eVidyarthi Govt Exam Preparation
Main Menu
  • School
    • CBSE English Medium
    • CBSE Hindi Medium
    • UP Board
    • Bihar Board
    • Maharashtra Board
    • MP Board
    • Close
  • Sarkari Exam Preparation
    • All Govt Exams Preparation
    • State Wise Competitive Exam Preparation
    • India – Notes for All Competitive Exams
    • MCQs & Notes for Competitive Exams
    • NCERT Syllabus for Competitive Exam
    • Close
  • Current Affairs
    • Current Affairs
    • Current Affairs Quizzes
    • State Wise Current Affairs
    • Monthly Current Affairs
    • Close
  • English
    • English Grammar for School
    • Basic English Grammar
    • Basic English Speaking
    • English Vocabulary
    • English Idioms & Phrases
    • Personality Enhancement
    • Interview Skills
    • Close
  • Study Abroad
    • Study in Australia
    • Study in Canada
    • Study in UK
    • Study in Germany
    • Study in USA
    • Close
  • Rajasthan MCQ for Competitive Exam
  • Rajasthan Notes for Competitive Exam
SELECT YOUR LANGUAGE
Home»राजस्थान का इतिहास History of Rajasthan»चौहान वंश — अजमेर, वासुदेव, विग्रहराज IV (बीसलदेव), पृथ्वीराज III
राजस्थान का इतिहास

चौहान वंश — अजमेर, वासुदेव, विग्रहराज IV, पृथ्वीराज III

Rajasthan Govt Exam Medieval Period Mains
📑 विषय-सूची
1 चौहान वंश का परिचय और उत्पत्ति 2 वासुदेव और प्रारंभिक शासक 3 विग्रहराज IV (बीसलदेव) — शक्तिशाली शासक 4 पृथ्वीराज III — अंतिम महान चौहान राजा 5 चौहान वंश की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ 6 परीक्षा प्रश्न और सारांश
खण्ड 1

चौहान वंश का परिचय और उत्पत्ति

चौहान वंश राजस्थान के सबसे प्रभावशाली राजपूत वंशों में से एक था, जिसका मुख्य केंद्र अजमेर था। यह वंश अग्निकुल सिद्धांत के अनुसार माउंट आबू की अग्नि से उत्पन्न माना जाता है। चौहान राजाओं ने 8वीं से 12वीं शताब्दी तक राजस्थान के विशाल भूभाग पर शासन किया और भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वंश की स्थापना और प्रारंभिक विकास

चौहान वंश की स्थापना वासुदेव द्वारा की गई थी, जो 8वीं शताब्दी के अंत में अजमेर क्षेत्र में शक्तिशाली हुए। प्रारंभ में चौहान राजा गुर्जर-प्रतिहार के अधीन सामंत थे, लेकिन धीरे-धीरे वे स्वतंत्र हो गए। अजमेर को चौहान वंश की राजधानी बनाया गया, जो व्यापार और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुई।

8वीं शताब्दी वंश की स्थापना
अजमेर राजधानी
12वीं शताब्दी चरम शक्ति
1192 ईस्वी तराइन की लड़ाई

भौगोलिक विस्तार

चौहान वंश के शासकों ने अपने राज्य का विस्तार दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तक किया। अजमेर केंद्रीय शक्ति के रूप में रहा, जबकि दिल्ली उत्तरी सीमा पर एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गई। इस विस्तृत साम्राज्य के कारण चौहान राजा चालुक्य, परमार और गहड़वाल राजाओं के साथ निरंतर संघर्ष में रहे।

ℹ️
अग्निकुल सिद्धांत चौहान, प्रतिहार, परमार और चालुक्य वंश को अग्निकुल में माना जाता है। कथा के अनुसार ये वंश माउंट आबू पर ऋषि वशिष्ठ द्वारा की गई अग्नि पूजा से उत्पन्न हुए।
Introduction and origin of Chauhan dynasty
खण्ड 2

वासुदेव और प्रारंभिक शासक

चौहान वंश के संस्थापक वासुदेव (लगभग 8वीं शताब्दी) ने अजमेर क्षेत्र में एक छोटी रियासत की स्थापना की। वह गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य के अधीन एक सामंत थे, लेकिन उन्होंने अपनी शक्ति को धीरे-धीरे बढ़ाया और स्वतंत्र राज्य की नींव डाली।

