दलहन — मोठ, मूंग, चना, ग्वार
ग्वार गम — विश्व का #1 उत्पादक | Rajasthan Govt Exam Preparation
दलहन का परिचय और महत्व
दलहन राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग हैं। ये फलीदार पौधे हैं जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं और मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं। राजस्थान में मोठ, मूंग, चना और ग्वार प्रमुख दलहन फसलें हैं।
दलहन का महत्व
- पोषण: प्रोटीन का मुख्य स्रोत — 20-25% प्रोटीन सामग्री
- मृदा सुधार: नाइट्रोजन स्थिरीकरण से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है
- आय स्रोत: किसानों के लिए नकद फसल और आजीविका
- खाद्य सुरक्षा: भारतीय आहार में दालें अनिवार्य हैं
- निर्यात: ग्वार गम का विश्व बाजार में उच्च मूल्य

मोठ — सूखा सहन करने वाली दलहन
मोठ राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण दलहन फसल है, विशेषकर पश्चिमी और दक्षिणी जिलों में। यह सूखा सहन करने वाली फसल है और रेतीली मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| वैज्ञानिक नाम | Vigna aconitifolia |
| बुवाई का समय | जुलाई-अगस्त (मानसून) |
| कटाई का समय | अक्टूबर-नवंबर |
| प्रमुख क्षेत्र | बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर |
| वार्षिक उत्पादन | 8-10 लाख टन |
| प्रोटीन सामग्री | 22-24% |
मोठ की विशेषताएं
- सूखा सहन: न्यूनतम वर्षा (250-500 मिमी) में उगाई जा सकती है
- मिट्टी: रेतीली, बलुई दोमट और लवणीय मिट्टी में उपयुक्त
- पशु चारा: पौधे का उपयोग पशु चारे के रूप में भी होता है
- अवधि: 90-120 दिन की अवधि में तैयार हो जाती है
- उपज: 8-12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
मोठ का उपयोग
- मानव भोजन: दाल के रूप में पकाई जाती है, पाचन में आसान
- पशु आहार: भूसा और पत्तियां पशुओं के लिए पोषक चारा
- मृदा सुधार: नाइट्रोजन स्थिरीकरण से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है
मूंग — ग्रीष्मकालीन दलहन
मूंग एक ग्रीष्मकालीन दलहन है जो गर्मी और नमी दोनों को सहन कर सकती है। राजस्थान में इसकी खेती पूर्वी और दक्षिणी जिलों में की जाती है, विशेषकर सिंचित क्षेत्रों में।
मूंग की विशेषताएं
- जलवायु: 25-35°C तापमान में सर्वोत्तम वृद्धि
- वर्षा: 50-75 सेमी वार्षिक वर्षा आवश्यक
- मिट्टी: दोमट और बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त
- उपज: 10-15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (सिंचित)
- प्रोटीन: 24-26% प्रोटीन सामग्री
- बीज दर: 15-20 किग्रा प्रति हेक्टेयर
- बीज उपचार: ट्राइकोडर्मा से उपचारित करें
- पंक्ति दूरी: 30 सेमी की दूरी पर बुवाई करें
- निराई: 30-40 दिन बाद निराई करें
- सिंचाई: गर्मी में 2-3 सिंचाई आवश्यक
- कटाई: जब पत्तियां पीली पड़ जाएं तो कटाई करें

चना — शीतकालीन दलहन
चना राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण शीतकालीन दलहन है। यह अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती है और मार्च-अप्रैल में कटाई की जाती है। राजस्थान भारत में चने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
चने की किस्में
चने की खेती की जानकारी
- तापमान: 15-25°C अनुकूल तापमान
- वर्षा: 40-60 सेमी वार्षिक वर्षा पर्याप्त
- मिट्टी: दोमट, बलुई दोमट और काली मिट्टी उपयुक्त
- प्रमुख क्षेत्र: अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बीकानेर
- उपज: 15-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
- प्रोटीन: 20-22% प्रोटीन सामग्री
ग्वार — ग्वार गम का स्रोत (#1 विश्व)
ग्वार राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण नकद दलहन फसल है। ग्वार गम का उत्पादन राजस्थान विश्व में #1 स्थान पर है। यह औद्योगिक उपयोग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ग्वार की विशेषताएं
- वैज्ञानिक नाम: Cyamopsis tetragonoloba
- बुवाई: जुलाई-अगस्त में बुवाई
- कटाई: अक्टूबर-नवंबर में कटाई
- तापमान: 25-35°C में सर्वोत्तम वृद्धि
- वर्षा: 40-50 सेमी वार्षिक वर्षा पर्याप्त
- मिट्टी: रेतीली, बलुई दोमट और दोमट मिट्टी उपयुक्त
ग्वार गम — औद्योगिक महत्व
| उपयोग क्षेत्र | विवरण | प्रतिशत |
|---|---|---|
| तेल उद्योग | तेल निष्कर्षण में गाढ़ापन बढ़ाने के लिए | 50-55% |
| खाद्य उद्योग | आइसक्रीम, दही, सॉस में गाढ़ापन | 20-25% |
| कागज उद्योग | कागज की गुणवत्ता बढ़ाने में | 10-15% |
| दवा उद्योग | दवाओं में बाइंडर के रूप में | 5-10% |
| अन्य उद्योग | कॉस्मेटिक्स, टेक्सटाइल आदि | 5% |
ग्वार के प्रमुख उत्पादक जिले
- बीकानेर: राजस्थान का सबसे बड़ा ग्वार उत्पादक जिला
- जैसलमेर: रेतीली मिट्टी में अच्छी पैदावार
- नागौर: बड़े पैमाने पर ग्वार की खेती
- जोधपुर: सूखे क्षेत्र में महत्वपूर्ण फसल
- बाड़मेर: सीमांत क्षेत्र में ग्वार खेती
- निर्यात: राजस्थान से विश्व के 50+ देशों को निर्यात होता है
- मूल्य: ग्वार गम का अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उच्च मूल्य
- मांग: तेल उद्योग में तेजी से बढ़ती मांग
- आय: किसानों के लिए सर्वोच्च आय वाली दलहन फसल
परीक्षा प्रश्न और सारांश
त्वरित संशोधन तालिका
अभ्यास प्रश्न
- पोषण: दालें प्रोटीन का मुख्य स्रोत हैं। भारतीय आहार में दालें अनिवार्य हैं।
- मृदा सुधार: दलहन नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
- आर्थिक लाभ: किसानों के लिए आय का मुख्य स्रोत। ग्वार गम का अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उच्च मूल्य।
- निर्यात: ग्वार गम का विश्व के 50+ देशों को निर्यात होता है। विदेशी मुद्रा अर्जन।
- फसल चक्र: दलहन फसल चक्र का महत्वपूर्ण अंग है। अगली फसल के लिए नाइट्रोजन प्रदान करती है।
- जलवायु: 25-35°C तापमान में सर्वोत्तम वृद्धि। 40-50 सेमी वार्षिक वर्षा पर्याप्त।
- मिट्टी: रेतीली, बलुई दोमट और दोमट मिट्टी उपयुक्त। राजस्थान की पश्चिमी मिट्टी आदर्श है।
- क्षेत्र: बीकानेर, जैसलमेर, नागौर, जोधपुर में आदर्श परिस्थितियां हैं।
- सूखा सहन: ग्वार सूखा सहन करने वाली फसल है, जो राजस्थान के सूखे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।
- उपज: अनुकूल परिस्थितियों में 15-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिलती है।


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