बिहार के जल संसाधन
सतही जल
नदियाँ, झीलें, जलाशय एवं बाढ़ — BPSC परीक्षा हेतु सम्पूर्ण विश्लेषण
परिचय एवं महत्व
बिहार के जल संसाधन — विशेषतः सतही जल — BPSC परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। बिहार की नदियाँ, झीलें एवं जलाशय राज्य की कृषि, परिवहन एवं जनजीवन की धुरी हैं।
बिहार की भौगोलिक स्थिति इसे जल-समृद्ध राज्य बनाती है। राज्य के उत्तर में हिमालय की नदियाँ तथा दक्षिण में छोटानागपुर पठार से निकलने वाली नदियाँ गंगा में मिलती हैं। इस प्रकार बिहार से होकर भारत के कुल सतही जल का लगभग 28.5% प्रवाहित होता है।
बिहार में सतही जल के मुख्य स्रोत
- नदियाँ (Rivers): गंगा एवं उसकी सहायक नदियाँ — उत्तर बिहार में हिमालयी नदियाँ (Himalayan Rivers) तथा दक्षिण बिहार में प्रायद्वीपीय नदियाँ (Peninsular Rivers)।
- झीलें एवं दियारा (Lakes & Ox-bow Lakes): चौर, ताल, झील जैसे जलाशय जो बाढ़ के बाद बनते हैं।
- जलाशय एवं बाँध (Reservoirs & Dams): गंडक, कोसी, सोन जैसी परियोजनाओं के अंतर्गत निर्मित जलाशय।
- वर्षा जल (Rainwater): मानसूनी वर्षा के रूप में जून–सितम्बर के मध्य प्राप्त जल।
गंगा नदी तंत्र
गंगा (Ganga) बिहार की जीवन-रेखा है। यह नदी उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद से निकलकर बिहार में बक्सर (Buxar) के निकट प्रवेश करती है और फरक्का (Farakka) के निकट पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर जाती है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| बिहार में प्रवेश | बक्सर (Buxar) के निकट — उत्तर प्रदेश से |
| बिहार में लम्बाई | लगभग 445 km |
| प्रवाह दिशा | पश्चिम से पूर्व (West to East) |
| निकास बिंदु | फरक्का बैराज के निकट — पश्चिम बंगाल |
| उत्तर की सहायक नदियाँ | घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी, महानंदा |
| दक्षिण की सहायक नदियाँ | सोन, पुनपुन, फल्गु (निरंजना), किऊल, हरोहर, चानन |
| महत्वपूर्ण शहर | पटना, भागलपुर, मुंगेर, बेगूसराय |
गंगा की विशेषताएँ — बिहार में
- गंगा का मैदान (Gangetic Plain): बिहार का उत्तरी मैदान गंगा एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित जलोढ़ मैदान (Alluvial Plain) है जो अत्यंत उपजाऊ है।
- दो भागों में विभाजन: गंगा बिहार को उत्तर बिहार (North Bihar) एवं दक्षिण बिहार (South Bihar) में विभाजित करती है।
- डेल्टा निर्माण: बिहार में नहीं — डेल्टा पश्चिम बंगाल एवं बांग्लादेश में निर्मित होता है।
- जल परिवहन: पटना से फरक्का तक जल परिवहन (Inland Waterway No. 1) संचालित होता है।
- तलछट (Silt): गंगा अपार मात्रा में तलछट लाती है जो भूमि की उर्वरता बढ़ाती है किन्तु नदी के तल को उथला भी करती है।
घाघरा (Ghaghra), जिसे सरयू (Saryu) भी कहते हैं, नेपाल के मापचाचुंगो हिमनद से निकलती है। यह बिहार में सारण जिले में गंगा से मिलती है। घाघरा उत्तर प्रदेश एवं बिहार की सीमा बनाती है। इसकी कुल लंबाई लगभग 1,080 km है। इसे बिहार की सबसे बड़ी नदी (जल मात्रा के आधार पर) माना जाता है। यह नदी भीषण बाढ़ लाती है — विशेषकर सीवान, सारण एवं गोपालगंज जिलों में।
उत्तर बिहार की प्रमुख नदियाँ (हिमालयी नदी तंत्र)
उत्तर बिहार की नदियाँ हिमालय (Himalayas) एवं नेपाल (Nepal) में उद्गमित होती हैं। ये नदियाँ बारहमासी (Perennial) हैं क्योंकि इन्हें हिमनदों से जल मिलता रहता है। ये नदियाँ अपने साथ अत्यधिक अवसाद (Sediment) लाती हैं तथा बिहार में भीषण बाढ़ का कारण बनती हैं।
गंडक नदी (Gandak)
सालिग्रामी / नारायणीबूढ़ी गंडक (Burhi Gandak)
सिकरहना नदीकोसी नदी (Kosi)
बिहार का शोकबागमती नदी (Bagmati)
नेपाल से आगतकमला-बलान (Kamla-Balan)
मिथिला की नदीमहानंदा (Mahananda)
