जिप्सम — बाड़मेर, बीकानेर, नागौर
जिप्सम परिचय एवं महत्व
जिप्सम (Gypsum) राजस्थान का एक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन है जिसमें भारत विश्व में अग्रणी स्थान रखता है। राजस्थान Rajasthan Govt Exam Preparation के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यह राज्य भारत का सर्वाधिक जिप्सम उत्पादक है।
जिप्सम की परिभाषा
जिप्सम एक हाइड्रेटेड कैल्शियम सल्फेट खनिज है जो प्राकृतिक रूप से पृथ्वी की ऊपरी परत में पाया जाता है। इसका रंग सफेद, हल्का गुलाबी या पीला हो सकता है। यह खनिज मुलायम होता है और आसानी से खोदा जा सकता है।
भारत में जिप्सम का स्थान
भारत विश्व में जिप्सम उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। राजस्थान भारत का सबसे बड़ा जिप्सम उत्पादक राज्य है और भारत के कुल उत्पादन का लगभग 60-65% जिप्सम राजस्थान से प्राप्त होता है। विश्व में थाईलैंड सर्वाधिक जिप्सम का उत्पादन करता है।

राजस्थान में जिप्सम वितरण
राजस्थान के तीन प्रमुख जिलों में जिप्सम के विशाल भंडार पाए जाते हैं। ये जिले बाड़मेर, बीकानेर और नागौर हैं जो राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित हैं।
प्रमुख जिप्सम क्षेत्र
भौगोलिक स्थिति
ये तीनों जिले राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित हैं। बाड़मेर जिला राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम में, बीकानेर उत्तर-पश्चिम में और नागौर मध्य-पश्चिम में स्थित है। ये क्षेत्र थार मरुस्थल के भाग हैं जहाँ जिप्सम की परत भूमि के अंदर पाई जाती है।
| जिला | स्थिति | उत्पादन स्तर | प्रमुख खदान क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| बाड़मेर | दक्षिण-पश्चिम | सर्वाधिक | बाड़मेर तहसील, शिव तहसील |
| बीकानेर | उत्तर-पश्चिम | मध्यम-उच्च | लूणकरणसर, खीमसर क्षेत्र |
| नागौर | मध्य-पश्चिम | मध्यम | डेगाना, मेड़ता क्षेत्र |
खनन क्षेत्र एवं उत्पादन
राजस्थान में जिप्सम का खनन बड़े पैमाने पर किया जाता है। यहाँ की खदानें आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता का जिप्सम निकालती हैं।
खनन प्रक्रिया
- खुली खदान खनन: राजस्थान में जिप्सम का खनन मुख्यतः खुली खदानों से किया जाता है क्योंकि जिप्सम की परत भूमि की सतह के निकट पाई जाती है।
- ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग: खदानों में ड्रिलिंग मशीनें लगाई जाती हैं और विस्फोटकों का उपयोग करके जिप्सम को तोड़ा जाता है।
- लोडिंग और परिवहन: खोदे गए जिप्सम को लोडर और डंपर से खदान से बाहर निकाला जाता है।
- क्रशिंग और ग्रेडिंग: जिप्सम को क्रशिंग प्लांट में पीसा जाता है और विभिन्न आकारों में ग्रेड किया जाता है।
वार्षिक उत्पादन आंकड़े
राजस्थान में वर्तमान में लगभग 50-60 लाख टन जिप्सम का वार्षिक उत्पादन होता है। बाड़मेर जिला कुल उत्पादन का 60% से अधिक जिप्सम निकालता है। भारत का कुल जिप्सम उत्पादन लगभग 80-90 लाख टन है, जिसमें राजस्थान की हिस्सेदारी सर्वाधिक है।
- बाड़मेर: शिव खदान, बाड़मेर खदान, बिलाड़ा खदान, जसोल खदान
- बीकानेर: लूणकरणसर खदान, खीमसर खदान, पोखरण खदान
- नागौर: डेगाना खदान, मेड़ता खदान, नागौर खदान

जिप्सम के उपयोग
जिप्सम के विविध औद्योगिक और कृषि उपयोग हैं। यह खनिज विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मुख्य उपयोग
जिप्सम का सबसे बड़ा उपयोग निर्माण कार्यों में होता है। इसका उपयोग प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), सीमेंट, दीवारों की पलस्तरी और छत के निर्माण में किया जाता है।
जिप्सम का उपयोग मिट्टी सुधारक के रूप में किया जाता है। यह क्षारीय मिट्टी को सुधारता है और पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाता है।
जिप्सम का उपयोग सल्फ्यूरिक एसिड, सोडियम सल्फेट और अन्य रसायनों के निर्माण में किया जाता है।
कागज निर्माण में जिप्सम का उपयोग फिलर के रूप में किया जाता है। यह कागज को चमकदार और मजबूत बनाता है।
जिप्सम का उपयोग मूर्तियों, मोल्ड्स और कलात्मक कार्यों में किया जाता है। यह आसानी से तराशा जा सकता है।
चिकित्सा में जिप्सम का उपयोग प्लास्टर कास्ट और दंत कार्यों में किया जाता है। यह हड्डियों को ठीक करने में सहायक है।
उपयोग का प्रतिशत वितरण
| उपयोग क्षेत्र | प्रतिशत | विवरण |
|---|---|---|
| निर्माण | 45-50% | सीमेंट, प्लास्टर, POP, दीवारें |
| कृषि | 20-25% | मिट्टी सुधारक, पोषक तत्व |
| रासायनिक | 15-18% | एसिड, सल्फेट, अन्य रसायन |
| कागज | 8-10% | फिलर, कोटिंग |
| अन्य | 5-7% | कला, चिकित्सा, अन्य |
आर्थिक महत्व एवं निर्यात
जिप्सम राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक संसाधन है। इसके खनन और निर्यात से राज्य को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।
राजस्व और रोजगार
जिप्सम खनन से राजस्थान को प्रतिवर्ष 200-250 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इस उद्योग में लगभग 10,000-15,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। खदानों में कार्य करने वाले मजदूरों से लेकर प्रसंस्करण कारखानों तक हजारों लोग इस उद्योग पर निर्भर हैं।
निर्यात बाजार
राजस्थान का जिप्सम विश्व के विभिन्न देशों को निर्यात किया जाता है। मुख्य आयातक देश हैं:
- एशिया: थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस
- यूरोप: जर्मनी, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स
- अन्य: अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका
निर्यात मूल्य
राजस्थान का जिप्सम निर्यात प्रतिवर्ष 15-20 लाख टन के आसपास होता है। निर्यात से राज्य को प्रतिवर्ष 50-80 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। जिप्सम का अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य $30-50 प्रति टन के बीच होता है।
- परिवहन लागत: राजस्थान के दूरस्थ क्षेत्रों से बंदरगाहों तक परिवहन महंगा है।
- अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा: थाईलैंड और अन्य देशों से सस्ता जिप्सम मिलता है।
- गुणवत्ता नियंत्रण: अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण है।
- बाजार में उतार-चढ़ाव: अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतों में अस्थिरता है।


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