बिहार की कायांतरित चट्टानें
Metamorphic Rocks of Bihar — BPSC Prelims + Mains सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
परिचय एवं परिभाषा
बिहार की कायांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) BPSC परीक्षा में चट्टान विज्ञान के अंतर्गत पूछे जाने वाले महत्त्वपूर्ण प्रश्नों का केन्द्र हैं — ये चट्टानें मुख्यतः राज्य के दक्षिणी पहाड़ी जिलों गया, नवादा, मुंगेर और जमुई में पाई जाती हैं और अभ्रक (Mica) जैसे बहुमूल्य खनिजों का स्रोत हैं।
कायांतरित चट्टानें वे शैल हैं जो पहले से विद्यमान आग्नेय (Igneous) या अवसादी (Sedimentary) चट्टानों के अत्यधिक ताप (Temperature) और दाब (Pressure) के प्रभाव में रासायनिक एवं खनिज-वैज्ञानिक रूपांतरण से बनती हैं। “Meta” का अर्थ है परिवर्तन और “morphe” का अर्थ है रूप — अर्थात् रूप का परिवर्तन।
इन चट्टानों में मूल खनिज नष्ट होकर नए खनिज बनते हैं। उदाहरण के लिए, Limestone → Marble, Shale → Slate, Sandstone → Quartzite, Granite → Gneiss। बिहार में ये प्रायः Archaean एवं Proterozoic युग की आधार-शैला (Basement Rock) के रूप में दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र में पाई जाती हैं।
कायांतरण की प्रक्रिया एवं प्रकार
कायांतरण (Metamorphism) तीन प्रमुख कारकों — ताप, दाब और रासायनिक क्रिया — के संयुक्त प्रभाव से होता है। बिहार में ये प्रक्रियाएँ करोड़ों वर्ष पूर्व Archaean युग में सक्रिय थीं जब छोटानागपुर पठार की आधार-शैला बन रही थी।
कायांतरण के तीन प्रमुख कारक
कायांतरण के प्रमुख प्रकार
मूल चट्टान से रूपांतरित चट्टान — रूपांतरण तालिका
| मूल चट्टान (Protolith) | प्रकार | रूपांतरित चट्टान | बिहार संदर्भ |
|---|---|---|---|
| Limestone | अवसादी | Marble (संगमरमर) | रोहतास, मुंगेर पहाड़ी |
| Shale | अवसादी | Slate → Phyllite → Schist | गया-नवादा पहाड़ी क्षेत्र |
| Sandstone | अवसादी | Quartzite (क्वार्टज़ाइट) | रोहतास-कैमूर सीमा, गया |
| Granite | आग्नेय | Gneiss (नाइस) | गया, नवादा, मुंगेर — Archaean |
| Basalt / Shale | आग्नेय/अवसादी | Schist (शिस्ट) | जमुई पहाड़ी क्षेत्र |
| Impure Limestone | अवसादी | Calc-Silicate / Skarn | मुंगेर — Contact Zone |
बिहार में कायांतरित चट्टानों का भौगोलिक वितरण
बिहार में कायांतरित चट्टानें मुख्यतः दक्षिणी पहाड़ी एवं पठारी जिलों में पाई जाती हैं जो भूवैज्ञानिक दृष्टि से छोटानागपुर पठार के उत्तरी सीमांत का हिस्सा हैं। ये चट्टानें राज्य की सबसे प्राचीन भूवैज्ञानिक संरचनाओं में से हैं।
प्रमुख क्षेत्रवार वितरण
गया-नवादा क्षेत्र बिहार में कायांतरित चट्टानों का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। यहाँ Archaean Gneiss Complex का विस्तार है।
- Mica (अभ्रक) खदानें: गया और नवादा में बड़े पैमाने पर। भारत के कुल Mica उत्पादन में बिहार का योगदान।
- Gneiss: सर्वाधिक प्रचुर कायांतरित चट्टान। Banded Gneiss Complex।
- Schist: Mica-Schist में अभ्रक की परतें। आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान।
- Quartzite: कठोर, सफेद/भूरी। निर्माण कार्य में उपयोगी।
मुंगेर पहाड़ी और जमुई जिले में Archaean आधार-शैला सतह पर आती है।