वासुदेव का शासनकाल

वासुदेव ने अजमेर को अपनी राजधानी बनाया और इसे एक सुदृढ़ किले में परिणत किया। उन्होंने स्थानीय राजपूत सामंतों को नियंत्रित किया और अपने राज्य की सीमाओं को विस्तृत किया। वासुदेव के समय में अजमेर एक व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ, जो सिल्क रूट पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।

प्रारंभिक चौहान राजा

वासुदेव के बाद के शासकों ने वंश की शक्ति को और मजबूत किया। सिंहराज, विग्रहराज I और II जैसे राजाओं ने गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य के कमजोर होने के साथ ही अपनी स्वतंत्रता घोषित की। 10वीं शताब्दी तक चौहान वंश एक प्रमुख शक्ति बन गया था।

8वीं शताब्दी
वासुदेव द्वारा चौहान वंश की स्थापना और अजमेर को राजधानी बनाया जाना।
9वीं शताब्दी
चौहान राज्य का विस्तार और अजमेर का व्यापारिक केंद्र के रूप में विकास।
10वीं शताब्दी
चौहान वंश की स्वतंत्रता और प्रमुख राजपूत शक्ति के रूप में प्रतिष्ठा।
✓
अजमेर का महत्व अजमेर चौहान वंश की राजधानी होने के साथ ही एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र भी बना। यहाँ ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह बाद में इस्लामिक संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनी।
खण्ड 3

विग्रहराज IV (बीसलदेव) — शक्तिशाली शासक

विग्रहराज IV (1153-1163 ईस्वी), जिन्हें बीसलदेव के नाम से भी जाना जाता है, चौहान वंश के सबसे शक्तिशाली शासकों में से एक थे। उनके शासनकाल में चौहान साम्राज्य अपनी सर्वोच्च शक्ति पर पहुँचा और उन्होंने उत्तरी भारत में एक प्रमुख शक्ति के रूप में अपनी स्थिति स्थापित की।

विग्रहराज IV की विजयें

विग्रहराज IV ने अपने शासनकाल में कई महत्वपूर्ण विजयें प्राप्त कीं। उन्होंने गहड़वाल राजा जयचंद्र को पराजित किया और कन्नौज पर अपना नियंत्रण स्थापित किया। उन्होंने गुजरात के चालुक्य राजा को भी चुनौती दी और अपने राज्य को दिल्ली से गुजरात तक विस्तृत किया। इन विजयों के कारण वह उत्तरी भारत का सबसे शक्तिशाली राजा बन गए।

सांस्कृतिक योगदान

विग्रहराज IV केवल एक योद्धा नहीं बल्कि एक विद्वान और संरक्षक भी थे। उन्होंने अजमेर में एक विश्वविद्यालय की स्थापना की, जहाँ संस्कृत, दर्शन और साहित्य की शिक्षा दी जाती थी। उन्होंने विष्णु मंदिर का निर्माण करवाया, जिसे बाद में ढाई दिन का झोंपड़ा के नाम से जाना गया। उनके दरबार में कवि पृथ्वीराज रासो के रचयिता चंदबरदाई जैसे विद्वान रहते थे।

विग्रहराज IV (बीसलदेव)

1153–1163 ईस्वी

चौहान वंश के सबसे शक्तिशाली शासक। उन्होंने उत्तरी भारत में चौहान साम्राज्य की सर्वोच्च शक्ति स्थापित की।

कन्नौज विजय विश्वविद्यालय संस्थापक संस्कृत संरक्षक
विषयविवरण
शासनकाल1153–1163 ईस्वी (10 वर्ष)
प्रमुख विजयकन्नौज, गहड़वाल, गुजरात के क्षेत्र
राजधानीअजमेर
सांस्कृतिक कार्यविश्वविद्यालय, विष्णु मंदिर, साहित्य संरक्षण
उपलब्धिउत्तरी भारत का सर्वशक्तिमान राजा
📚
ढाई दिन का झोंपड़ा विग्रहराज IV द्वारा निर्मित विष्णु मंदिर को बाद में मुहम्मद गोरी के सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने मस्जिद में परिवर्तित कर दिया। इसे ढाई दिन का झोंपड़ा कहा जाता है क्योंकि इसका निर्माण मात्र ढाई दिन में पूरा हुआ था।
Vigraharaja IV (Bisaladeva) powerful ruler
खण्ड 4

