अरावली — विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वत
अरावली का परिचय एवं भौगोलिक विस्तार
अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे प्राचीन वलित (Folded) पर्वत श्रृंखला है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 692 किलोमीटर है। राजस्थान में इसका विस्तार लगभग 550 किलोमीटर तक है, जो इसे राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण भौतिक विशेषता बनाता है।
भौगोलिक विस्तार
अरावली पर्वत श्रृंखला गुजरात के पालनपुर से शुरू होकर दिल्ली के रिज तक विस्तृत है। इसका मुख्य विस्तार राजस्थान में है, जहाँ यह पूर्वोत्तर से दक्षिणपश्चिम दिशा में फैली हुई है। अरावली राजस्थान को दो भागों में विभाजित करती है — पश्चिमी शुष्क भाग और पूर्वी आर्द्र भाग।
- कुल लंबाई: 692 किलोमीटर (गुजरात से दिल्ली तक)
- राजस्थान में विस्तार: 550 किलोमीटर (कुल का 79.5%)
- दिशा: पूर्वोत्तर से दक्षिणपश्चिम (NE-SW)
- चौड़ाई: 10 से 100 किलोमीटर तक परिवर्तनशील
- औसत ऊँचाई: 500-900 मीटर

भूवैज्ञानिक संरचना और प्राचीनता
अरावली विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वत श्रृंखला है। इसका निर्माण प्रीकैम्ब्रियन काल (लगभग 1.7 अरब वर्ष पहले) में हुआ था, जो इसे हिमालय (5 करोड़ वर्ष) से भी पुरानी बनाता है।
भूवैज्ञानिक आयु और निर्माण
अरावली का निर्माण आर्कियन और प्रोटेरोजोइक ईऑन में हुआ था। इसकी चट्टानें मुख्यतः ग्रेनाइट, नीस, शिस्ट और क्वार्टजाइट से बनी हैं। समय के साथ इसका अपरदन हुआ और वर्तमान में यह एक अपरदित पर्वत श्रृंखला (Eroded Mountain Range) है।
| भूवैज्ञानिक काल | समय अवधि | अरावली की स्थिति |
|---|---|---|
| आर्कियन ईऑन | 4.0-2.5 अरब वर्ष पहले | प्रारंभिक निर्माण, ग्रेनाइट-नीस का विकास |
| प्रोटेरोजोइक ईऑन | 2.5-0.54 अरब वर्ष पहले | वलन (Folding) और रूपांतरण, खनिज निक्षेपण |
| पैलेओजोइक से वर्तमान | 54 करोड़ वर्ष से अब तक | तीव्र अपरदन, वर्तमान अपरदित रूप |
अपरदन और वर्तमान रूप
अरावली के प्राचीन होने के कारण इसका व्यापक अपरदन हुआ है। इसकी ऊँचाई समय के साथ घटी है। वर्तमान में यह निम्न से मध्यम ऊँचाई की पर्वत श्रृंखला है। इसके अपरदन से बनी मिट्टी और तलछट ने थार मरुस्थल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- चट्टान प्रकार: ग्रेनाइट, नीस, शिस्ट, क्वार्टजाइट, मार्बल
- खनिज संरचना: फेल्सपार, क्वार्ट्ज, माइका, फेरोमैग्नेशियन खनिज
- अपरदन दर: तीव्र, विशेषकर वर्षा वाले क्षेत्रों में
- वर्तमान अवस्था: अपरदित, निम्न-मध्य ऊँचाई की श्रृंखला
अरावली की भौतिक विशेषताएँ
अरावली की भौतिक विशेषताएँ इसे राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण भौतिक संरचना बनाती हैं। इसकी संरचना, ऊँचाई, दिशा और अभिविन्यास सभी राजस्थान की जलवायु, वनस्पति और मानव भूगोल को प्रभावित करते हैं।
संरचनात्मक विशेषताएँ
अरावली एक वलित पर्वत श्रृंखला (Folded Mountain Range) है, जिसका निर्माण भूसंचलन (Orogeny) के कारण हुआ। इसकी संरचना में समानांतर पर्वत श्रेणियाँ और अंतरवर्तीय घाटियाँ हैं। पर्वत श्रृंखला की दिशा पूर्वोत्तर-दक्षिणपश्चिम है।
ऊँचाई और विस्तार
अरावली की ऊँचाई 500 से 900 मीटर के बीच है, जिसमें कुछ शिखर 1,600 मीटर से अधिक हैं। राजस्थान में सर्वोच्च शिखर गुरु शिखर (1,722 मीटर) है, जो माउंट आबू पर स्थित है। अरावली की चौड़ाई 10 से 100 किलोमीटर तक परिवर्तनशील है।
जलवायु विभाजक की भूमिका
अरावली एक महत्वपूर्ण जलवायु विभाजक (Climatic Divide) है। इसके पश्चिम में शुष्क जलवायु (थार मरुस्थल) है, जबकि पूर्व में अर्ध-आर्द्र जलवायु है। यह पर्वत श्रृंखला दक्षिण-पश्चिम मानसून को रोकती है, जिससे पूर्वी भाग को अधिक वर्षा मिलती है।