- Marble: Limestone के कायांतरण से। मुंगेर के निकट Contact Metamorphism zones।
- Gneiss + Granite: मिश्रित आग्नेय-कायांतरित परिसर (Migmatite)।
- Hornblende Schist: जमुई की पहाड़ियों में।
रोहतास पठार के आधार में Precambrian कायांतरित चट्टानें हैं जिनके ऊपर Vindhyan अवसादी चट्टानें जमी हैं।
- Quartzite: कैमूर-रोहतास सीमा पर। बलुआ पत्थर का कायांतरण।
- Phyllite: Shale के आंशिक रूपांतरण से। रोहतास पहाड़ी के निचले भाग।
- Basement Complex: Vindhyan चट्टानों के नीचे Archaean आधार।
औरंगाबाद और अरवल के पहाड़ी क्षेत्रों में कायांतरित चट्टानें छिटपुट रूप से मिलती हैं।
- Gneiss: पुरानी Granite का रूपांतरण। कठोर भूभाग।
- Quartzite Ridges: छोटी-छोटी पहाड़ियाँ Quartzite की कठोरता के कारण बची हैं।
बिहार की प्रमुख कायांतरित चट्टानें — विस्तृत विवरण
बिहार में पाई जाने वाली कायांतरित चट्टानों में Gneiss, Quartzite, Schist, Marble और Phyllite प्रमुख हैं। इनमें से प्रत्येक की अलग उत्पत्ति, संरचना और आर्थिक महत्त्व है।
1. Gneiss (नाइस) — सर्वाधिक व्यापक
Gneiss बिहार की कायांतरित चट्टानों में सर्वाधिक व्यापक रूप से पाई जाती है। यह Granite या अन्य Igneous चट्टानों के उच्च कोटि के Regional Metamorphism से बनती है। इसकी पहचान बैंडिंग (Banding) — गहरे और हल्के खनिज पट्टियों के एकांतरण — से होती है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| रंग | सफेद-भूरी, धारीदार (Banded) — गहरे Hornblende और हल्के Feldspar की पट्टियाँ |
| खनिज | Quartz, Feldspar, Biotite, Hornblende |
| कठोरता | अत्यधिक कठोर — Mohs Scale 6-7 |
| बिहार में | गया, नवादा, मुंगेर, औरंगाबाद — Archaean Basement |
| उपयोग | सड़क निर्माण, भवन नींव, सजावटी पत्थर, Kerbstone |
2. Quartzite (क्वार्टज़ाइट) — कठोर पर्वत-निर्माता
Quartzite Sandstone के उच्च ताप-दाब में कायांतरण से बनती है। इसमें Quartz कण पुनः क्रिस्टलीकृत होकर इंटरलॉकिंग बनाते हैं जिससे यह Sandstone से भी अधिक कठोर हो जाती है। बिहार में यह रोहतास-कैमूर और गया के पहाड़ी क्षेत्रों में मिलती है।
- सफेद / हल्के भूरे रंग की
- अत्यंत कठोर (Mohs 7+)
- छूने पर चीनी जैसी बनावट
- Foliation कम या अनुपस्थित
- टूटने पर कण नहीं टूटते
- कठोर होने से पहाड़ियाँ बनाती है
- Silica का स्रोत — काँच उद्योग
- Ferroalloys उद्योग में उपयोग
- Road Metal / निर्माण सामग्री
- Refractory (दुर्दाह्य) उद्योग
3. Schist (शिस्ट) — Mica का घर
Schist मध्यम से उच्च कोटि के Regional Metamorphism का परिणाम है। इसकी सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता Schistosity (शिस्टोसिटी) है — अर्थात् Mica एवं अन्य पत्ती-नुमा खनिज समानांतर परतों में व्यवस्थित होते हैं। बिहार में Mica-Schist गया-नवादा जिले में आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
4. Marble (संगमरमर) — Limestone का रूपांतरण
Marble Limestone या Dolomite के Contact या Regional Metamorphism से बनता है। इसमें Calcite क्रिस्टल पुनः बड़े और इंटरलॉकिंग हो जाते हैं। बिहार में यह मुंगेर के निकट मिलता है, हालाँकि यहाँ की मात्रा राजस्थान जैसे राज्यों की तुलना में सीमित है।
