मराठों का राजस्थान पर प्रभाव — आर्थिक शोषण
18वीं सदी में चौथ-सरदेशमुखी वसूली और राजस्व संकट
परिचय — मराठा आर्थिक नीति
18वीं सदी में मराठों का राजस्थान पर प्रभाव केवल सैन्य आक्रमण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने एक व्यवस्थित आर्थिक शोषण नीति अपनाई जिसने राजस्थान के राज्यों को गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया। मराठा साम्राज्य के विस्तार के साथ-साथ उनकी राजस्व संग्रहण प्रणाली राजस्थान के प्रमुख राज्यों — जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर और अन्य — के लिए एक बड़ी समस्या बन गई।
मराठा आर्थिक नीति का उद्देश्य
मराठा नेता बालाजी विश्वनाथ और उनके उत्तराधिकारियों ने एक सुव्यवस्थित कर प्रणाली विकसित की जिसका उद्देश्य था:
- राजस्व संग्रहण: मराठा साम्राज्य की सैन्य शक्ति को बनाए रखने के लिए निरंतर धन की आवश्यकता
- राजनीतिक नियंत्रण: आर्थिक दबाव के माध्यम से राजस्थान के राज्यों को अधीन रखना
- क्षेत्रीय वर्चस्व: मुगल पतन के बाद दक्षिण भारत से उत्तर भारत तक अपना प्रभाव स्थापित करना

चौथ और सरदेशमुखी — कर प्रणाली
मराठा आर्थिक शोषण की मूल नींव दो कर थे: चौथ और सरदेशमुखी। ये कर प्रणाली राजस्थान के राज्यों के लिए एक भारी बोझ बन गई और उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
| कर का नाम | दर | उद्देश्य | राजस्थान पर प्रभाव |
|---|---|---|---|
| चौथ (Chauth) | कुल राजस्व का 25% | सुरक्षा कर — मराठा सेना से सुरक्षा के बदले | राजस्व में भारी कटौती, किसानों पर दबाव |
| सरदेशमुखी (Sardeshmukhi) | कुल राजस्व का 10% | प्रशासनिक शुल्क — मराठा प्रशासन के लिए | अतिरिक्त आर्थिक बोझ, कुल 35% तक कर |
| संयुक्त प्रभाव | 35–40% | कुल राजस्व का एक-तिहाई से अधिक | राज्य की आय में गंभीर कमी, सैन्य व्यय में कटौती |
चौथ — सुरक्षा कर
चौथ (चौपाई) का अर्थ है “चौथाई” या “एक-चौथाई”। मराठा नेताओं का दावा था कि वे राजस्थान के राज्यों को अन्य आक्रमणकारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं, इसलिए उन्हें कुल राजस्व का 25% देना चाहिए। यह कर निम्नलिखित तरीकों से वसूल किया जाता था:
- नियमित वसूली: हर साल एक निर्धारित राशि, चाहे फसल अच्छी हो या बुरी
- सैन्य दल: मराठा सैन्य दल राज्य में आकर सीधे किसानों से वसूली करते थे
- विनाश की धमकी: भुगतान न करने पर गांवों को लूटने और जलाने की धमकी
सरदेशमुखी — प्रशासनिक शुल्क
सरदेशमुखी एक अतिरिक्त कर था जो मराठा प्रशासन के रखरखाव के नाम पर लगाया जाता था। यह कर चौथ के अलावा था और राज्य की आर्थिक स्थिति को और भी कमजोर करता था। सरदेशमुखी के तहत:
- प्रशासनिक नियंत्रण: मराठा अधिकारी राज्य के राजस्व प्रशासन में हस्तक्षेप करते थे
- भ्रष्टाचार: स्थानीय मराठा अधिकारी अतिरिक्त रिश्वत और उपहार मांगते थे
- दोहरा शोषण: चौथ और सरदेशमुखी दोनों मिलकर राजस्व का 35–40% तक हो जाते थे
राजस्थान पर आर्थिक प्रभाव
मराठा आर्थिक नीति का राजस्थान पर गहरा और दीर्घकालीन प्रभाव पड़ा। यह प्रभाव केवल राजकोष तक सीमित नहीं था, बल्कि यह राज्य की सैन्य शक्ति, प्रशासन, कृषि और सामान्य जनता के जीवन स्तर को प्रभावित करता था।
राजस्थान के राज्यों का कुल राजस्व का 35–40% मराठों को चला जाता था, जिससे राज्य की आय में गंभीर कमी आई। जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे समृद्ध राज्य भी आर्थिक संकट का सामना करने लगे।
राजस्व की कमी के कारण राज्य अपनी सेना को बनाए रखने में असमर्थ हो गए। सैन्य शक्ति में कमी के कारण राज्य मराठों के सामने और भी कमजोर हो गए और उनके दबाव में आ गए।
मराठा सैन्य दल गांवों में आकर सीधे किसानों से चौथ वसूल करते थे। इससे किसानों पर दबाव बढ़ा, कृषि उत्पादन में कमी आई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर हुई।
राजस्व की कमी के कारण राज्य प्रशासन को सुचारू रूप से चलाना मुश्किल हो गया। सड़कें, किले और सार्वजनिक सुविधाओं का रखरखाव नहीं हो सका।
राजस्थान के प्रमुख राज्यों पर विशेष प्रभाव
जयपुर राजस्थान का सबसे समृद्ध राज्य था, लेकिन मराठा आर्थिक नीति के कारण यह गंभीर संकट में आ गया। महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय (1699–1743) के समय से ही मराठों ने जयपुर से चौथ वसूल करना शुरू कर दिया था।
- 1728 के बाद: मराठा दलों ने नियमित रूप से जयपुर के क्षेत्रों में घुसकर चौथ वसूल करना शुरू किया
- राजस्व का 35%: जयपुर का कुल राजस्व का 35% तक मराठों को देना पड़ता था
- सैन्य कमजोरी: राजस्व की कमी के कारण जयपुर की सेना को कम किया जाना पड़ा
- 1787 का तुंगा युद्ध: इसी आर्थिक दबाव के कारण जयपुर को मराठों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष करना पड़ा
जोधपुर (मारवाड़) भी मराठा आर्थिक शोषण का शिकार रहा। महाराजा अभयसिंह (1724–1749) के समय से ही मराठों ने जोधपुर से चौथ वसूल करना शुरू कर दिया था।
- 1740 के बाद: मराठा सेनाएं नियमित रूप से जोधपुर के क्षेत्रों को लूटती थीं
- कृषि संकट: मराठा दलों की वजह से किसान अपनी फसल नहीं बो सकते थे
- व्यापार में गिरावट: अनिश्चितता के कारण व्यापार और वाणिज्य में भारी गिरावट आई
- दुर्गम स्थिति: जोधपुर को अपनी सेना को बनाए रखने के लिए अन्य राज्यों से कर्ज लेना पड़ा
उदयपुर (मेवाड़) भी मराठा आर्थिक नीति से बुरी तरह प्रभावित हुआ। महाराणा अमरसिंह द्वितीय (1698–1710) के बाद के शासकों को मराठा दबाव का सामना करना पड़ा।
- 1740 के बाद: मराठा सेनाएं मेवाड़ के पूर्वी क्षेत्रों में नियमित रूप से चौथ वसूल करती थीं
- राजस्व संकट: उदयपुर का राजस्व आधा हो गया, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई
- सांस्कृतिक प्रभाव: आर्थिक संकट के कारण कला और संस्कृति को संरक्षण देना मुश्किल हो गया
- जनता पर दबाव: राज्य को अतिरिक्त कर लगाने पड़े, जिससे जनता की स्थिति खराब हुई