- औसत ऊँचाई: 500-900 मीटर
- सर्वोच्च शिखर: गुरु शिखर (1,722 मीटर, माउंट आबू)
- चौड़ाई: 10-100 किलोमीटर
- दिशा: पूर्वोत्तर-दक्षिणपश्चिम (NE-SW)
- जलवायु प्रभाव: मानसून को रोकना, वर्षा वितरण को नियंत्रित करना

राजस्थान में अरावली का विस्तार
राजस्थान में अरावली का विस्तार लगभग 550 किलोमीटर है, जो कुल अरावली का 79.5% है। यह राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण भौतिक विशेषता है और राज्य को दो भागों में विभाजित करती है।
राजस्थान में भौगोलिक विस्तार
अरावली राजस्थान में उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में विस्तृत है। यह सिरोही जिले (माउंट आबू) से शुरू होकर अलवर जिले तक फैली हुई है। राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 10% अरावली पर्वत श्रृंखला द्वारा कवर किया जाता है।
जिलों में अरावली का विस्तार
अरावली राजस्थान के 8-10 जिलों से होकर गुजरती है। मुख्य जिले हैं: सिरोही, पाली, राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, जयपुर और अलवर। प्रत्येक जिले में अरावली की भौतिक विशेषताएँ और आर्थिक महत्व अलग-अलग हैं।
| जिला | अरावली की विशेषता | आर्थिक महत्व |
|---|---|---|
| सिरोही | सर्वोच्च शिखर (गुरु शिखर 1,722 मी) | पर्यटन, खनिज, कृषि |
| पाली | मुख्य पर्वत श्रृंखलाएँ, घाटियाँ | सीसा-जस्ता खनन, कृषि |
| राजसमंद | संगमरमर की खदानें, ऊँची श्रेणियाँ | संगमरमर निर्यात, पर्यटन |
| उदयपुर | घाटियाँ, झीलें, वन | पर्यटन, कृषि, वन उत्पाद |
| अजमेर | मध्यम ऊँचाई, ऐतिहासिक महत्व | पर्यटन, धार्मिक केंद्र |
| अलवर | निम्न ऊँचाई, उत्तरी विस्तार | कृषि, पर्यटन, वन |
अरावली से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
- राजस्थान में विस्तार: 550 किलोमीटर (कुल अरावली का 79.5%)
- राज्य के क्षेत्रफल में हिस्सा: लगभग 10%
- प्रमुख जिले: सिरोही, पाली, राजसमंद, उदयपुर, अजमेर, जयपुर, अलवर
- जलवायु विभाजन: पश्चिम में शुष्क, पूर्व में आर्द्र
- आर्थिक महत्व: खनिज, पर्यटन, कृषि, जल संसाधन
परीक्षा-केंद्रित महत्वपूर्ण तथ्य
अरावली पर्वत श्रृंखला राजस्थान सरकारी परीक्षाओं का एक महत्वपूर्ण विषय है। इसके बारे में परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न मुख्यतः इसकी भौगोलिक विशेषताओं, भूवैज्ञानिक संरचना, और राजस्थान में महत्व से संबंधित होते हैं।
मुख्य परीक्षा बिंदु
परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न के प्रकार
- अरावली की कुल लंबाई कितनी है?
- राजस्थान में अरावली का विस्तार कितना है?
- अरावली की दिशा क्या है?
- अरावली किन जिलों से होकर गुजरती है?
- अरावली की सर्वोच्च चोटी कौन सी है?
- अरावली कितनी पुरानी है?
- अरावली किस काल में बनी?
- अरावली की चट्टानें किस प्रकार की हैं?
- अरावली को विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला क्यों कहा जाता है?
- अरावली में कौन-कौन से खनिज पाए जाते हैं?
- अरावली जलवायु विभाजक कैसे है?
- अरावली के पश्चिम और पूर्व में जलवायु में क्या अंतर है?
- अरावली मानसून को कैसे प्रभावित करती है?
- अरावली का पर्यावरणीय महत्व क्या है?
- अरावली के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
महत्वपूर्ण संख्याएँ और तारीखें
- अरावली = विश्व की सबसे प्राचीन वलित पर्वत श्रृंखला — यह सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है
- 692 किमी कुल लंबाई, 550 किमी राजस्थान में — संख्याएँ याद रखें
- गुरु शिखर (1,722 मीटर) = राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी
- जलवायु विभाजक — पश्चिम में शुष्क, पूर्व में आर्द्र
- प्रीकैम्ब्रियन काल = 1.7 अरब वर्ष पहले — भूवैज्ञानिक आयु


