एकसदनीय विधानमंडल — 200 सदस्य (1 Anglo-Indian अब समाप्त)
परिचय — एकसदनीय विधानमंडल की संरचना
राजस्थान की विधानसभा एक एकसदनीय (Unicameral) विधानमंडल है, जिसमें कुल 200 सदस्य हैं। यह संरचना राजस्थान के संविधान के अनुच्छेद 168 द्वारा निर्धारित की गई है और Rajasthan Govt Exam Preparation के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
राजस्थान में द्विसदनीय (Bicameral) विधानमंडल की व्यवस्था नहीं है। यह सीधे जनता द्वारा निर्वाचित सदस्यों से बना है। विधानसभा का मुख्य कार्य राज्य के लिए कानून बनाना, बजट को मंजूरी देना और सरकार पर नियंत्रण रखना है।

200 सदस्यों की संख्या — आवंटन और आरक्षण
राजस्थान विधानसभा के 200 सदस्य विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों (Constituencies) से निर्वाचित होते हैं। ये सदस्य सामान्य सीटों, अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित सीटों और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित सीटों में विभाजित होते हैं।
200 सदस्यों का आवंटन निम्नलिखित प्रकार से किया गया है:
| सीट का प्रकार | संख्या | विवरण |
|---|---|---|
| सामान्य सीटें | 131 | किसी भी वर्ग के उम्मीदवार के लिए खुली सीटें |
| SC आरक्षित सीटें | 25 | अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित |
| ST आरक्षित सीटें | 34 | अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित |
| Anglo-Indian सीटें | 1 (समाप्त) | पहले Anglo-Indian समुदाय के लिए, अब समाप्त |
| कुल | 200 | राजस्थान विधानसभा की कुल सदस्य संख्या |
SC और ST आरक्षण का महत्व
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के तहत, राजस्थान में SC और ST समुदायों के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं। यह सुनिश्चित करता है कि ये समुदाय विधानसभा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त करें।
राजस्थान की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों का अनुपात लगभग 17-18% है, जिसके अनुसार 25 सीटें आरक्षित की गई हैं।
अनुसूचित जनजातियों का अनुपात लगभग 13-14% है। राजस्थान में जनजाति जनसंख्या अधिक होने के कारण 34 सीटें आरक्षित हैं।
Anglo-Indian सदस्य — समाप्ति और संवैधानिक परिवर्तन
राजस्थान विधानसभा में पहले 1 Anglo-Indian सदस्य की व्यवस्था थी, लेकिन यह व्यवस्था अब समाप्त हो गई है। यह परिवर्तन भारतीय संविधान में किए गए 104वें संशोधन (2019) के कारण हुआ।
Anglo-Indian सदस्य की पृष्ठभूमि
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 333 में Anglo-Indian समुदाय के लिए राज्य विधानसभाओं में सदस्य नामांकित करने की व्यवस्था थी। यह व्यवस्था अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व देने के लिए की गई थी।
104वां संवैधानिक संशोधन (2019)
यह संशोधन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 331 और 333 में किया गया था। इसके तहत:
- लोकसभा में Anglo-Indian सदस्य: 2 सदस्यों की व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
- राज्य विधानसभाओं में Anglo-Indian सदस्य: राजस्थान सहित सभी राज्यों में 1-1 सदस्य की व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
- कारण: 70 साल बाद यह माना गया कि Anglo-Indian समुदाय अब अल्पसंख्यक नहीं रह गया है और सामान्य निर्वाचन प्रक्रिया में भाग ले सकता है।

सदस्यों की योग्यता और निर्वाचन प्रक्रिया
राजस्थान विधानसभा के सदस्य बनने के लिए उम्मीदवारों को कुछ योग्यताएं (Qualifications) पूरी करनी होती हैं। ये योग्यताएं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 173 में निर्धारित की गई हैं।
विधानसभा सदस्य बनने के लिए योग्यताएं
- भारतीय नागरिक: उम्मीदवार भारत का नागरिक होना चाहिए।
- आयु: कम से कम 25 वर्ष की आयु होनी चाहिए।
- मतदाता: राजस्थान के किसी निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत मतदाता होना चाहिए।
- निवास: राजस्थान में निवास करना चाहिए।
- पागलपन: किसी मानसिक रोग से पीड़ित नहीं होना चाहिए।
- कर्ज: सरकार से कोई बकाया कर्ज नहीं होना चाहिए।
- अपराध: किसी गंभीर अपराध के लिए दोषी नहीं होना चाहिए।
- सरकारी नौकरी: केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कोई लाभजनक पद नहीं रखना चाहिए।
निर्वाचन प्रक्रिया
राजस्थान विधानसभा के सदस्यों का निर्वाचन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (Universal Adult Suffrage) के आधार पर होता है। 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी भारतीय नागरिक मतदान कर सकता है।
- निर्वाचन क्षेत्र: राजस्थान को 200 निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
- मतदान: प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र से एक सदस्य का चुनाव होता है।
- बहुमत: जो उम्मीदवार सर्वाधिक मत प्राप्त करता है, वह निर्वाचित होता है।
- कार्यकाल: निर्वाचित सदस्य 5 वर्ष के लिए विधानसभा में रहते हैं।
- पुनः निर्वाचन: कार्यकाल समाप्त होने के बाद सदस्य दोबारा चुनाव लड़ सकते हैं।
विधानसभा की शक्तियां और कार्य
राजस्थान विधानसभा के 200 सदस्य मिलकर राज्य के लिए कानून बनाते हैं, बजट को मंजूरी देते हैं और सरकार पर नियंत्रण रखते हैं। ये शक्तियां भारतीय संविधान के अनुच्छेद 194-229 में निर्धारित की गई हैं।
विधानसभा की मुख्य शक्तियां
विधानसभा के कार्य
विधानसभा का प्रमुख कार्य राज्य के लिए कानून बनाना है। कोई भी विधेयक निम्नलिखित चरणों से गुजरता है:
- प्रथम वाचन: विधेयक को पहली बार पढ़ा जाता है।
- द्वितीय वाचन: विधेयक पर विस्तृत चर्चा होती है।
- तृतीय वाचन: अंतिम मतदान होता है।
- राज्यपाल की स्वीकृति: पारित विधेयक राज्यपाल को भेजा जाता है।
वित्त मंत्री हर साल विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हैं। विधानसभा के सदस्य:
- बजट पर चर्चा करते हैं।
- विभिन्न विभागों के लिए धन आवंटन को मंजूरी देते हैं।
- कर संबंधी प्रस्तावों पर मतदान करते हैं।
- सार्वजनिक धन के उपयोग पर नियंत्रण रखते हैं।
विधानसभा सरकार पर निम्नलिखित तरीकों से नियंत्रण रखती है:
- प्रश्नकाल: सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछ सकते हैं।
- शून्यकाल: तत्काल महत्व के मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।
- ध्यानाकर्षण: किसी महत्वपूर्ण मामले की ओर ध्यान आकर्षित किया जा सकता है।
- अविश्वास प्रस्ताव: यदि सरकार को बहुमत का समर्थन नहीं है, तो सदस्य अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं।


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