अरावली का पर्यावरणीय महत्व — मरुस्थलीकरण रोकथाम
अरावली और मरुस्थलीकरण — परिचय
अरावली पर्वत श्रृंखला राजस्थान के पर्यावरणीय संतुलन का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो मरुस्थलीकरण (desertification) को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती है। यह विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वत श्रृंखला राजस्थान में लगभग 550 किमी तक विस्तृत है और थार मरुस्थल के विस्तार को रोकने का प्राकृतिक अवरोध है।
मरुस्थलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे रेगिस्तान में परिणत हो जाती है। राजस्थान के 60% से अधिक क्षेत्र पर थार मरुस्थल का विस्तार है, और अरावली इसी विस्तार को नियंत्रित करने का प्रमुख कारक है। यह पर्वत श्रृंखला न केवल एक भौतिक अवरोध है, बल्कि जलवायु, जल संसाधन, और जैव विविधता के संरक्षण का भी माध्यम है।

मरुस्थलीकरण की समस्या
राजस्थान में मरुस्थलीकरण एक गंभीर पर्यावरणीय संकट है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, भारत में 105.2 मिलियन हेक्टेयर भूमि मरुस्थलीकरण से प्रभावित है, जिसमें राजस्थान का योगदान सर्वाधिक है।
| मरुस्थलीकरण के कारण | प्रभाव | राजस्थान में स्थिति |
|---|---|---|
| अत्यधिक चराई | वनस्पति का विनाश, मिट्टी का क्षरण | पश्चिमी राजस्थान में गंभीर |
| वनों की कटाई | जल संरक्षण क्षमता में कमी | अरावली क्षेत्र में 40% वन हानि |
| अनुचित कृषि | मिट्टी की उर्वरता में कमी | सिंचित क्षेत्रों में लवणता की समस्या |
| जलवायु परिवर्तन | वर्षा में अनिश्चितता, तापमान वृद्धि | औसत वर्षा में 20% की कमी |
| खनन गतिविधियाँ | भूमि का विनाश, जल प्रदूषण | अरावली में अवैध खनन व्यापक |
राजस्थान में मरुस्थलीकरण की गति
राजस्थान में 1.5 मिलियन हेक्टेयर भूमि गंभीर मरुस्थलीकरण से प्रभावित है। पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर) में यह समस्या सबसे तीव्र है। अरावली के पश्चिमी ढलान पर स्थित क्षेत्रों में वर्षा मात्र 25-50 सेमी प्रति वर्ष है, जो मरुस्थलीकरण के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती है।
- कृषि उत्पादकता में गिरावट: मरुस्थलीकरण से कृषि भूमि की उत्पादकता में 20-30% की कमी
- जल संकट: भूजल स्तर में गिरावट और जल की गुणवत्ता में बिगड़ाव
- जैव विविधता का नुकसान: वन्यजीवों के आवास का विनाश
- आर्थिक संकट: ग्रामीण आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव
अरावली की सुरक्षात्मक भूमिका
अरावली पर्वत श्रृंखला राजस्थान के लिए एक प्राकृतिक अवरोध (natural barrier) के रूप में कार्य करती है जो थार मरुस्थल के विस्तार को रोकती है। इसकी सुरक्षात्मक भूमिका कई पर्यावरणीय और जलवायु संबंधी कारकों पर आधारित है।
अरावली में उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन, सागौन, धोक, गुर्जन जैसी प्रजातियाँ मिट्टी को स्थिर रखती हैं और वायु अपरदन को रोकती हैं।
अरावली की वनस्पति वर्षा के जल को अवशोषित करती है, भूजल पुनर्भरण को बढ़ाती है, और जल की उपलब्धता सुनिश्चित करती है।
पर्वत श्रृंखला शुष्क हवाओं (loo winds) को रोकती है और मिट्टी के कणों के विस्थापन को कम करती है।
वनस्पति का आवरण मिट्टी को वायु और जल अपरदन से बचाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।
अरावली के बिना परिणाम
यदि अरावली को हटा दिया जाए, तो राजस्थान का पूर्वी क्षेत्र (जयपुर, अलवर, दौसा) भी मरुस्थलीकरण का शिकार हो सकता है। अरावली के पूर्व में स्थित क्षेत्रों में वर्षा अपेक्षाकृत अधिक (50-100 सेमी) है, जो इस पर्वत श्रृंखला की सुरक्षात्मक भूमिका का प्रमाण है।

