कमायचा — मांगणियार का प्रमुख वाद्य
राजस्थान का लोक संगीत और वाद्य
कमायचा का परिचय और महत्व
कमायचा राजस्थान का एक प्राचीन तंतु वाद्य है जो विशेषकर मांगणियार समुदाय द्वारा वादन किया जाता है। यह वाद्य बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में सबसे अधिक प्रचलित है और राजस्थान की लोक संगीत परंपरा का अभिन्न अंग माना जाता है।
कमायचा की परिभाषा
कमायचा एक घुमावदार तंतु वाद्य है जिसका शरीर लकड़ी से बना होता है। इसमें घोड़े की पूंछ के बालों से बना धनुष (bow) होता है जिससे तारों को रगड़कर संगीत निकाला जाता है। यह वाद्य सारंगी के समान है लेकिन इसकी संरचना और ध्वनि में अंतर होता है।
कमायचा का नाम संभवतः कामा (धनुष) शब्द से आया है। इसे कामायचा भी कहा जाता है। यह वाद्य मांगणियार संगीतकारों की पहचान बन गया है और उनकी संगीत परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण साधन है।
संरचना और निर्माण
कमायचा की संरचना अत्यंत विशिष्ट होती है। इसके निर्माण में परंपरागत तकनीकें और प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है जो इसे अन्य तंतु वाद्यों से अलग बनाती है।
मुख्य भाग और सामग्री
| भाग का नाम | विवरण | सामग्री |
|---|---|---|
| शरीर (Body) | वाद्य का मुख्य भाग, घुमावदार आकार | कद्दू या लकड़ी |
| गर्दन (Neck) | लंबी गर्दन जिस पर तार लगे होते हैं | कठोर लकड़ी |
| तार (Strings) | आमतौर पर 4-5 मुख्य तार | धातु की पतली पट्टियां |
| धनुष (Bow) | तारों को रगड़ने के लिए | घोड़े की पूंछ के बाल |
| ब्रिज (Bridge) | तारों को ऊंचाई देता है | लकड़ी |
आकार और माप
कमायचा की लंबाई आमतौर पर 60-70 सेंटीमीटर होती है। शरीर का व्यास लगभग 15-20 सेंटीमीटर होता है। धनुष की लंबाई 40-50 सेंटीमीटर होती है। ये माप परंपरागत नियमों के अनुसार निर्धारित होते हैं।
तार की व्यवस्था
कमायचा में आमतौर पर 4 मुख्य तार होते हैं जो विभिन्न सुरों में ट्यून किए जाते हैं। इसके अलावा कुछ सहायक तार भी होते हैं जो सहानुभूतिपूर्वक कंपन करते हैं। तारों की संख्या और व्यवस्था वादक की पसंद और संगीत शैली पर निर्भर करती है।
वादन शैली और तकनीक
कमायचा को वादन करने की विशिष्ट तकनीकें होती हैं जो मांगणियार परंपरा में पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इन तकनीकों में धनुष के सही उपयोग और उंगलियों की गति का महत्वपूर्ण स्थान है।
वादन की मुख्य तकनीकें
- धनुष का उपयोग: घोड़े की पूंछ के बालों से बने धनुष को तारों पर नियंत्रित गति से चलाया जाता है। धनुष की दबाव और गति ध्वनि की गुणवत्ता निर्धारित करती है।
- उंगलियों की गति: बाएं हाथ की उंगलियां तारों को दबाती हैं जिससे विभिन्न सुर निकलते हैं। इसमें सूक्ष्म गति और सटीकता की आवश्यकता होती है।
- मेहेंदी (Vibrato): तारों को दबाते समय हल्की कंपन गति से सुरों में मधुरता आती है। यह तकनीक कमायचा की विशेषता है।
- ग्लिसांडो: एक सुर से दूसरे सुर में सुचारु संक्रमण। यह तकनीक भावनात्मक अभिव्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
- स्टैकाटो: तेज और अलग-अलग नोट्स निकालने की तकनीक जो तेज गति के संगीत में प्रयुक्त होती है।
वादन की स्थिति
कमायचा को वादन करते समय वादक बैठी हुई स्थिति में होता है। वाद्य को बाएं कंधे पर रखा जाता है और धनुष को दाएं हाथ से संचालित किया जाता है। यह स्थिति सारंगी के वादन के समान होती है लेकिन कमायचा की संरचना के अनुसार अनुकूलित होती है।
- गहरी और मधुर ध्वनि: कमायचा की ध्वनि गहरी, मधुर और भावपूर्ण होती है जो श्रोताओं के हृदय को छूती है।
- नाजुक सुर: इस वाद्य से निकलने वाले सुर बहुत नाजुक और सूक्ष्म होते हैं। यह मानव कंठ के समान लचीलापन प्रदान करता है।
- भावनात्मक अभिव्यक्ति: कमायचा से विभिन्न भावनाओं को व्यक्त किया जा सकता है। इसकी ध्वनि में दुःख, खुशी, प्रेम और भक्ति सभी भावनाएं समाहित हो सकती हैं।
- सुर की निरंतरता: धनुष के कारण सुरों में निरंतरता आती है जो मानव कंठ के समान प्रभाव पैदा करती है।
