गरीबी निर्मूलन योजना — अंत्योदय, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (NFSA), PMAY
परिचय — गरीबी निर्मूलन के राष्ट्रीय प्रयास
भारत में गरीबी निर्मूलन एक दीर्घकालीन सामाजिक-आर्थिक लक्ष्य है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने तीन प्रमुख योजनाएँ चलाई हैं: अंत्योदय अन्न योजना (AAY), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), और प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY)। ये योजनाएँ खाद्य सुरक्षा, आवास और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास करती हैं।
गरीबी निर्मूलन की रणनीति
भारत की गरीबी निर्मूलन रणनीति तीन स्तंभों पर आधारित है: खाद्य सुरक्षा (भूख से मुक्ति), आवास सुरक्षा (सुरक्षित रहने की जगह), और आय सृजन (रोजगार और कौशल विकास)। ये योजनाएँ विशेषकर ग्रामीण भारत और शहरी झुग्गी-झोपड़ियों में लागू की गई हैं।
अंत्योदय अन्न योजना (AAY) — सबसे गरीब परिवारों के लिए
अंत्योदय अन्न योजना (AAY) को दिसंबर 2000 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य सबसे गरीब परिवारों (BPL) को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से सस्ते अनाज प्रदान करना है।
अंत्योदय योजना की मुख्य विशेषताएँ
- लक्ष्य समूह: सबसे गरीब परिवार (BPL की श्रेणी में सबसे नीचे), बुजुर्ग, विकलांग, विधवाएँ
- खाद्य सहायता: 35 किग्रा चावल/गेहूँ प्रति परिवार प्रति माह बहुत कम दर पर
- मूल्य निर्धारण: चावल ₹2 प्रति किग्रा, गेहूँ ₹1 प्रति किग्रा (2023 तक)
- वितरण: PDS दुकानों के माध्यम से राशन कार्ड धारकों को
- कवरेज: लगभग 1 करोड़ परिवार (राष्ट्रीय स्तर पर)
| पहलू | विवरण | महाराष्ट्र में स्थिति |
|---|---|---|
| शुरुआत वर्ष | दिसंबर 2000 | तुरंत लागू |
| लाभार्थी परिवार | सबसे गरीब BPL परिवार | ~25 लाख परिवार |
| मासिक अनाज | 35 किग्रा (चावल/गेहूँ) | समान दर |
| मूल्य (चावल) | ₹2 प्रति किग्रा | समान दर |
| वितरण माध्यम | PDS दुकानें | ~1,50,000 दुकानें |
अंत्योदय योजना की सफलता और चुनौतियाँ
लाखों परिवारों को खाद्य असुरक्षा से बचाया, कुपोषण में कमी, सामाजिक सुरक्षा जाल मजबूत किया।
लाभार्थी पहचान में त्रुटि, PDS में भ्रष्टाचार, अधूरा कवरेज, राशन कार्ड में विलंब।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) को सितंबर 2013 में संसद द्वारा पारित किया गया था। यह एक ऐतिहासिक कानून है जो खाद्य सुरक्षा को एक कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता देता है, न कि केवल एक कल्याणकारी योजना।
NFSA की मुख्य विशेषताएँ
- कानूनी अधिकार: खाद्य सुरक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में स्वीकृति
- लाभार्थी कवरेज: ग्रामीण भारत का 75%, शहरी भारत का 50% आबादी
- खाद्य सहायता: प्रति व्यक्ति 5 किग्रा अनाज प्रति माह (चावल ₹3, गेहूँ ₹2 प्रति किग्रा)
- अंत्योदय परिवार: 35 किग्रा अनाज प्रति परिवार प्रति माह (अतिरिक्त लाभ)
- पोषण समर्थन: गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ, बच्चों को विशेष पोषण
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS): NFSA के तहत PDS को सुदृढ़ किया गया
NFSA के तहत लाभार्थी श्रेणियाँ
महाराष्ट्र में NFSA का कार्यान्वयन
महाराष्ट्र में NFSA के तहत लगभग 2.5 करोड़ लाभार्थी पंजीकृत हैं। राज्य ने PDS को डिजिटलीकृत किया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है। विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में कृषि संकट के कारण NFSA की भूमिका महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) — आवास सुरक्षा
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) को जून 2015 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य 2022 तक सभी को पक्का मकान प्रदान करना है। यह योजना गरीबी निर्मूलन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, क्योंकि आवास सुरक्षा मानव गरिमा का आधार है।