जलवायु विभाजक और वर्षा संरक्षण
अरावली पर्वत श्रृंखला राजस्थान का जलवायु विभाजक (climatic divide) है। यह पर्वत श्रृंखला दक्षिण-पश्चिम मानसून को अवरुद्ध करती है, जिससे पूर्वी राजस्थान में अधिक वर्षा होती है, जबकि पश्चिमी राजस्थान शुष्क रहता है।
वर्षा वितरण और अरावली
अरावली की पश्चिमी ढलान पर वर्षा मात्र 25-50 सेमी होती है, जबकि पूर्वी ढलान पर 50-100 सेमी वर्षा होती है। यह अंतर अरावली की ऊँचाई और मानसून को अवरुद्ध करने की क्षमता के कारण है। पर्वत श्रृंखला के पूर्व में स्थित क्षेत्रों में वनस्पति अधिक घनी है, जबकि पश्चिम में रेगिस्तान का विस्तार है।
| क्षेत्र | वार्षिक वर्षा (सेमी) | जलवायु प्रकार | वनस्पति |
|---|---|---|---|
| पूर्वी राजस्थान (अलवर, जयपुर) | 50-100 | अर्धशुष्क उष्णकटिबंधीय | पर्णपाती वन, घास |
| अरावली क्षेत्र (माउंट आबू, सिरोही) | 60-150 | समशीतोष्ण (उच्च ऊँचाई पर) | सागौन, धोक, गुर्जन |
| पश्चिमी राजस्थान (जैसलमेर, बाड़मेर) | 25-50 | शुष्क मरुस्थलीय | खेजड़ी, नीम, बबूल |
संरक्षण नीतियाँ और चुनौतियाँ
अरावली के पर्यावरणीय महत्व को समझते हुए, राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार ने कई संरक्षण नीतियाँ लागू की हैं। हालांकि, अवैध खनन, वनों की कटाई, और अनुचित विकास परियोजनाएँ इन प्रयासों को चुनौती दे रही हैं।
- वन संरक्षण अधिनियम, 1980: अरावली के वनों को संरक्षित वन (protected forest) के रूप में नामित किया गया है।
- राजस्थान वन नीति, 2010: वन आवरण को 25% तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- अरावली संरक्षण नीति: अरावली क्षेत्र में खनन पर प्रतिबंध और वनरोपण कार्यक्रम।
- राष्ट्रीय वन कार्य योजना: मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए वृक्षारोपण और वन संरक्षण।
- जल संरक्षण नीति: अरावली क्षेत्र में जल संचयन संरचनाओं का निर्माण।
चुनौतियाँ और समस्याएँ
अरावली के संरक्षण में कई गंभीर चुनौतियाँ हैं:
सफल संरक्षण पहल
कुछ क्षेत्रों में अरावली के संरक्षण में सफलता मिली है:
- राजस्थान वन विभाग: अरावली में 5 लाख से अधिक पेड़ों का रोपण किया गया है।
- NGO पहल: विभिन्न पर्यावरणीय संगठन अरावली के संरक्षण में सक्रिय हैं।
- सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों को अरावली संरक्षण में शामिल किया जा रहा है।
- कानूनी कार्रवाई: अवैध खनन के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

परीक्षा प्रश्न और सारांश
इंटरैक्टिव प्रश्न
त्वरित संशोधन तालिका
सारांश
परीक्षा प्रश्न (PYQ)
- थार मरुस्थल के विस्तार को रोकने का प्राकृतिक अवरोध है
- वन आवरण प्रदान करती है जो मिट्टी को स्थिर रखता है
- जलवायु विभाजक के रूप में कार्य करती है
- वर्षा के जल को अवशोषित करती है और भूजल पुनर्भरण बढ़ाती है
- वायु अपरदन को रोकती है
- अरावली दक्षिण-पश्चिम मानसून को अवरुद्ध करती है
- पूर्वी ढलान पर मानसून की नमी गिरती है, जिससे अधिक वर्षा (50-100 सेमी) होती है
- पश्चिमी ढलान पर मानसून की नमी समाप्त हो जाती है, जिससे कम वर्षा (25-50 सेमी) होती है
- यह जलवायु विभाजक की भूमिका है
- अवैध खनन: सीसा-जस्ता, संगमरमर आदि का अवैध खनन वनों को नष्ट करता है। समाधान: कानूनी कार्रवाई, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना।
- वनों की कटाई: ईंधन और निर्माण सामग्री के लिए वनों की कटाई। समाधान: वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत, सामुदायिक वनरोपण।
- अत्यधिक चराई: पशुओं की अत्यधिक संख्या से वनस्पति नष्ट होती है। समाधान: चराई पर नियंत्रण, पशुपालन को विनियमित करना।
- विकास परियोजनाएँ: सड़क, बाँध आदि परियोजनाएँ अरावली को नुकसान पहुँचाती हैं। समाधान: पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन, वैकल्पिक मार्ग।
- वन आवरण को 25% तक बढ़ाना
- मरुस्थलीकरण को रोकना
- जल संसाधनों का संरक्षण
- जैव विविधता का संरक्षण
- ग्रामीण आजीविका में सुधार
B. वनों की कटाई को प्रोत्साहित करना
C. वनरोपण और अवैध खनन पर प्रतिबंध
D. अत्यधिक चराई को प्रोत्साहित करना
सही उत्तर: C — वनरोपण और अवैध खनन पर प्रतिबंध अरावली के संरक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

