बिहार की अवसादी चट्टानें
Sedimentary Rocks of Bihar — BPSC Prelims + Mains सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री
परिचय एवं परिभाषा
बिहार की चट्टानों के अध्ययन में अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks) सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि राज्य का लगभग तीन-चौथाई भू-क्षेत्र इन्हीं से आच्छादित है — यही कारण है कि BPSC Prelims और Mains दोनों में इस विषय से प्रश्न निरंतर पूछे जाते हैं।
अवसादी चट्टानें वे शैल हैं जिनका निर्माण अपरदन (Erosion), परिवहन (Transportation) और निक्षेपण (Deposition) की प्रक्रियाओं द्वारा होता है। नदियाँ, वायु, हिमनद और समुद्री तरंगें पुरानी चट्टानों को तोड़कर उनके अवसादों को निचले क्षेत्रों में जमा करती हैं। लाखों वर्षों में दबाव और सीमेन्टेशन के कारण ये अवसाद ठोस चट्टान बन जाते हैं।
अवसादी चट्टानों का निर्माण — प्रक्रिया
अवसादी चट्टानों का निर्माण एक दीर्घकालीन भूगर्भिक प्रक्रिया है जो तीन मुख्य चरणों में होती है — अपरदन, परिवहन और निक्षेपण। बिहार की गंगा घाटी इस प्रक्रिया का सर्वोत्तम उदाहरण है जहाँ हिमालय से लाए गए अवसाद हजारों मीटर की गहराई तक जमे हुए हैं।
निर्माण के तीन मुख्य चरण
निर्माण के आधार पर वर्गीकरण
| क्र | प्रकार | निर्माण का स्रोत | बिहार उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | Clastic / खंडाश्मी | यांत्रिक अपरदन के टुकड़े | Sandstone (बलुआ पत्थर), Shale, Conglomerate — रोहतास, कैमूर |
| 2 | Chemical / रासायनिक | जल में घुले खनिजों का अवक्षेपण | Limestone (चूना पत्थर) — रोहतास, मुंगेर पहाड़ी |
| 3 | Organic / जैविक | जीव-जन्तुओं के अवशेष | Coal (कोयला) — Gondwana क्रम में, बिहार-झारखंड सीमा |
| 4 | Alluvial / जलोढ़ | नदी निक्षेपण (अभी तक लिथीफाइड नहीं) | गंगा मैदान का पूरा भाग — New Alluvium, Old Alluvium |
बिहार में अवसादी चट्टानों का भौगोलिक वितरण
बिहार को भूवैज्ञानिक दृष्टि से तीन प्रमुख क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है — उत्तर का गंगा मैदान, दक्षिण का पठार (अब झारखंड) और मध्य की गंगा घाटी। अवसादी चट्टानों का वितरण इन्हीं क्षेत्रों की संरचना से निर्धारित होता है।
चट्टान प्रकार: New Alluvium (नवीन जलोढ़) एवं Old Alluvium (प्राचीन जलोढ़)
विशेषता: गंगा, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी, बागमती, कमला-बलान द्वारा लाए गए हिमालयी अवसाद। गहराई 1,000 से 3,000 मीटर तक।
चट्टान प्रकार: Vindhyan Sandstone, Limestone (चूना पत्थर), Shale, Gondwana Coal Measures
विशेषता: Precambrian से Gondwana युग तक की चट्टानें। खनिज संपदा का मुख्य केन्द्र।
प्रमुख भूवैज्ञानिक संरचनाएँ — बिहार
| भूवैज्ञानिक क्रम | आयु (लगभग) | बिहार में स्थान | प्रमुख चट्टान |
|---|---|---|---|
| Quaternary Alluvium | 0 — 2.6 Ma | सम्पूर्ण गंगा मैदान | Clay, Silt, Sand, Gravel |
| Gondwana | 250 — 350 Ma | रोहतास-सोन घाटी, झारखंड सीमा | Coal, Sandstone, Shale |
| Vindhyan | 600 — 1,700 Ma | कैमूर श्रेणी, रोहतास पठार | Sandstone, Limestone, Shale |
| Archaean / Precambrian | > 2,500 Ma | गया-नवादा पहाड़ी, मुंगेर | Gneiss, Quartzite (कायांतरित) |
बिहार की प्रमुख अवसादी चट्टानें — विस्तृत विवरण
बिहार में पाई जाने वाली अवसादी चट्टानों में जलोढ़ निक्षेप, चूना पत्थर, बलुआ पत्थर, शेल और कोयला सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण हैं। इनमें से प्रत्येक का अलग आर्थिक, भूगर्भिक और परीक्षा की दृष्टि से महत्त्व है।
