झालावाड़ — सर्वाधिक वर्षा (मैदानी)
झालावाड़ का परिचय
झालावाड़ राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित एक जिला है जो मैदानी क्षेत्र में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करता है। यह क्षेत्र राजस्थान की जलवायु विविधता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है और राजस्थान सरकारी परीक्षा की भूगोल विषय में एक प्रमुख विषय है।
झालावाड़ को मैदानी क्षेत्र में सर्वाधिक वर्षा वाला जिला कहा जाता है क्योंकि माउंट आबू (जो पहाड़ी क्षेत्र है) को छोड़कर, मैदानी भागों में यह सबसे अधिक वर्षा प्राप्त करता है। इसकी वर्षा राजस्थान के अन्य मैदानी क्षेत्रों की तुलना में लगभग दोगुनी है।

भौगोलिक स्थिति और विशेषताएं
झालावाड़ जिला राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी कोने में स्थित है। यह मध्य प्रदेश की सीमा से लगा हुआ है और अरावली पर्वत श्रेणी के पूर्वी ढलानों पर अवस्थित है। इसका भौगोलिक स्थान ही इसे अधिक वर्षा प्रदान करता है।
भौगोलिक विशेषताएं
- अक्षांश और देशांतर: लगभग 23°-24° उत्तरी अक्षांश और 75°-76° पूर्वी देशांतर पर स्थित
- सीमावर्ती जिले: कोटा, बूंदी और मध्य प्रदेश के साथ सीमा साझा करता है
- भूआकृति: अरावली की पूर्वी ढलान, पठारी और मैदानी क्षेत्रों का मिश्रण
- नदियां: चंबल नदी और उसकी सहायक नदियां इस क्षेत्र से बहती हैं
| विशेषता | झालावाड़ | राजस्थान का औसत |
|---|---|---|
| वार्षिक वर्षा | 60-90 सेमी | 57 सेमी |
| जलवायु प्रकार | अर्ध-आर्द्र | शुष्क से अर्ध-आर्द्र |
| मुख्य मानसून | दक्षिण-पश्चिम | दक्षिण-पश्चिम |
| औसत तापमान (ग्रीष्म) | 38-40°C | 40-48°C |
वर्षा की विशेषताएं
झालावाड़ की वर्षा की विशेषताएं इसे राजस्थान के अन्य क्षेत्रों से अलग करती हैं। यहां की वार्षिक वर्षा 60-90 सेमी तक होती है, जो राजस्थान के मैदानी भागों में सर्वाधिक है।
वर्षा की मात्रा और वितरण
जून से सितंबर तक मुख्य वर्षा होती है। कुल वार्षिक वर्षा का 85-90% इसी अवधि में प्राप्त होता है।
वर्षा अधिकांशतः तीव्र और केंद्रित होती है। कभी-कभी एक ही दिन में 10-15 सेमी वर्षा हो जाती है।

वर्षा के कारण
झालावाड़ में अधिक वर्षा के पीछे कई भौगोलिक और जलवायु संबंधी कारण हैं। इन कारणों को समझना राजस्थान की जलवायु को समझने के लिए आवश्यक है।
प्रमुख कारण
अरावली पर्वत श्रेणी दक्षिण-पश्चिम से आने वाली मानसून हवाओं को रोकती है, जिससे झालावाड़ में अधिक वर्षा होती है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून सीधे झालावाड़ की ओर आता है, जिससे यह अधिक नमी प्राप्त करता है।
दक्षिण-पूर्वी स्थिति के कारण झालावाड़ मध्य प्रदेश की नमी प्राप्त करता है, जो वर्षा में वृद्धि करती है।
चंबल नदी और उसकी सहायक नदियां स्थानीय नमी बढ़ाती हैं, जिससे वर्षा में वृद्धि होती है।
अरावली पर्वत श्रेणी राजस्थान की जलवायु को नियंत्रित करने वाली सबसे महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषता है। यह पर्वत श्रेणी दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर फैली हुई है।
- वर्षा छाया प्रभाव: अरावली के पश्चिम में वर्षा छाया क्षेत्र बनता है, जहां वर्षा कम होती है
- पूर्वी ढलान: झालावाड़ अरावली की पूर्वी ढलान पर है, जहां मानसून सीधे टकराता है
- उच्चावच प्रभाव: पर्वत की ऊंचाई वर्षा को प्रभावित करती है और स्थानीय जलवायु बनाती है
कृषि और जल संसाधन
झालावाड़ में अधिक वर्षा के कारण यह क्षेत्र कृषि के लिए अनुकूल है। यहां की वर्षा ने इसे राजस्थान के कृषि क्षेत्रों में से एक बना दिया है।
कृषि विशेषताएं
जल संसाधन प्रबंधन
परीक्षा प्रश्न
इंटरैक्टिव प्रश्न
B. यहां वार्षिक वर्षा 30-40 सेमी होती है।
C. यह अरावली पर्वत श्रेणी की पूर्वी ढलान पर स्थित है। ✓
D. यहां मुख्य वर्षा दिसंबर से फरवरी तक होती है।
सही उत्तर: C