पृथ्वीराज III — अंतिम महान चौहान राजा

पृथ्वीराज III (1177-1192 ईस्वी), जिन्हें पृथ्वीराज चौहान के नाम से जाना जाता है, चौहान वंश के अंतिम महान राजा थे। वह भारतीय इतिहास में एक किंवदंती बन गए हैं और तराइन की लड़ाई में उनकी पराजय भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।

पृथ्वीराज III का शासनकाल

पृथ्वीराज III को मात्र 11 वर्ष की आयु में अजमेर का राजा बनाया गया। उन्होंने अपने शासनकाल में चौहान साम्राज्य को और भी विस्तृत किया। उन्होंने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और गुजरात के विशाल भूभाग पर शासन किया। उनके समय में चौहान साम्राज्य अपने सर्वोच्च विस्तार पर था।

तराइन की लड़ाई (1191-1192 ईस्वी)

पृथ्वीराज III का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक संघर्ष तराइन की लड़ाई था। मुहम्मद गोरी (घोर का शासक) ने भारत पर विजय के लिए आक्रमण किया। 1191 ईस्वी में पहली तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज III ने मुहम्मद गोरी को पराजित किया और उसे बंदी बना लिया। हालांकि, गोरी ने अगले साल फिर से आक्रमण किया।

1192 ईस्वी में दूसरी तराइन की लड़ाई में पृथ्वीराज III को भारी पराजय का सामना करना पड़ा। इस लड़ाई में उनके सेनापति गोविंद राय मारे गए। पृथ्वीराज III को बंदी बना लिया गया और बाद में उन्हें मार दिया गया। यह लड़ाई भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, क्योंकि इसके बाद दिल्ली पर मुस्लिम शासन की स्थापना हुई।

1177 ईस्वी
पृथ्वीराज III अजमेर के राजा बने (11 वर्ष की आयु में)।
1191 ईस्वी
पहली तराइन की लड़ाई — पृथ्वीराज III ने मुहम्मद गोरी को पराजित किया।
1192 ईस्वी
दूसरी तराइन की लड़ाई — पृथ्वीराज III की पराजय और बंदीकरण।
1192 ईस्वी के बाद
दिल्ली पर मुस्लिम शासन की स्थापना और चौहान वंश का पतन।

पृथ्वीराज रासो और किंवदंती

पृथ्वीराज III की कहानी पृथ्वीराज रासो नामक महाकाव्य में दर्ज है, जिसे चंदबरदाई ने लिखा था। इस महाकाव्य में पृथ्वीराज और संयोगिता की प्रेम कहानी का वर्णन है। किंवदंती के अनुसार, पृथ्वीराज को बंदी बनाने के बाद भी उन्होंने शब्दभेदी बाण से मुहम्मद गोरी को मार दिया था।

पृथ्वीराज III (पृथ्वीराज चौहान) 1177–1192 ईस्वी

चौहान वंश के अंतिम महान राजा। उन्होंने उत्तरी भारत में एक विशाल साम्राज्य पर शासन किया लेकिन तराइन की लड़ाई में मुहम्मद गोरी से पराजित हुए।

राजधानी अजमेर, दिल्ली
प्रमुख विजय कन्नौज, गुजरात
प्रसिद्ध लड़ाई तराइन (1191-1192)
विरोधी मुहम्मद गोरी
⚠️
तराइन की लड़ाई का महत्व तराइन की लड़ाई (विशेषकर 1192 ईस्वी की दूसरी लड़ाई) भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। इसके बाद दिल्ली पर मुस्लिम शासन की स्थापना हुई और राजपूत शक्ति का पतन शुरू हुआ।
खण्ड 5

चौहान वंश की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ

चौहान वंश केवल एक सैन्य शक्ति नहीं था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, साहित्य और वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण संरक्षक भी था। उनके शासनकाल में अजमेर एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ।

साहित्य और विद्वत्ता

चौहान राजाओं के दरबार में कई प्रसिद्ध कवि और विद्वान रहते थे। चंदबरदाई ने पृथ्वीराज रासो की रचना की, जो राजपूत वीरता का एक महान काव्य है। विग्रहराज IV के समय में संस्कृत साहित्य का विशेष विकास हुआ। उनके दरबार में हेमचंद्र जैसे प्रसिद्ध विद्वान भी आते थे।

वास्तुकला और मंदिर निर्माण

चौहान राजाओं ने कई महत्वपूर्ण मंदिरों का निर्माण करवाया। अजमेर में पृथ्वीराज मंदिर और विग्रहराज IV द्वारा निर्मित विष्णु मंदिर (ढाई दिन का झोंपड़ा) प्रसिद्ध हैं। ये मंदिर नागर शैली की वास्तुकला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