पूर्वी बिहार| क्र. | नदी | उद्गम | बिहार में प्रवेश | गंगा से संगम | प्रभावित जिले |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | घाघरा | नेपाल (मापचाचुंगो) | उत्तर प्रदेश सीमा | सारण | सीवान, सारण, गोपालगंज |
| 2 | गंडक | नेपाल (धौलागिरि) | गोपालगंज | सोनपुर/सारण | पश्चिमी चम्पारण, गोपालगंज |
| 3 | बूढ़ी गंडक | सोमेश्वर पहाड़ी (बिहार) | पश्चिमी चम्पारण | मुंगेर | पूर्वी चम्पारण, मुजफ्फरपुर |
| 4 | बागमती | शिवपुरी (नेपाल) | सीतामढ़ी | खगड़िया | सीतामढ़ी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर |
| 5 | कमला-बलान | महाभारत पर्वत (नेपाल) | मधुबनी | सहरसा | मधुबनी, दरभंगा |
| 6 | कोसी | गोसाईंथान (नेपाल-तिब्बत) | सुपौल | कुरसेला/कटिहार | सुपौल, सहरसा, खगड़िया |
| 7 | महानंदा | महालदिरम (दार्जिलिंग) | किशनगंज | कटिहार | किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार |
दक्षिण बिहार की प्रमुख नदियाँ (प्रायद्वीपीय नदी तंत्र)
दक्षिण बिहार की नदियाँ छोटानागपुर पठार (Chhotanagpur Plateau) तथा विंध्याचल पर्वतमाला से उद्गमित होती हैं। ये नदियाँ मौसमी (Seasonal) हैं तथा उत्तर बिहार की नदियों की तुलना में कम जल लाती हैं। इनका प्रवाह उत्तर की ओर होता है।
सोन नदी (Son River) मध्य प्रदेश के अमरकंटक पठार से निकलती है। यह बिहार में रोहतास जिले में प्रवेश करती है। पटना के निकट दीनापुर में गंगा से मिलती है। बिहार में इसकी लंबाई लगभग 202 km है। सोन नदी पर इंद्रपुरी बैराज (Indrapuri Barrage) तथा डेहरी-ऑन-सोन (Dehri-on-Son) महत्वपूर्ण स्थान हैं। इसे “बिहार की सबसे बड़ी दक्षिणी सहायक नदी” कहा जाता है। सोन नहर प्रणाली से रोहतास, औरंगाबाद एवं अरवल जिलों में सिंचाई होती है।
पुनपुन नदी झारखंड के पलामू जिले से निकलती है। यह अरवल एवं पटना जिलों से होकर गंगा में मिलती है। पटना के दक्षिण में फतुहा के निकट गंगा से संगम। पुनपुन को पुण्यभद्रा भी कहा जाता है — इसका धार्मिक महत्व भी है। पितृपक्ष (Pitrupaksha) मेले के दौरान यहाँ पिंडदान की परम्परा है।
फल्गु नदी झारखंड के हजारीबाग जिले से निकलती है। यह निरंजना (Niranjana) नदी के नाम से भी जानी जाती है। बोधगया (Bodh Gaya) के निकट यह पवित्र मानी जाती है — यहीं पर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। गया में पितृपक्ष मेला फल्गु के तट पर लगता है। यह नदी अधिकांशतः बालू में समा जाती है — इसे “अन्तःसलिला” या अदृश्य नदी भी कहते हैं। अंत में यह पुनपुन में मिल जाती है।
किऊल नदी (Kiul River): झारखंड के गिरिडीह से निकलकर लखीसराय जिले में गंगा से मिलती है। लंबाई ~145 km। हरोहर नदी (Harohar): झारखंड से निकलकर बेगूसराय जिले में गंगा से मिलती है। चानन नदी (Chanan): झारखंड के हजारीबाग से निकलकर जहानाबाद एवं नालंदा से होकर बहती है। अजय नदी (Ajay): झारखंड के देवघर से निकलती है — यद्यपि यह बिहार में कम आती है किन्तु जमुई को प्रभावित करती है।
| नदी | उद्गम | संगम | प्रमुख जिले | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| सोन | अमरकंटक (MP) | दीनापुर (गंगा) | रोहतास, भोजपुर | सबसे बड़ी दक्षिणी नदी |
| पुनपुन | पलामू (JH) | फतुहा (गंगा) | अरवल, पटना | धार्मिक महत्व — पितृपक्ष |
| फल्गु | हजारीबाग (JH) | पुनपुन में | गया | अन्तःसलिला — बोधगया |
| किऊल | गिरिडीह (JH) | लखीसराय (गंगा) | लखीसराय, मुंगेर | — |
| हरोहर | झारखंड | बेगूसराय (गंगा) | बेगूसराय | — |
| चानन | हजारीबाग (JH) | पुनपुन में | नालंदा, जहानाबाद | — |
झीलें, चौर एवं आर्द्रभूमि
बिहार में सतही जल के संरक्षण में झीलें (Lakes), चौर (Chaur — Ox-bow Lakes) तथा आर्द्रभूमि (Wetlands) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये जैव-विविधता के केंद्र हैं तथा जलवायु नियमन में सहायक हैं।
बिहार की प्रमुख आर्द्रभूमियाँ (Wetlands of Bihar)
| आर्द्रभूमि | जिला | क्षेत्रफल | विशेषता |
