है। पृथ्वी की भू-पर्पटी में तीन प्रमुख प्रकार की चट्टानें पाई जाती हैं — आग्नेय (Igneous), अवसादी (Sedimentary) एवं कायांतरित (Metamorphic)। इनमें आग्नेय चट्टान सबसे प्राचीन एवं मूल चट्टान मानी जाती हैं।
चट्टानों का चक्र (Rock Cycle)
तीनों प्रकार की चट्टानें एक-दूसरे में परिवर्तित होती रहती हैं। इसे शैल चक्र (Rock Cycle) कहते हैं। आग्नेय चट्टान → अवसादी चट्टान → कायांतरित चट्टान → पुनः आग्नेय चट्टान — यह एक निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है। James Hutton ने सर्वप्रथम 1788 में Rock Cycle की अवधारणा प्रस्तुत की।
आग्नेय चट्टान — परिभाषा एवं आधारभूत अवधारणाएँ
आग्नेय चट्टान (Igneous Rocks) लैटिन शब्द “Ignis” (अग्नि) से बना है। ये चट्टानें पृथ्वी के आंतरिक भाग में स्थित मैग्मा (Magma) या धरातल पर प्रवाहित लावा (Lava) के शीतलन एवं ठोसीकरण से बनती हैं।
रासायनिक संरचना के आधार पर वर्गीकरण
आग्नेय चट्टानों की निर्माण प्रक्रिया
आग्नेय चट्टानों का निर्माण दो मुख्य प्रक्रियाओं द्वारा होता है — पृथ्वी के आंतरिक भाग में मैग्मा का ठोसीकरण (अन्तर्वेधी / Intrusive) एवं धरातल पर लावा का शीतलन (बाह्य / Extrusive)।
ज्वालामुखी एवं आग्नेय चट्टान का संबंध
बिहार के परिप्रेक्ष्य में झारखण्ड से सटे क्षेत्र (जो कभी एक ही भूभाग था) में Gondwana काल के ज्वालामुखीय क्रियाकलापों से बेसाल्ट एवं ग्रेनाइट जैसी आग्नेय चट्टानें बनीं। बिहार के झारखण्ड से लगे दक्षिणी पठारी भाग (रोहतास, कैमूर, गया, नवादा जिले) में ये चट्टानें मिलती हैं।
आग्नेय चट्टानों के प्रकार एवं वर्गीकरण
आग्नेय चट्टानों को मुख्यतः तीन आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है — उत्पत्ति स्थान, बनावट (Texture) एवं रासायनिक संरचना। BPSC परीक्षा के लिए अन्तर्वेधी (Intrusive) एवं बाह्यवेधी (Extrusive) वर्गीकरण सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।
जब मैग्मा पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से पहले ही भू-पर्पटी के अंदर ठंडा हो जाता है, तो बनने वाली चट्टानें अन्तर्वेधी आग्नेय चट्टान कहलाती हैं। इनमें शीतलन बहुत धीमी गति से होती है, जिससे बड़े-बड़े क्रिस्टल बनते हैं।
जब मैग्मा ज्वालामुखी उद्गार द्वारा धरातल पर पहुँचता है और वहाँ लावा के रूप में ठंडा होता है, तो बनने वाली चट्टानें बाह्यवेधी आग्नेय चट्टान कहलाती हैं। तीव्र शीतलन के कारण इनमें क्रिस्टल बहुत छोटे या बिल्कुल नहीं बनते।
अन्तर्वेधी बनाम बाह्यवेधी — तुलनात्मक तालिका
| आधार | अन्तर्वेधी (Intrusive) | बाह्यवेधी (Extrusive) |
|---|---|---|
| निर्माण स्थान | भू-पर्पटी के अंदर | धरातल पर |
| शीतलन दर | धीमी (लाखों वर्ष) | तीव्र (दिनों-महीनों में) |
| क्रिस्टल आकार | बड़े (Coarse-grained) | छोटे/अनुपस्थित (Fine-grained) |
| उदाहरण | ग्रेनाइट, गैब्रो | बेसाल्ट, रायोलाइट |
| बिहार में | गया, नवादा, रोहतास | रोहतास, कैमूर क्षेत्र |