राज्यों की आर्थिक दुर्दशा और परिणाम
मराठा आर्थिक शोषण के परिणामस्वरूप राजस्थान के राज्यों की आर्थिक स्थिति में तेजी से गिरावट आई। यह गिरावट 18वीं सदी के अंत तक इतनी गंभीर हो गई कि राज्य अपनी मूलभूत जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर सकते थे।
आर्थिक दुर्दशा के मुख्य लक्षण
- राजकोष की खाली स्थिति: राजस्थान के राज्यों के राजकोष खाली हो गए, जिससे वे अपने कर्मचारियों को वेतन देने में भी असमर्थ हो गए
- सैन्य विघटन: सेना को वेतन न मिलने के कारण सैनिक भाग गए या विद्रोह कर दिए। कई राज्यों की सेना आधी रह गई
- कृषि उत्पादन में गिरावट: मराठा दलों की लूटपाट से किसान खेती करने से डरते थे। कई गांव खाली हो गए
- व्यापार और वाणिज्य का विनाश: अनिश्चितता के कारण व्यापारी अपना व्यवसाय छोड़ गए। शहरों की आर्थिक स्थिति खराब हुई
- जनता पर अतिरिक्त कर: राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए राज्यों को जनता पर अतिरिक्त कर लगाने पड़े
- सामाजिक विघटन: आर्थिक संकट के कारण समाज में असंतोष और विद्रोह की स्थिति पैदा हुई
- समस्या: मराठा चौथ और सरदेशमुखी के कारण राजस्थान के राज्यों का 35–40% राजस्व मराठों को चला जाता था
- परिणाम: राज्यों के पास अपनी सेना, प्रशासन और विकास पर खर्च करने के लिए पर्याप्त धन नहीं रहा
- दुष्प्रभाव: कृषि, व्यापार, सैन्य शक्ति और सामाजिक व्यवस्था सभी कमजोर हो गए
- परिणति: राजस्थान के राज्य ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की शरण में चले गए

सारांश और परीक्षा बिंदु
मराठों का राजस्थान पर आर्थिक प्रभाव 18वीं सदी का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है जो Rajasthan Govt Exam में नियमित रूप से पूछी जाती है। इस विषय को समझने के लिए चौथ, सरदेशमुखी, राजस्व संकट और उसके परिणामों को स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
परीक्षा प्रश्न और इंटरैक्टिव MCQ
यह खण्ड Rajasthan Govt Exam में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नों और इंटरैक्टिव MCQ प्रश्नों को प्रस्तुत करता है। इन प्रश्नों को हल करने से आप इस विषय की गहरी समझ प्राप्त कर सकेंगे।
इंटरैक्टिव MCQ प्रश्न
पिछली परीक्षाओं के प्रश्न (PYQ)
निष्कर्ष
मराठों का राजस्थान पर आर्थिक प्रभाव 18वीं सदी का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है। चौथ और सरदेशमुखी की व्यवस्थित कर प्रणाली के माध्यम से मराठों ने राजस्थान के राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया। इस आर्थिक शोषण के कारण राजस्थान के राज्यों की सैन्य शक्ति, कृषि उत्पादन और सामाजिक व्यवस्था सभी कमजोर हो गए। अंत में, राजस्थान के राज्यों को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की शरण लेनी पड़ी, जिससे वे औपनिवेशिक शासन के अधीन हो गए। यह विषय Rajasthan Govt Exam में नियमित रूप से पूछा जाता है और इसे गहरी समझ के साथ तैयार करना आवश्यक है।


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