75 जिले (2023 में पुनर्गठन, पहले 33), 7 संभाग
जिलों का पुनर्गठन — 2023 का महत्वपूर्ण सुधार
राजस्थान में 26 अगस्त 2023 को एक ऐतिहासिक प्रशासनिक पुनर्गठन किया गया, जिसमें जिलों की संख्या 33 से बढ़ाकर 75 कर दी गई। यह निर्णय राजस्थान Rajasthan Govt Exam Preparation के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रशासनिक संरचना, स्थानीय शासन और भौगोलिक विभाजन से सीधे संबंधित है।
पुनर्गठन का उद्देश्य
- प्रशासनिक दक्षता: छोटे जिलों से स्थानीय प्रशासन अधिक प्रभावी और जनता के करीब हो सकता है।
- विकास केंद्रों का निर्माण: प्रत्येक जिले को आर्थिक विकास का केंद्र बनाने का प्रयास।
- जनसंख्या संतुलन: बड़े जिलों को छोटे जिलों में विभाजित करके जनसंख्या को संतुलित करना।
- स्थानीय शासन को मजबूत करना: पंचायती राज और नगरीय निकायों को अधिक प्रभावी बनाना।

33 से 75 जिलों तक — विस्तार का कारण
राजस्थान के जिलों की संख्या में यह वृद्धि केवल एक संख्यात्मक परिवर्तन नहीं है, बल्कि प्रशासनिक संरचना को पुनः परिभाषित करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस विस्तार के पीछे कई कारण हैं जो राजस्थान के विकास और शासन से संबंधित हैं।
विस्तार के मुख्य कारण
राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है (3,42,239 वर्ग किमी)। 33 जिलों में इतने बड़े क्षेत्र को प्रभावी ढंग से प्रशासित करना कठिन था।
कुछ जिलों की जनसंख्या बहुत अधिक थी (जयपुर, अलवर, कोटा), जिससे प्रशासनिक कार्य में बाधा आती थी।
छोटे जिलों से पंचायती राज और नगरीय निकायों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रत्येक जिले को एक विकास केंद्र के रूप में स्थापित करने से क्षेत्रीय असंतुलन को कम किया जा सकता है।
| पहलू | 33 जिलों की स्थिति | 75 जिलों की स्थिति |
|---|---|---|
| औसत क्षेत्रफल | ~10,370 वर्ग किमी | ~4,563 वर्ग किमी |
| प्रशासनिक दक्षता | कम (बड़े क्षेत्र) | अधिक (छोटे क्षेत्र) |
| जनता तक पहुंच | कठिन | आसान |
| विकास केंद्र | सीमित | अधिक |
7 संभाग — प्रशासनिक संरचना
राजस्थान को 7 संभागों (Divisions) में विभाजित किया गया है। संभाग जिलों के ऊपर एक प्रशासनिक स्तर है, जहां एक संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) सभी जिलों के कार्यों का समन्वय करता है। ये 7 संभाग हैं: जयपुर, जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर, और बीकानेर।
संभागीय संरचना का महत्व
- समन्वय केंद्र: संभाग जिलों के बीच नीति और कार्यान्वयन में समन्वय स्थापित करता है।
- निरीक्षण और पर्यवेक्षण: संभागीय आयुक्त सभी जिलों के प्रशासनिक कार्यों का निरीक्षण करता है।
- विकास योजनाएं: क्षेत्रीय विकास योजनाओं को लागू करने में संभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- कानून और व्यवस्था: संभाग स्तर पर कानून और व्यवस्था का समन्वय किया जाता है।

नए जिलों की सूची — 42 नए जिले
2023 के पुनर्गठन में 42 नए जिले जोड़े गए। ये नए जिले मुख्यतः पुराने जिलों को विभाजित करके बनाए गए हैं। इन नए जिलों के नाम और उनके मुख्यालय राजस्थान Rajasthan Govt Exam Preparation के लिए महत्वपूर्ण हैं।
नए जिलों का विभाजन
- जयपुर: जयपुर (विभाजित) → जयपुर, अमेठ, मालपुरा
