जैव विविधता — वनस्पति, जीव-जंतु, विशिष्ट प्रजातियां
राजस्थान की जैव विविधता — परिचय
राजस्थान भारत की सबसे विविध जैव-भौगोलिक क्षेत्रों में से एक है, जहां मरुस्थलीय, अर्ध-शुष्क, अरावली पर्वतीय और आर्द्र पारिस्थितिकी तंत्र एक साथ पाए जाते हैं। यह विविधता राजस्थान को वनस्पति और जीव-जंतु प्रजातियों का एक समृद्ध भंडार बनाती है, जो Rajasthan Govt Exam Preparation के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जैव विविधता का महत्व
राजस्थान की जैव विविधता निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:
- पारिस्थितिकी संतुलन: विभिन्न पारिस्थितिक तंत्र पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखते हैं।
- आर्थिक मूल्य: वनस्पति और जीव-जंतु स्थानीय समुदायों के लिए भोजन, ईंधन और आजीविका का स्रोत हैं।
- वैज्ञानिक महत्व: अनुसंधान और औषधीय उपयोग के लिए अमूल्य संसाधन।
- पर्यटन: वन्यजीव पर्यटन राजस्थान की अर्थव्यवस्था में योगदान देता है।
वनस्पति विविधता — वन, घास, झाड़ियां
राजस्थान में वनस्पति विविधता जलवायु और मिट्टी की विविधता के अनुसार बदलती है। शुष्क क्षेत्रों में कांटेदार झाड़ियां, अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में घास और अरावली पर्वतों पर सदाबहार वन पाए जाते हैं।
वनस्पति के प्रमुख प्रकार
| वनस्पति प्रकार | क्षेत्र | प्रमुख प्रजातियां | विशेषताएं |
|---|---|---|---|
| कांटेदार झाड़ियां | पश्चिमी मरुस्थल | खेजड़ी, बबूल, नीम | कम वर्षा सहन करने वाली, गहरी जड़ें |
| घास के मैदान | अर्ध-शुष्क क्षेत्र | सेवण, धामण, मोठ | पशुचारण के लिए उपयोगी, मौसमी |
| सदाबहार वन | अरावली पर्वत | बांस, साल, आंवला | सदा हरे-भरे, अधिक वर्षा वाले क्षेत्र |
| आर्द्र क्षेत्र की वनस्पति | पूर्वी राजस्थान | ताड़, नारियल, आम | अधिक जल उपलब्ध, सघन वनस्पति |
महत्वपूर्ण वनस्पति प्रजातियां
जीव-जंतु विविधता — स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप
राजस्थान में 2,500 से अधिक जीव-जंतु प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप, उभयचर और कीट शामिल हैं। विविध पारिस्थितिक तंत्र विभिन्न प्रजातियों को आश्रय प्रदान करते हैं।
जीव-जंतु वर्गीकरण
शेर, बाघ, चीता, हिरण, नीलगाय, जंगली सूअर, लोमड़ी, जैकेल, साही।
बाज, गिद्ध, सारस, बत्तख, तीतर, उल्लू, कौआ, गौरैया, मैना।
कोबरा, अजगर, छिपकली, कछुआ, मगरमच्छ, गिरगिट।
प्रमुख जीव-जंतु प्रजातियां
शेर (Panthera leo)
गिर वन, गुजरात से राजस्थानबाघ (Panthera tigris)
अरावली क्षेत्रचीता (Acinonyx jubatus)
मरुस्थलीय क्षेत्रनीलगाय (Boselaphus tragocamelus)
अर्ध-शुष्क क्षेत्रपक्षी विविधता
राजस्थान 400 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर है। सांभर झील और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- शिकारी पक्षी: बाज, गिद्ध, उल्लू, चील
- जलीय पक्षी: बत्तख, सारस, बगुला, पेलिकन
- भूमि पक्षी: तीतर, बटेर, शुतुरमुर्ग, मोर
- प्रवासी पक्षी: साइबेरिया से आने वाली प्रजातियां (सर्दियों में)
संरक्षित प्रजातियां — लुप्तप्राय, संवेदनशील
राजस्थान में कई जीव-जंतु प्रजातियां संरक्षण की आवश्यकता के कारण कानूनी सुरक्षा प्राप्त हैं। ये प्रजातियां शिकार, आवास विनाश और जलवायु परिवर्तन के कारण खतरे में हैं।
संरक्षण स्थिति का वर्गीकरण
- शेर: राजस्थान में विलुप्त, केवल गिर वन (गुजरात) में पाए जाते हैं।
- चीता: भारत में पूरी तरह विलुप्त, पुनः परिचय परियोजना चल रही है।
- गैंडा: भारत में विलुप्त, असम में संरक्षित।