- अनुनाद (Resonance): कमायचे का शरीर अच्छे अनुनाद के लिए डिज़ाइन किया गया है जो ध्वनि को समृद्ध बनाता है।
मांगणियार संस्कृति और परंपरा
मांगणियार राजस्थान का एक प्राचीन संगीतकार समुदाय है जो कमायचा को अपनी पहचान के रूप में वादन करता है। यह समुदाय पीढ़ियों से अपनी संगीत परंपरा को संरक्षित रखे हुए है।
मांगणियार समुदाय का इतिहास
मांगणियार शब्द ‘मांग’ (मांगना) से आया है। ऐतिहासिक रूप से, ये संगीतकार राजस्थान के राजाओं और जागीरदारों के दरबारों में संगीत प्रस्तुत करते थे। बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में यह समुदाय सबसे अधिक केंद्रित है।
मांगणियार समुदाय मुख्यतः मुस्लिम संगीतकारों का समुदाय है। इन्होंने राजस्थान की लोक संगीत परंपरा को समृद्ध किया है। लंगा समुदाय के साथ मांगणियार राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध संगीतकार समुदाय हैं।
परंपरागत प्रशिक्षण प्रणाली
कमायचा की शिक्षा पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से दी जाती है। आमतौर पर पिता अपने पुत्र को संगीत सिखाते हैं।
शिष्य को वाद्य बनाने से लेकर वादन तक सभी कौशल सिखाए जाते हैं। यह प्रशिक्षण कई वर्षों तक चलता है।
सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका
मांगणियार समुदाय राजस्थान की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है। ये संगीतकार विभिन्न सामाजिक अनुष्ठानों में संगीत प्रस्तुत करते हैं:
- विवाह समारोह: विवाह के समय मांगणियार परंपरागत गीत गाते हैं और कमायचा बजाते हैं।
- धार्मिक अनुष्ठान: विभिन्न धार्मिक समारोहों में भक्ति संगीत प्रस्तुत किया जाता है।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: स्थानीय त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों में संगीत प्रदर्शन।
- लोक कथाएं: परंपरागत लोक कथाओं को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।
आधुनिक संरक्षण और स्वीकृति
कमायचा और मांगणियार परंपरा को आधुनिक समय में विश्व स्तरीय स्वीकृति मिली है। यूनेस्को और भारतीय सरकार द्वारा इस परंपरा को संरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यूनेस्को की मान्यता
2005 में यूनेस्को ने मांगणियार संगीत परंपरा को ‘मास्टरपीस ऑफ द ओरल एंड इंटेंजिबल हेरिटेज ऑफ ह्यूमैनिटी’ (मानवता की मौखिक और अमूर्त विरासत की कृति) की सूची में शामिल किया। यह स्वीकृति मांगणियार समुदाय के लिए गर्व की बात है।
2009 में इसे यूनेस्को की ‘इंटेंजिबल कल्चरल हेरिटेज’ की सूची में स्थायी रूप से शामिल किया गया। यह मांगणियार परंपरा को विश्व की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता देता है।
भारतीय सरकार की पहल
| पहल / पुरस्कार | विवरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| पद्मश्री पुरस्कार | प्रमुख मांगणियार कलाकारों को दिया गया | कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता |
| संगीत नाटक अकादमी | मांगणियार परंपरा को अकादमिक मंच | औपचारिक संरक्षण और प्रचार |
| राष्ट्रीय संग्रहालय | कमायचा के नमूने संग्रहीत | ऐतिहासिक दस्तावेज़ीकरण |
| सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम | अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रदर्शन | विश्व स्तर पर परिचय |
संरक्षण की चुनौतियां
आधुनिकता के इस युग में मांगणियार परंपरा को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। युवा पीढ़ी परंपरागत संगीत से दूर हो रही है। आर्थिक कारणों से कई कलाकार अपनी परंपरा छोड़ रहे हैं।
- आर्थिक समस्या: परंपरागत संगीत से पर्याप्त आय नहीं मिलती है।
- शिक्षा की कमी: औपचारिक संगीत शिक्षा के अवसर सीमित हैं।
- युवाओं का विमुखता: आधुनिक संगीत के प्रति युवाओं का झुकाव।
- वाद्य निर्माण कला का ह्रास: कमायचा बनाने वाले कारीगरों की संख्या घट रही है।


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