5. Phyllite (फिलाइट) — Slate से Schist के बीच
Phyllite Slate के आगे के कायांतरण से बनती है। इसमें Sericite Mica का विकास होता है जो इसे चमकदार (Silky Lustre) बनाता है। यह Shale → Slate → Phyllite → Schist की रूपांतरण श्रृंखला का तीसरा चरण है। बिहार में रोहतास पहाड़ी के निचले भागों में मिलती है।
| चट्टान | मूल चट्टान | कायांतरण ग्रेड | प्रमुख खनिज | बिहार जिला |
|---|---|---|---|---|
| Gneiss | Granite | उच्च | Quartz, Feldspar, Biotite | गया, नवादा, मुंगेर |
| Quartzite | Sandstone | मध्यम-उच्च | Quartz | रोहतास, कैमूर, गया |
| Mica-Schist | Shale/Basalt | मध्यम | Muscovite Mica | गया, नवादा |
| Marble | Limestone | मध्यम-उच्च | Calcite | मुंगेर |
| Phyllite | Shale/Slate | निम्न-मध्यम | Sericite Mica | रोहतास पहाड़ी |
| Slate | Shale/Mudstone | निम्न | Clay minerals | सीमित |
Archaean एवं Precambrian क्रम — बिहार की प्राचीनतम भूवैज्ञानिक विरासत
बिहार के दक्षिणी जिलों की कायांतरित चट्टानें Archaean (>2,500 Ma) और Proterozoic (600–2,500 Ma) युग की हैं — ये पृथ्वी पर पाई जाने वाली सबसे प्राचीन चट्टानों में गिनी जाती हैं और छोटानागपुर Craton का अभिन्न अंग हैं।
Archaean Complex — बिहार में
भूवैज्ञानिक कालक्रम — बिहार की चट्टानें
- छोटानागपुर Craton: बिहार के दक्षिणी जिले इसके उत्तरी भाग हैं। यह Craton खनिज संपदा का भंडार है।
- 2000 में झारखंड अलग: बिहार के अधिकांश Archaean क्षेत्र (Dhanbad, Ranchi) झारखंड में चले गए। बिहार में केवल सीमांत क्षेत्र शेष।
- Mica Belt: गया-नवादा-हजारीबाग (अब झारखंड) मिलकर भारत की प्रमुख Mica Belt बनाते हैं।
- भूकंप स्थिरता: Archaean Craton भूवैज्ञानिक रूप से स्थिर — उत्तर बिहार की तुलना में कम भूकंप संभावना।
कायांतरित चट्टानों का आर्थिक एवं खनिज महत्त्व
बिहार की कायांतरित चट्टानें Mica, Quartzite, Marble और निर्माण पत्थर जैसे बहुमूल्य खनिजों का स्रोत हैं। 2000 में झारखंड अलग होने के बाद भी बिहार के गया-नवादा क्षेत्र में Mica खनन जारी है।
गया-नवादा की Mica-Schist से Muscovite Mica। विद्युत उपकरण, कंडेनसर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कॉस्मेटिक उद्योग में उपयोग। भारत विश्व का बड़ा Mica निर्यातक।
रोहतास-कैमूर और गया की Quartzite। काँच उद्योग, Ferroalloys, Refractory उद्योग में। सड़क निर्माण में Road Metal के रूप में व्यापक उपयोग।
अत्यंत कठोर Gneiss सड़क, पुल, बाँध नींव के लिए उपयुक्त। गया के निकट Gneiss खदानें। Kerbstone, Paving Stone के रूप में उपयोग।
Gneiss-Quartzite की पहाड़ियाँ बोधगया, राजगीर के निकट। पहाड़ों का पर्यटन महत्त्व। ऐतिहासिक मंदिर पत्थरों का आधार।
कायांतरित चट्टानें कम पारगम्य (Impermeable) होने से भूजल के स्तर नीचे। दक्षिण बिहार में भूजल उत्खनन चुनौतीपूर्ण। Fracture Zones में जल मिलता है।
Archaean Gneiss से पृथ्वी के प्रारंभिक इतिहास की जानकारी। Craton स्थिरता का अध्ययन। भविष्य में Gold/Uranium खनिजीकरण की संभावना।
बिहार की कायांतरित चट्टानों से प्राप्त खनिज
| खनिज | चट्टान प्रकार | बिहार जिला | उपयोग | महत्त्व |
|---|---|---|---|---|
