बिहार में कोहरा (Fog)
बिहार की मौसम संबंधी घटनाएँ — कारण, प्रभाव, क्षेत्र और परीक्षा उपयोगी तथ्य
परिचय एवं परिभाषा
बिहार में कोहरा (Fog) एक महत्वपूर्ण मौसम संबंधी घटना है जो शीत ऋतु (नवंबर से फरवरी) के दौरान गंगा के मैदानी क्षेत्रों में व्यापक रूप से देखी जाती है। Bihar Govt. Competitive Exams में इस विषय से प्रश्न पूछे जाते हैं।
कोहरा एक प्रकार का निम्न-स्तरीय बादल (Low-lying Cloud) है जो भूमि की सतह के निकट बनता है। जब वायुमंडल में मौजूद जलवाष्प संघनन (Condensation) के कारण अत्यंत सूक्ष्म जल-कणों या बर्फ-कणों में बदल जाती है तो कोहरा बनता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार जब दृश्यता (Visibility) 1000 मीटर से कम हो जाती है तो उसे कोहरा कहते हैं।
कोहरे और धुंध में अंतर
| विशेषता | कोहरा (Fog) | धुंध (Mist) | धुआँसा (Smog) |
|---|---|---|---|
| दृश्यता | <1000 मीटर | 1000–2000 मीटर | बहुत कम (प्रदूषण) |
| आर्द्रता | 100% (संतृप्त) | 95–99% | प्रदूषण + नमी |
| रंग | सफेद / ग्रे | हल्का सफेद | पीला-भूरा |
| कारण | जलवाष्प संघनन | आंशिक संघनन | धुआँ + कोहरा |
| मुख्य समय | प्रात:काल | सायंकाल | सर्दी में लंबे समय |
कोहरे के प्रकार (Types of Fog)
कोहरे का निर्माण विभिन्न भौगोलिक व मौसमी परिस्थितियों में होता है। बिहार में मुख्यतः विकिरण कोहरा और अभिवहन कोहरा पाया जाता है। इनकी परीक्षा में पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कोहरा बनने की वैज्ञानिक प्रक्रिया
कोहरा बनने के लिए तीन मूलभूत शर्तें आवश्यक हैं:
- पर्याप्त नमी (Moisture): वायुमंडल में जलवाष्प की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए। बिहार में गंगा, कोसी, गंडक जैसी नदियाँ इसका मुख्य स्रोत हैं।
- ठंडी सतह (Cold Surface): भूमि की सतह रात्रि में विकिरण से ठंडी हो जाती है। जब सतह का तापमान ओसांक (Dew Point Temperature) से नीचे गिरता है तो कोहरा बनता है।
- संघनन केंद्रक (Condensation Nuclei): धूलकण, धुएँ के कण, लवणकण आदि जिन पर जलवाष्प संघनित होती है। बिहार के कृषि क्षेत्रों में पराली जलाने से ये कण बढ़ जाते हैं।
सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के आगे बढ़ने पर उत्तर भारत में ठंडी हवाएँ चलती हैं। इससे रात का तापमान तेजी से गिरता है और गंगा के मैदानों में घना कोहरा बनता है।
बिहार में कोहरे के कारण (Causes of Fog in Bihar)
बिहार की भौगोलिक स्थिति, नदी-प्रणाली, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और जलवायु मिलकर इसे कोहरे के लिए अत्यंत संवेदनशील बनाते हैं। यह समझना Bihar Govt. Competitive Exams मुख्य परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
बिहार गंगा के विशाल जलोढ़ मैदान पर स्थित है। यह मैदान समतल होने के कारण ठंडी हवाओं को रोकने में सक्षम नहीं है। शांत (Still) वायु की स्थिति में विकिरण कोहरा तेजी से बनता है। उत्तर में हिमालय पर्वत और दक्षिण में विंध्य-पठार के बीच यह मैदानी क्षेत्र कोहरे के लिए आदर्श “कटोरे” जैसी भूमिका निभाता है।
बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, सोन, पुनपुन, फल्गु आदि अनेक नदियाँ बहती हैं। इन नदियों से वाष्पीकरण द्वारा लगातार नमी वायुमंडल में मिलती रहती है। सर्दियों में यही नमी कम तापमान के कारण संघनित होकर कोहरे का रूप लेती है। उत्तर बिहार में नदियों की घनत्व सर्वाधिक।
भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में ठंडी लहरें (Cold Waves) लाते हैं। इनके कारण बिहार का तापमान तेजी से गिरता है। रात्रि का न्यूनतम तापमान कभी-कभी 2–5°C तक पहुँच जाता है जो घने कोहरे के लिए अनुकूल है।
बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। रबी फसल (गेहूँ, सरसों) के लिए किसान सिंचाई करते हैं जिससे वायुमंडलीय नमी बढ़ती है। इसके अलावा पराली जलाना (Stubble Burning) — विशेषकर पंजाब-हरियाणा से धुएँ के कण — पूर्व की ओर बहकर बिहार में कोहरे को और घना बना देते हैं।
पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर जैसे नगरों में वाहनों व उद्योगों से PM 2.5 और PM 10 की मात्रा बढ़ रही है। ये सूक्ष्म कण संघनन केंद्रक (Condensation Nuclei) का काम करते हैं और कोहरे को अधिक घना, अधिक विषैला और लंबे समय तक बनाए रखते हैं।
बिहार में वन आच्छादन मात्र 9.79% (India State of Forest Report) है जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। वृक्षों की कमी से भूमि तेजी से ठंडी होती है और तापमान में तीव्र गिरावट आती है जिससे कोहरे की संभावना बढ़ती है।
कोहरे से संबंधित मौसमी संकेत
भौगोलिक वितरण एवं प्रभावित क्षेत्र (Geographical Distribution)
बिहार को तीन भौगोलिक क्षेत्रों में बाँटकर देखें तो उत्तरी बिहार (North Bihar) में कोहरे की तीव्रता सर्वाधिक होती है क्योंकि यहाँ नदियों की अधिकता और हिमालय से आने वाली ठंडी हवाओं का सीधा प्रभाव पड़ता है।
क्षेत्रानुसार कोहरे की स्थिति
उत्तर बिहार में गंगा के उत्तर में स्थित जिले — पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार — सर्वाधिक कोहरे से प्रभावित रहते हैं।
- हिमालय की तराई पेटी से नमी आती है
- कोसी, गंडक, बागमती, महानंदा नदियों से भाप
- तापमान दिसंबर में 3–7°C तक गिरता है
- दृश्यता कभी-कभी 10–20 मीटर तक
पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर, भागलपुर, खगड़िया, लखीसराय आदि जिले मध्यम कोहरे से प्रभावित होते हैं।
- गंगा नदी के किनारे अभिवहन कोहरा अधिक
- पटना में दृश्यता 100–500 मीटर तक गिरती है
- पटना हवाई अड्डे पर उड़ानें बाधित होती हैं
- NH-30, NH-31, NH-80 पर दुर्घटनाएँ बढ़ती हैं
गया, नालंदा, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, भोजपुर आदि जिले कम कोहरे से प्रभावित होते हैं।
- छोटानागपुर पठार का प्रभाव — अपेक्षाकृत शुष्क
- नदियों की कमी से कम नमी
- तापमान उत्तर बिहार से थोड़ा अधिक रहता है
- गया में न्यूनतम तापमान कभी-कभी बहुत कम होता है (Radiation Cooling)
बिहार के प्रमुख जिले और कोहरे की तीव्रता
| # | जिला | क्षेत्र | कोहरे की तीव्रता | मुख्य कारण |
|---|---|---|---|---|
| 1 | दरभंगा | उत्तर बिहार | अत्यधिक | बागमती, कमला नदियाँ; तराई नमी |
| 2 | सीतामढ़ी | उत्तर बिहार | अत्यधिक | नेपाल तराई से ठंडी हवा |
| 3 | पूर्णिया | पूर्वोत्तर बिहार | बहुत अधिक | महानंदा नदी; पूर्वोत्तर आर्द्रता |
| 4 | मुजफ्फरपुर | उत्तर बिहार | बहुत अधिक | गंडक नदी; कृषि सिंचाई |
| 5 | पटना | मध्य बिहार | अधिक | गंगा; नगरीय प्रदूषण (Smog) |
| 6 | भागलपुर | पूर्वी बिहार | मध्यम | गंगा का चौड़ा पाट; अभिवहन कोहरा |
| 7 | गया | दक्षिण बिहार | कम–मध्यम | Radiation Cooling (फल्गु नदी) |
| 8 | रोहतास/कैमूर | दक्षिण बिहार | कम | पठारी क्षेत्र; कम नमी |
कोहरे के प्रभाव (Effects of Fog in Bihar)
कोहरे के प्रभाव बहुआयामी हैं — परिवहन, कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग और दैनिक जीवन सभी प्रभावित होते हैं। बिहार जैसे विकासशील राज्य के लिए ये प्रभाव और भी गंभीर हो जाते हैं।
1. परिवहन पर प्रभाव (Impact on Transport)
2. कृषि पर प्रभाव (Impact on Agriculture)