| आर्थिक महत्त्व | निर्माण, आभूषण (ग्रेनाइट) | काली मिट्टी, सड़क निर्माण |
बनावट (Texture) के आधार पर वर्गीकरण
बिहार में आग्नेय चट्टानों का वितरण
बिहार मुख्यतः गंगा के मैदान में स्थित है, जहाँ अवसादी चट्टानें प्रधान हैं। परंतु बिहार के दक्षिणी पठारी भाग में, जो छोटा नागपुर पठार का विस्तार है, आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानें पाई जाती हैं।
रोहतास पठार में ग्रेनाइट, बेसाल्ट एवं क्वार्टज़ाइट जैसी चट्टानें मिलती हैं। यहाँ सोन नदी इन चट्टानों को काटकर गहरी घाटी बनाती है। डेहरी-ऑन-सोन के निकट चूना-पत्थर के साथ आग्नेय चट्टानें भी पाई जाती हैं।
कैमूर पर्वत श्रेणी (उत्तर-पश्चिमी बिहार) में Vindhyan Supergroup की चट्टानों के मध्य आग्नेय अन्तर्वेधन (Intrusions) देखने को मिलते हैं। यहाँ डोलेराइट डाइक्स मिलती हैं।
गया जिले में ग्रेनाइट एवं नीस (Gneiss — कायांतरित) चट्टानें पाई जाती हैं। बराबर की पहाड़ियाँ (जहाँ मौर्यकालीन गुफाएँ हैं) ग्रेनाइट से निर्मित हैं। नवादा जिले में भी ग्रेनाइट के भण्डार हैं।
मुंगेर की पहाड़ियाँ (खड़गपुर पहाड़ी) प्राचीन Archaean काल की आग्नेय एवं कायांतरित चट्टानों से बनी हैं। जमुई जिले में भी इसी काल की चट्टानें मिलती हैं।
बिहार की भूवैज्ञानिक संरचना (Geological Structure)
| क्षेत्र | प्रमुख चट्टान प्रकार | मुख्य जिले | महत्व |
|---|---|---|---|
| उत्तरी मैदान | अवसादी (Alluvial) | सारण, वैशाली, समस्तीपुर | उपजाऊ कृषि भूमि |
| दक्षिणी पठार | आग्नेय + कायांतरित | गया, नवादा, रोहतास, कैमूर | खनिज संसाधन, पर्यटन |
| विंध्य क्षेत्र | अवसादी + आग्नेय अन्तर्वेधन | रोहतास, कैमूर | चूना-पत्थर, सीमेंट उद्योग |
| गंगा-घाटी | नवीन जलोढ़ (New Alluvial) | पटना, भोजपुर, बक्सर | खाद्यान्न उत्पादन |
| मुंगेर पहाड़ी | Archaean आग्नेय/कायांतरित | मुंगेर, जमुई, बाँका | ग्रेनाइट, खनिज |
आग्नेय चट्टानों की विशेषताएँ एवं आर्थिक महत्त्व
आग्नेय चट्टानों की विशिष्ट भौतिक, रासायनिक एवं आर्थिक विशेषताएँ इन्हें बिहार एवं भारत के विकास में महत्त्वपूर्ण बनाती हैं। ये खनिज संसाधनों के प्रमुख स्रोत, निर्माण सामग्री एवं भू-पर्यटन के केन्द्र हैं।
प्रमुख भौतिक विशेषताएँ
- परतविहीन (Non-stratified): इनमें अवसादी चट्टानों की तरह परतें नहीं होती हैं।
- कठोरता (Hardness): ये बहुत कठोर होती हैं। ग्रेनाइट की Mohs Hardness Scale पर कठोरता 6-7 होती है।
- क्रिस्टलीय संरचना (Crystalline Structure): अधिकांश में क्रिस्टल पाए जाते हैं।
- जीवाश्मविहीन (Fossil-free): उच्च ताप के कारण जीव नष्ट हो जाते हैं, अतः कोई जीवाश्म नहीं।
- रन्ध्रहीनता (Non-porous): ये जल का अवशोषण नहीं करतीं (ऑब्सीडियन को छोड़कर)।
- प्राथमिक खनिज (Primary Minerals): फेल्डस्पार, क्वार्ट्ज़, माइका, पाइरॉक्सीन, ओलिविन आदि।


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