|---|---|---|---|
| काँवर झील | बेगूसराय | 6,786 ha | Ramsar Site 2020 — एशिया की सबसे बड़ी Ox-bow Lake |
| नागी बाँध जलाशय | जमुई | ~723 ha | Ramsar Site 2022 — प्रवासी पक्षी |
| नकटी बाँध जलाशय | जमुई | ~336 ha | Ramsar Site 2022 — पक्षी आश्रय |
| सूर सरोवर | — | — | उत्तर प्रदेश में — BPSC में confusion न करें |
बाढ़ — कारण, प्रभाव एवं प्रबंधन
बिहार भारत का सर्वाधिक बाढ़ग्रस्त राज्य है। राज्य का लगभग 76,252 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र बाढ़ प्रभावित है जो देश के कुल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का लगभग 17.2% है। उत्तर बिहार विशेष रूप से बाढ़ का शिकार होता है।
नेपाल एवं हिमालय में भारी वर्षा एवं हिम-पिघलन से कोसी, गंडक, बागमती आदि नदियों में अचानक बाढ़ आती है।
हर वर्ष तलछट जमाव से नदियों का तल ऊँचा होता जाता है जिससे थोड़ी वर्षा में भी बाढ़ आ जाती है।
कोसी नदी ने पिछले 200 वर्षों में 100-120 km पश्चिम की ओर अपना पाट बदला है — इसे “भटकती नदी” (Wandering River) कहते हैं।
जून–सितम्बर के मध्य अत्यधिक एवं असमान वर्षा से बाढ़ आती है। बिहार में औसत वार्षिक वर्षा 1,000–1,600 mm है।
नेपाल एवं बिहार में वनों की कटाई से वर्षा जल शीघ्र नदियों में पहुँचता है जिससे बाढ़ की तीव्रता बढ़ती है।
तटबंधों (Embankments) के टूटने से भारी तबाही होती है। 2008 का कोसी तटबंध टूटना (Kosi Flood) इसका उदाहरण है।
2008 का कोसी महाविनाश — “बिहार का शोक”
बाढ़ प्रबंधन — सरकारी प्रयास
- बिहार बाढ़ नियंत्रण बोर्ड (Bihar Flood Control Board): तटबंध निर्माण, नदी नियंत्रण एवं बाढ़ पूर्वानुमान।
- NDRF (National Disaster Response Force): बाढ़ राहत एवं बचाव कार्य।
- कोसी परियोजना (Kosi Project): भारत-नेपाल संधि — 1954 के अंतर्गत कोसी बैराज (Hanuman Nagar Barrage) का निर्माण।
- गंडक परियोजना: भारत-नेपाल संधि — 1959, वाल्मीकि नगर बैराज।
- बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र: पटना में केंद्रीय जल आयोग (CWC) का बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र।
प्रमुख जल परियोजनाएँ एवं सिंचाई
बिहार की कृषि मुख्यतः सिंचाई पर निर्भर है। राज्य में अनेक महत्वपूर्ण जल परियोजनाएँ हैं जो न केवल सिंचाई बल्कि विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण तथा पेयजल आपूर्ति भी करती हैं।
| परियोजना | नदी | स्थान | उद्देश्य | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| गंडक परियोजना | गंडक | वाल्मीकि नगर | सिंचाई + विद्युत | भारत-नेपाल संयुक्त परियोजना — 1959 |
| कोसी परियोजना | कोसी | हनुमान नगर (नेपाल) | बाढ़ नियंत्रण + सिंचाई | भारत-नेपाल संधि — 1954 |
| सोन नहर प्रणाली | सोन | इंद्रपुरी बैराज | सिंचाई | रोहतास, औरंगाबाद — प्राचीनतम प्रणाली |
| पूर्वी कोसी नहर | कोसी | पूर्णिया, सहरसा | सिंचाई | 3.16 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता |
| पश्चिमी कोसी नहर | कोसी | सुपौल, मधेपुरा | सिंचाई | 2.52 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता |
| बागमती परियोजना | बागमती | ढेंग (नेपाल) | सिंचाई + बाढ़ नियंत्रण | सीतामढ़ी, दरभंगा |
| गंगा पंप नहर | गंगा | पटना | पेयजल + सिंचाई | पटना को पेयजल आपूर्ति |
सिंचाई की वर्तमान स्थिति
- उत्तर बिहार: अत्यधिक जल — बाढ़ की समस्या, भूजल स्तर उच्च।
- दक्षिण बिहार: जल की कमी — गर्मियों में नदियाँ सूखती हैं, सिंचाई की समस्या।
- समाधान: नदी-जोड़ परियोजना (River Interlinking) — कोसी-मेची, गंडक-गंगा लिंक।
MCQ अभ्यास — BPSC स्तर
नीचे दिए गए प्रश्नों पर क्लिक करके अपना उत्तर जाँचें। ये प्रश्न BPSC Prelims के पैटर्न पर आधारित हैं।


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