बिहार की अर्थव्यवस्था काफी हद तक कृषि पर निर्भर है। कोहरे का कृषि पर दोहरा प्रभाव होता है — कभी लाभदायक, कभी हानिकारक।
| फसल/घटना | कोहरे का लाभकारी प्रभाव | कोहरे का हानिकारक प्रभाव |
|---|---|---|
| गेहूँ (Wheat) | पर्याप्त नमी मिलती है — सिंचाई की कम जरूरत | अत्यधिक कोहरे से Rust Disease (गेरुआ रोग) लगती है |
| सरसों (Mustard) | हल्का कोहरा फूल परागण में सहायक | घने कोहरे से Alternaria Blight (पत्ती धब्बा रोग) |
| सब्जियाँ | नमी से वृद्धि होती है | फफूंद रोग (Fungal Diseases) बढ़ते हैं; फल सड़ते हैं |
| आलू (Potato) | ठंडा तापमान उत्पादन के लिए अनुकूल | Late Blight रोग का खतरा बढ़ता है |
| मक्का / दलहन | कोई विशेष लाभ नहीं | रबी मक्का में Downy Mildew रोग |
3. स्वास्थ्य पर प्रभाव (Health Impact)
- श्वसन रोग: अस्थमा (Asthma), ब्रोंकाइटिस (Bronchitis), COPD जैसी बीमारियाँ बढ़ती हैं। PM 2.5 फेफड़ों में प्रवेश करता है।
- आँखों में जलन: कोहरे में मिश्रित रसायन आँखों और गले में जलन पैदा करते हैं।
- शीतलहर से मौत: बेघर और वृद्ध लोग ठंड-कोहरे के संयोजन से मर जाते हैं। बिहार में प्रतिवर्ष शीत-मृत्यु की घटनाएँ।
- हाइपोथर्मिया: शरीर का तापमान असामान्य रूप से गिर जाना — बच्चों और बुजुर्गों में खतरनाक।
- मानसिक स्वास्थ्य: लंबे समय तक सूर्यप्रकाश न मिलने से अवसाद (SAD — Seasonal Affective Disorder) के लक्षण।
4. आर्थिक एवं सामाजिक प्रभाव
- माल-ढुलाई में देरी से लागत बढ़ती है
- पर्यटन स्थलों (बोधगया, नालंदा, वैशाली) पर असर
- रबी फसल को नुकसान — कृषि GDP पर प्रभाव
- उड़ानें रद्द — एयरपोर्ट को राजस्व हानि
- स्कूल/कॉलेज देर से खुलते हैं या बंद रहते हैं
- दैनिक मजदूरों को काम नहीं मिलता
- बाजारों में ग्राहकी कम होती है
- महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ता है
कोहरे से बचाव एवं सरकारी उपाय (Mitigation Measures)
बिहार सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने कोहरे से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्रशासनिक, तकनीकी और जागरूकता आधारित उपाय लागू किए हैं।
- राजमार्गों पर Fog Lights और Reflective Strips लगाना
- रेलवे में Fog Safety Device (FSD) का उपयोग
- हवाई अड्डे पर CAT-III ILS तकनीक की स्थापना
- स्पीड लिमिट में कमी — NH पर 40–60 km/h
- High Mast Lights और LED साइनेज
- अलाव केंद्र (Bonfire Points) की स्थापना
- Night Shelters (रैन बसेरा) बेघरों के लिए
- स्वास्थ्य विभाग द्वारा कंबल वितरण
- Cold Wave Alert पर स्कूल बंद रखने का आदेश
- आयुष्मान भारत अस्पतालों में विशेष व्यवस्था
- SAFAR (System of Air Quality and Weather Forecasting)
- पटना IMD केंद्र द्वारा 3–5 दिन पूर्व Fog Advisory
- Color-coded Alerts: Yellow / Orange / Red
- मोबाइल SMS अलर्ट किसानों को
- Doordarshan और AIR से प्रसारण
- वृक्षारोपण — वन आच्छादन 9.79% से बढ़ाना
- पराली जलाने पर प्रतिबंध और जागरूकता
- उद्योगों में उत्सर्जन नियंत्रण
- BS-VI वाहन मानक लागू करना
- स्मार्ट हाईवे परियोजनाएँ
व्यक्तिगत बचाव के उपाय
- वाहन चालक: Fog Lights जलाएँ, Low Beam का उपयोग करें, गति धीमी रखें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- पैदल यात्री: चमकीले/रंगीन कपड़े पहनें, बहुत जरूरी हो तभी बाहर निकलें।
- किसान: फसलों पर Fungicide छिड़काव करें; कोहरे के बाद नमी हटाएँ।
- स्वास्थ्य: मास्क (N95) पहनें, बुजुर्गों-बच्चों को बाहर न जाने दें, गर्म पेय लें।
- किसान सलाह: IMD की Agromet Advisory नियमित सुनें।


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