गंगा मैदान का सम्पूर्ण भाग जलोढ़ (Alluvial) अवसादों से ढका है। ये अभी पूर्णतः लिथीफाइड नहीं हैं इसलिए इन्हें “Unconsolidated Sedimentary Deposits” भी कहते हैं।
दो प्रकार के जलोढ़
Limestone (Calcium Carbonate — CaCO₃) बिहार में रोहतास, कैमूर और मुंगेर पहाड़ी में पाई जाती है। यह Vindhyan क्रम की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण चट्टान है।
- रोहतास: Dalmia Cement के कारखाने को कच्चा माल। देश का प्रमुख सीमेंट उत्पादन केन्द्र।
- कैमूर श्रेणी: Limestone की मोटी परतें। Vindhyan Limestone के रूप में पहचानी जाती हैं।
- मुंगेर पहाड़ी: छोटानागपुर पठार से मिलने वाले सीमांत क्षेत्र में।
- उपयोग: सीमेंट उद्योग, चूना निर्माण, लौह-इस्पात उद्योग में flux के रूप में।
Sandstone (SiO₂ प्रधान) रेत के कणों के सीमेन्टेशन से बनती है। बिहार में यह मुख्यतः Vindhyan Supergroup के अंतर्गत पाई जाती है।
| क्षेत्र | विशेषता | उपयोग |
|---|---|---|
| कैमूर पठार | लाल-भूरा Vindhyan Sandstone, कठोर, मोटी परत | निर्माण सामग्री, भवन-पत्थर |
| रोहतास पहाड़ी | सफेद-पीला Sandstone, मध्यम कठोरता | मंदिर निर्माण, ऐतिहासिक किले |
| सोन घाटी | Gondwana Sandstone, कोयला परतों के बीच | Gondwana कोयले के साथ पाई जाती है |
रोहतास जिले में स्थित रोहतास गढ़ किला और शेरशाह का मकबरा (सासाराम) इसी स्थानीय बलुआ पत्थर से निर्मित हैं।
Shale महीन मृत्तिका (Clay) और सिल्ट के संघनन से बनती है। यह Gondwana और Vindhyan दोनों क्रमों में पाई जाती है। बिहार में सोन घाटी और झारखंड सीमावर्ती क्षेत्र में।
- विशेषता: पतली-पतली परतों में विभाजित। जल अवरोधक (Impermeable)। जीवाश्म युक्त।
- Oil Shale: कुछ Shale में कार्बनिक पदार्थ होते हैं जिससे तेल निकाला जा सकता है — भविष्य के ऊर्जा स्रोत।
- उपयोग: ईंट निर्माण, मृत्तिका उद्योग, सीमेंट में मिश्रण।
Gondwana चट्टानें — बिहार का ऐतिहासिक भूवैज्ञानिक खजाना
Gondwana Rocks बिहार की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण प्राचीन अवसादी शृंखला है जो लगभग 250 से 350 मिलियन वर्ष पुरानी है। इसमें बिहार के कोयला भंडारों का मूल स्रोत निहित है और BPSC Mains में इसका विश्लेषणात्मक महत्त्व अत्यधिक है।
बिहार में Gondwana चट्टानों का वितरण
Gondwana चट्टानों की विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| आयु | Upper Carboniferous से Cretaceous (350 — 65 Ma) |
| प्रमुख चट्टानें | Sandstone, Shale, Coal (Bituminous), Conglomerate |
| जीवाश्म | Glossopteris (फर्न जैसा पौधा) — Gondwana पहचान का सबूत |
| कोयले का प्रकार | Bituminous Coal — उच्च ऊष्मीय मान |
| भारत में विस्तार | दामोदर घाटी, सोन घाटी, महानदी घाटी, गोदावरी घाटी |
| बिहार में महत्त्व | 2000 से पहले बिहार में थीं, अब झारखंड में — परंतु परीक्षा में पूछी जाती हैं |
- Glossopteris Flora: Gondwana चट्टानों में मिला यह जीवाश्म Gondwanaland के अस्तित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण है — Continental Drift Theory का आधार।
- 2000 में झारखंड अलग: बिहार से झारखंड अलग होने के बाद अधिकांश खनिज संपदा (Gondwana कोयला, Dhanbad, Jharia) झारखंड में चली गई।
- Coal Measures: Gondwana Sandstone और Coal Measures परस्पर स्तरीय (interbedded) हैं। Coal Seams इन्हीं में पाए जाते हैं।
अवसादी चट्टानों का आर्थिक एवं खनिज महत्त्व
बिहार की अवसादी चट्टानें राज्य की कृषि, उद्योग, जल संसाधन और खनिज अर्थव्यवस्था की नींव हैं। जलोढ़ मिट्टी की उर्वरता से लेकर चूना पत्थर के सीमेंट उद्योग तक — इन चट्टानों का आर्थिक योगदान अपरिहार्य है।