- अलवर: अलवर (विभाजित) → अलवर, तिजारा
- दौसा: दौसा (विभाजित) → दौसा, रामगंज मंडी
- सीकर: सीकर (विभाजित) → सीकर, खिमसर
- जोधपुर: जोधपुर (विभाजित) → जोधपुर, बिलाड़ा
- बाड़मेर: बाड़मेर (विभाजित) → बाड़मेर, सिवाणा
- पाली: पाली (विभाजित) → पाली, सुमेरपुर
- नागौर: नागौर (विभाजित) → नागौर, मेड़ता सिटी
- अजमेर: अजमेर (विभाजित) → अजमेर, किशनगढ़
- भीलवाड़ा: भीलवाड़ा (विभाजित) → भीलवाड़ा, शाहपुरा
- टोंक: टोंक (विभाजित) → टोंक, देवली-उनियारा
- भरतपुर: भरतपुर (विभाजित) → भरतपुर, डीग
- धौलपुर: धौलपुर (विभाजित) → धौलपुर, राजाखेड़ी
- करौली: करौली (विभाजित) → करौली, सैयदपुरा
- कोटा: कोटा (विभाजित) → कोटा, झालावाड़
- बूंदी: बूंदी (विभाजित) → बूंदी, केशोरायपाटन
- उदयपुर: उदयपुर (विभाजित) → उदयपुर, गिरवा
- राजसमंद: राजसमंद (विभाजित) → राजसमंद, कुंभलगढ़
- चित्तौड़गढ़: चित्तौड़गढ़ (विभाजित) → चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़
- बांसवाड़ा: बांसवाड़ा (विभाजित) → बांसवाड़ा, झालावाड़
संभागीय विभाजन — 7 संभाग और उनके जिले
राजस्थान के 75 जिलों को 7 संभागों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक संभाग का एक मुख्यालय है और उसके अंतर्गत कई जिले आते हैं। यह संभागीय विभाजन प्रशासनिक कार्यों के समन्वय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
7 संभाग और उनके जिले
| संभाग | मुख्यालय | जिलों की संख्या | प्रमुख जिले |
|---|---|---|---|
| जयपुर | जयपुर | 13 | जयपुर, अलवर, दौसा, सीकर, झुंझुनूं, अमेठ, मालपुरा, तिजारा, रामगंज मंडी, खिमसर |
| जोधपुर | जोधपुर | 11 | जोधपुर, बाड़मेर, पाली, नागौर, जैसलमेर, बिलाड़ा, सिवाणा, सुमेरपुर, मेड़ता सिटी |
| अजमेर | अजमेर | 10 | अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक, किशनगढ़, शाहपुरा, देवली-उनियारा |
| भरतपुर | भरतपुर | 8 | भरतपुर, धौलपुर, करौली, डीग, राजाखेड़ी, सैयदपुरा |
| कोटा | कोटा | 7 | कोटा, बूंदी, झालावाड़, केशोरायपाटन |
| उदयपुर | उदयपुर | 16 | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, गिरवा, कुंभलगढ़, प्रतापगढ़ |
| बीकानेर | बीकानेर | 10 | बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, बीकानेर |
संभागीय विशेषताएं
परीक्षा प्रश्न — PYQ और MCQ
राजस्थान Rajasthan Govt Exam Preparation में जिलों और संभागों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। यहां कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं।
इंटरैक्टिव MCQ
पिछली परीक्षाओं के प्रश्न (PYQ)
- प्रशासनिक दक्षता में सुधार
- जनसंख्या का संतुलन
- स्थानीय शासन को मजबूत करना
- क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना
- जिलों के बीच समन्वय स्थापित करना
- नीति कार्यान्वयन में निरीक्षण
- क्षेत्रीय विकास योजनाओं का संचालन
- कानून और व्यवस्था का समन्वय
लाभ:
- प्रशासनिक दक्षता में सुधार
- जनता को प्रशासन के करीब लाना
- स्थानीय विकास को बढ़ावा देना
- पंचायती राज को मजबूत करना
- नई प्रशासनिक संरचना स्थापित करना
- कर्मचारियों की नियुक्ति
- बजट का आवंटन
- पुरानी व्यवस्था से नई व्यवस्था में संक्रमण
सही उत्तर: C — उदयपुर संभाग में 16 जिले हैं, जो सभी संभागों में सबसे अधिक है।