| Mica (अभ्रक) | Mica-Schist | गया, नवादा | विद्युत उपकरण, कॉस्मेटिक | अत्यधिक |
| Quartzite | Metamorphic | रोहतास, गया, कैमूर | काँच, Refractory, सड़क | अधिक |
| Marble | Metamorphic | मुंगेर | सजावट, निर्माण | मध्यम |
| Gneiss (Stone) | Metamorphic | गया, नवादा, औरंगाबाद | Road Metal, नींव पत्थर | मध्यम |
| Slate | Metamorphic (low) | सीमित | छत, फर्श टाइल | कम |
Mains विश्लेषण — कारण, प्रभाव एवं चुनौतियाँ
BPSC Mains में कायांतरित चट्टानों पर विश्लेषणात्मक और तुलनात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। यह खण्ड उसी दृष्टिकोण से तैयार किया गया है — कारण, प्रभाव, चुनौतियाँ और Mains उत्तर का ढाँचा।
कायांतरित चट्टानों की विशिष्टताएँ — तुलनात्मक दृष्टि
| आधार | आग्नेय | अवसादी | कायांतरित |
|---|---|---|---|
| निर्माण | मैग्मा शीतलन | अवसाद संघनन | ताप-दाब रूपांतरण |
| जीवाश्म | नहीं | हाँ | नहीं |
| परतें | नहीं | हाँ (Strata) | Foliation/Banding |
| कठोरता | उच्च | कम-मध्यम | सर्वाधिक उच्च |
| बिहार में | सीमित (सीमावर्ती) | सर्वाधिक (~77%) | दक्षिण पहाड़ी |
| प्रमुख खनिज | Feldspar, Mica | Limestone, Coal | Mica, Quartzite |
सकारात्मक भूमिका — Mains Answer Points
- Mica उद्योग: गया-नवादा — विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को कच्चा माल, रोजगार।
- कठोर भू-आकृति: Quartzite-Gneiss की पहाड़ियाँ जल विभाजन (Watershed) का कार्य करती हैं।
- जलप्रपात पर्यटन: सोन, फल्गु नदियों के जलप्रपात कठोर चट्टानों के कारण। Eco-Tourism।
- निर्माण सामग्री: Road Metal, Railway Ballast, Dam Foundation में Gneiss-Quartzite।
- Craton स्थिरता: दक्षिण बिहार में भूकंप जोखिम कम — Craton की भूवैज्ञानिक दृढ़ता।
चुनौतियाँ एवं समस्याएँ
- भूजल की कमी: कायांतरित चट्टानें अपारगम्य (Impermeable) होती हैं — दक्षिण बिहार में भूजल गहरा और कम उपलब्ध। नलकूप खनन कठिन और महँगा।
- खेती की सीमा: कठोर चट्टानों पर मिट्टी कम गहरी — कृषि उत्पादकता उत्तर बिहार से कम। Laterite मिट्टी अम्लीय।
- Mica खनन — बाल श्रम: गया-नवादा में अवैध Mica खनन में बाल श्रम की गंभीर समस्या। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निंदा।
- झारखंड विभाजन: 2000 में Archaean खनिज-समृद्ध क्षेत्र (Hazaribagh, Dhanbad) झारखंड में। बिहार की खनिज आय में भारी कमी।
- वन कटाई: Quartzite और Gneiss खनन से कैमूर-रोहतास और गया के वनों का ह्रास। पर्यावरण असंतुलन।
Mains Model Answer — नमूना प्रारूप
भूमिका: बिहार के दक्षिणी जिलों में Archaean एवं Proterozoic युग की कायांतरित चट्टानें छोटानागपुर Craton का सीमांत भाग बनाती हैं। ये चट्टानें राज्य की प्राचीनतम भूवैज्ञानिक विरासत हैं।
आर्थिक योगदान: गया-नवादा की Mica-Schist से Muscovite Mica; रोहतास-गया की Quartzite से Silica एवं Road Metal; मुंगेर की Marble सजावट हेतु। Gneiss बाँध एवं पुल नींव के लिए उपयुक्त।
चुनौतियाँ: भूजल की कमी, सीमित कृषि क्षेत्र, Mica खनन में बाल श्रम एवं 2000 के बाद झारखंड विभाजन से खनिज क्षेत्र में गिरावट।
निष्कर्ष: टिकाऊ खनन नीति, बाल श्रम उन्मूलन और Eco-Tourism के विकास से इन चट्टानों का समुचित उपयोग संभव है।


Leave a Reply