धार्मिक संरक्षण

चौहान राजा हिंदू धर्म के परम संरक्षक थे। उन्होंने वैष्णव और शैव दोनों संप्रदायों को संरक्षण दिया। उनके समय में अजमेर एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बन गया।

📚 साहित्य
पृथ्वीराज रासो, संस्कृत काव्य, दरबारी विद्वान।
🏛️ वास्तुकला
मंदिर निर्माण, नागर शैली, अजमेर विकास।
🙏 धर्म
हिंदू धर्म संरक्षण, तीर्थ स्थल विकास।

शिक्षा और विश्वविद्यालय

विग्रहराज IV ने अजमेर में एक विश्वविद्यालय की स्थापना की, जहाँ संस्कृत, दर्शन, गणित और ज्योतिष की शिक्षा दी जाती थी। यह विश्वविद्यालय नालंदा और तक्षशिला जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों के समान था।

  • विग्रहराज IV: अजमेर विश्वविद्यालय की स्थापना, विष्णु मंदिर निर्माण, संस्कृत साहित्य का संरक्षण।
  • पृथ्वीराज III: पृथ्वीराज रासो का संरक्षण, दरबारी विद्वानों का संरक्षण, अजमेर का विकास।
  • अन्य राजा: मंदिरों का निर्माण, धार्मिक अनुष्ठानों का संरक्षण, व्यापार मार्गों का विकास।
  • कला और हस्तशिल्प: चौहान राजाओं के समय में अजमेर में कई कुशल कारीगर और कलाकार रहते थे।
✍️
मुख्य परीक्षा उत्तर प्रश्न: चौहान वंश की सांस्कृतिक उपलब्धियों का वर्णन करें।
उत्तर: चौहान वंश ने साहित्य (पृथ्वीराज रासो), वास्तुकला (मंदिर निर्माण), शिक्षा (विश्वविद्यालय), और धार्मिक संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विग्रहराज IV और पृथ्वीराज III के समय में अजमेर एक सांस्कृतिक केंद्र बन गया।
खण्ड 6

परीक्षा प्रश्न और सारांश

चौहान वंश का सारांश

📋 सारांश
🏰
राजधानी
अजमेर चौहान वंश की मुख्य राजधानी था, जो व्यापार और संस्कृति का केंद्र बन गया।
👑
संस्थापक
वासुदेव ने 8वीं शताब्दी में चौहान वंश की स्थापना की और अजमेर को राजधानी बनाया।
⚔️
विग्रहराज IV
बीसलदेव के नाम से प्रसिद्ध, वह चौहान वंश के सबसे शक्तिशाली शासक थे।
🗡️
पृथ्वीराज III
अंतिम महान चौहान राजा, जो तराइन की लड़ाई में मुहम्मद गोरी से पराजित हुए।
📚
संस्कृति
साहित्य, वास्तुकला, शिक्षा और धार्मिक संरक्षण में चौहान वंश का महत्वपूर्ण योगदान।
📍
पतन
1192 ईस्वी में तराइन की दूसरी लड़ाई के बाद दिल्ली पर मुस्लिम शासन की स्थापना हुई।
🔑 चौहान वंश स्मरण सूत्र V – B – P – T
V = Vasudeva (वासुदेव) — संस्थापक B = Bisaldev (बीसलदेव/विग्रहराज IV) — सर्वशक्तिमान P = Prithviraj III (पृथ्वीराज III) — अंतिम महान T = Tarain (तराइन) — 1192 की लड़ाई, पतन

महत्वपूर्ण तथ्य

विषय
उत्तर
चौहान वंश की स्थापना
8वीं शताब्दी में वासुदेव द्वारा
राजधानी
अजमेर
विग्रहराज IV का काल
1153–1163 ईस्वी
पृथ्वीराज III का काल
1177–1192 ईस्वी
तराइन की पहली लड़ाई
1191 ईस्वी — पृथ्वीराज की जीत
तराइन की दूसरी लड़ाई
1192 ईस्वी — पृथ्वीराज की पराजय
ढाई दिन का झोंपड़ा
विग्रहराज IV द्वारा निर्मित विष्णु मंदिर
पृथ्वीराज रासो
चंदबरदाई द्वारा रचित महाकाव्य
चौहान वंश का पतन
1192 ईस्वी के बाद दिल्ली पर मुस्लिम शासन