- बाघ: शिकार और आवास विनाश के कारण संख्या में कमी।
- तेंदुआ: शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण खतरे में।
- गिद्ध: दवाइयों के उपयोग से संख्या में तेजी से कमी।
- घड़ियाल: जलीय प्रदूषण के कारण संख्या में कमी।
- हिरण: शिकार के कारण संख्या में कमी, लेकिन संरक्षण से बढ़ रही है।
- जंगली सूअर: आवास विनाश के कारण संख्या में कमी।
- सांभर: शिकार और रोग के कारण खतरे में।
- नीलगाय: संख्या में वृद्धि हुई है, कृषि के लिए हानिकारक।
- लोमड़ी: मरुस्थलीय क्षेत्रों में आम।
- गौरैया: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पाई जाती है।
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत किया जाता है। इस अधिनियम के तहत प्रजातियों को अनुसूचियों में वर्गीकृत किया गया है:
| अनुसूची | सुरक्षा स्तर | प्रजातियां | दंड |
|---|---|---|---|
| अनुसूची I | सर्वोच्च सुरक्षा | बाघ, शेर, हाथी, गैंडा | कठोर दंड |
| अनुसूची II | उच्च सुरक्षा | तेंदुआ, हिरण, गिद्ध | कठोर दंड |
| अनुसूची III | मध्यम सुरक्षा | नीलगाय, जंगली सूअर | मध्यम दंड |
| अनुसूची IV | सामान्य सुरक्षा | सरीसृप, कीट | हल्का दंड |
संरक्षण प्रयास — अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान
राजस्थान में 32 संरक्षित क्षेत्र (राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण भंडार) स्थापित किए गए हैं। ये क्षेत्र वन्यजीवों के आवास को संरक्षित करते हैं और जैव विविधता को बनाए रखते हैं।
प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान
क्षेत्रफल: 1,334 वर्ग किमी
प्रमुख जीव: बाघ, तेंदुआ, हिरण, जंगली सूअर
विशेषता: बाघ संरक्षण के लिए प्रसिद्ध, रणथंभौर किला स्थित है।
क्षेत्रफल: 29 वर्ग किमी
प्रमुख जीव: प्रवासी पक्षी (400+ प्रजातियां)
विशेषता: रामसर स्थल, पक्षी अभयारण्य।
क्षेत्रफल: 759 वर्ग किमी
प्रमुख जीव: तेंदुआ, हिरण, जंगली सूअर
विशेषता: अरावली पर्वतों में स्थित।
क्षेत्रफल: 881 वर्ग किमी
प्रमुख जीव: बाघ, तेंदुआ, हिरण
विशेषता: बाघ पुनः परिचय परियोजना।
प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य
संरक्षण परियोजनाएं
रणथंभौर और सरिस्का में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए चलाई जा रही है।
अफ्रीका से चीतों को राजस्थान में लाने की योजना (2023 से शुरू)।
गिद्धों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रजनन केंद्र स्थापित किए गए हैं।
वनों के विस्तार और पुनर्जनन के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम।
परीक्षा प्रश्न एवं सारांश
इंटरैक्टिव प्रश्न
पिछले वर्षों के परीक्षा प्रश्न
1. संरक्षित क्षेत्र: 32 संरक्षित क्षेत्र (राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य) स्थापित किए गए हैं।
2. बाघ संरक्षण: रणथंभौर और सरिस्का में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए परियोजनाएं चलाई जा रही हैं।
3. चीता पुनः परिचय: 2023 से अफ्रीकी चीतों को भारत में लाया जा रहा है।
4. वन संरक्षण: वनों के विस्तार और पुनर्जनन के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम।
5. कानूनी सुरक्षा: भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत प्रजातियों को सुरक्षा दी जाती है।
1. पशुओं के लिए चारा प्रदान करता है।
2. फली और बीज खाद्य हैं।
3. ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
4. मिट्टी को स्थिर रखता है और मरुस्थलीकरण को रोकता है।
5. सूखा सहन करने वाला पौधा है।


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