गंगा मैदान की जलोढ़ अवसादी मिट्टी विश्व की सर्वाधिक उपजाऊ मिट्टियों में है। धान, गेहूँ, मक्का, गन्ना उत्पादन में बिहार का राष्ट्रीय योगदान इसी पर निर्भर।
रोहतास और कैमूर की Limestone से सीमेंट उत्पादन। Dalmianagar (रोहतास) एशिया का एक समय सबसे बड़ा सीमेंट कारखाना था।
जलोढ़ चट्टानें उत्कृष्ट Aquifer (भूजल भंडार) हैं। बिहार में नलकूप सिंचाई इन्हीं पर आधारित। पटना, मुजफ्फरपुर जैसे शहरों को पेयजल इन्हीं से।
Limestone → सीमेंट, चूना। Sandstone → भवन निर्माण। Mica (अभ्रक) → गया-नवादा। Sand → निर्माण उद्योग। Gondwana Coal → ऊर्जा।
रोहतास गढ़, शेरशाह का मकबरा (सासाराम), विभिन्न मंदिर — स्थानीय Sandstone और Limestone से निर्मित ऐतिहासिक स्थल।
Gondwana जीवाश्म → भूवैज्ञानिक इतिहास। पुरा-जलवायु अनुसंधान। भूकंप जोखिम आकलन में जलोढ़ परत की भूमिका।
बिहार के प्रमुख खनिज और उनकी चट्टानें
| खनिज | चट्टान प्रकार | बिहार जिला | उपयोग |
|---|---|---|---|
| Limestone (चूना पत्थर) | Vindhyan अवसादी | रोहतास, कैमूर | सीमेंट, इस्पात |
| Sandstone (बलुआ पत्थर) | Vindhyan / Gondwana अवसादी | रोहतास, कैमूर, गया | भवन, निर्माण |
| Mica (अभ्रक) | Archaean कायांतरित | गया, नवादा, मुंगेर | विद्युत उद्योग |
| Coal (कोयला) | Gondwana अवसादी | झारखंड सीमावर्ती (अब झारखंड में) | ऊर्जा, इस्पात |
| Sand (बालू) | जलोढ़ / नदी अवसाद | गंगा, सोन, गंडक तट | निर्माण उद्योग |
| Pyrite (पाइराइट) | अवसादी/कायांतरित | रोहतास | गंधक, उर्वरक |
Mains विश्लेषण — कारण, प्रभाव और चुनौतियाँ
BPSC Mains में अवसादी चट्टानों पर विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं जैसे — बिहार के विकास में इनकी भूमिका, चुनौतियाँ और भविष्य। यह खण्ड उसी दृष्टि से तैयार किया गया है।
बिहार के विकास में अवसादी चट्टानों की सकारात्मक भूमिका
- कृषि का आधार: जलोढ़ मिट्टी से 75%+ बिहारी कृषि पर निर्भर। खाद्य सुरक्षा।
- उद्योग: रोहतास Limestone → सीमेंट उद्योग → रोजगार।
- जल संसाधन: जलोढ़ Aquifer → नलकूप सिंचाई → कृषि उत्पादकता।
- बाढ़ मैदान: नई जलोढ़ → प्रतिवर्ष पोषक तत्त्वों की पुनः आपूर्ति।
- पर्यटन: Sandstone निर्मित ऐतिहासिक किले-मंदिर → धरोहर पर्यटन।
चुनौतियाँ एवं समस्याएँ
- बाढ़ की समस्या: जलोढ़ मैदान सपाट होने से बाढ़ का पानी नहीं निकल पाता। उत्तर बिहार में वार्षिक बाढ़ — कोसी, गंडक, बागमती।
- भूजल प्रदूषण: जलोढ़ Aquifer में आर्सेनिक (Arsenic) की समस्या। गंगा के दक्षिणी किनारे पर — भोजपुर, भागलपुर, बक्सर में।
- भूकंप जोखिम: जलोढ़ चट्टानें भूकंप में liquefaction की प्रवृत्ति रखती हैं। उत्तर बिहार Seismic Zone IV में।
- खनन की चुनौती: Limestone और Sandstone के अत्यधिक खनन से पर्यावरण क्षरण। कैमूर-रोहतास में वन विनाश।
- झारखंड विभाजन: 2000 के बाद अधिकांश खनिज भंडार झारखंड में चले गए — बिहार की खनिज आय में भारी कमी।
Mains Model Answer — नमूना प्रारूप
भूमिका: बिहार का भूगोल मुख्यतः अवसादी चट्टानों द्वारा निर्धारित है। इसके उत्तर में हिमालयी जलोढ़ और दक्षिण में Vindhyan-Gondwana क्रम की चट्टानें राज्य को विविध भूवैज्ञानिक विरासत प्रदान करती हैं।
आर्थिक योगदान: जलोढ़ मिट्टी कृषि उत्पादकता का आधार है। Limestone से सीमेंट उद्योग, Sandstone से निर्माण सामग्री और Mica से विद्युत उद्योग को कच्चा माल मिलता है।
चुनौतियाँ: बाढ़, भूजल आर्सेनिक, भूकंप जोखिम और झारखंड विभाजन के बाद खनिज संसाधनों की कमी प्रमुख समस्याएँ हैं।
निष्कर्ष: टिकाऊ विकास के लिए आवश्यक है कि अवसादी चट्टानों के खनन में पर्यावरणीय मानकों का पालन हो और जलोढ़ Aquifer के संरक्षण पर ध्यान दिया जाए।


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