इंटरैक्टिव प्रश्न

1 चौहान वंश की राजधानी कौन सी थी?
A. दिल्ली
B. अजमेर
C. कन्नौज
D. गुजरात
✅ उत्तर: B — अजमेर चौहान वंश की मुख्य राजधानी था और एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बन गया।
←◂ पिछला विषयगुर्जर-प्रतिहार वंश — नागभट्ट I-II, मिहिर भोज, कन्नौज, मंडोर, भीनमालअगला विषय ▸गुहिल/सिसोदिया वंश — मेवाड़, बप्पा रावल, राणा कुंभा, राणा सांगा, महाराणा प्रताप→
2 विग्रहराज IV को किस नाम से भी जाना जाता है?

Ads

UPSC, BPSC, MPPSC, UPPSC, RPSC :- Syllabus, Mock Test and Notes

Rajasthan Public Service Commission (RPSC) Syllabus, Mock Test and Notes.

Uttar Pradesh Public Service Commission (UPPSC) Syllabus, Mock Test and Notes.

Madhya Pradesh Public Service Commission (MPPSC) Syllabus, Mock Test and Notes.

Bihar Public Service Commission (BPSC) Syllabus, Mock Test and Notes.

SSC CHSL, SSC CPO, SSC Steno, SSC GD CGL Syllabus

SSC Combined Graduate Level Exam

UPSC, SSC & Railway Exams Syllabus, Mock Test, Videos, MCQ and Notes

At eVidyarthi, you can prepare for various SSC Combined Graduate Level Exams (SSC CGL, SSC CHSL, SSC CPO, SSC Stenographer). eVidyarthi offers SSC Mock Tests and SSC Pre Syllabus for Combined Graduate Level Exams (including SSC CGL Pre and SSC GD).

सरकारी Exam Preparation

Sarkari Exam Preparation Youtube

CBSE Board English Medium

  • Class 6 CBSE English Medium
  • Class 7 CBSE English Medium
  • Class 8 CBSE English Medium
  • Class 9 CBSE English Medium
  • Class 10 CBSE English Medium
  • Class 11 CBSE English Medium
  • Class 12 CBSE English Medium

CBSE Board Hindi Medium

  • Class 6 CBSE Hindi Medium
  • Class 7 CBSE Hindi Medium
  • Class 8 CBSE Hindi Medium
  • Class 9 CBSE Hindi Medium
  • Class 10 CBSE Hindi Medium
  • Class 11 CBSE Hindi Medium
  • Class 12 CBSE Hindi Medium

बिहार बोर्ड

  • Class 6 Bihar Board
  • Class 7 Bihar Board
  • Class 8 Bihar Board
  • Class 9 Bihar Board
  • Class 10 Bihar Board
  • Class 11 Bihar Board
  • Class 12 Bihar Board

उत्तर प्रदेश बोर्ड

  • Class 6 UP Board
  • Class 7 UP Board
  • Class 8 UP Board
  • Class 9 UP Board
  • Class 10 UP Board
  • Class 11 UP Board
  • Class 12 UP Board

महाराष्ट्र बोर्ड

  • Class 6 Maharashtra Board
  • Class 7 Maharashtra Board
  • Class 8 Maharashtra Board
  • Class 9 Maharashtra Board
  • Class 10 Maharashtra Board
  • Class 11 Maharashtra Board
  • Class 12 Maharashtra Board

मध्य प्रदेश बोर्ड

  • Class 6 MP Board
  • Class 7 MP Board
  • Class 8 MP Board
  • Class 9 MP Board
  • Class 10 MP Board
  • Class 11 MP Board
  • Class 12 MP Board

ગુજરાત બોર્ડ

  • Class 6 Gujarat Board
  • Class 7 Gujarat Board
  • Class 8 Gujarat Board
  • Class 9 Gujarat Board
  • Class 10 Gujarat Board
  • Class 11 Gujarat Board
  • Class 12 Gujarat Board

PSC Exam Preparation

  • Uttar Pradesh PSC Exam Preparation (UPPSC)
  • Bihar PSC Exam Preparation (BPSC)
  • Madhya Pradesh PSC Exam Preparation (MPPSC)
  • Rajasthan PSC Exam Preparation (RPSC)
  • Maharashtra PSC Exam Preparation (MPSC)
Install App

Install our app for the best experience!

Install App

Install our app for the best experience!

Privacy Policies, Terms and Conditions, About Us, Contact Us
Copyright © 2026 eVidyarthi and its licensors. All Rights Reserved.