अरब सागर — लूनी, माही, साबरमती, पश्चिमी बनास, जाखम
परिचय और महत्व
राजस्थान की अरब सागर में विलीन होने वाली नदियां राज्य के दक्षिण-पश्चिमी भाग का जल प्रवाह नियंत्रित करती हैं। लूनी, माही, साबरमती, पश्चिमी बनास और जाखम ये पाँच प्रमुख नदियां राजस्थान की अर्थव्यवस्था, कृषि और जल संसाधन प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये नदियां Rajasthan Govt Exam में भूगोल खंड का एक आवश्यक विषय हैं।
अरब सागर की नदियों की विशेषताएं
- भौगोलिक स्थिति: ये नदियां अरावली पर्वत श्रेणी और थार मरुस्थल से उद्भूत होती हैं
- जल प्रवाह: मानसून पर अत्यधिक निर्भर, गर्मियों में सूख जाती हैं
- कृषि महत्व: सिंचाई के लिए बांध और नहरें निर्मित की गई हैं
- सीमांत नदियां: माही, साबरमती और लूनी राजस्थान की सीमा बनाती हैं

लूनी नदी
लूनी नदी राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण पश्चिमी नदी है जो अजमेर के नागपहाड़ (नाग पर्वत) से निकलती है और कच्छ के रण में विलीन हो जाती है। इसकी कुल लंबाई 495 किमी है, जिसमें से 330 किमी राजस्थान में है।
लूनी नदी का भौगोलिक मार्ग
लूनी नदी की सहायक नदियां
| सहायक नदी | उद्भव स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| सूकड़ी | नागपहाड़ से | लूनी की प्रमुख सहायक |
| मिठड़ी | पाली जिले से | दाहिनी ओर से मिलती है |
| गुहिया | अजमेर से | छोटी सहायक नदी |
| जवाई | मध्य प्रदेश से | पाली में मिलती है |
लूनी नदी की विशेषताएं
- खारापन: बालोतरा के बाद पानी खारा हो जाता है, इसलिए सिंचाई सीमित है
- मानसून निर्भर: वर्षा ऋतु में बाढ़, गर्मियों में सूख जाती है
- बांध: सूरतगढ़ बांध, लूनी बांध (जोधपुर)
- नहरें: इंदिरा गांधी नहर इसी से जुड़ी है
माही नदी
माही नदी राजस्थान की दक्षिणी सीमा नदी है जो मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से निकलती है और अरब सागर में गिरती है। इसे ‘दक्षिण की गंगा’ भी कहा जाता है। इसकी कुल लंबाई 576 किमी है, जिसमें से 172 किमी राजस्थान में है।
माही नदी का भौगोलिक महत्व
माही नदी का मार्ग और सहायक नदियां
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| उद्भव | मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से (विंध्य पर्वत से) |
| राजस्थान में प्रवेश | बांसवाड़ा जिले से |
| विलय | खंभात की खाड़ी (अरब सागर) में |
| प्रमुख सहायक | सोम, जाखम, अनास, मोरेन |
| बांध | माही बांध (बांसवाड़ा), कडाना बांध |
माही नदी की विशेषताएं
- वनवासी क्षेत्र: माही का बेसिन आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां भील और गरासिया जनजातियां रहती हैं
- जल विद्युत: माही बांध से बिजली उत्पादन होता है
- सीमा नदी: राजस्थान-गुजरात सीमा निर्धारित करती है
- पर्यटन: माही बांध के आसपास पर्यटन स्थल हैं

साबरमती, पश्चिमी बनास और जाखम
राजस्थान की अरब सागर में विलीन होने वाली नदियों में साबरमती, पश्चिमी बनास और जाखम भी महत्वपूर्ण हैं। ये नदियां राज्य के दक्षिण-पश्चिमी भाग में बहती हैं और स्थानीय कृषि को सहारा देती हैं।
साबरमती नदी
साबरमती नदी अरावली पर्वत श्रेणी से निकलती है और राजस्थान-गुजरात सीमा बनाती है। इसकी कुल लंबाई 371 किमी है, जिसमें से 48 किमी राजस्थान में है।
- सहायक नदियां: वाकल, हरनाई
- बांध: साबरमती बांध (धरोई)
- विशेषता: गुजरात में अहमदाबाद शहर इसी के किनारे बसा है
पश्चिमी बनास नदी
पश्चिमी बनास (या बनास पश्चिम) सिरोही जिले के अरावली पर्वत से निकलती है और गुजरात में अरब सागर में विलीन हो जाती है।
- विशेषता: छोटी नदी, मानसून पर निर्भर
- क्षेत्र: सिरोही जिले में बहती है
- महत्व: स्थानीय सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण
जाखम नदी
जाखम नदी माही नदी की प्रमुख सहायक नदी है। यह प्रतापगढ़ जिले से निकलती है और माही में मिलती है।
- बांध: जाखम बांध (प्रतापगढ़)
- क्षेत्र: वनवासी बहुल क्षेत्र
- कृषि: दालें, मक्का, तिलहन की खेती
तुलनात्मक विश्लेषण
अरब सागर में विलीन होने वाली सभी नदियों की तुलना करने से राजस्थान की जल प्रणाली की जटिलता समझ आती है। प्रत्येक नदी की अपनी विशेषताएं, सहायक नदियां और आर्थिक महत्व है।
नदियों की तुलनात्मक तालिका
| नदी | कुल लंबाई | राज में लंबाई | उद्भव स्थान | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| लूनी | 495 किमी | 330 किमी | अजमेर (नागपहाड़) | खारा पानी (बालोतरा के बाद) |
| माही | 576 किमी | 172 किमी | मध्य प्रदेश (इंदौर) | सीमा नदी, वनवासी क्षेत्र |
| साबरमती | 371 किमी | 48 किमी | अरावली (राजसमंद) | राज-गुज सीमा |
| पश्चिमी बनास | 180 किमी | ~80 किमी | सिरोही (अरावली) | छोटी नदी, स्थानीय महत्व |
| जाखम | ~90 किमी | ~90 किमी | प्रतापगढ़ (अरावली) | माही की सहायक |
नदियों के आधार पर क्षेत्रीय विभाजन
लूनी नदी पश्चिमी राजस्थान (जोधपुर, पाली, बाड़मेर) को सिंचित करती है। यह क्षेत्र अर्ध-शुष्क है।
माही नदी दक्षिणी राजस्थान (बांसवाड़ा, डूंगरपुर) को सिंचित करती है। यह वनवासी क्षेत्र है।
साबरमती राजस्थान-गुजरात सीमा बनाती है और राजसमंद जिले से निकलती है।
पश्चिमी बनास और जाखम अरावली पर्वत से निकलती हैं और स्थानीय कृषि को सहारा देती हैं।
सिंचाई और बांध प्रणाली
- लूनी: सूरतगढ़ बांध, लूनी बांध (जोधपुर), इंदिरा गांधी नहर से जुड़ी
- माही: माही बांध (बांसवाड़ा), कडाना बांध, जल विद्युत उत्पादन
- साबरमती: धरोई बांध (गुजरात में), सीमांत सिंचाई
- जाखम: जाखम बांध (प्रतापगढ़), स्थानीय सिंचाई