PMAY की मुख्य विशेषताएँ
- लक्ष्य: 2 करोड़ घर निर्माण (ग्रामीण 1 करोड़, शहरी 1 करोड़)
- लाभार्थी: BPL परिवार, EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग), LIG (निम्न आय वर्ग)
- वित्तीय सहायता: ₹1.5 लाख से ₹2.5 लाख तक सब्सिडी (ग्रामीण)
- शहरी PMAY: ₹2.5 लाख से ₹10 लाख तक सब्सिडी (आय के आधार पर)
- निर्माण मानक: न्यूनतम 20 वर्ग मीटर (ग्रामीण), 30 वर्ग मीटर (शहरी)
- बैंक ऋण: PMAY के तहत सस्ते ब्याज दर पर होम लोन
PMAY के दो घटक
उद्देश्य: ग्रामीण भारत में 1 करोड़ पक्के मकान बनाना।
- लाभार्थी: BPL परिवार, SC/ST, अल्पसंख्यांक
- सहायता: ₹1.5 लाख (मैदानी क्षेत्र), ₹1.75 लाख (पहाड़ी क्षेत्र)
- निर्माण: लाभार्थी स्वयं निर्माण करते हैं, सरकार सामग्री और मजदूरी देती है
- कवरेज: महाराष्ट्र में ~50 लाख घर निर्मित
उद्देश्य: शहरी झुग्गी-झोपड़ियों को पक्के मकानों में बदलना।
- लाभार्थी: EWS, LIG शहरी परिवार
- सहायता: ₹2.5 लाख (EWS), ₹5 लाख (LIG) तक सब्सिडी
- निर्माण: सरकार या निजी डेवलपर द्वारा निर्माण
- कवरेज: मुंबई, पुणे, नागपुर आदि शहरों में व्यापक कार्यान्वयन
महाराष्ट्र में PMAY की प्रगति
| पहलू | लक्ष्य | महाराष्ट्र में उपलब्धि (2023) |
|---|---|---|
| ग्रामीण घर | 1 करोड़ | ~50 लाख निर्मित |
| शहरी घर | 1 करोड़ | ~15 लाख निर्मित |
| कुल निवेश | ₹5 लाख करोड़ | ₹2.5 लाख करोड़ व्यय |
| रोजगार सृजन | 3 करोड़ व्यक्ति-दिन | 1.5 करोड़ व्यक्ति-दिन |
महाराष्ट्र में कार्यान्वयन और प्रभाव
महाराष्ट्र में गरीबी निर्मूलन योजनाओं का कार्यान्वयन अन्य राज्यों की तुलना में अधिक प्रभावी रहा है। राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था और शहरी केंद्रों की मजबूत उपस्थिति ने इन योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद की है।
महाराष्ट्र में गरीबी निर्मूलन योजनाओं का कवरेज
विदर्भ-मराठवाड़ा में विशेष प्रभाव
विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में कृषि संकट, किसान आत्महत्याएँ, और उच्च बेरोजगारी के कारण गरीबी अधिक है। इन क्षेत्रों में:
- NFSA: खाद्य असुरक्षा को 40% तक कम किया है
- PMAY: ग्रामीण आवास में 70% की वृद्धि लाई है
- अंत्योदय: सबसे गरीब परिवारों को मासिक 35 किग्रा अनाज प्रदान करता है
- रोजगार सृजन: PMAY के तहत ~2 लाख व्यक्ति-दिन रोजगार
डिजिटलीकरण और पारदर्शिता
महाराष्ट्र ने PDS को डिजिटलीकृत किया है, जिससे:
ऑनलाइन पंजीकरण, ई-राशन कार्ड, और डिजिटल लेनदेन से भ्रष्टाचार में कमी।
लाभार्थी सूची सार्वजनिक, PDS दुकानों की निगरानी, और शिकायत निवारण तंत्र।
आधार से जुड़ाव, जैव-मेट्रिक सत्यापन, और नकली लाभार्थियों की पहचान।
सामाजिक प्रभाव
- कुपोषण दर में 25% की कमी (2015-2023)
- बाल मृत्यु दर में 30% की गिरावट
- महिला सशक्तिकरण में वृद्धि (NFSA के तहत महिलाओं को प्राथमिकता)
- शिक्षा में सुधार (मिड-डे मील योजना के साथ NFSA का एकीकरण)
- आवास सुरक्षा से महिलाओं की सुरक्षा में सुधार
परीक्षा प्रश्न और सारांश
त्वरित संशोधन तालिका
इंटरैक्टिव MCQ प्रश्न
पिछले वर्षों के परीक्षा प्रश्न (PYQ)
- ग्रामीण PMAY: BPL परिवारों को ₹1.5-1.75 लाख की सहायता, लाभार्थी स्वयं निर्माण करते हैं, न्यूनतम 20 वर्ग मीटर क्षेत्र।
- शहरी PMAY: EWS/LIG परिवारों को ₹2.5-10 लाख की सहायता, सरकार/डेवलपर द्वारा निर्माण, न्यूनतम 30 वर्ग मीटर क्षेत्र।
ये तीनों योजनाएँ गरीबी निर्मूलन के तीन स्तंभ हैं:
- अंत्योदय: सबसे गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करता है।
- NFSA: खाद्य सुरक्षा को एक कानूनी अधिकार बनाता है और व्यापक कवरेज प्रदान करता है।
- PMAY: आवास सुरक्षा प्रदान करता है, जो गरीबी से बाहर निकलने का आधार है।
ये योजनाएँ मिलकर गरीबों को खाद्य, आवास, और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती हैं, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार होता है।


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